Married Lady Employee Sex
मेरा नाम शिप्रा है. मेरा कद 5 फीट 7 इंच है. मेरी शादी हो चुकी है. शादी होने पर मैंने तरह-तरह के सपने देखे थे मगर जैसा सोचा था वैसा कुछ नहीं हुआ.मुझे उम्मीद थी कि मेरा पति बहुत ही स्मार्ट होगा और मोटे लंड से चोद-चोद कर मुझे जवानी का मजा देगा. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. आज मैं चुदने वाली थी. आज मैं लंड खाने वाली थी. Married Lady Employee Sex
इससे पहले मैं आजतक नहीं चुदी थी और मन में थोड़ी ख़ुशी थी कि आज मेरा पति नितिन अपने मोटे लंड से चोद-चोदकर जन्नत का मजा दे देगा. आगे जो हुआ वो कुछ ख़ास नहीं था.. नितिन का लंड काफी छोटा था. शायद 4 इंच का होगा. 2-3 मिनट ही मुझे चोद पाते और झड़ जाते. ऐसा लगातार 3 हफ्ते हुआ.
बात साफ़ थी कि नितिन में जवान मर्दों वाली कोई बात नहीं थी. मैं सही से चुद नहीं पाती. नितिन 3-4 धक्के देकर झड़ जाता. नितिन कोई रोमांटिक मर्द नहीं था. उसे तो रोमांस का ‘र’ भी नहीं मालूम था. मैं बाथरूम में जाकर चूत में उंगली करती. मगर दोस्तो, जो मजा एक मोटा 8-9 इंच लम्बा लंड देता है जो भला उंगली कैसी दे सकती है. मुझे कोई मजा नहीं मिलता.
शादी के 6 महीने बीत गये. एक बार भी मेरा पति नितिन मुझे सही से चोद नहीं सका. कभी-कभी छिप कर अपने फोन में चुदाई वाली ब्लू फिल्म देख लेती पर शांति नहीं मिलती. मैं बहुत गर्म औरत हू. अभी सिर्फ 25 साल की उम्र है मेरी। नितिन कभी मेरी गांड भी नहीं मारता था. न ही मुंह पर माल झाड़ता. मेरी चूची भी मुंह में लेकर नहीं चूसता था.
मैं मन ही मन सोचती “किस चूतिये से शादी हो गयी मेरी?” इस तरह एक साल गुजर गया। मैं भी घर की चारदीवारी से बाहर जाना चाहती थी. अखबार में नौकरी तलाशने लगी. फिर इंटरव्यू के लिए गयी. वो कोई सॉफ्टवेयर बनाने वाली कम्पनी थी. मैं साड़ी पहनकर गयी. मैंने आपको अपने बदन के आकार के बारे में नहीं बताया. मेरा फिगर 36-30-34 का है.
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साड़ी के ब्लाउज में भी मेरी बड़ी-बड़ी चूचियां बाहर की तरफ उभरी हुई होती हैं. मैं कितना भी छुपाने की कोशिश करूं लेकिन मेरे बड़े-बड़े चीनी जैसे मीठे दूध मर्दों की नजर में आ ही जाते हैं और उनके मोटे-मोटे लंडो को खड़ा कर देते हैं. सभी मर्द मुझे खा जाने वाली नजर से देखते हैं और चोदने की कामना करते हैं.
सब मेरी रसीली बुर को मुंह में लेकर चूसना-चाटना चाहते हैं. ऐसा सेक्सी सामान हूँ मैं. मैंने एक बार अपने ब्लाउज की तरफ देखा. मैं गुलाबी साड़ी में थी और आगे से ब्लाउज काफी खुला था. मेरे सफ़ेद चिकने मम्मे नजर में आ रहे थे. मैंने पीछे से बैकलेस डोरी वाला ब्लाउज पहना हुआ था.
मेरी चिकनी सफ़ेद मांसल पीठ दिख रही थी. मैंने आगे से अपने ब्लाउज को थोड़ा ऊपर किया और बॉस के केबिन में चली गयी. मैंने उसे देखा. वो 6 फीट लम्बा एक हट्टा-कट्टा आदमी था. करीब 45 50 साल का होगा. “हैलो शिप्रा ! गुड मॉर्निंग कैसी हैं आप? मेरा नाम मिश्रा जी है. ये मेरी ही कम्पनी है. आइये बैठिये आकर!” वो हसंकर बोला.
“ओके सर!” मैं धीमी आवाज में बोली और मिश्रा जी सर के सामने पड़ी कुर्सी पर बैठ गयी. वो मुझसे सवाल जबाव करने लगे. मैं बार-बार उसके चेहरे की तरफ देख रही थी. वो अच्छा ही लगे मुझे. वो हंसमुख मर्द था. मैं सोचने लगी कि 6 फुट लम्बा मर्द है ये. मेरा पति नितिन तो सिर्फ 5 फीट इंच का है.
इसका लंड कितना लम्बा होगा! क्या 8 9 इंच का होगा? क्या खूब रसीला लंड होगा जो किसी भी जवान औरत की चूत को चोद-चोदकर उसे फाड़ डाले… मैं मन ही मन ये सब बातें सोचने लगी. “तो आपकी जॉब पक्की है. आप रिसेप्शनिस्ट-कम-अस्सिस्टेंट होंगी और सिर्फ 15 हजार ही मैं आपको दे पाऊंगा.” मिश्रा जी ने कहा। मैने हामी भर दी.
