Brother Fuck Virgin Sister
सुरेंद्र 28 साल का एक युवा इंजीनियर था। शहर की चकाचौंध भरी जिंदगी में वह दिन-रात नौकरी की दौड़ में लगा रहता था, लेकिन उसके दिल की गहराई में हमेशा गांव का वो छोटा सा घर, खेतों की महक और परिवार की गर्मजोशी बसी रहती थी। उसकी कद-काठी छह फीट लंबी, मजबूत और कसरती थी। चौड़े कंधे, मोटी भुजाएं, सीना जो वर्षों की जिम और मेहनत से तराशा हुआ था। Brother Fuck Virgin Sister
उसका चेहरा नुकीला, आंखें गहरी और भौंहें घनी थीं। गांव के लोग कहते थे कि सुरेंद्र देखने में किसी फिल्मी हीरो की तरह लगता है। उसका पिता सुनील 50 साल का था, लेकिन उम्र ने उसकी शक्ति को कम नहीं किया था। वह भी छह फीट का लंबा, तगड़ा आदमी था। कपड़ों की दुकान चलाते हुए उसका शरीर हमेशा सक्रिय रहता। उसकी त्वचा सांवली, मूंछें घनी और आंखों में अनुभव की चमक थी। गांव में लोग उसका सम्मान करते थे।
नीरजा, सुरेंद्र की मां, 45 साल की उम्र में भी गांव की सबसे खूबसूरत औरत मानी जाती थी। उसकी लंबाई पांच फीट छह इंच थी। उसका शरीर नाजुक लेकिन आकर्षक था – गोल-मटोल कूल्हे, पतली कमर, और भरे-भरे चूची जो साड़ी के आंचल में भी अपनी उपस्थिति महसूस कराते थे।
उसकी त्वचा दूधिया गोरी, बाल लंबे और घने, आंखें बड़ी-बड़ी और होंठ गुलाबी। पूरे गांव में उसकी चर्चा थी। महिलाएं उसकी सौंदर्य की तारीफ करतीं और पुरुष चुपके-चुपके नजरें डालते। नीरजा घर संभालती, पति की दुकान का हिसाब रखती और बच्चों की परवरिश करती – सब कुछ पूरे आत्मसम्मान के साथ।
राशि, सुरेंद्र की छोटी बहन, अभी-अभी 18 साल की हुई थी। उसने 12वीं का बोर्ड एग्जाम दिया था। वह अपनी मां की तरह ही पांच फीट छह इंच की थी, लेकिन जवानी की ताजगी उसे और भी आकर्षक बनाती थी। उसके चूची ऊपर उठे हुए, कसकर भरे हुए, कमर इतनी पतली कि हाथों से घेर लिया जा सके, और कूल्हे हल्के-हल्के लहराते हुए चलने पर किसी को भी दीवाना बना देते।
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उसकी त्वचा मां की तरह गोरी, बाल कंधों तक लहराते, आंखें बड़ी और भोली-भोली, होंठ पतले और आकर्षक। जब वह हंसती तो गालों पर गड्ढे पड़ जाते। गांव के सारे लड़के उसकी जवान होती देह को देखकर पागल हो जाते। वे उसे पटाने के लिए तरह-तरह के बहाने करते – कभी स्कूल के नोट्स, कभी मोबाइल पर गाने, कभी होली के रंग खेलने का निमंत्रण।
राशि सब जानती थी। वह समझदार लड़की थी। परिवार की इज्जत को वह कभी खतरे में नहीं डालना चाहती थी। लेकिन वह एक लड़की भी तो थी। अंदर ही अंदर सहेलियों की बातें सुनकर, बॉयफ्रेंड के हाथों में सिमट जाने के सपने देखती। मजे करने की इच्छा होती, लेकिन डर भी लगता।
इस बार होली से एक दिन पहले सुरेंद्र शहर से घर आया। राशि उसे लेने गई थी, बस स्टैंड पर उतरते ही राशि दौड़कर उसके गले लग गईऔर सुरेंद्र ने उसको अपने आलिंगन में कस लिया। “भैया! आ गए आखिर!” उसकी आवाज में खुशी थी, लेकिन आलिंगन में कुछ ज्यादा ही देर लग गई। सुरेंद्र ने उसे सीने से लगाया, उसकी पीठ थपथपाई।
“हां राशि, कितना मिस कर रहा था तुझे मेरी बहन कैसी है तू। एग्जाम कैसा गया?”
राशि ने सिर ऊपर उठाकर भाई की आंखों में देखा। इस बार उसकी नजर में वो भोलेपन के साथ कुछ और भी था – एक गहरी, अनजानी चाहत। सुरेंद्र की मजबूत छाती, उसकी मांसल बाहें, उसकी पुरुष सुगंध – सब कुछ उसे अजीब सा महसूस हो रहा था। वह जल्दी से अलग हुई और मुस्कुराई।
“ठीक गया भैया। अब आप आए हो तो मजा आएगा होली में।”
घर में मां और पिताजी कैसे हैं, उनका स्वास्थ्य कैसा है आदि बातें करते हुए दोनों भाई बहन घर आ गए। घर पहुंच कर मां ने बेटे का स्वागत किया और सुरेंद्र ने मां के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और बेटे को गले से लगा लिया। ये क्या हाल बना रखा है कितना दुबला हो गया है खाना नहीं खाता क्या अपनी सेहत का जरा भी ख्याल नहीं रखता।
ऐसा कुछ भी नहीं है मां खाना पीना भी खाया जाता है लेकिन सब कुछ अकेले मैनेज करने में बड़ी दिक्कत होती है ऑफिस से आना फिर खाना बनाना, लेट हो गए तो कभी-कभी खाना खाने का मन भी नहीं करता है या सुबह देर से उठे तो बिना नाश्ता किये चले गए आप समझ सकती हो अकेले कितना मैनेज होगा मुझे से।
बेटा इसीलिए तो तेरी शादी करना चाहते हैं तुम्हें कोई लड़की पसंद ही नहीं आ रही कैसे कब तक चलेगा तुम्हारी उम्र में तुम्हारे पापा दो बच्चे हो गए थे यानी की तुम 10 साल के थे और राखी मेरी गोद में थी, हम अभी भी शादी नहीं करोगे तो कब करोगे कब बच्चे बड़े होंगे।
यह सब छोड़िए मां जब समय आएगा तब हो जाएगी शादी के लिए सही और अच्छी लड़की भी तो मिलनी चाहिए। भैया अगर आप कहें तो मैं आपके लिए अपनी सहेलियों की लाइन लगा दूं वह सब आपके बारे में बातें करती हैं जो पसंद हो बता दीजिएगा मैंने उनको होली खेलने के लिए इनवाइट किया है बस आप मुझे इशारा कर दीजिएगा।
अरे मेरी बहन तू अपनी पढ़ाई लिखाई पर ध्यान दें मेरी शादी के चक्कर में मत पड़।
