New Hot Girl Chudai Kahani
बात तब की है जब मैं एक बार गंगा घाट पर नहाने के लिए गया तो मैंने देखा कि एक लड़की नहाने के लिए आई थी अपनी मम्मी के साथ। उसकी उम्र होगी 18-19 साल की और साथ में उसकी मम्मी थी करीब 35 साल की। मैंने देखा कि वो नहाने के लिए माँ-बेटी कपड़े निकालने लग गईं। New Hot Girl Chudai Kahani
दोनों ने अपना सूट निकालकर पेटीकोट पहन लिया। मैं गया तो नहाने था लेकिन उनको देखकर मेरा मन खराब हो गया और मैं नहाने के लिए रुक गया और देखने लगा उन दोनों को। माँ और बेटी दोनों नीचे गईं और नहाने लगीं। तभी मैं देखता हूँ कि दोनों माँ-बेटी की चुचियाँ दिखाई दे रही थीं और साथ में चूतड़ और चूत का नाप कपड़े गीले होने की वजह से दिखाई दे रहा था।
मुझसे रहा नहीं गया मैं टकटकी लगाकर दोनों को देखने लगा। दो माँ की नज़र मेरे पर पड़ी और मुझे देखकर हँसने लगी। यह देखकर मेरी हिम्मत बढ़ी और मैंने भी कपड़े निकाले और नहाने के लिए घुस गया। मैं उनसे थोड़ी दूर पर नहाने लगा और आराम-आराम से उनके पास ही आ गया।
मैंने चुपके से लड़की के पैर में पैर लगाया और मुझे एकदम से बहुत ही गरम एहसास हुआ। मेरा सारा शरीर ठंडे पानी में गरम हो गया। उस लड़की ने यह जताया जैसे कुछ हुआ ही नहीं। यह देख मेरी हिम्मत बढ़ गई और मैंने अगली बार फिर उसकी जाँघों पर पानी के अंदर ही अंदर पैर लगाया।
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तो भी वो चुप रही। अब मेरी हिम्मत बढ़ी और अगली बार मैंने अपना पैर अगली बार उसके पेटीकोट के नीचे से उसकी चूत में घुसा दिया। तो मुझे महसूस हुआ कि उसकी चूत पर कोई बाल नहीं था। मैंने इसी तरह से उसे बार-बार पैर लगाता रहा और वो और मैं यह सब खेल खेलते रहे।
अब जान मुझसे रहा नहीं गया तो मैं पानी के अंदर गर्दन तक डुबकर अपनी एक उँगली उसके पेटीकोट के नीचे से उसकी गांड में डाल दी। उसने एकदम से अपनी गांड दबा ली और इस तरह से गरमा-गरमी करते हुए वो माँ-बेटी नहा ली और दोनों बाहर आकर कपड़े बदलने शुरू कर दिए।
मैं नहाते हुए दोनों को देख रहा था तो मैंने देखा कि उसकी माँ जब कपड़े बदल रही थी तो उसने पेटीकोट निकाला और अपनी जाँघों को सकोड़ते हुए एकदम से अपना पेटीकोट निकाल दिया। अब वो एक छुपड़ी की तरह में एकदम से नंगी थी लेकिन मुझे वो दिखाई दे रही थी।
मेरा लंड एकदम से तन गया उसकी चूत देखकर। बेटी की चूत में तो मैंने उँगली ही डाली थी लेकिन माँ की चूत देखकर मेरा लंड इतना टाइट हो गया कि मुझे दर्द होने लगा। अब मुझसे रहा नहीं गया तो मैंने वही पानी के अंदर ही हाथ से अपने लंड को शांत कर लिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
अपना हाथ जगन्नाथ से मुझे थोड़ी राहत मिली लेकिन मेरा मन हो रहा था कि किसी तरीके से उसकी माँ की चूत मुझे मिल जाए। मैं नहाकर बाहर आया और उस लड़की को मौका देखकर मैंने अपना फोन नंबर दे दिया। मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ तो मैं वहाँ से नहाकर दिल्ली लौट आया और रात को दो बार उसकी माँ की चूत की तस्वीर बनाकर अपना हाथ जगन्नाथ किया।