“ठीक है शिप्रा जी, आप कल से आ जाइए.” मिश्रा जी बोला।
मैं खुश थी. बस पकड़कर घर आ गयी. रात में करीब 12 बजे मेरे पति ने मुझे फिर चोदा और 5 मिनट मे ही झड़ गया. मैंने मन ही मन उनको गाली दी. नितिन दूसरी तरफ मुंह करके जोर-जोर से खर्रांटे लेने लगे. मैं बिस्तर पर नंगी थी. बार-बार मेरे नये बॉस मिश्रा जी का चेहरा मेरे सामने आ रहे थे. मेरे सीधे हाथ की बीच वाली उंगली जो करीब 3-4 इंच लम्बी थी, मेरी बुर में घुस गयी.
“मिश्रा जी! मुझे अपने मोटे लंड से चोद डालो! मेरे स्त्रीतत्व को सार्थक बना डालो. बॉस मेरी रसीली बुर प्यासी है. इसे चोद-चोदकर इसका भोसड़ा बना डालो! मुझे रंडियों की तरह चोद डालो! मेरे मुंह पर माल झाड़ो! प्लीज! ऐसा करो!” मैं ये सब बातें मन ही मन खुद से कह रही थी. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मेरी बीच वाली उंगली जल्दी-जल्दी मेरी चिकनी चूत में सरपट-सरपट दौड़ रही थी. मैं अपने नये बॉस को सोच-सोचकर दोनों मोटी-मोटी जांघ खोलकर नंगी बिस्तर पर पड़ी थी. कम से कम 20 मिनट चूत में उंगली करती रही. अब झड़ने की बारी थी. पूरे बदन में करंट दौड़ रहे थे. मेरा बदन अकड़ गया.
चूत में ज्वालामुखी फट रहे थे. लग रहे थे कि आज मर जाऊंगी. मीठा नशा था वो. बहुत मीठा. मैं देसी रंडियों की तरह पेश आ रही थी. उसके बाद अपने सीधे हाथ की 2 उंगली अपने भोसड़े में घुसा दी और जल्दी-जल्दी फेंटने लगी और फिर मेरी चूत ने पिचर-पिचर की आवाज के साथ मेरा अमृतरस छोड़ दिया.
मैं लम्बी-लम्बी साँसें लेती रही. अपने नये बॉस से मैं मन ही मन चुद गयी थी.धीरे-धीरे मैंने काम शुरू कर दिया. मेरा बॉस मिश्रा जी मुझे कभी उस नजरों से नहीं देखता था. मैं ही उसके पीछे पागल थी. मैं उससे चुदने के सपने देखती थी. सोचती थी कि कभी वो मुझसे प्यार करे. मेरी जॉब 10 बजे से 5 बजे तक थी.
ऑफिस में मेरा ज्यादातर काम फोन कॉल के जवाब देने में बीतता था. मेरा वक़्त आराम से कट जाता था. धीरे-धीरे मुझे मेरा बॉस कुछ ज्यादा ही अच्छा लगने लगे. रोज रात में मैं उसके नाम की मुट्ठ मारती थी. शुरू के कई महीने मेरी नजदीकी मिश्रा जी से ज्यादा नहीं बढ़ पाई. एक दिन मिश्रा जी बहुत टेंशन में दिख रहे थे. वो अपने केबिन में था और उसकी बेचैनी मैं साफ साफ़ देख सकती थी. मैं अपनी कुर्सी से उठी और सीधा बॉस के पास गयी.
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“क्या हुआ बॉस? परेशान दिख रहे हैं आप?” मैंने कहा।
“शिप्रा ! मेरे सिर में बहुत दर्द है.” मिश्रा जी बोले।
“लाइये! मैं आपके सिर में मूव का मलहम लगे दूँ.” मैंने कहा।
“अरे तुम रहने दो.” वो मना करने लगे. मैं अपनी कुर्सी पर आई और अपने बैग से मूव निकाला और मिश्रा जी को कुर्सी पर बिठाकर माथे पर लगने लगी. उसे तुरंत ही मूव की ठंडक मिलने लगी. फौरन फायदा होने लगे. “मेरी बीवी मुझे ज्यादा पसंद नही है क्या करूँ?” मिश्रा जी अपनी उलझन बताने लगे.
“आप उस पर ज्यादा ध्यान न दो और कहीं कोई खूबसूरत औरत के साथ सेटिंग कर लो और जिन्दगी का मजा लो.”
“सोच रहा हूँ कि तुम्हारी बात मान लूँ. किसी खूबसूरत औरत से अफेयर कर लूँ. क्या तुम ऐसी किसी औरत को जानती हो?” मिश्रा जी कहने लगे।
“ठीक है मैं आपको बताऊंगी.” मैं जल्दबाजी में बोली।
“उसकी जरूरत नहीं है. वो खूबसूरत औरत मेरे सामने है.” मिश्रा जी ने मेरी तरफ देखते हुए कहा।
हम दोनों की नजरें टकरा गयीं. मिश्रा जी मुझे सीधा देख रहे थे. मैं भी उसे देखे जा रही थी. उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया. मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगे. मैं काँप रही थी. उन्होंने मेरे सीधे हाथ को प्यार से बेहद कोमलता से थामा और अपने होंठों के पास जाकर किस कर दिया.