अच्छा तुम दोनों भाई बहन बातें करो मैं जाकर खाना बना देती हूं और फिर मुझे पड़ोस में सरला भाभी के यहां गुजिया बनवाने जाना है।
राशि मुझे बातें करते हुए शहर की जानकारी ले रही थी कैसे लोग रहते हैं कैसे बाजार हैं कैसे लड़के लड़कियां आपस में साथ में घूमते फिरते हैं आधी आधी फिर मन हम दोनों को खाना खिलाया और खुद भी खाना खाकर सरला चाची के यहां चली गई। अब मैं और राशि घर में अकेले थे राशि तो बिल्कुल मेरे पीछे ही पड़ गई। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
भैया क्यों मां पापा को परेशान कर रहे हो जल्दी से शादी कर लो ना।
अरे शादी के लिए कोई लड़की भी तो पसंद आनी चाहिए ना कोई ठीक सी लड़की ही नहीं मिल रही है। जो मां-बाप को पसंद है वह मुझको पसंद नहीं जो मुझको पसंद है वह मां पापा को पसंद नहीं जो दोनों को पसंद है उसका घर सही नहीं ऐसे कैसे शादी कर लूं।
भैया मैं आपकी मदद कर सकती हूं मेरी बहुत सारी सहेलियां बहुत खूबसूरत खूबसूरत है आपको जरूर पसंद आएंगी।
राशि मुझे नहीं लगता कि तुम अपने भैया से बहुत ज्यादा खुलकर बात कर रही हो तुम कितनी छोटी हो तुम्हारी सहेलियों भी तुम्हारी ही उम्र की होगी हमें और तुम में 10 साल का अंतर है तुम अभी बच्ची हो। तुम नहीं समझ सकती की शादी के लिए एक लड़का और उसका परिवार क्या चाहता है।
भैया मैं बच्ची नहीं रही आप ध्यान से देखिए मुझे, राशि ने अपने संतरे जैसे चूचियों को उभार कर तुरंत सुरेंद्र की आंखों के सामने कर दिया बोली देखिए देखिए मैं कहां से बच्ची रह गई हूं, मुझे लगता है एक लड़के को अपनी पत्नी से जो चाहिए वह मैं दे सकती हूं, और मां-बाप को अपनी बहू से जो चाहिए वह तो लगभग हर लड़की कर सकती है की मां-बाप की सेवा करे घर को संभाले पति का ख्याल रखें और क्या चाहिए।
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तू ठीक कह रही है तू बड़ी हो गई है पहले हम तेरी ही शादी करवा देते हैं और तू अपने पति को भी खुश रखना और उनके मां-बाप को भी ठीक है।
भैया मैं आपकी शादी की बात कर रही हूं मैं अभी छोटी हूं अभी मुझे और पढ़ाई पूरी करनी है आपकी तरह से इंजीनियर बनना है अपने पैरों पर खड़े होकर तब मैं शादी करूंगी।
अभी तो तू बड़ी बन गई थी अब अचानक से छोटी हो गई यह क्या है.
आप भी न भैया मेरे बुद्धू हो अरे मैं बड़ी हो गई हूं एक लड़के को जो चाहिए वह खुशी देने के लिए लेकिन अभी छोटी हूं परिवार की जिम्मेदारियां को संभालने के लिए उससे पहले अपना करियर भी तो बनाना है।
ठीक कह रही है तू दादी बन गई है जो मुझे समझा रही है।
अच्छा बताइए भैया आपको कैसी लड़की पसंद है मैं ढूंढने में आपकी मदद करूंगी।
मुझे लड़की लंबी खूबसूरत पतली दुबली चाहिए आकर्षक होनी चाहिए कि देखते ही अपना बनाने का मन करने लगे मैं इंजीनियर हूं तो उसे भी कम से कम इंजीनियर होना चाहिए। उसका घर परिवार भी अच्छा होना चाहिए और क्या एक लड़का चाहता है।
अच्छा उसे लड़की के बारे में कुछ तो आपने सोचा होगा कि दिखने में कैसी हो।
यह मैं नहीं बता सकता।
अरे भैया बताइए ना तभी तो मैं ढूंढ पाऊंगी।
इतनी सुंदर है कि मैं शब्दों से बयां नहीं कर सकता।
अच्छा समझ गई आप पहले से ही किसी के साथ इंगेज हैं अच्छा उसकी फोटो दिखाइए।
नहीं मैं किसी के साथ इंगेज नहीं हूं क्योंकि मेरे पास समय नहीं है।
तो फिर कैसे ढूंढेंगे कुछ आप ही बताइए ना।
अच्छा ठीक अपनी आंखें बंद कर और मेरे साथ चल।
भैया ने मेरी आंखें बंद की और ले जाकर इंटरेस्टिंग टेबल के सामने खड़ा कर दिया और बोले अब आंखें खोलो देखो मुझे ऐसी ही लड़की चाहिए।
शीशे में अपने को देखकर मैं शर्मा गई। धक यह क्या तरीका है अब आपको आपकी बहन जैसी लड़की कहां मिलेगी।
भैया बोले अगर मुझे ऐसी लड़की मिल जाए तो मैं अभी शादी करने के लिए तैयार हूं मुझे ऐसी ही लड़की चाहिए जब तक नहीं मिलेगी मैं शादी नहीं करूंगा और हां यह बात तुम्हें किसी से बताने की जरूरत नहीं है हम दोनों के बीच में ही रहनी चाहिए तुम्हें पता है अब तुम मेरे लिए ऐसी लड़की ढूंढ सकती हो तो बताना। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
इस तरह आपस में बात करते-करते दोपहर कट गई शाम हो गई. शाम को पूरा परिवार इकट्ठा हुआ। सुनील दुकान से लौटे, नीरजा रसोई में व्यस्त थी। राशि ने भाई के लिए चाय बनाई और उसके कमरे में ले गई। दोनों पुरानी यादें ताजा कर रहे थे। सुरेंद्र बिस्तर पर लेटा था, राशि उसके पास बैठी थी। बातें करते-करते राशि ने अनजाने में अपना हाथ भाई की छाती पर रख दिया।
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“भैया, आप शहर में अकेले कैसे रह लेते हो? कोई गर्लफ्रेंड तो नहीं बन गई?” उसने शरारत से पूछा, लेकिन आंखों में जिज्ञासा थी।
सुरेंद्र हंसा। “अरे पगली, वहां टाइम ही कहां मिलता है और तुझे बताया था ना कि तेरे जैसी लड़की नहीं मिल रही मिल जाती तो मैं सोचता भी। तू बता, तेरा कैसा चल रहा है तेरा तो कोई बॉयफ्रेंड वगैरा है क्या, गांव के लड़के तुझे परेशान तो नहीं करते?”
