Mast Parivarik Chudai Kahani
“अरे दीदी, इतना सामान उठा कर कहाँ जा रही हैं आप,” कोई पीछे से बोला तो मैंने पलट कर देखा। यह मेरे पापा के बचपन के दोस्त का इकलौता बेटा था। “लाइए, मैं आपको अपनी बाइक पर घर छोड़ देता हूँ,” उसने आगे कहा। “अरे भैया, आप यहाँ क्या कर रहे हो?” मैंने पूछा। “कुछ नहीं दीदी, थोड़ा दोस्त की दुकान पर आया था। लेकिन आप बाजार से क्या खरीद ले जा रही हो?” उसने पूछा। Mast Parivarik Chudai Kahani
“कुछ खास नहीं भैया। आज कॉलेज में जल्दी छुट्टी हो गई थी तो मैंने सोचा घर जाते समय बाजार से कुछ किताबें खरीद लूँ। और मम्मी का फोन आया था कि कुछ और सामान भी लेती आना। वैसे मैं रिक्शा करने की सोच ही रही थी कि आप आ गए,” मैं बोली।
और हम उसकी बाइक पर सवार होकर हमारे घर की तरफ चल पड़े। दरअसल, मेरे पापा और उसके पापा बचपन के दोस्त थे। एक साथ पले-बढ़े और पढ़े-लिखे थे। हमारी फैमिलीज़ में बहुत अच्छे संबंध थे। हमारे घर भी पास-पास ही थे। मैं और मेरी छोटी बहन बचपन में अक्सर उनके घर खेलने जाया करती थीं।
हमारा कोई सगा भाई तो नहीं था पर इससे हम अपने सगे भाई से भी बढ़कर मानते थे। उम्र में मेरी छोटी बहन और यह, दोनों ही बराबर थे और मैं इनसे चार साढ़े चार साल बड़ी थी। तो इस वजह से यह हमेशा मुझे दीदी कहकर ही संबोधित करता था।
हम दोनों बहनों की तो मानो यह जान ही था। मेरी बहन और यह दोनों एक ही स्कूल में पढ़ते थे, जबकि मैं कॉलेज में बी.एससी. कर रही थी। अब पेपर्स के दिन थे और कॉलेज में छुट्टियाँ शुरू हो रही थीं। यह दोनों भी 12वीं के बोर्ड के एग्जाम खत्म करके छुट्टियाँ ही मना रहे थे।
“अरे भैया, यह तो बताओ कि आगे कौन से कॉलेज में एडमिशन लेनी है, इसके बारे में सोचा है?” मैं रास्ते में उससे बातें करती जा रही थी।
“अरे नहीं दीदी। अभी इतनी जल्दी क्या है। और आप तो वैसे भी जानती हैं कि जिस गली में हमारा घर है, उसके कोसों दूर तक भी कहीं विद्या नहीं बस्ती,” वह हँसते हुए बोला।
“लीजिए आपका घर भी आ गया। आपको छोड़कर मैं निकलता हूँ। आज शाम को हमारी क्रिकेट टीम का पड़ोस के मोहल्ले की टीम के साथ मैच है, तो थोड़ा अरेंजमेंट करना है और सभी लड़कों को इकट्ठा भी करना है,” मुझे छोड़ते वक्त वह बोला।
“क्या भैया, इतने दिनों के बाद आज दिखाई दिए हो और आज भी अपनी दीदी के साथ चाय पीने का टाइम नहीं,” मैं रूठे का नाटक करते हुए बोली।
“Sorry दीदी, पर आज नहीं, फिर कभी। अच्छा चलता हूँ,” कहकर उसने अपनी मोटरसाइकिल दौड़ा दी।
“कौन था दीदी?” मेरी बहन ने घर में घुसते ही पहला सवाल किया।
“था अपना इकलौता भाई, जो मुझे बाजार से घर तक छोड़कर गया है, पर जिसके पास अपनी बहनों के साथ बिताने के लिए दस मिनट का टाइम भी नहीं है,” मैं मानो शिकायत सी करते हुए बोली।
“अरे अब वो बड़ा हो गया है। अब वो अपने दोस्तों में रहकर ज्यादा खुश तो होगा ही ना। अब तुम दोनों लड़कियों के बीच उसका क्या काम?” पीछे से मेरी माँ बोली।
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खैर, उसके बाद हम सब अपने-अपने कमरे में चले गए। हमारे घर में चार बेडरूम हैं। नीचे वाला एक मम्मी-पापा के लिए और एक मेहमानों के लिए। मेरा बेडरूम मम्मी-पापा के कमरे के ऊपर है और मेरी बहन का दूसरे बेडरूम के ऊपर। हम दोनों बहनें एक-दूसरे को जान से भी ज्यादा चाहती हैं पर कभी एक साथ नहीं सोईं।
घर में फालतू कमरे होने की वजह से हम सभी के अपने प्राइवेट रूम थे। लेकिन मेरी बहन के कमरे और मेरे कमरे के बीच में एक कॉमन ड्रेसिंग रूम था जिसका एक दरवाजा मेरे कमरे में और दूसरा दरवाजा मेरी बहन के कमरे में खुलता था। अब जैसे कि मैंने आपको बताया, कुछ दिनों में पेपर शुरू हो रहे थे और अगले दिन से कॉलेज में भी छुट्टियाँ थीं, तो मैं दिन में थोड़ा सो गई ताकि रात में थोड़ी देर तक पढ़ सकूँ, जैसा कि मेरी आदत थी।
अब रात को दो-तीन बजे तक मैं पढ़ती रही और फिर मैं लाइट बंद करके सोने के लिए लेट गई। मुझे लेटे हुए तकरीबन आधा घंटा हो गया होगा पर मुझे पेपर्स के बारे में सोचकर अब थोड़ी टेंशन हो रही थी तो इस वजह से मैं सो नहीं पा रही थी। मैं शुरू से ही पढ़ाकू किस्म की लड़की थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
हमेशा स्कूल में अव्वल आने वाली। कॉलेज में भी मैं पहले दो साल की टॉपर थी। पर इस बार हमारे कॉलेज में एक नई लड़की आई थी जिसके साथ मेरा जमकर मुकाबला था यूनिवर्सिटी मेडल के लिए। इसलिए मुझे टेंशन के मारे नींद नहीं आ रही थी। लेटे-लेटे मैं पेपर्स के बारे में ही कुछ सोच रही थी कि मुझे लगा जैसे कोई बातें कर रहा हो।
“लो अब टेंशन के मारे मेरे कान भी बजना शुरू हो गए,” मैंने मन ही मन सोचा और मुस्कुरा पड़ी और सोने की बेकार कोशिश करने लगी। अभी लेटे हुए कुछ पल ही और हुए होंगे कि मुझे फिरसे ऐसा लगा कि जैसे कोई बातें कर रहा हो। मैं बेड से उठी और खिड़की के पास जाकर मैंने गली में देखा तो वहाँ कोई नहीं था। पर आवाजें आ रही थीं।
मैंने सोचा कि पापा को उठाती हूँ, कहीं कोई चोर न हों। यह सोचकर जैसे ही मैं अपने कमरे के दरवाजे की तरफ चली तो ड्रेसिंग रूम के दरवाजे के पास से गुजरते वक्त मुझे लगा जैसे ये आवाजें मेरी बहन के कमरे से आ रही हों। मेरा माथा ठनका कि यह माजरा क्या है। मेरी बहन किसके साथ बात कर रही है, और इतनी रात में उसके कमरे में कौन है।
मैंने बड़े हल्के से अपने कमरे वाला ड्रेसिंग रूम का दरवाजा खोला और दबे पाँव ड्रेसिंग रूम में घुस गई। मेरी बहन के कमरे वाला ड्रेसिंग रूम का दरवाजा थोड़ा खुला था। शायद उससे भूले से खुला रह गया होगा। दरवाजा ड्रेसिंग रूम में अंदर की तरफ खुलता था। तो मैं दीवार के साथ सटकर खड़ी हो गई और मैंने हल्के से खुले दरवाजे में से मेरी बहन के कमरे के अंदर देखा।
और अंदर जो देखा वो देखते ही मेरी आँखें फटी की फटी रह गईं और मेरी साँसें गले में ही अटक गईं, मानो एक पल के लिए मैं साँस लेना ही भूल गई। कमरे में मेरी बहन के साथ कोई लड़का खिड़की के पास लिपटा खड़ा था और उसके होंठ मेरी बहन के होंठों के साथ एकदम सटे हुए थे। कमरे की सब लाइट्स बंद थीं पर चाँदनी रात की रोशनी कमरे को दीप्त करने में काफी थी।
उनका लंबा किस टूटा तो लड़का दबी हुई आवाज में बोला, “अरे डरती क्यों हो जान, मैं तेरी दीदी को एक घंटा पहले अपने कमरे की लाइट बंद करते देखा था। अरे अब तक तो वो सो गई होगी और पेपर्स में टॉप करने के अच्छे-अच्छे ख्वाब देख रही होगी या फिर फेल होने के भयानक सपने। अभी रात को 3 बजे वो कमरे में अंधेरा करके तो वो पढ़ नहीं सकती। या फिर वो उल्लू है?”