“बॉस… ये आप क्या कर रहे हैं?” मैं घबरा गयी.
“तुमसे प्यार कर रहा हूँ!” वो कहने लगे.
“पर बॉस! मैं एक शादीशुदा औरत हूँ! ये सब ठीक नहीं है. अगर मेरे पति को पता चल गया तो?” मैं धक-धक करते हुए अपने दिल की धड़कन को संभालते हुए बोली. मेरे लिए ये बहुत बड़ी बात थी.
“उसे कुछ नहीं पता चलेगा! उसके आफिस मे ऐ.सी. चल रहे थे. मैं ठंडी होने लगी. गर्मी भी काफी थी. मुझे अच्छा लग रहे थे. मिश्रा जी की कुर्सी बहुत बड़ी थी. वो जाकर ऑफिस के मेन गेट को बंद कर आये. फिर आकर अपनी बड़ी सी कुर्सी में बैठ गए.
उन्होंने मुझे अपनी गोद में बिठा लिया. ऐ.सी. की हवा सीधी मेरी तरफ आ रही थी. मिश्रा जी मुझे किसी प्रेमिका की तरह गाल पर किस कर रहे थे. मैं देखने में काफी सेक्सी माल थी. रोज अच्छी तरह से मेक-अप करके आती थी. मैं भी बिल्कुल रापचिक आइटम लग रही थी.
“बॉस! ये सब सही नहीं है.” मैं मुंह से तो कह रही थी लेकिन अंदर से मैं भी मिश्रा जी से चुदने के मूड में थी. उन्होंने मुझे अपनी गोद में बिठा लिया और साड़ी के पल्लू को नीचे सरका दिया. मदमस्त बड़े बङे मम्मे 36″ के उसे दिख गये, वो प्यार भरे अंदाज से मेरे मम्मो को अपने बड़े-बड़े हाथों से दबाने लगे. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
“नहीं बॉस! ये सब सही नहीं!” मैं धीरे-धीरे कह रही थी.
मिश्रा जी आज मुझे चोदने के मूड में थे. उसकी आँखों में मैंने पढ़ लिया था. शायद मैं भी यही चाहती थी. धीरे-धीरे वो मेरे मस्त-मस्त आम को सहलाने लगे. फिर ब्लाउज के अन्दर हाथ डालकर हल्का-हल्का दबाने लगे. “आह आह आई आई …” मेरे मुंह से कामुक आवाजें निकलने लगीं.अब उसका जोश बढ़ गया. वो और तेज-तेज दबाने लगे. फिर ब्लाउज के बटन खोलने लगे.
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“नहीं प्लीज!! ऐसा मत करिये बॉस.” मैं फिर बोली.
उन्होंने ब्लाउस के सभी 4 बटन खोल दिये और मेरे दोनों कन्धों से उसे उतार दिया. मेरी बड़ी-बड़ी 38″ की चूचियां उसके मुंह में जाने को रेडी थीं. उन्होंने जुगाड़ करके मेरी ब्रा के हुक को बहुत जल्दी खोल डाला. ब्रा को उतार कर दूर फेंका और मुझे अपनी तरफ मुंह करके चिपका लिया.
मैं अब उसके सामने ऊपर से नंगी हो चुकी थी. मेरे बॉस मिश्रा के दोनों हाथ मेरी पीठ को थामे हुए थे. उसका मुंह मेरी रसीली बड़ी-बड़ी चूचियों के बीच में था. वो मुझे हर जगह किस कर रहे थे, जल्दी-जल्दी बेसब्री से. किसी कॉलेज के लड़के जैसी बेचैनी वो दिखा रहे थे. वो मेरे सफ़ेद गले, चूची, क्लीवेज, मेरे गाल सब जगह पर चुम्मा ले रहे थे.
“आई लव यू! शिप्रा रानी!” वो कहने लगे.
“आई लव यू बॉस!!” मैंने भी बोल दिया.
“साली आज तुझे चोद डालूँगा! रंडी!”.
मैं भी आज उसकी रंडी बनने को तैयार थी. मिश्रा जी का तेवर बदल गया. वो मेरा शिकार करने के मूड में हो गए. उन्होंने मेरे गले को पकड़ा और करीब किया और मेरे डार्क पिंक लिपस्टिक वाले होंठों को पास किया और अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिये. फिर वो मुझे चूसने लगे. इसी बीच मैं भी भूल गयी कि मैं शादीशुदा औरत हूँ. वो मुझे लिप लॉक होकर चूसने लगे. मैं भी उसे लिप लॉक होकर चूसने लगी.
मिश्रा जी आज मुझे रंडियों की तरह चोदने वाला थे. उसकी बेताबी उसका हाल बता रही थी. उन्होंने 5 मिनट तक मेरे संतरे जैसे होंठों को चूसा और सारी लिपस्टिक व लिप लाइनर छुड़ा डाली. मेरी दाईं चूची तनी हुई ठीक उसके मुंह के सामने थी. मेरे दोनों कबूतर अब काफी सख्त हो गये थे.