राशि की आंखें नीचे झुक गईं। शरमाते हुए बोली “करते हैं ना… सबके सब । लेकिन मैं किसी को मौका नहीं देती। अपनी और परिवार की इज्जत… आप जानते हो ना?” एक बार अगर कहीं बदनामी हो गई तो फिर क्या होगा।
सुरेंद्र ने उसका सिर सहलाया। “बहुत अच्छी लड़की है मेरी राशि बड़ी समझदार हो गई है उसे सभी ऊंच-नीच के बारे में पता है वैसे मुझे इतनी उम्मीद नहीं थी। लेकिन मैं तो सुना है तुम्हारी क्लास की कई लड़कियों के बाहर अफेयर हैं और वह उनके साथ मजे भी करने जाती हैं।”
हां भैया हैं वह सब जब अपनी कहानी बताती हैं तो मेरा भी मन करने लगता है लेकिन डरती हूं जैसे आपको मेरी क्लास की लड़कियों के बारे में सुनने को मिला मैं नहीं चाहती कि मैं कुछ ऐसा करूं जिसमें पिताजी या आपको कुछ गलत सुनने को मिले।
सुरेंद्र को तुरंत ही एहसास हुआ कि उसकी बहन बहुत समझदार और मैच्योरिटी वाली बातें करने लगी है लेकिन उसकी उम्र ही ऐसी है कि कभी भी पैर फिसल सकता है उसे कैसे संभाल जाएगा इस उम्र में चूत की खुजली बड़ी खराब चीज होती है कुछ भी करवा देती है यह सोचकर वह थोड़ा सा डर गया कि कहीं कुछ गलत हो गया तो क्या होगा।
भैया क्या सोचने लगे.
कुछ नहीं मैं तेरे बारे में सोच रहा था अच्छा तूने बताया कि तेरा भी मन करने लगता है तो मुझे बता तेरे तुझे कैसा लड़का पसंद है तू जिसके साथ सब मज़ा करना चाहती है।
भैया मैं आपको नहीं बता सकती मुझे शर्म आती है।
अरे इसमें शर्माने वाली क्या बात है।
लेकिन यह बात तो अपने दोस्तों में ही होती है आपसे कैसे करूं।
तुम उसको अपना दोस्त मान ले और दिल की बात खुलकर बता दे मुझ पर भरोसा रख तेरी कसम यह बात सिर्फ मुझ तक ही रहेगी और किसी को नहीं पता चलेगा।
ठीक है भैया आप इतना कहते हो तो एक्चुअली मुझे भी आपकी तरह 6 फीट लंबा मसल्स वाला ताकतवर बॉयफ्रेंड चाहिए था जो मुझे अपने बाहों में लेकर खूब प्यार करे।
मेरी तरह से ही क्यों।
भैया क्योंकि आप दिखने में बहुत सुंदर आकर्षक हैं और मेरी कितनी केयर करते हैं मुझे कितना प्यार करते हैं हर लड़की की इच्छा यही होती है कि उसे एक केयर करने वाला प्यार करने वाला बॉयफ्रेंड मिले और….
और क्या आगे भी तो बता..
भैया समझ में नहीं आ रहा कैसे बताऊं.
अरे जैसे अपनी सहेलियों को बताती है मान ले कि मैं तेरी सहेली हूं.
आप मेरी सहेली कैसे हो सकते हो तो लड़का हो लड़के तो बॉयफ्रेंड होते हैं.
तू मान ले कि मैं तेरा बॉयफ्रेंड हूं और तुम मेरी गर्लफ्रेंड अब तो बता सकती है ना।
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ओ भैया मेरी सहेली पूनम अपने बॉयफ्रेंड के बारे में बता रही थी कि वह उसको कैसे अपनी बाहों में लेकर प्यार करता है वह उसकी मूवी दिखाने के लिए ले गया और हाल में ही शरारतें शुरू कर दी फिर उसको अपने रूम पर ले गया वहां दोनों अकेले थे और खूब प्यार किया….
मूवी हाल में शरारत और रूम में प्यार…. कैसे किया जरा डिटेल में बता ना।
नहीं भैया यह चीज तो मैं नहीं बता पाऊंगी मैं पानी पीने जा रही हूं आपको पानी चाहिए क्या तो मैं लेकर आती हूं मुझे बहुत जोर प्यास लगी है.
तू पानी यही ले आ आज मैं तुझे पानी पिलाता हूं और तेरी प्यास बुझाता हूं।
धत्…. भैया अपनी बहन से कोई ऐसी बातें करता है।
अरे मैं कैसे बातें कर रहा हूं तुम मुझे पानी पिला सकती है तो क्या मैं तुझे पानी नहीं पिला सकता और जब पानी पिलाऊंगा तो प्यास बुझेगी ही ना इसमें क्या गलत कहा।
रात हो गई। सुनील और नीरजा अपने कमरे में चले गए। राशि अपने कमरे में जाने की बजाय पानी लेकर भाई के कमरे में आ गई।
“भैया, आज नींद नहीं आ रही। आपके साथ थोड़ी और बातें कर लूं?”
सुरेंद्र ने मुस्कुराकर जगह बनाई। “आ जा।” पहले मुझे पानी पिला दे और मेरी प्यास बुझा दे फिर मैं तुझे पानी पिला कर तेरी प्यास बुझा दूंगा।
दोनों एक ही बेड पर लेट गए। कमरे की लाइट बंद कर दी गई। सिर्फ बाहर राशि की हल्की रोशनी खिड़की से आ रही थी। बातें शुरू हुईं – बचपन की शरारतें, स्कूल के किस्से, शहर की जिंदगी। राशि धीरे-धीरे सुरेंद्र के करीब सरक आई। उसकी सांसें तेज हो रही थीं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
“भैया… आप इतने दिन बाद आए हो। मुझे बहुत अच्छा लग रहा है,” उसने फुसफुसाकर कहा।
सुरेंद्र ने उसकी ओर मुड़कर देखा। अंधेरे में भी राशि की चमकती आंखें साफ दिख रही थीं। “मुझे भी राशि। तू बड़ी हो गई है। बहुत सुंदर लग रही है।”
राशि शर्मा गई। उसने अपना चेहरा भाई के सीने पर छिपा लिया। “ऐसा मत कहो… मैं आपकी छोटी बहन हूं।”
“बहन तो है, लेकिन अब तू जवान हो गई है।” सुरेंद्र का हाथ अनजाने में उसकी पीठ पर फिरने लगा। राशि सिहर उठी।
तभी उनके माता-पिता वाले कमरे से हल्की-हल्की आवाजें आने लगीं। रोमांटिक फुसफुसाहट, हंसी, और फिर कुछ ऐसी आवाजें जो स्पष्ट रूप से प्यार भरी थीं। हटो जी… क्या कर रहे हो, आह धीरे करो…. सुनील और नीरजा अपनी निजी खुशी मना रहे थे। राशि और सुरेंद्र दोनों शर्मा गए। राशि ने अपना मुंह और भी छिपा लिया।
“भैया… मम्मी-पापा…” उसकी आवाज कांप रही थी।
सुरेंद्र ने हल्का सा हंसकर उसे और करीब खींच लिया। “शरमाती क्यों है? वे पति-पत्नी हैं। उनके बीच प्यार है।”
राशि ने धीरे से सिर उठाया। अब उनकी नाकें लगभग छू रही थीं। “भैया बॉयफ्रेंड और गर्लफ्रेंड भी तो ऐसे ही प्यार करते हैं ना पर हम… भाई-बहन हैं ना?”