यह सुनकर मेरी बहन के मुँह से हँसी छूट पड़ी जिसे उसने उसी पल दबा लिया। पर मुझे लड़के की आवाज कुछ जानी-पहचानी सी लगी।
“इश्क में आदमी क्या-क्या पापड़ बेलता है। अब पेपर तुम्हारी बहन के हैं और नाइट शिफ्ट मेरी छोटी हो जाएगी। अब हर रोज रात को 3 बजे से पहले मैं तुम्हें मिल नहीं पाऊँगा और 4 बजे के बाद तुम मुझे घर में रुकने नहीं दोगी। तुम्हारा बाप जो सुबह-सुबह उठ जाता है सैर पर जाने के लिए,” वह शिकायत सी करते हुए बोला।
“कुछ दिनों की ही तो बात है। उसके बाद तो मैं फिरसे हर रात पूरी रात के लिए तुम्हारी दुल्हन बन जाया करूँगी ना। तुम अब बातों में वक्त जाया न करो और जल्दी से मेरे जिस्म की गर्मी को अपने पाइप के गड्ढे पानी से बुझा दो,” मेरी बहन बोली और उससे लिपट गई।
वो दोनों एक-दूसरे को चूमने लगे। उसने मेरी बहन की गर्दन पर किस किया और उसके नाइट सूट के टॉप की ज़िप को खोला और अपने हाथों से उसके कंधों से सरकाने लगा और साथ-साथ उसके नंगे कंधों को चूमने लगा। मेरी बहन ने उसकी टी-शर्ट पकड़कर ऊपर खींच दी।
और उसने अपने दोनों हाथों से मेरी बहन के बूब्स को मसल दिया और उसके होंठ चूसने लगा। मैं हक्की-बक्की सी ड्रेसिंग रूम में खड़ी सब कुछ देख रही थी। ड्रेसिंग रूम में अंधेरा था इस वजह से वो मुझे नहीं देख सकते थे, पर चाँदनी रात की वजह से खिड़की के सामने खड़े मैं उनके साए अच्छे से देख सकती थी।
सिर्फ पहचान में नहीं आ रहा था तो वो जाना-पहचाना सा लड़का। अब वो लड़का और मेरी बहन एक-दूसरे के होंठों को चूस रहे थे। मेरी बहन ने उस लड़के का चेहरा अपने हाथों में ले रखा था जबकि उस लड़के का एक हाथ मेरी बहन की पीठ पर मालिश कर रहा था जबकि दूसरा हाथ उसके चूतड़ों का जायजा ले रहा था।
कुछ देर बाद उस लड़के ने मेरी बहन के होंठों को छोड़ा और उसके बूब्स को चूसने लगा और उसके दोनों हाथ मेरी बहन की कमर पर आ टिके। फिर उसने बड़े प्यार से मेरी बहन की स्कर्ट की हुक खोली और उसकी स्कर्ट नीचे उसके पैरों में जा गिरी और वो लड़का मेरी बहन के बूब्स को चूसता हुआ नीचे की तरफ बढ़ने लगा।
उसने मेरी बहन को पेट में किस किया और फिर उसकी टांगों के बीच में उसने अपना मुँह घुसा दिया और मुझे लगा जैसे वो उसकी योनि को चाट रहा हो। मेरी बहन के मुँह से हल्की सिसकियाँ छूटने लगी जिन्हें वो बड़ी मुश्किल से ही दबा पा रही थी। “आह! मैं गई,” उसके मुँह से दबी सी आवाज निकली। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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तो इस पर वो लड़का खड़ा हो गया और उसने फटाफट अपनी पतलून खोली और उतार फेंकी। मेरी नंगी बहन को उसने गोद में उठाया और पलंग की एक तरफ घूमकर उसने उसे पलंग पर लिटा दिया। इस बार एक पल के लिए उसका चेहरा चाँदनी में आया और उस पर एक नजर पड़ते ही मेरे पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक गई।
ये तो हमारा मुँह बोला भाई था। मेरे पापा के फैमिली फ्रेंड्स का बेटा। मेरी आँखों में उसी पल आँसू भर आए और मेरे मुँह से दर्द भरी चीख निकलते-निकलते रह गई। “नहीं, यह सच नहीं हो सकता। मैं ज़रूर पागल हो गई हूँ या फिर मैं ये कोई गंदा और निहायत ही घटिया सपना देख रही हूँ। यह नहीं हो सकता। यह तो मेरा प्यारा छोटा भैया है, यह तो मेरी प्यारी छोटी बहन का चहेता भाई है। यह मेरी बहन के साथ ऐसे… नहीं नहीं!”