मिश्रा जी ने जंगलीपन दिखाना शुरू कर दिया. उन्होंने दोनों हाथों से मेरी निप्पल्स को पकड़ लिया और ऐंठने लगे.आपको बता दूँ कि मेरी चूचियां संगमरमर जैसी चिकनी और सफ़ेद हैं. मेरे दूध कलश जैसे गोल गोल हैं और निप्पल्स के चारों ओर बड़े-बड़े चमकदार चिकने डार्क कलर के गोले हैं.
मेरे आम इतने सेक्सी और कामुक थे कि चोदने से पहले ही कोई मर्द झड़ जाये. ऐसी माल थी मैं. वो बदतमीजी करने लगे. मुझे अपनी गोद में बिठाकर मिश्रा जी अपने दोनों हाथों से मेरी निप्पल्स को मरोड़ने लगे.“ऊई माँ!! उम्म्ह… अहह… हय… याह… अई ऐईई सी… सी… सी! मर गयी बॉस!” मैं जोर से चिल्लाने लगी.
“बहनचोद!! चिल्ला-चिल्ला के अपनी माँ क्यों चुदा रही है. क्या तेरे पति ने कभी तेरी सेक्सी कामुक निप्पल्स को नहीं मरोड़ा?” मिश्रा जी बोला और फिर बड़ी तेज-तेज मरोड़ने लगे.
मुझे बहुत जोरों का दर्द हो रहे थे. बस किसी तरह मैं बर्दाश्त कर रही थी.“नहीं बॉस! मेरे पति ने कभी ऐसा नहीं किया. मैंने दर्द में आँखें बंद कर ली थीं. मिश्रा जी बोले “साली!! तेरी चूचियां तो केवल जोर से मरोड़ने के लिए बनी हैं!” अगले 7-8 मिनट उन्होंने बड़ी बेदर्दी से मेरे दूध की निप्पल्स को मरोड़-मरोड़ के भर्ता बना दिया.
दर्द के कारण मेरी आँखों से आंसू गिरने लगे. फिर मिश्रा जी ने मेरी दाईं चूची को पकड़ा और अपने मुंह में तेजी से घुसा लिया और वहशी की तरह चूसने लगे. “आई! ईईई आराम से बॉस! मैं फिर कराहने लगी. मगर उन्होंने नहीं सुना और मेरी चूची को चूसने लगे. उसका बस चलता तो मेरे आम को काट ही डालता.
उसके दांत तेजी से मेरे नर्म-नर्म दूध में गड़ रहे थे. मुझे उनके इस अंदाज से मजा भी मिल रहे थे. वो मुंह में लेकर मेरे कबूतर को चूस रहे थे. फिर बायें दूध को भी चूस डाला. मैं भी अब चुदने को राजी हो गई थी. “बहन की लौड़ी!! आ जा मेरा लौड़ा चूस आकर!” मिश्रा जी बोला.
उन्होंने तेजी से अपनी पैन्ट की बेल्ट खोली और पैन्ट नीचे कर दी. उन्होंने अपने आसमानी रंग के चड्डी को नीचे सरकाया. पकड़ कर मुझे नीचे फर्श पर बिठा दिया. “चूस मादरचोद!! अच्छे से मेरा लौड़ा चूस!” मिश्रा जी ने सिसकारी भरते हुए कहा. मैं भी आतुर हो चुकी थी. आज कितने महीनों बाद उसके लौड़े का दीदार होने वाला था.
मैं भी आतुर हो चुकी थी. आज कितने महीनों बाद उसके लौड़े का दीदार हुआ था. मेरा अंदाजा सही था. काफी लम्बा-चौड़ा बदन होने के कारण उसका लौड़ा 9 इंच लम्बा जबरदस्त साइज का था. देखने में अमेरिकन लौड़े की तरह दिख रहे थे. उसका लंड अपना काम रस छोड़ रहे थे. मैं पकड़कर जल्दी जल्दी उसके लंड को मुट्ठ देने लगी. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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“फेंट शिप्रा !! अच्छे से फेंट साली मादरचोद” मिश्रा जी बोला. मैं काम पर लग गयी. आज मैं भी उसे खुश कर देना चाहती थी. मैंने मिश्रा जी का 9 इंच लम्बा और कम से कम 8 इंच मोटा लंड हाथ में ले लिया. शानदार रसीला और बेहद जूसी लंड था. मेरी उँगलियाँ काम करने लगीं. जल्दी-जल्दी मिश्रा जी के लंड को फेंटने लगी.
मिश्रा जी ने मेरे सिर को पकड़ा और पास ले जाकर फिर से मेरे होंठों को कुछ मिनट तक चूसा. मैं पहले तो जीभ निकालकर उसका लंड चाटने लगी. फिर चूसने वाले काम पर लग गयी. फिर मुंह में लेकर किसी देसी रंडी की तरह उसके लंड को चूसने लगी. “शानदार! जन्नत दिखा दी तूने शिप्रा ! और चूस बहनचोद ! आह्ह …” मिश्रा जी ने कामुक सिसकारी भरते हुए कहा.
