Free Antarvasna Chudai
नमस्कार दोस्तो, मैं आपकी चुदक्कड शिप्रा हाजिर हूँ नई चुदाई कहानी लेकर, इसबार आपकी शिप्रा अपने पति नितिन के बॉस से खूब चुदी. आप जानते हो कि शादी के इतने दिन बाद भी आज तक मेरे पति ने मुझे कभी संतुष्ट नहीं किया. वे कभी भी 2-3 मिनट से ज्यादा नहीं टिक पाते थे और उनका मन कभी कभी ही सेक्स के लिए होता था. Free Antarvasna Chudai
मैं हमेशा बिस्तर पर मचलती रहती और मेरे पति झड़ कर मुझसे अलग होकर पलट कर सो जाते थे. पति के जाने के बाद मोबाइल पर हमारी वासना की कहानियां पढ़ना, नंगी वीडियो देखना और फिर अपने हाथ से अपनी चूत को सहलाते हुए अपने आप को शांत करना… वापस शुरू हो गई था. मेरे पति की 2 दिन की छुट्टी थी और वे घर पर ही थे. उन्होंने अपने बॉस को खाने के लिए आमंत्रित किया.
सुबह से ही मैं नहाने के बाद तैयार हुई और खाने की तैयारी में लग गई. दोपहर तक मैंने खाना बनाकर तैयार कर लिया और दोपहर एक बजे पति के बॉस खाने के लिए हमारे घर आ गए. शुरुआत में मैं उनके लिए पानी लेकर गई और उन्होंने पहली बार मुझे देखा. मैंने उन्हें पानी दिया और वे मुझे बहुत गौर से देखते हुए पानी का गिलास लेकर पीने लगे.
मैंने खाना लगाया और वे दोनों खाना खाने लगे. पति के बॉस का नाम मुनीश था. मेरे पति चुपचाप केवल खाना खा रहे थे. उनके बॉस मुनीश मुझसे बात कर रहे थे. कुछ देर बाद मैंने गौर किया कि मुनीश जी की नजर मेरे सीने पर जा रही है क्योंकि मैं गहरे गले का ब्लाउज पहनी हुई थी और मेरे ब्लाउज के बीच से मेरे दूध की लाइन दिख रही थी.
मैं बार बार अपने आंचल से अपने सीने को ढक रही थी लेकिन बार बार आंचल गिरा जा रहा था. मुनीश जी बहुत ही कामुक निगाहों से देखते हुए मुझसे बात कर रहे थे जो कि उस वक्त न जाने क्यों मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था. कई बार तो ऐसा हुआ कि जब मेरे पति घर पर नहीं होते तो वे घर आ जाते और चाय पीने के बहाने से मुझसे घंटों बात किया करते.
एक दिन उन्होंने मुझसे मेरा मोबाइल नंबर भी मांग लिया और वे अब आए दिन मुझसे फोन पर बात करने लगे. धीरे धीरे मैं भी उनके साथ घुल-मिल गई और उनसे एक दोस्त की तरह बात करने लगी. मुनीश जी की उम्र 56 साल थी शुरुआत में तो मुझे उनसे बात करना अच्छा नहीं लगता था लेकिन धीरे धीरे मैं भी उनके करीब जाने लगी.
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यूं कहें कि मेरा अकेलापन और मेरे बदन की प्यास मुझे उनके करीब ले जा रही थी. फिर एक दिन जब सुबह मेरे पति काम पर गए, उसके थोड़ी देर बाद ही मुनीश जी हमारे घर आ गए. मैंने उनके लिए चाय बनाई और हम दोनों साथ में चाय पीने लगे.
मैंने कहा- नितिन आते होंगे आप उन्हें फोन लगा लीजिये.
मुनीश- वो जल्दी नहीं आयेगा, मैंने उसे शहर से दूर भेजा है.
मैं बोली- तो फिर आप यहाँ क्यों आय है.
मुनीश- मैं तुम्हे पसंद करने लगा हूँ शिप्रा. तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो.
ये सुनकर मैं ऊपर से नीचे तक पसीने पसीने हो गई और बस आंख नीचे किए हुए रही.
मुनीश- क्या हुआ तुम्हे बुरा तो नही लगा.