एक ही पल में मेरे दिमाग में कई विचार दौड़ गए। और मेरी आँखों से लगातार आँसू बहने लगे पर मैंने अपने मुँह से एक सिसकी भी निकलने नहीं दी और ये गंदा कांड देखती रही। वो भी बेड पर मेरी बहन के ऊपर चढ़ गया और उसे फिर किस करने लगा। दोनों एक-दूसरे को बड़े मजे से अच्छी तरह चूस रहे थे।
उसने एक हाथ से मेरी बहन की छाती मसलनी शुरू कर दी और उसका दूसरा हाथ मेरी बहन की टांगों के बीच उसकी योनि के पास कहीं अंधेरे में गुम हो गया। ऐसे लगा जैसे वो अपने हाथ को आगे-पीछे कर रहा हो। क्या उसने अपना हाथ या फिर कोई उँगली मेरी बहन की योनि में डाल रखी थी? मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था पर मेरी बहन की आहें अब थोड़ी ज्यादा गरम और लंबी और थोड़े ऊँचे स्वर की हो गई थीं।
“सस्स्सह्ह्ह्ह! आहिस्ता,” वो मेरी बहन से बोला। “उन्ह्ह!” मेरी बहन के मुँह से हल्की की आवाज में एक मजे से भरी हाँ निकली। वो पलंग से उतरा और उसने मेरी बहन को उसके पैरों से पकड़कर पलंग के एक किनारे की तरफ खींच लिया। अब मेरी बहन का शरीर तो पलंग पर था पर उसके पैर फर्श पर थे। उसने मेरी बहन के पैरों को अलग किया और उसकी टांगों के बीच बैठकर उसकी योनि को चाटने लगा।
ये सब देखते-देखते मेरे आँसू अपने आप ही बंद हो गए थे और मेरा हाथ जाने क्यों अपने आप ही मेरे पेट के नीचे दोनों टांगों के बीच के हिस्से पर जा कर कस गया था। उधर मेरी बहन अपनी सिसकियों को दबाने की नाकाम कोशिश कर रही थी। फिर अचानक चाँदनी रात की रोशनी में मैंने देखा कि मेरी बहन की कमर एक पल के लिए थोड़ी हवा में उठी और फिर एक झटके के साथ फिर बेड पर गिर पड़ी।
“औह! मैं तो झड़ भी गई। जानू अब तो मेरे ऊपर चढ़ जाओ और मुझे चोद दो!” मेरी बहन जैसे उसके आगे गिड़गिड़ाई।
“अरे जान, आपका हुक्म सर आँखों पर,” हमारा मुँह बोला बचपन का भाई बोला और उसने मेरी बहन को कमर से पकड़कर थोड़ा ऊपर उठाकर बेड पर फिर हल्के से पीछे फेंक दिया। और उसके ऊपर चढ़ गया। उसने अपना हाथ नीचे किया और उसमें एक पाइप सी पकड़ ली।
“अरे बाप रे! क्या ये सच में वो ही है जो मैं सोच रही हूँ? क्या ये वाकई में इसकी पेशाब वाली नली है जो इसके हाथ में है? पर ये इतनी बड़ी और इतनी मोटी कैसे हो गई? बचपन में तो मैंने जब भी इससे पानी के टब में नंगे नहाते देखा था तब तो बहुत छोटी सी होती थी!” मेरे मन में बिजली के जैसे कई विचार कौंधे।
उसने अपने हाथ में पकड़ी वो मोटी सी पाइप जो शायद उसकी पेशाब वाली पाइप ही थी, उसे मेरी बहन की योनि के ऊपर टिकाया और मेरी बहन ने अपनी कमर के बल से अपने चूतड़ थोड़े हवा में उठाए और उसकी पाइप मेरी बहन की योनि में समा गई और वो मेरी बहन के ऊपर लेट गया।
फिर उसने अपने चूतड़ ऊपर उठा-उठाकर नीचे करना शुरू कर दिए जैसे वो अपनी पाइप मेरी बहन की योनि से बार-बार अंदर-बाहर कर रहा हो। मेरी बहन हल्की सिसकियाँ भरने लगी और कमरे में से अजीब सी आवाज आने लगी, जैसे कोई दूध से मक्खन निकाल रहा हो और साथ में हल्के पटाखे जैसे आवाजें आ रही थीं जो शायद दोनों की जाँघें आपस में भिड़ने की वजह से आ रही थीं।
मेरे लिए ये सब कुछ नया था। मैं बी.एससी. के फाइनल ईयर में पहुँच चुकी हूँ पर आज तक किसी लड़के ने मुझे छुआ तक नहीं है और न ही अभी तक मेरा कोई बॉयफ्रेंड हुआ है। मैंने सेक्स के बारे में थोड़ा-बहुत जो सुना वो न चाहते हुए मेरी सहेलियों के मुँह से ही सुना है, क्योंकि मैं बहुत ही शर्मीली किस्म की लड़की हूँ और सेक्स का नाम आते ही मुझे शर्म आ जाती है।
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और एक मेरी बेशर्म बहन है जो धड़ल्ले से बिना किसी खौफ के अपने ही मुँह बोले भाई से, जिसे हर साल वो बड़े चाव से उसके घर जा कर राखी बाँध कर आती है, उससे आधी रात में चुद रही है। और न जाने ऐसा कब से हो रहा है। खैर कुछ देर बाद उनकी चप-चप धीमी हो गई और मेरी बहन के मुँह से एक ठंडी आह निकली और मेरा प्यारा भाई भी जैसे थक कर उस पर गिर पड़ा।
पता नहीं इतना भारी-भरकम शरीर मेरी पतली सी बहन अपने ऊपर कैसे टिकाए पड़ी थी। कुछ पल के बाद उन्होंने एक-दूसरे को हल्का-फुल्का सा फिर से किस किया और फिर वो उठा और उसने फटाफट अपने कपड़े पहने और बोला, “अच्छा जान, मैं चलता हूँ! तेरे बाप के उठने का टाइम हो रहा है। पर तू वो गोली लेना तो याद रखती है ना जो मैं तेरे लिए केमिस्ट से लाया था। देखना कहीं तेरी एक भूल की वजह से मैं कुँवारा बाप बन जाऊँ।”
“अरे हाँ बाबा! तुम घबराओ मत! मैं गोली हर रोज टाइम से ले रही हूँ,” मेरी बहन बोली।
“और उन्हें छुपा के कहाँ रखा है जान?” उसने पूछा।
“मुझे उन्हें छुपा कर रखने की एक अच्छी जगह मिल गई है। हमारे स्टोर में एक पुरानी अलमारी है जिसके निचले हिस्से में पाँव में एक छेद है, जिसमें मैं वो छुपा के रखती हूँ,” मेरी बहन बोली।
“ओके! बाय डार्लिंग। कल फिर आऊँगा। ममुन्ह!” फ्लाइंग किस फेंकता हुआ वो लुच्चा मेरा मुँह बोला भाई मेरी बहन से बोला।
उसके जाने के बाद भी बहुत देर तक ड्रेसिंग रूम में ही बैठी रही और सोचती रही कि ये सब क्या हो गया है। हमारा भाई ऐसा कब से हो गया और मेरी बहन इतना कब और क्यों बिगड़ गई। सोचते-सोचते पता नहीं कितनी बार मेरी आँखों से आँसू बहे। जबकि मेरी बहन मजे से अपने कमरे में अब नंगी सो रही थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