मैं भी उसे आज अच्छे से संतुष्ट करना चाहती थी. मैं सीधे हाथ को फुर्ती से सांड जैसे लंड पर दौड़ा रही थी. “ओह्ह्ह ओह्ह्ह्ह आह आह मजा आ रहा है… और चूस मादरचोद! और चूस!” मिश्रा जी बड़बड़ाते हुए कहने लगे. फिर मैं वासना के समुन्द्र में गोते लगाने लगी. बॉस का लौड़ा मुंह में लेकर जल्दी-जल्दी से सिर हिलाकर चूसने लगी.
इसी बीच मेरे बाल खुल गये. मिश्रा जी अपनी बड़ी सी बॉस वाली कुर्सी पर बैठा थे. वो पीछे की तरफ झुका हुआ थे और मुझसे लंड चुसाई करवा रहे थे. मैं आज किसी रांड की तरह लगी थी. मिश्रा जी का लौड़ा प्रत्येक 8-10 सेकंड पर माल की कुछ बूंदे छोड़ रहे था जिनको मैं अपनी जीभ लगेकर चूस लेती थी. उसका माल नमकीन था. करीब 15 मिनट तक मैंने उसका लौड़ा चूसा.
“बहन की लौड़ी! अब मेरी गोली चूस!” मिश्रा जी ने कहा.
मैंने उसकी गोलियां कस कर पकड़ लीं और जोर से दबा लीं।
“मारेगी क्या रंडी?” मिश्रा जी दर्द से आह्ह करते हुए बोला.
उसके बाद मैं फिर गोली चूसने लगी. गोलियों को भी 10 मिनट तक बुरे तरीके से चूस डाला .“साली अब अपनी रसीली बुर के दर्शन करवा दे.” वो बोला और मुझे टेबल पर लेटने को कहा. उसकी ऑफिस की टेबल बहुत बड़ी थी. मैंने साड़ी खोली. फिर पेटीकोट की डोरी खोली. उसे उतार दिया. अब सिर्फ लाल पैन्टी में थी.
मैं उसकी टेबल पर लेट गयी. मिश्रा जी मेरे पैरों से खेलने लगे. वो मेरे पैर की उँगलियों पर किस करने लगे. खूब किस किया उन्होंने. फिर मेरी दोनों जांघों को सहलाने लगे. मेरी जांघें बेहद चिकनी और सफ़ेद थी. वो किस करता रहे. फिर मेरे दोनों पैर खोल दिए उन्होंने. मिश्रा जी की नजरें मेरी पैन्टी को घूरने लगी.“रंडी! तू तो गीली हो गयी!” वह बोला.
“जब मुझसे लंड चुसाओगे तो और क्या होगा?” मैं बोली।
वो पास आ गया. ऊपर से लाल पैन्टी को अपनी जीभ लगे कर चाटने लगे. मेरी चूत के मीठे रस से मेरी पैन्टी भीग गयी थी. मिश्रा जी चाटने लगे. “आह आह सी … सी … हीईई … अईईई ओह” मैं सिसकरियां भरने लगी. वो रुका नहीं, आँखें बंद करके लगातार चाटता रहा. बस लगातार मेरी पैन्टी को चाट ही रहे थे.
मैं बेहद गर्म होने लगी.“चाटो बॉस!! मजा आ रहा है… ओह्ह … ओह्ह्ह्ह” मैं अपनी गांड उठा उठाकर कह रही थी. उन्होंने 15 मिनट तक मेरी लाल पैन्टी को ऊपर से चूसा और चाटा. फिर उसे उतारने लगे. जल्दबाजी में उन्होंने जल्दी से पैन्टी खींची. मेरी पैन्टी फटते फटते बची. फिर मिश्रा जी ने मेरे पैर खोल दिये. मुंह लगाकर मेरा बॉस मेरी चूत का अमृतपान करने लगे. मैंने दोनों आँखें बंद कर लीं.
ऐसी सेक्सी हालत में ऐ.सी की हवा मुझे ठंडा कर रही थी. बड़ा सुकून मिल रहे थे. मेरी चूत बहुत तरस रही थी उसकी क्रियाओं से गर्म होकर. मेरी चूत बहुत दिनों के बाद इस तरह से रस की गगरी छलका रही थी जिसको मिश्रा जी साथ-साथ पी जा रहे थे. सारा माल, सारा रस मिश्रा जी चूस गया. हम मैं नंगी उसकी टेबल पर पड़ी थी. वो मेरी बुर को चाटने में लगे हुआ था.मैं बार-बार गांड और कमर उठा देती थी.
“मेरी चूत पसंद आई बॉस?” मैं बोल पड़ी.
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“अरे रंडी! तेरी चूत पर तो अपनी पूरी जवानी कुर्बान कर दूँ!! ऐसी सेक्सी चूत है तेरी ” मिश्रा जी सिर उठाकर बोला और फिर से चाटने लगे.फिर वो चूत के होंठों को दांत से पकड़ कर रबर की तरह खींचने लगे. ऊई उईई मर गयी! आराम से बॉस!! ऊईईई सी… सी… आहह्ह” मेरी हालत खराब हो रही थी. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
वो आँखें बंद करके दोनों लबों को खींच रहे थे. उसकी जीभ की नोंक एक इंच भीतर मेरी चूत में घुस गयी थी. मिश्रा जी ने अपनी उंगली ली और मुंह में डालकर गीली की. फिर मेरी चूत में घुसा दी और फेंटने लगे. “अआअ धीरे … धीरे … करो बॉस!! आपकी उंगली चूत में लगती है… आह आह्हह्ह!” मैंने मजे में बोल रही थी.