सुरेंद्र ने कुछ पल चुप रहकर उसकी आंखों में देखा। “हां… लेकिन प्यार की कोई सीमा नहीं होती राशि और अभी थोड़ी देर पहले तुमने मुझे अपना बॉयफ्रेंड बनाया है मेरी गर्लफ्रेंड बनी हो।”
राशि की सांसें भारी हो गईं। उसका हाथ धीरे से भाई की मजबूत बांह पर चला गया। “भैया… मैं पिछले कुछ महीनों से आपको अलग नजर से देख रही हूं। जैसे… जैसे कोई बॉयफ्रेंड। आपको देखकर मेरा मन प्यासा हो जाता है आप मुझे सुरक्षित लगते हो। मैं जानती हूं आप मुझे कभी दुख नहीं दोगे।”
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सुरेंद्र का दिल जोरों से धड़क रहा था। उसने बहन के गाल पर हाथ रखा। “राशि… तू मेरी सबसे प्यारी है। लेकिन यह सोचना…”
राशि ने उसकी बात बीच में ही रोक दी। “मैं सोच चुकी हूं भैया। होली आने वाली है। रंगों के इस त्योहार में… अगर हम भी एक-दूसरे को रंग दें तो?” और अभी जो आप मेरी प्यास बुझाने की बात कर रहे थे भैया सच में मैं बहुत प्यासी हूं मेरी प्यास बुझा दो।
उसकी आवाज में शर्म, डर और चाहत का अनोखा मिश्रण था। सुरेंद्र ने उसे अपने आलिंगन में कस लिया। दोनों देर तक चुपचाप एक-दूसरे की धड़कनों को महसूस करते रहे। माता-पिता वाले कमरे से आने वाली फुसफुसाहट अब और गहरी हो गई थी।
“मैं तुझे बहुत प्यार करता हूं राशि,” सुरेंद्र ने उसके कान में फुसफुसाया।
“मैं भी भैया… बहुत ज्यादा।” राशि ने आंखें बंद कर लीं।
उनकी सांसें एक हो रही थीं। कमरे में फागुन की हल्की ठंड दो जवान दिलों मे आग लगा रही थी फागुन की रंगीन रातों की महक घुलने लगी थी। राशि का शरीर भाई की छाती से सटा हुआ था। उसकी जवानी की गर्माहट सुरेंद्र को महसूस हो रही थी दोनों भूल गए कि वह भाई बहन है एक दूसरे में समा जाना चाहते थे।
सुरेंद्र के कमरे में सिर्फ बाहर से आती राशि और होली की दूर की हल्की आवाजें थीं। दोनों एक-दूसरे की बाहों में लिपटे हुए थे। राशि का नाजुक शरीर सुरेंद्र की मजबूत छाती से पूरी तरह सटा हुआ था। पहला किस अभी खत्म हुआ ही था कि राशि की सांसें भारी हो गईं। सुरेंद्र ने उसे और कसकर जकड़ लिया, जैसे वह हमेशा के लिए अपनी बना लेना चाहता हो।
“राशि… मेरी जान, मेरी छोटी सी रानी,” सुरेंद्र ने उसके कान में फुसफुसाते हुए कहा, उसकी आवाज में गहरी चाहत और प्यार था। “तेरा यह पहला किस… मुझे लगा जैसे मैं स्वर्ग छू रहा हूं। तू कितनी मीठी है मेरी बहन।”
राशि शर्मा कर मुस्कुराई, उसकी आंखें बंद थीं। “भैया… मुझे भी। आपकी होंठों की गर्मी… मैं कांप रही हूं। अब और करो ना… मुझे छुओ। मैं आपकी हूं आज रात मुझे अपनी गर्लफ्रेंड बना लो और प्यार करो।”
सुरेंद्र ने धीरे से राशि की नाइट सूट की ऊपरी हिस्सा ऊपर किया। उसके भरे-भरे, गोल-मटोल चूची बाहर आ गए। गुलाबी निप्पल्स पहले से ही कड़े हो चुके थे। सुरेंद्र की बड़ी-बड़ी हथेलियां उन पर फैल गईं। वह धीरे-धीरे उन्हें सहलाने लगा, मसलने लगा, दबाने लगा। राशि की सांसें तेज हो गईं।
सुरेंद्र की मजबूत बांह राशि की कमर के चारों ओर लिपटी हुई थी। राशि का सिर उसके सीने पर टिका था। माता-पिता वाले कमरे से अभी भी हल्की-हल्की फुसफुसाहट और प्यार भरी सांसों की आवाजें आ रही थीं, जो दोनों के अंदर आग सुलगा रही थीं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
“भैया…” राशि ने धीरे से फुसफुसाया, उसकी उंगलियां सुरेंद्र की छाती पर घूम रही थीं और उसके निप्पल को छेड़ रही थी सुरेंद्र के निप्पल एकदम खड़े हो गए और मन बहकने लगा। “आपकी धड़कन कितनी तेज हो रही है। मुझे भी डर लग रहा है… अजीब सा अच्छा लग रहा है।”
सुरेंद्र ने उसे और कसकर अपनी बाहों में खींच लिया। उसकी मजबूत कसरती देह राशि की नाजुक, जवान देह से सट गई।
“राशि, मेरी जान। तुझे इस तरह अपने पास महसूस करके मैं खुद को रोक नहीं पा रहा। तू मेरी छोटी बहन है, लेकिन आज तू मुझे मेरी गर्लफ्रेंड लग रही है जो मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था। तेरी यह नरम त्वचा, तेरी सांसों की महक… सब मुझे दीवाना बना रहा है मैं तुझे प्यार करना चाहता हूं तुझे अपना बनाना चाहता हूं।”
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राशि शर्मा कर उसके सीने में और छिप गई, लेकिन उसका एक हाथ सुरेंद्र की पीठ पर फिसल गया।
“भैया, मैं भी… पिछले कई महीनों से रातों को आपको याद करके अनजाने में ही अपने शरीर को छूती हूं। सहेलियां बताती हैं कि बॉयफ्रेंड के साथ कैसे मजे होते हैं। लेकिन मैं तो आपको अपना बॉयफ्रेंड बनाना चाहती हूं। आप मुझे बहुत प्यार करते हो…मेरे बॉयफ्रेंड बनकर अपनी गर्लफ्रेंड की तरह प्यार करो और मुझे अपना बना लो और अपनी मजबूत वहां से अपने सीने में दबोच कर मसल डालो। आई लव यू भैया मेरे बाबू.”