उसके कमरे से एक अजीब सी स्मेल आ रही थी जैसे कोई पुरानी बिजली की तार जली हो। ऐसी स्मेल कभी-कभी मैंने मम्मी-पापा के कमरे में से भी आती सूँघी थी। मैं उठकर धीरे से अपने कमरे में चली गई पर मुझे नींद नहीं आई। अगले कई दिनों तक मैं उस रात के बारे में ही सोचती रही।
पहले तो मुझे बहुत गुस्सा था और जब भी हमारा वो कुत्ता मुँह बोला भाई हमारे घर आता था तो उसकी शक्ल देखकर मेरा दिल करता था कि मैं उसका चेहरा नोच डालूँ, पर एक अनजाने सी डर की वजह से न तो मैं उसे कुछ बोल पाई, न अपनी बहन से कुछ पूछ पाई। बरसों के रिश्ते एक पल में इन दोनों बेवकूफों की गलती की वजह से टूट जाएँ और किसी की बदनामी न हो इस बात के डर से ये बात मैं अपने घरवालों से भी न कर पाई।
मैंने उससे बात करनी ही बंद कर दी और अपनी बहन से भी अब मैं कम की ही बात करती थी और वो भी बड़े रूखे स्वभाव से। सभी मेरी इन हरकतों से हैरान थे पर सबको लगा कि शायद मैं पेपर्स की वजह से टेंशन में हूँ इसलिए ऐसा कर रही हूँ। पर आज तो पेपर भी खत्म हो गए थे और मैं आखिरी पेपर भी अच्छे से देकर हल्के मन के साथ घर की तरफ जा रही थी।
“अरे दीदी! आपका पेपर कैसा हुआ?” मेरा लुच्चा मुँह बोला भाई फिर जाने कहाँ से रास्ते में टकरा गया। और आज उसके साथ एक दोस्त भी था।
“तुमसे मतलब!” मैंने गुस्से से कहा और गुस्से से भरी साँसें छोड़ते हुए आगे बढ़ गई।
“लगता है आपका पेपर अच्छा नहीं हुआ! पर उसका गुस्सा आप मुझ पर तो न उतारो दीदी। वैसे आप कुछ दिनों से मुझसे उखड़ी-उखड़ी हैं, अच्छे से बात नहीं कर रही। क्या बात है? मुझसे कोई गलती हो गई क्या?” वो बोला।
“नहीं! और प्लीज मुझे अकेला छोड़ दो!” मैंने फिर थोड़े उखड़े से मूड में कहा।
“लगता है आप किसी बात से मुझसे नाराज हैं। प्लीज दीदी मुझे बताओ तो सही आखिर बात क्या है?” उसने पूछा पर मैं चुप रही।
“अच्छा चलिए मैं आपको घर तक तो छोड़ दूँ!” वो बोला।
“No thanks! मैं अपने आप चली जाऊँगी,” मैंने कहा और मैं आगे चल पड़ी।
“क्या बात क्या है?” उसके दोस्त ने उससे पूछा।
“क्या तू लोगों में कोई प्रॉब्लम हो गई है? तुम तो कहते थे कि तुम्हारी फैमिली के इनकी फैमिली के साथ अच्छे रिलेशंस हैं। फिर बात क्या है,” उसका दोस्त आगे बोला।
पर वो थोड़ा ला-जवाब सा हो गया था और मुझे लगा कि कहीं बात बिगड़ न जाए और कहीं हमारी फैमिली के या मेरी बहन की कोई बदनामी न हो जाए। यह सोचकर मैं बोली, “Sorry भैया! मेरा मूड थोड़ा ऑफ है। मेरे पिछले कुछ पेपर पहले जैसे अच्छे नहीं हुए। मेरी बातों का आप बुरा मत मानना। आप प्लीज मुझे मेरे घर तक छोड़ दो।”
मैं ये झूठ बोलकर उसके बाइक पर बैठ गई।
“मैं दीदी को 2 मिनट में घर छोड़कर आया। तू तब तक यहीं रुक,” मेरा लुच्चा भाई अपने दोस्त से बोला और उसने मोटरसाइकिल मेरे घर की तरफ सरपट दबा दी।
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रास्ते में जहाँ-जहाँ वो ब्रेक लगाता मेरी छातियाँ उसकी पीठ में धंस जातीं। ऐसा पहले भी होता था लेकिन तब मैंने कभी ध्यान नहीं दिया था। मुझे लगता था कि ये आजकल के छोकरे इतनी तेज बाइक चलाते हैं कि पीछे वाला ब्रेक लगने पर आगे ही तो गिरेगा।
पर आज जब-जब उसने ब्रेक लगाए और मेरी छातियाँ उसकी पीठ में धँसीं मेरे तब-तब गुस्से से शरीर के रोयें खड़े हो गए। दिल करता था कि अभी बाइक रुकवा के नीचे उतरूँ और इससे जमकर झापड़ लगाऊँ। पर मैंने कुछ न कहा। सारे रास्ते चुप रही और अब उसने भी कुछ नहीं पूछा।
घर पहुँचते ही मैं चुपचाप उसकी बाइक से उतरी और घर के अंदर चली गई और वो अपनी बाइक दौड़ाता अपने रास्ते चला गया। पेपर अच्छा होने की सारी बात मैं अब भूल चुकी थी और मेरी आँखों के सामने बार-बार सिर्फ उसका और मेरी बहन का उस रात का भद्दा, नंगा और घटिया कामुक दृश्य घूम रहा था।
मुझे इस बात पर रह-रहकर गुस्सा आ रहा था कि एक छोटा सा प्यारा सा लड़का जिससे मैं और मेरी बहन अपने सगे भाई से भी बढ़कर मानते थे, वो कैसे इतना लुच्चा, कमीना और गिरा हुआ इंसान बन गया जिसे अपनी मुँह बोली बहन के जिस्म का मजा उठाते हुए ज़रा भी शर्म नहीं आई।
कैसे उसने मेरी भोली-भाली बहन को बहका कर उसे इतनी नीच और गिरी हुई बना दिया। और तो और मुझे घर छोड़ने के बहाने न जाने कितनी बार उसने मेरी छातियों को अपनी पीठ पर रगड़ा है। मैं गुस्से से तिलमिला उठी और मन ही मन उससे कोसती हुई घर में दाखिल हुई।
“आ गईं बेटा पेपर खत्म करके,” यह मेरी मौसी की आवाज थी।
“अरे मौसी, नमस्ते! आप कब आईं?” मैं एक पल में सारा गुस्सा भूल गई और मेरी मौसी के गले से लिपट गई। बचपन से ही हम दोनों बहनों का हमारी मौसी से खूब गहरा प्यार रहा है।
“बस आज ही मायके आई हूँ बेटी। तेरी नानी की तबीयत ठीक नहीं रहती तो सोचा उनकी खबर ले आऊँ। अब तुम लोगों के शहर आई हूँ तो अपनी प्यारी भांजियों से मिले बिना कैसे रह सकती हूँ?” वो बोलीं।
फिर अगले एक घंटे तक हम बहनें अपनी माँ और मौसी के साथ खूब बातें करते रहे। अब शाम हो रही थी तो मौसी मेरी नानी के घर जाने के लिए उठीं तो उन्होंने कहा, “अरे तुम दोनों भी मेरे साथ तुम्हारी नानी के घर क्यों नहीं चलतीं। कल सुबह जब मैं वापस जाने के लिए बस लूँगी तो तुम दोनों भी अपने घर वापस आ जाना।”
“नहीं मौसी, आज मैं बहुत थक चुकी हूँ। आज ही मेरे पेपर खत्म हुए हैं। मैं कुछ दिन आराम करके खुद ही आपके शहर कुछ दिन के लिए आ जाऊँगी,” मैं बोली।
“अरे छोटी तू तो मेरे साथ वहाँ आज की रात रुक सकती है। वैसे भी तो तू मुझे अपनी स्कूटी पे वहाँ छोड़ने जा ही रही है,” मौसी ने मेरी छोटी बहन से कहा।