वो अपनी उंगली से मुझे चोदने लगे. मैं पागल हुई जा रही थी. वो एक तरफ उंगली करता और साइड से जीभ से चाट जाता. लगातार उंगली करने से चूत में जैसे आग लग गयी थी. मेरा बदन बहुत गर्म हो गया था। अभी भी मिश्रा जी उंगली करते रहे. 2 मिनट बाद सारा पानी निकल गया.
मिश्रा जी ने अपने बदन पर बचे-खुचे कपड़े उतार दिए. मेरे सामने खड़ा होकर लंड को अपने हाथ में लेकर फेंटने लगे. उसका 9 इंच का लौड़ा और भी ज्यादा धांसू लग रहा था. मैं समझ गई कि वह मेरी चुदाई करने की तैयारी कर रहा है. “बॉस!! धीरे-धीरे चोदना!!” मैं बोल पड़ी.
उन्होंने सुना ही नहीं. मिश्रा जी अपने लंड को बराबर घिसते रहे. कुछ देर में उसका लंड किसी नीग्रो मर्द के मोटे लौड़े की तरह दिख रहा था. मैं डरी हुई सी घबरा रही थी. लंड की एक-एक नस तन गयी थी. मिश्रा जी अपने लंड को हिलाते हुआ मेरी तरफ बढे. मेरे मन एक अजीब सा डर पैदा होने लगे था उसके लंड को देख कर.
उन्होंने अपने लंड को मेरी चूत पर लगे दिया. चूत के मुंह पर लंड का टोपा लगे तो मेरी दबी हुई प्यास जाग उठी. मन कर रहे थे कि मिश्रा जी के इस लंड को अपने अंदर ही समा लूं. मगर मिश्रा जी तो खुद ही मेरी चूत को चोदने के लिए मरे जा रहे थे. मैं चुप रही और बस इंतजार कर रही थी कि अगले पल में क्या होने वाला है मेरी चूत के साथ.
मिश्रा जी ने धचाक से लंड चूत में घुसा दिया. उन्होंने मेरी कमर पकड़ ली. उसका लंड अंदर जाते ही मेरी आंखों के सामने अंधेरा सा छाने लगे. उम्म्ह… अहह… हय… याह… मुझे लगने लगे कि जैसे मैं किसी और ही दुनिया में चली गई हूँ. जब वापस से आंखों के सामने रोशनी आई तो मैंने होश में आकर देखा कि मिश्रा जी जल्दी-जल्दी अपनी बड़ी सी टेबल पर लिटाकर चोदने में लगे है.
उसके लंड ने मेरी चूत को फैला दिया. इतना आनंद मैंने कभी महसूस नहीं किया था. उसके लंड को लेने के सपने मैं कई महीने से देख रही थी. इसी आनंद में मैं सी… सी… सी आहह आहहह औहहह इससस अहहह औहहह आहहह औहहह इससस मज़ाहह आहह रहाहहह है अहह बॉस खूब छोड़ो नितिन मुझे ऐसे नही पेलता है करने लगी.
वह भी आह्ह ऊह्ह करने लगे.वो रफ्तार बना रहे थे. मैं अपनी कमर हिलाकर उसका लंड गपागप खाने लगी. पहले उसके धक्के हल्के थे. मगर जैसे-जैसे चुदाई आगे बढ़ रही थी वैसे-वैसे अब वो बहुत आक्रामक लगने लगे था.कुछ ही मिनटों में उन्होंने अच्छी रफ्तार पकड़ ली.
सटासट फटाफट वो धक्के मारने लगे. मेरी चूत से पट-पट-पट-पट जैसी ताली बजने की आवाज आने लगी. मैं अच्छे से चुदने लगी.उन्होंने 20 मिनट मुझे चोदा फिर अपना मुंह मेरे गुलाबी गुलाब के फूल जैसे दिखने वाले भोसड़े पर रख दिया. मिश्रा जी फिर से मेरी चुदी हुई चूत को चाटने लगे. मेरी चूत अब मलाई जैसी दिख रही थी. नर्म, रस से सराबोर, चिकनी और बेहद सेक्सी बुर.
“बॉस!! आराम से मेरी चूत चाटो!! आह आह्ह… उई… उई… सी सी!!!” मैं मजे में कहने लगी.
मिश्रा जी गालियाँ देते हुए बोले “शिप्रा ! आज तूने खुश कर दिया है मुझे! तू कमाल की है! साली छिनाल!”
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मिश्रा जी फिर से मेरी चूत की एक-एक कली चाटने लगे. मैं पागल हो रही थी. मदहोश हो रही थी. वो प्यार से मेरी चूत को चूस रहे थे. वो मुझे बहुत आनन्द दे रहे थे. उन्होंने 8-10 मिनट ले लिए. तबियत भर ली.मैं किसी रंडी की तरह उसकी ऑफिस टेबल पर लेटी रही. उन्होंने मुंह ऊपर उठाया.