मै क्या बोलती कि मेरा पति मुझे संतुष्ट नहीं कर पता है. बार बार मुझसे मेरी राय पूछते रहे लेकिन मैं कुछ नहीं बोल पा रही थी. उन्होंने मेरी ख़ामोशी को ही मेरी हां समझ लिया और मुझे एक झटके में अपनी बांहों में ले लिया और मेरा चेहरा ऊपर करते हुए मेरी आंखों में देखने लगे. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैं उनसे छूटने के लिए मचलती रही लेकिन उन्होंने मुझे कस लिया. मैं कुछ समझ पाती इससे पहले ही उन्होंने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और मेरे होंठ चूमने लगे. कुछ देर तक मैं उनका विरोध करती रही. लेकिन जल्द ही मेरे जिस्म ने मेरा साथ छोड़ दिया और मैंने उनके सामने घुटने टेक दिए.
अब मैं उनका साथ देने लगी और मेरी उंगलियां उनके बालों में चलने लगीं. उन्होंने एक हाथ मेरी नंगी कमर में लगाया हुआ था, जो कि साड़ी पहनने की वजह से दिख रही थी. उनके हाथों का स्पर्श पाकर मेरा रोम रोम मानो खड़ा हो गई. वे मेरे होंठों पर झुकते चले गए और मेरे होंठों का रसपान करने लगे.
मैं भी उनका साथ देती रही. काफ़ी देर तक वे मेरे होंठों गालों को चूमते रहे. फिर उन्होंने एक झटके में मुझे गोद में उठा लिया और बेडरूम की तरफ चल दिए. मैं किसी बच्ची की तरह उनकी गोद में थी. बेडरूम में उन्होंने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और मेरे ऊपर लेट गए.
इधर उन्होंने पुनः मेरे गालों व होंठों को चूमना शुरू कर दिया. उनके दोनों हाथ मेरे बदन पर चल रहे थे. मेरे पेट नाभि सीने को हल्के हल्के सहला रहे थे. कुछ देर बाद उन्होंने अपना हाथ मेरे पैरों की तरफ किया और साड़ी को ऊपर उठाते हुए मेरी जांघों को सहलाने लगे. उनके द्वारा ऐसा करने से मेरा अंग अंग मचल गई.
बिस्तर पर आते ही उन्होंने मेरी साड़ी ब्लाउज और पेटीकोट निकाल दिए. मैं बस ब्रा पैंटी में अर्धनग्न लेटी हुई थी. उन्होंने भी अपने कपड़े निकाल दिए और केवल चड्डी पहने हुए मुझसे लिपट गए. उनके नंगे जिस्म का स्पर्श पाकर मेरे बदन में आग लग गई. वे मुझे बेइंतहा चूमने लगे. मेरे गाल होंठ गले और ब्रा के ऊपर से मेरे दूध पर उन्होंने चुंबनों की झड़ी लगी दी.
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उनके हाथ कभी मेरी मोटी जांघों को सहलाते, कभी ब्रा के ऊपर से मेरे तने हुए दूध को मसलते. मेरे दूध इतने टाइट हो गए थे, जैसे वह ब्रा फाड़कर बाहर उछल पड़ेगे. जल्द ही मेरी पैंटी में मुझे गीलापन महसूस हुआ क्योंकि मेरी चूत ने कुछ ज्यादा ही पानी छोड़ना शुरू कर दिया था.
मेरी नजर बार बार उनकी चड्डी की तरफ जा रही थी. पता चल रहा था कि उनकी चड्डी में तम्बू बना हुआ था. कई बार उनका लंड मेरी जांघों से टकराया जिससे मुझे इतना तो अंदाजा हो गई कि इनका लंड काफ़ी मजबूत है. कुछ देर बाद उन्होंने ब्रा का हुक खोल दिया और ब्रा को जैसे ही अलग किया, मेरे दोनों बड़े बड़े दूध उछलकर उनके सामने आ गए.