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दो दिन बाद जब मैं अपने ऑफिस में काम कर रहा था तो मुझे फोन आया— “हैलो विमल बोल रहे हो?” मैंने कहा हाँ। “मैं रागिनी बोल रही हूँ।” मैंने कहा कौन रागिनी? उसने कहा वही गंगा घाट वाली। मैं अंदर ही अंदर खुशी से फूल नहीं समा रहा था। मैं चुपचाप ऑफिस से बाहर आया और उससे बात करने लगा।
तो उसने बताया वो भी दिल्ली में रोहिणी की रहने वाली हैं। मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। मैंने उसे ऐड लिया और कुछ दिनों तक फोन पर उसे नजदीकियाँ बढ़ाईं और एक दिन रोहिणी के एम२के सिनेमा में मिलने का वादा लेकर पहुँच गया।
उससे मिलने वहाँ मैं उसे मिला और उसे लेकर पिज़्ज़ा हट पर पिज़्ज़ा खाने लगा। खाते-खाते मैंने अपना हाथ उसकी जाँघों पर फिराने लगा तो वो चुपचाप बैठी रही। मैंने हिम्मत करके कहा यह तो उस दिन भी होता रहा। अब होटल के रूम में चलते हैं तो वो बोली तुम चाहो तो मेरे घर पर चल सकते हो। मैं और मेरी माँ वहाँ अकेले रहते हैं और मेरी मम्मी अभी मेरी मौसी के यहाँ गई हैं और शाम से पहले नहीं आएँगी।
मैं उसकी बात सुनकर एकदम उसकी मम्मी की चूत मेरे आगे आ गई और मैं उसकी मम्मी की चूत के बारे में सोचता हुआ उसके साथ गाड़ी में बैठकर उसके घर तक पहुँच गया। दिन का 1 बज रहा था। गर्मी के दिन थे बाहर कोई था नहीं इसलिए अंदर जाने में कोई दिक्कत नहीं आई।
जैसे ही मैं अंदर पहुँचा मुझसे रहा नहीं गया मैंने रागिनी को पकड़ लिया। वो बोली इसलिए आए हैं थोड़ा सब्र करो कुंडी तो लगाने दो। मैंने कहा अच्छा लगा लो। कुंडी दंग से लगी भी नहीं थी मैंने उसे गोद में उठाया और पास में बेड पर उसे लेकर लेट गया। उसकी उम्र भी कम थी वो एकदम गरम थी।
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मैंने पहले उसके सूट के ऊपर से ही उसकी चुचियों को दबाने लगा। मैंने पाया कि मेरी सोच के कहीं ज़्यादा मोटी थी उसकी चुचियाँ। थोड़ी देर दबाने के बाद मैंने गले के पास से उसकी चुचियों को हाथ अंदर डालकर पकड़ लिया तो मैंने पाया उसकी चुची मेरे एक हाथ में नहीं आ रही थी।
अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था मैंने उसके हाथ ऊपर कराए और उसका सूट निकाल दिया। नीचे उसने ब्रा पहनी हुई थी। मैंने देर नहीं लगाई और उसकी ब्रा एकदम से पकड़कर खींच दी जिससे उसकी ब्रा के हुक टूट गए और वो कहने लगी मैं कहीं भागकर जा रही हूँ कि ब्रा बेकार कर दी।
मैंने उसकी बातों की तरफ ध्यान नहीं दिया और मैं उसकी चुचियों को दबाने लगा। मैं कोई ड्रामा नहीं लिख रहा हूँ कि मैंने ऐसे सहलाया और वैसे किया वैसा किया। मैंने कुछ नहीं किया मैं बस पागलों की तरह उसकी चुचियों को दबाए जा रहा था और वो मस्त हुई जा रही थी।
थोड़ी देर में मैंने उसका नाड़ा खोला और उसकी सलवार पूरी एक झटके में निकाल दी। मैंने पाया कि नीचे उसने कुछ पहना ही नहीं था। उसकी नंगी चूत एकदम से मेरे सामने थी। जैसे मुझे नहाते हुए एहसास हुआ था उसकी चूत पर बाल नहीं थे कहीं-कहीं रूई टाइप से थे।
मैं चूतों का खिलाड़ी नहीं था मेरा भी वो 3 बार ही था। मुझसे रहा नहीं जा रहा था मैं एकदम से उसकी चूत में एक उँगली डाल दी। वो उसकी चूत में एकदम से चली गई तो मैंने दूसरी उँगली साथ में डालने की कोशिश की तो पाया नहीं जा पाई। मेरे मन में एक बार को आया कहीं मेरे लंड से ये बेहोश न हो जाए और कहीं लेने के देने न पड़ जाए पर खड़ा लंड कहाँ कुछ देखता है।