उसके होंठों के चारों ओर मेरी चूत का मीठा रस था. वो अपने 9 इंच के लंड को फिर से फेंटने लगे. फिर लंड को उन्होंने पकड़ा और मेरी चूत पर मोटे सुपाड़े को पटकने लगे. “ऊऊऊऊ आई अई आह आह्ह ऊ!” मैं सिसकारी भरने लगी. वो मेरी कुप्पा जैसी फूली हुई बड़ी सी चूत को पीट रहे थे. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
फिर लंड भीतर ठेलने लगे. मुझे दर्द हो रहे थे. वो जल्दबाजी में था. मिश्रा जी ने फिर से लंड भीतर पेल दिया. फिर खड़े होकर जल्दी-जल्दी पकापक पेलने लगे. “ओह्ह मम्मी! आआ… आआ… ईई!” मैं सिसकने लगी. वो इस बार और ज्यादा पावर से चोदने लगे. उसका लंड मेरी प्यारी सी बुर की कुटाई करने लगे.
जैसे खलहड़ से हल्दी पीसते हैं ठीक उसी तरह वो मेरी बुर की पिसाई करने लगे. उसके लंड ने अचानक विकराल रूप ले लिया. सबकुछ अपने आप हो रहे थे. जैसे कोई मशीन हो. वो मेरी बुर को अंदर तक तेज-तेज फाड़ रहे थे लग रहे थे कि आज पूरी तरह फाड़ ही डालेगा. फिर वो मुझ पर झुक गया और मेरे होंठों पर होंठ सटा दिए.
मेरे सेक्सी होंठों को पीते-पीते उन्होंने अनेक शॉट्स मारे. फिर मेरी कमर को दोनों साइड से पकड़ कर पेलने लगे. मैंने उसके चेहरे की तरफ देखा. वो पूरा का पूरा पसीने से तर था. उसका पूरा बदन पसीने की छोटी-छोटी बूंदों से भर गया था.अब भी चुदाई जारी थी. बड़ी देर के बाद वो झड़ने वाला था. “शिप्रा ! छिनाल! माल बाहर निकालूं क्या??”
मिश्रा जी कहने लगे. “मेरे मुंह पर निकालो बॉस!” मैंने अपने मन की इच्छा बता दी. उन्होंने जल्दी से लंड बाहर खींचा. मेरे मुंह की तरफ आया. तमतमाये लंड को हाथ में लेकर फेंटने लगे. मैंने भी अपना मुंह खोल दिया. मैं उसका माल पीने को आतुर थी. उन्होंने लंड फेंटना चालू किया. जोर से लंड हिलाते हुए उसको फेंटता रहा. ऐसे ही करता ही रहा.
बड़ी देर बाद जो झड़ा तो मैं तो उसके वीर्य की बरसात से सराबोर होने लगी. सटाक सटाक माल की बूंदें उसके लंड से निकल रही थीं. पिचकारी इतनी तेज थी कि कोई बूंद कहीं जाकर लगती और कोई कहीं जाकर गिरती. मेरे चेहरे पर मिश्रा जी का गर्म-गर्म माल गिरने लगे. मैंने मुंह खोल रखा था. कुछ माल मेरे मुंह में चला गया जिसे मैं पी गयी.कुछ पानी मेरे मम्मो ओ भिगो गया, मेने अपने मम्मो से वो पानी चाट लिया वो धीरे-धीरे झटके लेते हुए पूरा का पूरा झड़ गया.
“चल शिप्रा रंडी! चूस इसे!” मिश्रा जी बोला.
मैं नीचे आकर फर्श पर बैठ गयी. उसके लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी. चूस-चूसकर उसके लंड को अच्छे से साफ़ कर दिया मैंने.उसके लंड की चुदाई से मैं तृप्त हो गई थी. जब से मेरी शादी हुई थी मैं उसी दिन से प्यासी थी. मिश्रा जी के जबरदस्त लौड़े ने मेरी सालों पुरानी तमन्ना पूरी कर दी थी.
ऐसा चोदू मर्द मुझे मिल गया था जिसकी चुदाई पाकर कोई बांझ भी बच्चा जन दे. मगर बात अभी खत्म नहीं हुई थी. मैं वहीं टेबल पर निढाल होकर पड़ी हुई थी. मिश्रा जी अपनी बड़ी सी कुर्सी पर बैठे थे. मैं अपने ही ख्यालों में खोई हुई थी. ऐसा लग रहा था जैसे कोई बड़ा सा तूफान आकर थम गया हो.
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मैं उसी आनंद में डूबी हुई थी. लगभग दस मिनट की शांति के बाद मिश्रा जी ने मेरी जांघों पर फिर से हाथ फेरना शुरू कर दिया. मैं अभी भी वैसे ही पड़ी हुई थी. मैंने पूरी तरह से अपने आप को मिश्रा जी के हवाले कर दिया था. वह मेरी गांड के छेद पर उंगली चलाने लगे. उन्होंने मेरी टांगों को ऊपर उठा लिया था और मेरी गांड के छेद को छेड़ रहे थे.
कुछ देर तक बाहर गांड के छल्ले पर उंगली चलाने के बाद उन्होंने एक उंगली मेरी गांड में अंदर डाल दी. मैं थोड़ी संभली मगर उन्होंने मेरी टांगों को ऊपर उठा रखा था इसलिए उसी अवस्था में लेटी रही. मिश्रा जी ने मेरी गांड में उंगली को अंदर तक घुसा दिया था. अब वह धीरे-धीरे मेरी गांड में उंगली को अंदर-बाहर करने लगे.