मेरे बदन में सबसे आकर्षित करने वाले मेरे दूध ही हैं, जो बिल्कुल तने हुए टाइट और नुकीले हैं. मुनीश जी दोनों हाथों से मेरे दोनों चूचों को जकड़ते हुए उन पर एकदम से टूट पड़े और जोर जोर से मसलते हुए निप्पलों को चूसने लगे. उनके निप्पल चूसने से मुझे बेइंतहा मजा आ रहा था और मैं उनके सर को अपने सीने में ही दबाती हुई मदमस्त हुई जा रही थी. ‘आ आआह आअ ह्ह्ह आअह.’
मैं बिल्कुल कंट्रोल से बाहर हो चुकी थी और मुझे ऐसा लग रहा था, जैसे मैं स्वर्ग का मजा ले रही हूँ. मुनीश जी जिस तरह से मेरे दोनों दूध चूस रहे थे, ऐसा कभी मेरे पति ने नहीं चूसा था. मुझसे रहा नहीं जा रहा था और मैं अपने पैरों को बिस्तर पर आगे पीछे कर रही थी.
काफ़ी देर तक मेरे मम्मों को मसलने के बाद मुनीश जी मेरे बदन को चूमते हुए नीचे की तरफ जाने लगे. मेरे पेट पर पहुंचकर मेरी बड़ी सी नाभि में जीभ डालकर उसे चाटने लगे जिससे मुझे बहुत गुदगुदी हो रही थी. फिर वे और नीचे गए और पैंटी के ऊपर हाथ फिराते हुए मेरी उभरी हुई चूत को सहलाने लगे; फिर पैंटी के ऊपर से ही चूत की चुम्मी लेने लगे.
इसके बाद उन्होंने पैंटी को पकड़ा और हल्के हल्के से नीचे करने लगे. उस वक़्त मैंने शर्म से अपनी आंखों को बंद कर लिया और जल्द ही मैं पूरी तरह से नंगी हो गई. पैंटी उतारने के बाद मुनीश जी मेरे पैरों की तरफ से चूमते हुए ऊपर की ओर आने लगे. जांघों को सहलाते और चूमते हुए जल्द ही वे मेरी चूत तक आ गए. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
पहले उन्होंने अंगूठे से चूत को सहलाया, फिर एक प्यारी सी पप्पी चूत पर ली और अपनी दो उंगलियों से चूत को फैलाकर अपनी जीभ चूत में लगी दी. उनकी जीभ का अहसास पाते ही मैं मीठी आह के साथ सिसक उठी. वे इस तरह से जीभ चला रहे थे, जैसे मलाई चाट रहे हों.
पहले तो मेरे दोनों पैर आपस में सटे हुए थे लेकिन बाद में मेरे दोनों पैर अपने आप ही खुलने लगे. मुनीश जी मेरी दोनों जांघों के बीच में आ गए. उनके चूत चाटने से मानो मैं हवा में तैर रही थी. इतना मजा उससे पहले मुझे कभी नहीं मिला था और मैं उस पल को पूरी तरह एन्जॉय कर रही थी.
मुझे पता ही नहीं चला कि कब मेरे चूतड़ अपने आप हवा में उठ गए. मुनीश जी ने अपने दोनों हाथ मेरे चूतड़ों के नीचे लगी दिए और चूतड़ों को दबाते हुए मेरी पूरी चूत को अपने मुँह में भर ली. फिर जैसे ही उन्होंने मेरी चूत को जोर से चूसा, मैं एकदम से तिलमिला गई और मेरे मुँह से जोर से निकल पड़ा ‘उईई … मम्मीई ईई … आह हहह.’
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मेरी मदमस्त सिसकारी सुनकर मुनीश जी को और जोश आ गई और उन्होंने अपनी जीभ चूत के अन्दर तक डाल दी. मैं उस आनन्द के कारण उछल पड़ी और अपनी कमर ऊपर नीचे हिलाने लगी. मैंने कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि कोई मेरे साथ ऐसा भी करेगा… वाकयी में चुदाई का असली मजा आज ही मुझे मिल रहा था!