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मैंने इधर-उधर देखा तो कहीं ऑयल नहीं दिखाई दिया। उसे मैंने पूछना नहीं चाहा क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि वो जो कि इतना गरम हो चुकी थी उसका ध्यान कहीं और जाए। अब जब उसकी चूत का रास्ता आरामदायक बनाने का कोई रास्ता नहीं दिखा तो मैंने अपनी जीभ से ही काम चलाने की सोची। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने उसे पहले कभी चूत नहीं चाटी थी क्योंकि मुझसे अच्छा नहीं लगता था कि वही से पेशाब और वहीं चाटा जाए पर मैंने हिम्मत करके उसकी चूत में जीभ लगा दी तो मुझे एक बार अजीब लगा लेकिन फिर थोड़ा सा नमकीन जैसा टेस्ट आया और मैं फिर पागलों की तरह उसकी चूत चाटने लगा।
अब मैं सोच रहा था कि जीभ से उसकी चूत का रास्ता चौड़ा कर दिया जाए। मैंने अपने लंड की तरफ देखा तो पाया कि लंड में टाइट की वजह से दर्द होना शुरू हो गया था। मेरा लंड करीब-करीब 6 या 6.5 इंच का 2 या 2.5 इंच मोटा होगा (बाकी राइटर की तरह चूतिया बनाने की मशीन तो है नहीं मेरे पास 7 इंच 9 इंच जैसे गधे का लंड हो न कि इंसानी सब लिखते हैं 4 इंच 5 इंच मोटा अरे बहन के लौड़े 4 इंच का मतलब पता है गधे का लंड साले गधे झूठ बोलते रहते हैं)।
मैंने अब उसकी चूत के नीचे तकिया लगाया और लंड धीरे से उसकी चूत पर लगाकर आराम से धक्का दिया तो लंड थोड़ा सा अंदर गया। मुझे खुद दर्द हुआ। रागिनी का हाल तो क्या हुआ होगा आप अंदाज़ा लगा सकते हो। उसके बाद मैंने लंड को वही रोककर उसके होंठ चूमे और और एक ज़ोर का अनाड़ी की तरह धक्का लगाया तो लंड अंदर चला गया। थोड़ा सा बाकी था। अब वो दर्द के मारे रोने लगी.
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तो मैं घबरा गया पर मैंने लंड बाहर नहीं निकाला और उसी पोज़िशन में थोड़ा रुक गया और धीरे से उसे प्यार करने लगा। और थोड़ी देर बाद एक धक्का और लगाया और लंड पूरा अंदर चला गया। थोड़ी देर मुझे भी दर्द हो रहा था और उसका तो बेहिसाब बुरा हाल था। मुझे भी मज़ा और दर्द दोनों ही आ रहे थे लेकिन उसको शुरू में सिर्फ दर्द हो रहा था लेकिन थी रागिनी हिम्मत वाली एक बार भी नहीं बोली रहने दो। उसके बाद थोड़ी देर सबकी तरह वो भी नॉर्मल हो गई और कहने लगी मुझे आज पता लगा कि क्यों लड़के चूत के दीवाने होते हैं और लड़कियाँ लौड़े की।
और वो मेरा साथ देने लग गई। उस दिन मैं झूठ नहीं बोलूँगा मैं सिर्फ इस एक पोज़िशन में ही उसे चोदता रहा और चुदती रही। थोड़ी देर में मैंने उसके अंदर ही अपना वीर्य निकाल दिया तो वो बोली मेरे ऊपर सुसु क्यों किया तो मैं हँस कर बोला मेरी जान तेरा बाप तेरी माँ की चूत में सुसु नहीं करता तो मेरे लिए आज इतनी अच्छी चूत कहाँ से आती। वो हँसने लगी। इस तरह से रागिनी और मेरा चक्कर शुरू हुआ। उसके बाद मैंने उसकी माँ को भी चोदा वो अगली बार बताऊँगा क्योंकि अभी लिखते-लिखते उँगलियों में दर्द कर रही है।
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