उसकी आवाज कांप रही थी, लेकिन उसमें चाहत की गर्मी साफ महसूस हो रही थी। दोनों देर तक एक-दूसरे को देखते रहे। सुरेंद्र ने धीरे से राशि के बालों में उंगलियां फिराईं।
“तेरी आंखें कितनी भोली हैं, लेकिन आज उनमें आग है। एक प्यास दिख रही है बताओ ना, तुझे क्या चाहिए? मैं तुझे वो सब दूंगा जो तुझे चाहिए कभी दुख नहीं दूंगा।”
राशि ने सिर उठाया। उनकी नाकें छू रही थीं। “भैया… मुझे प्यार करो मुझे किस करो। वैसे ही जैसे एक बॉयफ्रेंड अपनी गर्लफ्रेंड को करता है पहली बार… बहुत प्यार से।”
सुरेंद्र का दिल जोर से धड़का। उसने राशि का चेहरा दोनों हाथों में थामा और धीरे-धीरे अपने होंठ उसके गुलाबी होंठों पर रख दिए। शुरुआत नरम थी, जैसे फूल को छूना। राशि सिहर उठी। फिर धीरे-धीरे किस गहरा होता गया। सुरेंद्र ने उसके निचले होंठ को हल्के से काटा, राशि ने आह भर दी और उसके होंठों को चूसने लगी। उनकी जुबानें मिलीं, नाचने लगीं। कमरे में सिर्फ उनकी सांसों और होंठों की चपाक की आवाज गूंज रही थी।
“उम्म्म… भैया… कितना अच्छा लग रहा है,” राशि ने किस के बीच में फुसफुसाया। “मेरे होठों को आज से पहले किसी ने नहीं चूमा है आप पहले हो मेरी भैया यह होंठ आज से सिर्फ आपके लिए हैं।
राशि क्या तू अपने भैया को प्यार करती है तू मेरी है।
राशि ने शर्माते हुए सिर हिलाया और फिर से उसके होंठों पर टूट पड़ी। “हां भैया… मैं आपकी हूं। पूरी तरह। आज होली के शुभ दिन पर जीवन में मिलने वाला पहला प्यार करो आई लव यू भैया.”
सुरेंद्र ने उसे लिटा दिया। उसने धीरे से राशि की नाइट सूट की स्ट्रैप्स खोलीं। उसके भरे-भरे, ऊपर उठी चूची बाहर आ गई। गुलाबी निप्पल्स कड़े हो चुके थे। सुरेंद्र ने उसकी चूची को अपने हाथ से सहलाया तो और राशि सिसकारी उठी.
सी…सी… आह…भैया बहुत अच्छा लग रहा है.
सुरेंद्र ने एक चूची को मुंह के पास लाकर चूसना शुरू किया। “मेरी राशि… तेरी चूचियां कितनी नरम और भरी हुई हैं। जैसे दूध से भरे हों।” वह जोर-जोर से चूसने लगा, निप्पल को दांतों से हल्का-हल्का काटने लगा। राशि ने उसका सिर पकड़कर अपनी छाती से चिपका लिया।
राशि कराह उठी, “आह्ह्ह… भैया… मजा आ रहा है। और जोर से चूसो… मेरे चूची आपकी हैं।”
सुरेंद्र उसकी चूची को जोर-जोर से पीने लगा और दूसरी चूची को जोर-जोर से दबाने लगा राशि मजे से सिसकारियां भर रही थी “आह्ह्ह… भैया… आपकी उंगलियां… कितनी मजबूत हैं। मेरी चूचियों को इस तरह मसलो… दबाओ… ये आपके लिए हैं,” राशि ने कराहते हुए कहा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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सी…सी… आह…भैया आह्ह्ह… भैया… मजा आ रहा है। और जोर से चूसो… मेरे चूची… मेरे निप्पल को अपने मुंह में भरकर पीओ.. भैया आपको अपने दूध पिलाने में बड़ा मज़ा आ रहा है हां भैया… चूसो… दूध पियो अपनी बहन का… काट काट करके पी जाओ… आह्ह्ह… और जोर से… मेरे निप्पल लाल कर दो… काटो उन्हें,” राशि की आवाज कामुकता से भर गई थी।
सुरेंद्र दूसरे चूची पर भी वैसा ही प्यार बरसाने लगा। वह चूसता, काटता, जुबान से घुमाता। राशि की चूचियां लाल हो गईं, उन पर खून सा जम गया था निप्पल्स सूज गए थे।
“मेरी जान… तू मुझे दीवाना बना रही है,” सुरेंद्र ने कहा और उसके होंठों पर फिर से गहरा किस किया। फिर वह नीचे सरक गया। उसकी जुबान राशि की नाभि तक पहुंची। वह नाभि को चूसने लगा, चाटने लगा, किस करने लगा। राशि तड़प उठी।
“भैया… वहां… ओहह… कितना अच्छा लग रहा है… मेरी नाभि चूसो… चाटो… मुझे गीला कर दो।”
सुरेंद्र ने राशि की पैंटी की इलास्टिक में उंगली फंसाई और उसकी पैंटी को उतार दिया, पैंटी उतरते ही उसकी बिना बालों वाली, गुलाबी, कुंवारी चूत सामने आई। पूरी तरह साफ, छोटी-सी, और अब थोड़ी नम हो चुकी थी। उसकी खुशबू – मीठी, कामुक, जवान लड़की की – कमरे में फैल गई। सुरेंद्र उत्तेजित होकर सूंघने लगा वो खुश्बू उसे मदहोश कर रही थी.