“आआ! ठीक है मौसी मैं आज आपके साथ वहीं रह जाऊँगी क्योंकि मेरी ट्यूशन शुरू होने वाली हैं, जिस वजह से मैं आपके पास आपके शहर नहीं आ पाऊँगी,” छोटी ने थोड़ा सोचकर कहा।
ट्यूशन का तो सारा उसका बहाना था। असली बात तो मैं जानती थी, कि अभी तो वो सिर्फ एक रात के लिए अपने यार, हमारे हरामी मुँह बोले भाई से बिछड़ेगी पर अगर कहीं उसे मौसी के शहर जाना पड़ गया तो कई रातों की जुदाई बन जाएगी। मैं एक बार फिर गुस्से से भर गई। और इस बार मुझे अपनी बहन पर गुस्सा आ रहा था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
उस रात की घटना के बाद मैंने यह स्पेशल नोट किया था कि पेपर्स के दौरान जैसे ही मैं रात को पढ़ने के बाद अपने कमरे की लाइट बंद करती थी उसके एक-आध घंटे बाद वो लुच्चा-लफंगा दीवार और चट्टानें फाँद कर मेरी बहन का बिस्तर गरम करने उसके कमरे में पहुँच जाता था।
हालाँकि उस रात के बाद कभी मैं उन्हें दोबारा सब करते देख नहीं पाई क्योंकि फिर कभी ड्रेसिंग रूम का दरवाजा खुला नहीं मिला, पर दरवाजे पर कान लगा कर मैं सब सुन लेती थी। उनकी गरम साँसों की आहें, सिसकियाँ और वो चप-चप की आवाज, और मैं समझ जाती थी कि वो क्या कर रहे हैं।
मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि मेरी बहन जो इतनी भोली बनती है वो इतनी गिरी हुई हरकत कर सकती है। उसे अपने माँ-बाप की इज्जत का ज़रा भी खयाल नहीं आया। ये सब सोचकर मेरा चेहरा गुस्से से लाल हो गया पर मैंने अपने आप को संभाला।
“अच्छा बेटा, अभी मैं चलती हूँ पर तुम कुछ दिन बाद ज़रूर हमारे वहाँ आना,” मेरी मौसी जाते-जाते बोलीं।
“जी मौसी ज़रूर,” मैं मुस्कुरा के बोली।
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और वो दोनों मेरी नानी के घर के लिए रवाना हो गए। खैर दिन ढला, शाम बीती और रात आई तो मैं टीवी देखने के लिए सोफे पर बैठी तो मुझे अपने नीचे कुछ पड़ा महसूस हुआ। मैंने उठकर देखा तो पाया कि मेरी बहन अपना मोबाइल घर में ही भूल गई है। मैंने मोबाइल उठाया और उसे टेबल पर रख दिया और टीवी देखने लगी।
फिर अचानक मेरे दिमाग के विचार आया कि क्यों न मेरी बहन के मोबाइल की तलाशी ली जाए। पता नहीं मैं क्या देखना चाहती थी पर मैंने मोबाइल उठाया, टीवी बंद किया और अपने कमरे में चली गई। रात के तकरीबन दस बज रहे थे और मेरे घरवाले सो रहे थे। मैं अपने कमरे में गई और अपने बेड पर लेटकर मोबाइल का लॉक खोलने की कोशिश करने लगी।
पर मैं ये पहले भी कई बार ऐसे ही मजाक में मेरी बहन के सामने कर चुकी हूँ पर मुझसे कभी लॉक खुला नहीं था और उसने कभी मुझे अनलॉक कोड बताया नहीं था। मैं कुछ देर ट्राई करती रही पर फिर मैं हार कर रुक गई। यह आज मुझसे खुलने वाला नहीं था। फिर अचानक मेरे दिमाग में आइडिया आया और मैंने अपने मुँह बोले भाई के नाम के अक्षरों वाले नंबर दबाए और टपाक से फोन खुल गया।
“Yessss!” मेरे मुँह से जीत की खुशी की आवाज निकली। लॉक खुलते ही सबसे पहले मैं मोबाइल के इनबॉक्स में पहुँची और मेरी बहन को आए मैसेज पढ़ने लगी। सबसे ज्यादा मैसेज उस हरामी के ही थे, और मैसेज थे इतने लुच्चे कि कुछ को पढ़कर तो मैं भी शर्म से पानी-पानी हो गई। एक मैसेज जो बार-बार आया था वो था, “सब सो गए क्या मेरी जान। मैं आ जाऊँ क्या?”
मैं मन ही मन उस आवारा, घटिया इंसान को कोसने से न रह सकी। उसके बाद मैंने मोबाइल का आउटबॉक्स देखा तो मेरी प्यारी भोली-भाली बहन के लिखे हुए बद से भी बदतर घटिया चीप और लुच्चे मैसेज पढ़कर मैं भी शर्म से पानी-पानी हो गई। एक मैसेज था,
“जल्दी से आ जाओ मेरी जान, मैं मारे प्यार के मरी जा रही हूँ। मैंने ब्रा और पैंटी भी नहीं पहनी है ताके तुम्हें ज्यादा कपड़े न उतारने पड़े। जल्दी आ जाओ अब अपनी जानू के पास। और कहो तो जो बाकी कपड़े पहने हैं वो भी उतार दूँ क्या। जल्दी आ जाओ वरना मैं दीवार फाँद कर मोहल्ले के चौकीदार से चुदने चली जाऊँगी………”
“छी! इतना गंदा मैसेज।” इससे आगे तो मैं भी न पढ़ पाई। खैर, अब मैं मैसेज पढ़ ही रही थी कि अचानक उसके मोबाइल पर एकदम से एक मैसेज आया और मैं डर के मारे काँप गई और मोबाइल मेरे हाथ से छूटकर नीचे गिर गया। मेरी साँसें फूल गईं, मानो मुझे किसी ने चोरी करते पकड़ लिया हो। मेरे चेहरे का रंग उड़ गया। फिर कुछ पल बाद मैंने अपने आप को संभाला और स्टडी टेबल पर पड़ा पानी पिया। थोड़ी साँस ठीक हुई तो कुछ हिम्मत करके मैंने वो मैसेज पढ़ा।
“सब सो गए क्या जान? बोलो तो अभी आ जाऊँ!”, ये हमारे उस लफंगे मुँह बोले भाई का मैसेज था। शायद मेरी बहन ने उससे बताया नहीं था कि वो आज घर पर नहीं है। बताती भी कैसे, उसका मोबाइल घर पर है, मौसी के पास मोबाइल नहीं है और हमारे नानी के घर का फोन कल से डेड पड़ा था जो आज भी चालू नहीं हुआ था।
मेरे दिमाग में एकदम से पता नहीं क्या आया और मैंने टपाक से उसके आउटबॉक्स में से एक मैसेज, “अभी थोड़ा रुकना जान। दीदी अभी जाग रही हैं। थोड़ी देर में आना,” उस लफंगे को सेंड कर दिया। ये मैंने क्या किया? मैसेज सेंड करते ही मैं घबरा गई। मेरे होश उड़ गए।
मैंने ऐसा क्यों किया? पता नहीं कहाँ से मेरे मन में ये खयाल आ गया था कि आज इससे मैं घर में बुलाती हूँ और जैसे ही वो मेरी बहन के कमरे में घुसेगा मैं उसे टपाक से एक तमाचा मारूँगी और बत्ती जगा कर उसे बताऊँगी कि ये मेरी बहन नहीं मैं हूँ। और उसे खबरदार करूँगी कि आइंदा अगर उसने ऐसी कोई घटिया हरकत की तो मैं उसकी करतूतों की खबर हमारे और उसके घरवालों को दे दूँगी।