मुझे हल्का हल्का दर्द होने लगे मगर कुछ ही देर के बाद मेरी गांड को मजा सा आने लगे. मेरी गांड खुद ही खुलने लगी. अब उन्होंने दूसरी उंगली भी मेरी गांड में डाल दी. वह दो उंगलियों से मेरी गांड की घाटी में गहराई नापने लगे. मेरी गांड खुल रही थी. उसके मर्द हाथों से मेरी गांड में एक सनसनी सी पैदा हो रही थी.
पहली बार किसी मर्द ने मेरी गांड को छेड़ा था. मैं उसका आनंद लेने लगी थी. कुछ ही देर में मिश्रा जी की उंगलियां तेजी से मेरी गांड में अंदर-बाहर होने लगीं. मुझे मजा आने लगे. उसके बाद मिश्रा जी ने टेबल के ड्राअर को खोला और उसमें कुछ निकाल कर वापस से ड्राअर बंद कर दिया. मैंने उठ कर देखा तो उसके हाथ में वैसलीन की शीशी थी.
उन्होंने अपनी उंगली पर क्रीम लगे ली और मेरी गांड पर मलने लगे. उन्होंने मेरी गांड में अंदर तक क्रीम लगे दी. उसके बाद मेरे मिश्रा जी ने अपने लंड पर भी क्रीम लगाई और क्रीम लगेते हुए उसका लौड़ा पूरा का पूरा तन गया. उन्होंने मेरी टांगों को उठाया और अपने लंड को अपने हाथ में लेकर मेरी गांड के छेद पर सेट किया और अंदर धकेलने लगे.
उसका नीग्रो जैसा लंड मेरी गांड को फाड़ने लगे. मैं दर्द से बिलबिलाने लगी आहह आऊ धीरे-धीरे आआऊऊईई डालो आआऊऊईई आआऊऊईई मगर वह रुका नहीं. वो बोले “वाह मादरचोद रांड तेरी गांड अभी भी कुंवारी है, तेरी गांड कि सील तोड़ने में मजा आयेगा.” वो मुझे पकड कर अपना विकराल लंड मेरे अंदर ठांसते जा रहे थे.
मेरे देखते देखते उनका विष लंड मेरे अन्दर गम हो गया और वो मुझसे चिपक गए. उन्होंने पूरा लंड अंदर तक फंसा कर ही उन्होंने दम लिया. मेरी हालत ऐसी हो गई थी कि मैं हिल भी नहीं पा रही थी. इतना दर्द मुझे कभी महसूस नहीं हुआ था. फिर उन्होंने अपने हाथों से मेरी चूचियों को दबाना शुरू किया.
कुछ मिनट के बाद मेरा दर्द कम होना शुरू हो गया. उसका लंड मेरी गांड में फंसा हुआ था. फिर मिश्रा जी ने मेरी गांड की चुदाई शुरू कर दी. वह तेजी के साथ मेरी कुंवारी गांड को चोदने लगे. चूत तो कुंवारी नहीं थी मगर गांड अभी तक कुंवारी ही थी.उसको मेरी गांड चोदने में कुछ ज्यादा ही मजा आ रहे थे.
उन्होंने तेजी से मेरी गांड की चुदाई की और लगभग बीस मिनट की चुदाई के बाद वह मेरी गांड के अंदर खाली हो गया.मेरी गांड खुल कर फैल गयी थी. मुझसे उठा भी नहीं जा रहे थे. मैं वहीं टेबल पर पड़ी रही. कुछ देर के बाद उठने लगी तो बहुत दर्द हो रहे थे. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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गांड में भी और चूत में भी ऐसा लग रहे थे जैसे किसी ने चीर दिया हो. मिश्रा जी ने शाम होते होते 5 6 बार मुझे सभी छेदों में खूब बजाया और फिर मेरे पति नितिन आ गए .मुझसे चलते भी नही बन रहा था. उन्होंने पूछा “शिप्रा क्या हो गया” मैंने बोला “बाथरूम में पैर फिसल गया था”. मिश्र जी बोले “शिप्रा 1-2 दिन आराम करना फिर आ जाना” नितिन बोले “थैंक सर, शिप्रा तुम्हारे बॉस काफी अच्छे है” मेने मन में सोचा “अबे साले तेरी बीबी को दिनभर कुतिया बनाकर चोदा है उन्होंने और तू उनकी तारीफ कर रहा है”.
मैं घर आ गई 2 दिन आराम करने के बाद मेरी तबियत ठीक हो गई. तीसरे दिन बॉस मुझे लेने घर आये और अपने फार्महाउस ले जाकर दिन भर खूब चोदा और फिर घर छोड़ दिया. मिश्रा जी के साथ मेरी चुदाई की शुरूआत हो चुकी थी. मैं ऑफिस में तक़रीबन रोज ही चुदती थी, कभी कभी तो ऑफिस के बाहने मिश्रा मुझे अपने फार्महाउस में ले जाकर दिनभर चोदते और फिर मुझे घर ड्राप करते हैं. मैं खुश रहने लगी थी. मुझे एक जवान चोदू मर्द मिल गया था. जब नितिन घर से बाहर टूर पे जाते तो मिश्रा जी मुझे मेरे घर पे ही आकर चोदते हैं.
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