“राशि… तेरी यह चूत… कितनी सुंदर, कितनी साफ… और यह खुशबू… मुझे पागल कर रही है।” उसने राशि की टांगें फैला दीं और उनके बीच में आकर बैठ गया। उसकी जुबान पहले तो बाहर की पुत्तियों को चाटने लगी। फिर वह पूरी तरह चूसने लगा।
राशि चीख पड़ी, “आआह्ह्ह भैया… वहां… चूसो… मेरी चूत चूसो… जीभ डालो अंदर… आई लव यू भैया ओह गॉड… मैं पागल हो रही हूं।”
सुरेंद्र ने जुबान अंदर डाली, जीभ से चोदने लगा। साथ ही एक उंगली भी डाल दी। राशि की टाइट कुंवारी चूत की खुरदरी चिकनी दीवारें उंगली को जकड़ रही थीं। वह उंगली अंदर-बाहर करने लगा, जीभ से क्लिटोरिस चूसता रहा। राशि का शरीर थरथरा रहा था। उसकी खुशबू और भी तेज हो गई थी, जो सुरेंद्र को और उत्तेजित कर रही थी।
“भैया… आपकी जीभ… अंदर… हां… चोदो मुझे अपनी जुबान से… ये मेरी चूत आपकी चूत है… आह्ह्ह… बहुत मजा आ रहा है… मैं झड़ने वाली हूं…”
राशि पहली बार झड़ गई। उसके शरीर में कंपन आया। सुरेंद्र ने सारा रस चाट लिया। अब राशि ने सुरेंद्र को ऊपर खींचा। उसकी आंखों में शर्म और चाहत थी। “भैया… अब मेरी बारी।” वह नीचे सरकी और सुरेंद्र की पैंट खोल दी। उसका 9 इंच का लंबा और 3.5 इंच मोटा, लंबा, तना हुआ लंड बाहर आ गया। राशि की आंखें आश्चर्य और भय से फैल गई।
“इतना बड़ा… भैया… यह तो मेरी चूत फाड़ देगा मेरी क्या किसी भी लड़की की चूत को फाड़ सकता है मुझे बहुत सेक्सी है आई लव यू।” उसने मुंह खोलकर टिप चूसनी शुरू की। फिर धीरे-धीरे पूरा मुंह में ले लिया। गले तक उतारने की कोशिश की। सुरेंद्र ने उसके बाल पकड़े।
“राशि… मेरी बहन… तेरा मुंह कितना गर्म है… चूसो… गले तक ले… हां… चोद मेरे लंड को अपने मुंह से… आह्ह्ह…”
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राशि ने गला खोलकर लंड पूरा ले लिया। उसकी आंखों में आंसू थे लेकिन वह रुकी नहीं। वह ऊपर-नीचे मुंह हिलाती रही, चूसती रही, जुबान घुमाती रही। सुरेंद्र का लंड उसके मुंह में चोद रहा था।
“बहुत अच्छी… आई लव यू मेरी रानी… अब अपने भैया को अपनी चूत देदे ऊपर आ।”
राशि ने उसे ऊपर खींच लिया। वह लेट गई, टांगें फैला दीं। “भैया… अब मुझे अपना बना लो, ले लो अपनी बहन की। अपनी बहन की कुंवारी चूत फाड़ दो।”
बेबी आई लव यू टू, तू मेरी गर्लफ्रेंड है ना अब ये तेरा लंड है तुझे प्यार करेगा। पहली बार थोड़ा सा दर्द होगा मैं प्यार से करूंगा धीरे धीरे आई लव यू।”
बाबू…. मैं पहली बार ले रही हूं मेरी सहेली के ब्वॉयफ्रेंड का तो 5 इंच का हैं आपका तो बहुत बड़ा है डर लग रहा है.
बेबी डर मत एक बार अंदर डाल कर प्यार करने दे फिर तो तू आनंद के सागर में गोते लगाने लगेगी।
राशि लेट गई, जाँघें फैला दी। सुरेंद्र उसके ऊपर आया। लिंग को उसकी चूत के मुंहाने पर रगड़ा। राशि काँप उठी।
“धीरे से भैया… पहली बार है…आई लव यू.”
“दर्द होगा बेबी… मैं धीरे करूँगा। तुझे भी थोड़ा सा सहन करना हगा मैं धीरे-धीरे लूंगा तेरी कंवारी चूत को।”
सुरेंद्र ने राशि की छोटी सी चूत के होंठों को खोलकर उसमें अपने लंड का सुपाड़ा फसाया और धीरे से दबाव डाला। उसका मोटा लंड का सुपाड़ा राशि की तंग, कुंवारी चूत में घुसा। राशि ने जोर से कराही – “आआआह्ह्ह… दर्द हो रहा है भैया…!”
आधा इंच… एक इंच… राशि की आँखों में आँसू आ गए। उसने सुरेंद्र की पीठ पर नाखून गाड़ दिए। सुरेंद्र रुका, उसके होंठों को चूमता रहा, चूची के निप्पल को अपने मुंह में लेकर पीने लगा और उसके आँसू चाट कर बोला। “शांत हो जा मेरी जान… मैं तुम्हारा भैया हूँ… तुम्हें दर्द नहीं पहुँचाना चाहता बेबी आई लव यू।”
अब राशि को थोड़ा राहत हो गई थी सुरेंद्र ने राशि की कमर पड़ी और धीरे-धीरे उसने और दबाव डाला सुरेंद्र का लंड2 इंच अंदर घुस गया था दर्द की लकीरें राशि के चेहरे पर साफ दिखाई पड़ रही थी। सुरेंद्र धीरे से राशि की माथे को चूम लेता है उसकी आंखों में आंखें डाल के कहता है बेबी आई लव यू मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूं दर्द नहीं देना चाहता इसलिए धीरे-धीरे कर रहा हूं लेकिन पहली बार दर्द होगा.
और वह धीरे-धीरे 2 इंच लंड से अंदर बाहर खाते हुए 3 इंच तक अंदर पहुंच जाता है राशि की टाइट चूत में सुरेंद्र के लंडको कस के चक्कर रखा था आगे पढ़ने की जगह खत्म सी महसूस हो रही थी सुरेंद्र समझ गया की यह राशि की सील है पूरा मजा देने के लिए तोड़ना ही पड़ेगा और उसकी दर्द होगा. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
लेकिन सुरेंद्र अपनी छोटी बहन से बहुत प्यार करता था उसको अभी दर्द नहीं देना चाहता था इसलिए वह वहीं रुक कर अपने तीन इंच लंडसे धीरे-धीरे अंदर बाहर करता हुआ राशि से बातें करने लगा आई लव यू बेबी तू मेरी जान है तेरी छूट कितनी टाइट है बहुत मजा आ रहा है तुम कैसा महसूस कर रही हो.
राशि थोड़ा नॉर्मल हो गई थी और वह भी 3 इंच लंड को अपने चूत में अंदर बाहर करवाते हुए मजा ले रही थी भैया आह …आ…सी.. बाबू बहुत अच्छा लग रहा है तुम ऐसे ही धीरे-धीरे करते रहो क्या आपने मेरी चूत में अपना पूरा लंड डाल दिया.