ये सोचकर मैं कुछ संभली और मोबाइल साइड में रखा और अपने आप को संभालने के लिए और कपड़े चेंज करने के लिए ड्रेसिंग रूम में गई। ड्रेसिंग रूम की लाइट ऑन करके मैंने अपने आप को शीशे में देखा। अब मैं मेरी बहन की तरह ही गोरी-चिट्टी और सुंदर लड़की हूँ।
जब भी बन-ठन कर किसी शादी में जाती हूँ तो मेरी उम्र से छोटे लड़कों से लेकर मैंने बूढ़े-बूढ़े लोगों को नजरों-नजरों में मेरे कपड़े उतारते महसूस किया है। हमारे सब रिश्तेदार तो ये भी कहते हैं कि बड़ी छोटी से ज्यादा सुशील ही नहीं बल्कि सुंदर भी है। अपनी सुंदरता छुपाने के लिए मैं जानबूझकर चश्मा लगाती हूँ ताकि लड़के मुझे तंग न करें।
पर फिर भी बहुत सारे लड़के मेरे साथ बात करने को उतावले रहते हैं। अरे एक-दो बार तो कॉलेज जाते समय मुझे स्कूल के कुछ लड़कों ने भी बस में छेड़ा है। ऐसी पिटाई की थी मैंने उन लड़कों की अब तक उस बस में सफर नहीं करते जिसमें मैं बैठी होती हूँ।
खैर कपड़े बदलने के लिए मैंने अपनी जींस का बटन और ज़िप खोली और उसे ज़ोर से खींचकर अपनी टांगों से अलग किया तो शीशे में देखा कि टॉप और पैंटी में मैं किसी हीरोइन से कम नहीं लग रही थी। मैंने अपने बाल खोलकर कंधों पर छोड़ दिए। अये हाय! क्या मस्त लग रही थी मैं उस धीमे बल्ब की लाइट में। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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मैंने अपना टॉप उतारकर फर्श पर फेंक दिया और शीशे में अपने आप को देखते हुए अपनी ब्रा में कैद छातियों को अपने हाथों से उठाकर देखा और अपने हाथों से पता नहीं क्यों जरा सा सहलाया। मुझे थोड़ा अच्छा लग रहा था। मेरे दिमाग में पता नहीं क्या आया और मैं अपने बूब्स को नंगा देखने के लिए मैंने अपनी ब्रा उतार दी।
अपनी छाती के उभरते उभारों को और उन पर लगे तने हुए निप्पल्स को देखकर मैं गर्व से भर गई। फिर मैंने अपनी पैंटी उतारी और अपनी योनि को देखा। मैं अपने शरीर के सारे फालतू बाल वैक्स करती हूँ, क्योंकि वो मुझे अच्छे नहीं लगते। सिर्फ मेरी योनि के बाल मैंने कभी शेव या वैक्स नहीं किए।
मैं कुछ देर अपने शरीर को सराहती रही, फिर अचानक याद आया कि हमारा हरामी भाई भी मेरी बहन से मिलने को बेताब हो रहा होगा, उसकी भी तो खबर लेनी बाकी थी। ये सोचकर मैंने अपनी ब्रा और पैंटी को पहना और अपना इलास्टिक वाला पजामा और ज़िप वाला नाइट टॉप उठाकर पहनने लगी।
फिर सोचा कि क्यों न ये देखा जाए कि वो बुद्धू मेरे शरीर को छूकर क्या पहचान पाएगा कि मैं मेरी बहन नहीं बल्कि मैं हूँ। पता नहीं कहाँ से ये खयाल आया और मैंने अपनी ब्रा और पैंटी उतार दी और सिर्फ पजामा और टॉप पहन लिया। फिर मैं अपने कमरे में आई ताकि लाइट बंद करके मेरी बहन के कमरे में जा सकूँ।
फिर सोचा कि कहीं मेरी योनि पर बाल पाकर वो समझ न जाए कि मैं मेरी बहन नहीं हूँ। अब अंधेरे में मैंने ये नहीं देखा था कि मेरी बहन नीचे से चिकनी है कि नहीं। अगर शेव कर दूँ तो भी कह सकती हूँ कि आज ही की है पर अगर नहीं की तो वो बोलेगा कि कल तो बाल नहीं थे आज ये घना जंगल कहाँ से आ गया।
ये सोचकर मैंने अपने कपड़े उतारकर बेड पर फेंके। पूरी नंगी होकर, उस्तरा उठाकर बाथरूम में योनि शेव करने गई तो शेव करके मैंने सोचा कि मेरे तन से खुशबू नहीं आ रही। क्यों न नहा लिया जाए। तो मैं फटाफट नहाकर नंगी और गीली कमरे में वापस आई और तौलिए से अपना बदन पोंछकर मैंने अपनी बॉडी पर अच्छा परफ्यूम लगाया और फिर से पजामा और टॉप पहन लिया।
पर ये सब मैं आखिर क्यों कर रही थी? आखिर मैं उसे कहाँ तक जाने देना चाहती थी? मुझे अब कुछ समझ नहीं आ रहा था। बस दिमाग में एक ही बात चल रही थी कि वो कमरे में घुसते ही क्या करेगा? क्या मुझे किस करेगा? क्या वो मेरे कपड़े उतारेगा भी या उसे पहले ही पता चल जाएगा कि मैं छोटी नहीं हूँ?
नहीं-नहीं ऐसा नहीं हो सकता वो मेरे कपड़े ज़रूर उतारेगा, वो मेरी योनि ज़रूर चाटेगा, और उससे बिल्कुल भी शक नहीं होगा। मेरा बदन बनावट में मेरी बहन के जैसा ही है और हमारी आवाज भी काफी मिलती है। बाकी मैं दबी आवाज में बात करूँगी ताकि उसे शक न हो। मैं उसे पता भी नहीं चलने दूँगी कि मैं मेरी बहन नहीं हूँ। मैं आज उसे सबक सिखाकर ही रहूँगी।
उफ्फ! ये मुझे क्या हो रहा था। मेरा दिमाग अब साफ काम नहीं कर रहा था मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था। मैं सही-गलत की पहचान भूल रही थी। मुझे घबराहट होने लगी। मैंने फटाफट अपने कमरे की लाइट बंद की और मेरी बहन के कमरे में चली गई और उसका इंतजार करने लगी। वो अब आया वो अब आया!
ये सोचकर मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। मेरी घबराहट बढ़ती जा रही थी। मेरा गला सूख रहा था। पर वो था कि आने का नाम ही नहीं ले रहा था। जब एक घंटे तक वो नहीं आया तो मैं बेचैन होने लगी, मेरी घबराहट चली गई और मुझे गुस्सा आने लगा।
कमीना इंसान बचपन से हमें बहन बुलाता और मानता रहा है। अब जवान क्या हुआ, हमारी ही जवानी लूटने लगा है। आने दो उसको मैं उसके आते ही उसको पहले ज़ोर से थप्पड़ मारूँगी और फिर चिल्लाकर अपने घरवालों को बुला लूँगी और उसे रंगे हाथों पकड़वाऊँगी और अपने घरवालों को सारी कहानी सुना दूँगी।
मेरा गुस्सा वापस आ गया था और हर पल के साथ बढ़ रहा था। जब वो फिर भी नहीं आया तो तंग आकर मैं अपनी बहन का मोबाइल उठा लाई और उससे मैसेज किया, “कहाँ रह गए! आज आओगे भी या नहीं!”