मुनीश जी जैसे अनुभवी मर्द ही एक औरत को असली सुख दे सकता है. मैं उस आनन्द को ज्यादा देर तक नहीं झेल पाई और झड़ गई. मेरी चूत पूरी तरह से चिपचिपा गई. मुनीश जी ने कपड़े से मेरी चूत को साफ किया और फिर से चाटने लगे. एक बार झड़ने मात्र से ही मेरा पूरा बदन कांपने लगी था. मुनीश जी लगीतार चूत चाट रहे थे जिससे जल्द ही मैं फिर से गर्म हो गई.
इसके बाद जैसे ही मुनीश जी को अहसास हुआ कि मैं गर्म हो चुकी हूँ, तो उन्होंने चूत चाटना छोड़ दिया और अपनी चड्डी भी निकाल दी. जैसे ही उन्होंने चड्डी निकाली, मेरी तिरछी नजर उनके लंड पर जा पड़ी. इनका लंड मेरे पति के लंड से कहीं ज्यादा बड़ा मोटा और फौलादी है. उनका लंड 8 इंच लम्बा था, ठीक वैसा ही जैसा मैं हमेशा ब्लू फिल्मों में देखती थी.
वो मेरे होट चूमते हुए बोले – जान, तुम तो बहुत हॉट हो।
चूमते हुए वो मेरी जांघों के बीच मुंह डालकर मेरी बुर को चाटने लगे। उनने अपनी जीभ को मेरी चूद में पेल दिया। मेरा बदन अब ऐंठने लगा। उफ्फ… मैं तो मस्त हो चली। उनकी जीभ मेरी चूत को कुरेद रही थी जिससे मेरे अंदर एक करंट सा दौड़ जाता था। मैं नागिन के जैसे पलटा खा जाती थी।
उनकी जीभ मेरी चूत के अंदर एक तूफान पैदा कर रही थी। ऐसी गुदगुदी और रोमांच मैंने कभी महसूस नहीं किया था। उनकी जीभ से कुरेदने के कारण मेरी चूत जैसे लसलसी हो गई थी। मेरा भी मन कर रहा था कि मुझे भी उनके लंड की छुअन का अहसास मिले।
मैं उनके लंड की तरफ हाथ बढ़ाने लगी। उनका लंड पकड़ने का मन कर रहा था मेरा! फिर मेरी इच्छा उन्होंने जल्द ही पूरी कर दी। वो उठकर मेरे सामने आ गए और लंड को मेरे मुंह के सामने कर दिया जबकि उनका मुंह मेरी चूत की तरफ ही था। हम 69 की पोजीशन में आ गए।
मैंने प्यासे होंठों से उनके लंड को मुंह में भर लिया और ऐसे चूसने लगी जैसे जल्दी से मुझे इसका रस निकाल कर पीना है। मैंने आज तक कभी भी लंड नहीं चूसा था लेकिन आज बहुत मन कर गया मेरा। जिस शिद्दत से मुनीश जी मेरी चूत को चूस रहे थे, उसी शिद्दत से मैं उनके लंड को चूस रही थी।
मैं जानबूझकर अपनी जीभ को उनके लंड के टोपे पर फिरा देती थी। जैसे ही मेरी जीभ उनके टोपे पर सहलाती, उनकी जीभ मेरी चूत के और अंदर तक जाने की कोशिश करती। इससे मेरा मजा दोगुना हो जाता था। मुनीश जी के लंड का सुपाड़ा बहुत मोटा था और जल्दी ही मेरा मुंह दुखने लगा।
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उन्होंने मेरी चूत को जीभ से कुरेद कुरेदकर मेरी हालत खराब कर दी थी। मैंने लंड को मुंह से निकाल दिया और जीभ से सुपाड़े को चाटने लगी। मेरी चूत में चुदने की आग भड़कती जा रही थी। मुझे अब किसी भी हाल में चूत में लंड चाहिए था लेकिन मैं खुद से कहना नहीं चाह रही थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
कुछ देर बाद मुनीश जी ने लंड को चूत में लगाया और मुझे जोर से अपनी बांहों में भर लिया. मैं भी उनसे चिपक गई. मेरे दोनों दूध उनके बाल भरे सीने में दबे जा रहे थेउन्होंने मेरी चिकनी जांघों को अपनी जांघों से दबा लिया था. फिर उन्होंने लंड पर जोर दिया और उनका सुपारा छेद को फैलाकर गप्प से अन्दर चला गई. मेरे मुँह से आवाज निकल पड़ी ‘उउउई अम्मा… सीईई आराम से.’