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सुरेंद्र बोला अभी नहीं अभी सिर्फ 3 इंच से ही कर रहा हूं आगे तुम्हारी सील है जिसे तोड़ना है बस एक बार थोड़ा सा दर्द होगा बेबी आई लव यू क्या तुम तैयार हो अपने भैया को अपनी सील देने के लिए आई लव यू बेबी तुम यही चाहती थी ना की मैं तुम्हें प्यार करूं और तुम्हारी सील तोड़ूं तुम तैयार हो.
राशि- भैया आपका बहुत बड़ा है मुझे बहुत दर्द होगा आप आराम से करना बेबी बस एक बार और दर्द होगा अपने भैया पर भरोसा रख चीखना नहीं वरना मां और पिताजी जग जायेंगे। भैया मुझे बहुत दर्द होगा मैं बर्दाश्त नहीं कर पाऊंगी मेरी चीख निकल जाएगी प्लीज आप धीरे से करना.
सुरेंद्र उसको चूमता हुआ ऊपर आया सुरेंद्र ने और दबाव डाला। और छोटे-छोटे धक्के लगाकर अब चार इंच अंदर घुसा दिया राशि की चूत की दीवारें बुरी तरह खिंच रही थीं उसे लगा कि भैया का लंड उसकी चूत में छेद करता हुआ अंदर घुस रहा है.
“उफ्फ़… आह्ह्ह्ह… भैया… मैं मर जाऊँगी… बहुत जल रहा है… फट गई… ऊं…ऊं…. आ..उई मां… उफ़ बाबू…. बहुत दर्द हो रहा है।
राशि जोर-जोर से रोने लगी। उसका पूरा शरीर पसीने से तर था। दर्द असहनीय था, लेकिन सुरेंद्र का लंड अब भी आधा ही अंदर था। सुरेंद्र राशि को बहला रहा था “शांत हो जा मेरी जान… मेरी प्यारी छोटी सी बेबी… दर्द सह ले… बस थोड़ा और… मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ… तुम मेरी हो… मेरी बहन… मेरी गर्लफ्रेंड है ना…”
सुरेंद्र ने थोड़ी देर उसकी चूचियों को सहलाया धीरे-धीरे मसला फिर निप्पल को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा राशि को दर्द कम हो गया और थोड़ा रिलेक्स हो गया तो सुरेंद्र ने उसके होंठों को अपने मुंह में भर लिया राशि के कंधों को अच्छी तरह से पकड़ा और अपनी सारी ताकत इकट्ठा की धीरे से लंडको बाहर खींचा और पूरी ताकत से जोर का धक्का मारा.
अचानक एक झटके पूरा 6 इंच लंड उसकी छोटी बहन की चूतमें सील तोड़ता हुआ अंदर बच्चेदानी तक घुस गया और इसके साथ उसकी सील टूट गई। राशि की चीख निकल गई – आआआआह्ह्ह्ह्ह!!! भैया…!!! नहीं… मेरी चूत फट गई… आह्ह्ह्ह!!! बहुत दर्द… जल रहा है…!!!”आआआह्ह्ह्ह!!! भैया… फट गई… दर्द… बहुत दर्द… हो रहा है मैं मर जाऊंगी आप बड़े निर्दयी हो!”
उसके आँसू बहने लगे। राशि की चीख कमरे में गूंज गई। दर्द इतना तीखा और भयानक था कि जैसे कोई गर्म लोहे का सलाखा उसकी चूत में ठोंक दिया गया हो। उसकी सील के टूटने के साथ गर्म खून की धार फूट पड़ी, सुरेंद्र के लंड को लाल रंग में रंगते हुए बेडशीट पर फैल गई।
राशि का पूरा शरीर ऐंठ गया। उसकी आँखें उलट गईं, साँसें रुकने लगीं। वह तड़प-तड़पकर चीख रही थी, अपने नितंब हिला-हिलाकर लंड निकालने की कोशिश कर रही थी, लेकिन सुरेंद्र ने उसे मजबूती से दोनों हाथों से जकड़ रखा था।
“भैया… प्लीज निकालो… मैं मर रही हूँ… आह्ह्ह… बहुत जलन… फट गई… खून निकल रहा है…!”
उसके आँसू लगातार बह रहे थे, होंठ काँप रहे थे। दर्द की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि राशि कुछ पलों के लिए बेहोश हो गई। उसका शरीर ढीला पड़ गया, बेहोशी में भी हल्की-हल्की सिसकारियाँ निकल रही थीं।
सुरेंद्र अपना लंड बढ़ाने ही निकला और राशि को धीरे धीरे चोदने लगा और उसके निप्पल को अपने मुंह में लेकर पीने लगा उसकी दूसरी चूची को सहलाने लगा. जब राशि को होश आया, उसकी आंखों में आंसू थे लेकिन कुछ बोल नहीं रही थी सुरेंद्र ने धीरे-धीरे लंड को आगे पीछे करना शुरू किया.
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राशि अब धीरे-धीरे दर्द और आनंद वाली संस्कारियां ले रही थी आ..आ…सी…सी …. बाबू आई लव यू आपने मेरी सील तोड़ दी…… आ..आ… सी…सी मैं आपसे ही अपनी आ..आ…इस्.. चूत का उद्घाटन कराना चाहती थी भैया आपने अपना पूरा 9 इंच का लंड मेरी चूत में ठोक कर उद्घाटन किया और मेरी चूत का किला फतह कर लिया है आई लव यू बाबू. सुरेंद्र हल्के से मुस्कुरा दिया और दबाव डालकर 7वाँ इंच भी अपनी छोटी बहन की चूत में घुसा दिया।
“आआह्ह्ह्ह!!! भैया… और दर्द… बहुत गहरा… मेरी चूत के अंदर कुछ फट रहा है… उफ्फ़… मेरी बच्चेदानी में घुस रहा है आह्ह्ह…!” मैं मर जाऊंगी बाबू बस बस्स बस और नहीं…
दर्द अब पहले से भी ज्यादा तीव्र हो गया था। राशि की चूत की अंदरूनी दीवारें बुरी तरह खिंच चुकी थीं लंड का सुपाड़ा बच्चेदानी के मुंह पर ठोकर मार रहा था । हर छोटी सी हलचल पर नई-नई जलन और फटने का एहसास हो रहा था। वह सुरेंद्र की छाती पर मुक्के मार रही थी, रो रही थी, चीख रही थी।
बेबी अभी पूरा नहीं गया 2 इंच और बाकी है आई लव यू जैसे तुमने 7 इंच लिया है वैसे थोड़ा सा बर्दाश्त कर लो.