जवाब तुरंत आया। “मेरी जान बस तुम्हारे घर के बाहर ही हूँ। अभी दीवार फाँद कर आ रहा हूँ।”
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मेरी साँसें फिर से तेज हो गईं और दिल फिर से ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। जैसे ही दरवाजे पर हल्की सी दस्तक हुई मैं बेड से उछलकर खड़ी हो गई और भागकर दरवाजा खोला। आज चाँद नहीं निकला था तो इस वजह से पूरा अंधेरा था। वो मुझे एकदम दरवाजा खुलने पर पहचान भी नहीं पाया और जल्दी से अंदर आ गया। उसके कमरे में घुसते ही मैं टपाक से उछलकर उसके गले से लिपट गई और अपने होंठ सीधे उसके होंठों पर जमा दिए।
उसने भी मुझे बाहों में कस कर भर लिया और मुझे गहरा किस करने लगा। उसकी ज़ुबान मेरे मुँह में लपलप चल रही थी और मेरी छाती उसकी मजबूत पकड़ की वजह से उसकी छाती के साथ पिस गई थी। एक पल के लिए मेरे होश उड़ गए। मेरे पाँव हल्के हो गए मानो फर्श पर रखे ही न हों। मेरी जिंदगी का ये पहला चुंबन था और इस चुंबन ने ही मेरे होश उड़ा दिए। मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था।
वो बोला, “अरे जान! क्या बात है आज बहुत मूड में हो।”
मैंने अपनी आवाज दबाकर फुसफुसाते हुए कहा, “बस अब कुछ न कहो, और आज मेरी जवानी मसल के रख दो।”
उफ्फ! ये मुझे क्या हो गया था, मैं क्या बोल रही थी। मैं अपना सारा गुस्सा और अपनी शर्म-हया सब भूल चुकी थी। भूल चुकी थी कि आज उसको घर बुलाने का मकसद क्या था।
“क्या बात है इतनी दबी-दबी आवाज में क्यों बात कर रही हो?” उसने पूछा।
“वो इसलिए कि कोई जाग न जाए और मेरा गला वैसे भी खराब है,” मैंने दबी सी आवाज में जवाब दिया और फिर पागलों की तरह उसे चूमने लगी।
अब वो भी मस्त हो चुका था। उसने भी मुझे ज़ोर से किस करना शुरू किया, मेरे होंठ चूसने लगा, काटने लगा। मुझे उसने धकेलकर दीवार के साथ लगा दिया और मेरे हाथों की उँगलियों में उँगलियाँ डालकर उन्हें दीवार के साथ चिपका दिया और मुझे पागलों की तरह किस करने लगा, कभी होंठों पर, कभी गले पर। मुझे अच्छे से चूस रहा था और बीच-बीच में काट रहा था।
उसने अपनी एक टांग मेरी टांगों के बीच धकेल दी और अपनी जाँघों से मेरी योनि को रगड़ने लगा। मुझसे अब बर्दाश्त नहीं हुआ और मेरे मुँह से सिसकी निकल गई। उसने अब मेरे हाथों को छोड़ तो मैं उससे लिपट गई। पर उसने मुझे दीवार के साथ ही लगाए रखा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
फिर उसने अपने एक हाथ से मेरे बूब्स को मसलना शुरू किया और दूसरे हाथ से मेरे पतले पजामे के कपड़े के ऊपर से ही मेरी योनि मसलनी शुरू कर दी। मैं मजे के सातवें आसमान पर उड़ रही थी और मेरे मुँह से आहें निकल रही थीं और वो मेरी गर्दन काट खा रहा था।
फिर अचानक वो हुआ जो पहले कभी नहीं हुआ था। मेरा पेट एकदम से अकड़ने लगा और फिर एकदम काँप सा गया और मुझे लगा जैसे मेरे अंदर पानी बहने लगा हो। और साथ में मुझे पहले कभी न महसूस हुए मजे का एहसास हुआ। फिर उसने मेरे टॉप की ज़िप खोली और उसे कॉलर से पकड़कर मेरी पीठ पर सरकाता हुआ उतारने लगा, और साथ में मेरी गर्दन और कंधों को चूमने और काटने लगा। मेरा टॉप उतारकर ज़मीन पर गिर गया।
उसने झट से अपनी टी-शर्ट उतारी और मुझसे लिपट गया। पहली बार मेरी नंगी छाती ने किसी मर्द की नंगी छाती को छुआ था। मैं एकदम सातवें आसमान पर उड़ने लगी, मेरा दिल ज़ोर से धड़कने लगा। उसने मुझे फिर ठंडी दीवार के साथ चिपका दिया और मेरे बूब्स को एक-एक कर चूसने लगा।
एक बूब चूसता तो दूसरे के निप्पल को उँगलियों में पकड़कर मरोड़ता। मुझे दर्द और मजे का एक साथ एहसास हो रहा था। बूब्स को चूसकर, फिर उन्हें काटकर, उसकी ज़ुबान मेरी नाभि तक पहुँची। उसने अपनी ज़ुबान को मेरी नाभि में घुमाया फिर मेरे पेट को किस किया। उसके दोनों हाथ मेरे बूब्स मसल रहे थे।
उसके दोनों हाथ मेरे बूब्स को छोड़ मेरे शरीर के साइड्स को सहलाते हुए मेरी कमर पर मेरे पजामे के इलास्टिक पर जा टिके। उसके होंठों ने मेरे पेट को चूमना बंद किया तो उसकी नाक मेरे पेट को रगड़ती हुई मेरे पजामे के इलास्टिक तक पहुँची। इस पर उसने अपने दोनों हाथों से मेरी कमर के साइड्स से मेरे पजामे को पकड़ा और उसे नीचे तक खींच दिया।
अब मैं उसके सामने अंधेरे में पूरी नंगी हो गई थी। मेरी दाहिनी टांग अपने आप ही घूमकर मेरी दाहिनी टांग के आगे आ गई, मानो शर्म के। उसने बड़े प्यार से अपने एक हाथ से मेरी टांग को साइड पे किया और अपनी ज़ुबान से मेरी योनि को चाटने लगा।
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“अरे जान आज तेरे बदन से बड़ी अच्छी खुशबू आ रही है और तेरी चूत का स्वाद भी बड़ा अच्छा आ रहा है। क्या बात है?” उसने लुच्चे से शब्दों में पूछा।
‘चूत’, योनि के लिए ये शब्द मेरे लिए नया था। पर अब मेरा दिमाग इन बातों पे कहाँ ध्यान दे रहा था। उसकी ज़ुबान तो मानो मेरी योनि, मतलब चूत में आग लगा रही थी। मैं मजे से पागल हुए जा रही थी और मेरे मुँह से ठंडी आहें निकल रही थीं।
एक बार फिर मेरा पेट अकड़ा और फिर मेरे पेट में पानी की एक नदी बह निकली। “अरे जान आज तो तू बड़ी जल्दी ही दो बार झड़ गई। लगता है मेरी परफॉर्मेंस आज कुछ ज्यादा ही अच्छी है, या फिर तू ज्यादा ही गरम?” मुझे चूमते हुए उसने कहा और झट से अपनी पैंट उतार दी, और मेरे से लिपट गया।
उसकी पाइप ने मेरे पेट को छुआ तो मुझे करंट सा लगा। मैं काँप गई और मैंने अपने दोनों हाथों से उसकी पाइप को पकड़ लिया। रे बाबा रे बाबा! उसकी पाइप तो चूल्हे के जैसे गरम, लोहे के जैसे सख्त और मोटे केले जैसे मोटी हो रखी थी। और तो और मेरे दोनों हाथों में भी मुश्किल से ही आ पा रही थी।
“क्यों जान! मेरा लौड़ा पकड़कर क्या मिन्नतें कर रही हो कि तुम्हें जल्दी से बेड पर लेटा कर, तेरी चूत में इससे डाल कर, तुम्हें जल्दी से चोद दूँ?” वो बोला। “हाँ.. हाँ!” मैंने दबी से आवाज से कहा।
इस पर उसने मुझे गोद में उठाया और बेड पर लिटाया, और खुद अपने भारी-भरकम तगड़े शरीर को लेकर मेरे ऊपर लेट गया। पर मैं हैरान थी कि मुझे उसके शरीर का तनिक भी भार महसूस नहीं हो रहा था। एक औरत क्या-क्या उठा सकती है!