सुरेंद्र ने तुरंत अपना मुंह उसके एक निप्पल पर रख दिया। जोर से चूसा, जीभ से घुमाया और हल्का सा काटा। दूसरे स्तन को हाथ से मसलते हुए फुसफुसाया: “शांत हो जा मेरी जान… मेरी छोटी सी बेबी… दर्द सह ले…अपने बाबू के लिए बस थोड़ा और… आई लव यू बेबी… तुम मेरी हो… मेरी बहन… मेरी गर्लफ्रेंड… हो, ना आई लव यू बेबी”.
सुरेंद्र ने राशि अपनी बाहों में भरकर एक और धक्का मार कर 8वाँ इंच भी अंदर कर दिया।
“आआआआह्ह्ह्ह्ह!!! भैया…!!! पूरा फट गया… बस…बस्…बाबू और नहीं आह्ह्ह… मैं सह नहीं पा रही… बहुत दर्द… हो रहा है अपका लंड मेरी बच्चेदानी में घुस गया है मैं मर जाऊंगी बाबू बस करो …!”
राशि बुरी तरह चिल्लाई। उसका शरीर पसीने से पूरी तरह भीग चुका था। दर्द अब पेट तक, कमर तक फैल रहा था। वह बार-बार तड़प रही थी, टाँगें पटक रही थी, लेकिन सुरेंद्र ने उसे और कसकर जकड़ लिया और उसके ऊपर लेटकर चूमने लगा।
सुरेंद्र ने उसके दोनों निप्पल बारी-बारी से चूसे, काटा, फिर उसकी गर्दन पर किस करते हुए उसके कान में मीठी-मीठी बातें कीं: “ मेरी जान… देख, तुम्हारी चूत मेरे लंड को पूरा अंदर ले रही है… तुम बहुत टाइट हो… बहुत हिम्मती हो …बस आखिरी थोड़ा सा… फिर दर्द कम हो जाएगा और मजा आएगा… मैं तुम्हारा भैया हूँ… तुम्हें कभी नहीं छोड़ूँगा…तेरी हर इच्छा पूरी करूंगा और बहुत खुश रखूंगा तू मेरी प्यारी गर्लफ्रेंड है”.
सुरेंद्र ने अपनी बहन को खुश करते हुए एक बार फिर अपनी बाहों में समेटा और आखिरी जोरदार धक्का मारा। पूरा 9 इंच लंबा और 3.5 इंच मोटा लंड राशि की छोटी सी चूत में पूरी तरह समा गया।
“आआआआह्ह्ह्ह्ह!!! भैया…!!! पूरा घुस गया… मेरी चूत फट गई… बहुत दर्द… आह्ह्ह…!”
राशि की चीख फट पड़ी। उसका पूरा शरीर एकदम सख्त हो गया, आँखें उलट गईं, मुंह खुला रह गया। कुछ सेकंड के लिए वह फिर से बेहोश हो गई। उसकी चूत का मुंह बुरी तरह फैला हुआ था, खून की धार अब भी रिस रही थी। जब होश आया तो राशि हाँफ रही थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
सुरेंद्र पूरी तरह अंदर रुका हुआ था। उसने राशि के माथे पर पसीना पोंछा, होंठ चूमे, स्तन चूसे और बहुत धीरे-धीरे अपनी कमर को हिलाना शुरू किया। धीरे-धीरे दर्द की तीव्रता कम होने लगी और उसकी जगह एक गहरी, भारी कामुकता ने ले ली। अब राशि का दर्द कम हो गया था और उसे मजा आने लगा।
“भैया… आह्ह्ह… अब… दर्द के साथ… बहुत मजा आ रहा है… हाँ… धीरे हिलो… आह्ह्ह… गहरा… बहुत गहरा…”
सुरेंद्र की गति धीरे-धीरे बढ़ी। पूरा लंड अब अंदर-बाहर होने लगा। राशि की चूत पूरी तरह फैल चुकी थी और अब लंड को चिपककर जकड़ रही थी।
“हाँ भैया… चोदो… अपनी बहन की कसी हुई चूत चोदो… आह्ह्ह… बहुत मोटा है… फाड़ दो मुझे… जोर से… हाँ… हाँ…!”
सुरेंद्र की गति बढ़ी। उसका मोटा लंड अब पूरी ताकत से उसकी चूत को चोद रहा था। चिकनी, गीली, तंग दीवारें उसके लंड को जकड़ रही थीं। हर धक्के पर राशि की छोटी चूत का मुंह बाहर निकलता, फिर अंदर चला जाता।
“राशि… तेरी चूत कितनी टाइट है… मेरी बहन की चूत… मेरी हो गई…” सुरेंद्र गुर्राया।
राशि अब पूरी तरह चुदासी बन चुकी थी। उसने अपनी टाँगें सुरेंद्र की कमर पर कस लीं, नाखून उसकी पीठ पर गाड़ दिए और खुद ऊपर से दबाव देने लगी। दोनों की सांसें एक हो गईं। कमरे में चूत की गीली “पच-पच-पच” आवाज, राशि की कामुक चीखें और सुरेंद्र की गुर्राहट गूंज रही थी। राशि की टाँगें सुरेंद्र की कमर पर लिपट गईं।
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“भैया… और जोर से… चोदो मुझे… अपनी राशि को… आह्ह्ह… हाँ… हाँ… मैं तुम्हारी हूँ… हमेशा तुम्हारी!” सुरेंद्र ने उसके स्तनों को जोर से मसलते हुए तेजी से चोदा। राशि कई बार जोर-जोर से झड़ गई। कमरा उनकी सिसकारियों, चीखों, शरीरों के टकराने की आवाज़ और गीली चुदाई की छप-छप से भर गया। सुरेंद्र ने आखिरी जोरदार धक्के दिए। उसका 9 इंच का लंड पूरी तरह अंदर था। वह राशि की बच्चेदानी में गरम वीर्य छोड़ने लगा। राशि मजे से चीख पड़ी, दोनों साथ ही चरम पर पहुंचे।
वे देर तक एक-दूसरे से चिपटे रहे। सुरेंद्र राशि को चूमता रहा। “मेरी राशि… अब तू पूरी तरह मेरी हो गई। होली से पहले ही हम एक हो गए।” राशि ने आंसू पोछते हुए मुस्कुराया। “भैया… यह दर्द और मजे का मिश्रण… मैं कभी नहीं भूलूंगी। आपने मुझे औरत बना दिया। अब होली के रंग में हम और रंगेंगे।” दोनों नंगे ही एक-दूसरे की बाहों में सो गए। बाहर होली की तैयारी हो रही थी, उनके बीच का प्यार सबसे गहरा, सबसे गर्म और सबसे सच्चा हो चुका था अब वो भाई बहन नहीं रह गए थे दो जवान प्रेमी-प्रेमिका बन गए थे.
Amit says
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