उसने मुझे फिरसे चूमना और चूसना शुरू किया। मेरे होंठों को, मेरे गले को, मेरे कंधों को, मेरे बूब्स को चूमा और चूसा। अपने हाथों से वो मेरे पूरे बदन को सहला रहा था। मेरी कमर की साइड्स से हाथों से मेरे शरीर को मसलता हुआ, मेरी बाहों को सहलाता हुआ, मेरे हाथों को पकड़ लिया और मुझे चूमने लगा। फिर अपने होंठों को मेरे शरीर पर दौड़ाते हुए एक बार फिर मेरी चूत चाटने लगा। उसके दोनों हाथ मेरी जाँघों को सहला रहे थे।
मैं एक बार फिर झड़ी तो उसने कहा, “लौड़े के लिए तैयार हो मेरी जान!”
“हाँ हाँ जानू! प्लीज जल्दी करो!” मैंने आवाज दबाकर कहा।
“तो ये लो!” कहकर उसने अपना लौड़ा अपने हाथ में लिया और मेरी चूत के ऊपर रख दिया। फिर वो मेरे ऊपर लेटा मुझे किस किया और फिर उसने हल्का सा ज़ोर लगाकर अपना लौड़ा मेरी चूत के अंदर घुसाने की कोशिश की। पर कुँवारी चूत में लौड़ा इतनी आसानी से कहाँ घुसने वाला था।
जैसे ही लौड़ा अंदर घुसने लगा मेरी चूत जैसे फटने लगी और एकदम से एक तीखा और बहुत तेज दर्द मुझे महसूस हुआ। उसने हल्का ज़ोर लगाया तो मेरा दर्द असह्य हो गया। मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं। मेरे मुँह से हल्की सी दर्द भरी चीख निकली पर मैंने अपने होंठों को कसकर दाँतों से दबाकर उसे कंट्रोल किया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
“घबरा मत दीदी! सिर्फ कुछ देर ही दर्द होगा फिर आपको भी छोटी की तरह मजा आने लगेगा,” उसके मुँह से ये बात सुनते ही मेरी आँखें खुल गईं, मेरे रोंगटे खड़े हो गए, मेरा शरीर ठंडा पड़ गया और मेरा दिल एक बार फिर ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा, जैसे फिर से किसी ने मेरी चोरी पकड़ ली हो। मेरे मुँह से केवल एक ही आवाज निकली, “हाँ?”
इस पर उसने अपने होंठों से मेरे होंठों पर किस किया और बोला, “हाँ दीदी, बस थोड़ा सा ही दर्द होगा फिर आपको खूब मजा आएगा। पर चिल्लाएगा मत वरना हम दोनों फंस जाएंगे।”
“ओके!” मैं बोली।
फिर उसने अपने होंठों से मेरे होंठों को कसकर सी लिया और पूरा ज़ोर लगाकर अपना लौड़ा मेरी चूत में धकेल दिया। मेरी चूत तो मानो फट ही गई हो। दर्द के मारे मेरा मुँह लाल हो गया। मेरी आँखें बाहर निकल आईं। मैं ज़ोर से चिल्लाना चाहती थी पर उस कमबख़्त के होंठों की मजबूत पकड़ ने और घरवालों के डर ने एक हल्की सी सिसकी ही बाहर आने दी।
फिर वो कुछ पल रुका, मेरा दर्द कम हुआ तो उसने अपना लौड़ा बाहर निकालना शुरू किया। मेरा दर्द कम होने लगा, पर कमबख़्त ने लौड़ा पूरा बाहर निकालने की बजाय फिरसे अंदर धकेल दिया, और दर्द के मारे मेरी आँखों से नदियाँ बहने लगीं। फिर वो ऐसे ही बार-बार अपना लौड़ा मेरी चूत के अंदर-बाहर करने लगा।
उसकी बात सच थी। दो-तीन मिनट के बाद मेरा दर्द कम हो गया और मुझे भी मजा आने लगा। अब कमरे में चप-चप की आवाजें गूँज रही थीं, जैसे उसका लौड़ा मेरी चूत से मक्खन निकाल रहा हो। ऐसे अंदर-बाहर का सिलसिला पता नहीं कब तक चला पर मैं उस बीच न जाने कितनी बार झड़ी थी।
फिर काफी देर बाद वो थोड़ा स्लो हुआ फिर अचानक उसने कुछ ज़ोर के झटके दिए और फिर उसके लौड़े से मेरे पेट के अंदर मानो गरम पानी का फव्वारा छोड़ दिया। वो थककर पसीने से लथपथ मेरे पसीने से भरे शरीर पर निढाल हो गया। मेरी भी साँसें फूल चुकी थीं। कुछ देर दोनों ने साँस ली फिर उसने मुझे मेरे सर के पीछे से पकड़कर मेरे होंठों पर एक गहरा चुंबन दिया।
फिर बोला, “वाह दीदी! आज आपकी कुँवारी चूत को चोदकर बहुत मजा आया। वैसे एक बात कहूँ। आप अपनी बहन से ज्यादा खूबसूरत ही नहीं बल्कि ज्यादा मज़ेदार भी हो।”
ये कहकर उसने मुझे फिर किस किया और मेरे बूब्स को सहलाया। कुछ हिम्मत जुटाकर मैंने उससे पूछा, “पर भैया! आपको कैसे पता चला कि ये मैं हूँ और छोटी नहीं?”
“दरअसल दीदी! मुझे शुरू से ही पता था कि आप हो। आपकी बहन जब आपकी मौसी के साथ जा रही थी तो मुझे रास्ते में मिली थी और उसने मुझे बता दिया था कि वो आज रात आपके नानी के घर सोने वाली है और उसका मोबाइल घर पर ही रह गया है।
मैंने तो ऐसे ही शरारत में मैसेज किया था। पर जब आपने जवाब भेजा तो मैंने सोचा कि आपको चोदने का इससे अच्छा मौका फिर कब मिलेगा। और अपनी प्यारी बड़ी दीदी को चोदने के लिए उनका ये भाई प्यार की डोरी से बंधा चला आया।”
“पर ये सब अच्छा नहीं है!” मैं बोली।
“किसे पता चलता है दीदी,” वो बोला।
“बस आप जवानी के मजे लो और हमें भी दो,” कहकर उसने मुझे फिर किस किया।
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सुबह होने वाली थी इसलिए वो फटाफट उठकर तैयार होकर चला गया और मैं थकी-मारी ऐसे ही नंगी ही सो गई। अगले दिन जब दोपहर में मैं उठी तो ये देखकर घबरा गई कि सारी चादर मेरे खून से लथपथ पड़ी है। मैंने बड़ी मुश्किल से मेरी बहन के वापस आने से पहले, अपनी माँ से छुपकर चादर रगड़-रगड़कर अपने बाथरूम में धोई और बहन के कमरे की चादर चेंज की। उसके कमरे से जली हुई तार जैसी जो स्मेल आ रही थी उसे दूर करने के लिए डियोडोरेंट छिड़का। खुद दो बार नहाई फिर भी मुझे अपने आप में से उसकी स्मेल आ रही थी।
सारा दिन मैं बड़ी मुश्किल से हल्का-हल्का लंगड़ा कर चल रही थी। पर इस सब चक्कर में मैं सबसे ज़रूरी चीज़ तो भूल ही गई। वो गोली लेना जिसकी बात मेरी बहन कर रही थी। कुछ दिनों बाद मेरी काली करतूतों का भंडा फूट गया। मजबूरी में घरवालों को सब सच बताना पड़ा। तो बदनामी से बचने के लिए मेरे घरवालों ने मुझसे उम्र में छोटे मेरे ही धर्म भाई के साथ सब नियतियाँ भुलाकर शादी कर दी। अब वो मेरे और मेरी बहन के भाई के बजाय मेरा घरवाला और मेरी बहन का जीजा बन गया। वैसे सच बोलूँ तो मेरी बहन उसकी रंडी बन गई। और सब रिश्ते बदल गए।
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