मुनीश जी इतने अनुभवी थे कि वे तुरंत समझ गए. वे बोले- ओह्ह्ह मेरी जान… तुम तो बिल्कुल अनछुई जैसी हो. तुम्हारा पति मेहनत नहीं करता क्या! उनकी बात सुनकर मैंने शर्म से चेहरा घुमा लिया. अब मुनीश जी ने लंड को आहिस्ता आहिस्ता अन्दर डालना शुरू किया और मैंने उन्हें कसकर जकड़ लिया.
जैसे जैसे लंड अन्दर जा रहा था, मेरा मुँह अपने आप खुलता जा रहा था.. मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कोई गर्म राड चूत में जा रही हो. कुछ ही पल में उन्होंने पूरा लंड मेरी चूत में डाल दिया. मेरी दोनों जांघें बुरी तरह काँप रही थीं और मैं मुनीश जी से बुरी तरह चिपक गई थी.
दर्द को सहते हुए मेरे मुँह से आवाज निकलने लगी थी- ओह्ह बस्स्स… मेरी चूत की कसावट को देख मुनीश जी जोश से भर गए थे. उन्होंने मेरे होंठों को चूमते हुए मेरी जीभ को अपने मुँह में भर लिया था. वे उसे किसी कुल्फी के जैसे चूसने लगे. जल्द ही उन्होंने लंड आधा बाहर किया और फिर से अन्दर पेल दिया.
ऐसा करने से मेरी तो आह निकलने को हुई मगर मेरे मुँह पर उनका मुँह लगी हुआ था. कम से कम 8-10 बार ऐसे ही धकापेल करते हुए उन्होंने चूत में लंड के लिए जगह बना ली. अब उन्होंने आहिस्ता आहिस्ता मुझे चोदना शुरू किया और मेरे गाल होंठ को चूमते रहे. मैं ‘आअ ह्ह्ह आअह’ की सिसकारियां लेती हुई बस उनके सीने से चिपकी जा रही थी.
अभी मुझे मजा तो नहीं आ रहा था क्योंकि मुझे डर लग रहा था कि अगर मुनीश जी ने जोरदार धक्का लगी दिया तो मेरी क्या हालत होगी. लेकिन मुनीश जी वास्तव में काफ़ी एक्सपीरियंस वाले मर्द थे, वे हल्के हल्के अपनी रफ़्तार बढ़ा रहे थे ताकि मुझे तकलीफ न हो. उनका लंड इतना मोटा था कि मेरी चूत में हवा तक जाने की जगह नहीं थी और लंड चूत की चमड़ी से बिल्कुल रगड़ कर जा रहा था.
करीब 5 मिनट बाद मेरी चूत ने पानी छोड़ना शुरू किया और तब मुझे भी मजा आने लगी. मुनीश जी भी समझ गए थे कि अब मुझे मजा आ रहा है. यह समझते ही उन्होंने अपनी रफ़्तार तेज कर दी. अब फट फट की आवाज आने लगी. जल्द ही वे अपनी पूरी रफ़्तार में थे और मैं बुरी तरह से सिसकारियां ले रही थी ‘आअ ह्ह्ह ऊऊ ऊआअ ह्ह्ह मम्मीई आआ आह मर गई आह.’
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मुनीश जी- मजा आ रहा है न?
मैं- हां बहुत… आअह्ह्ह.
मुनीश जी- कैसा लग रहा है?
मैं- बहुत अच्छा… आअह्ह्ह.
मैं मस्ती में डूब चुकी थी और मेरे मुँह से पता नहीं कैसी कैसी आवाज निकल रही थी. पूरा बिस्तर बुरी तरह से हिल रहा था और मेरी सिसकारियां पूरे कमरे में गूंज रही थीं. मेरे दूध उनके सीने के नीचे इतनी बुरी तरह दबे हुए थे कि मुझे दूध में दर्द हो रहा था लेकिन उस दर्द से कहीं ज्यादा मजा मुझे उनके चोदने से मिल रहा था.
जल्द ही उन्होंने मेरे दोनों पैरों में अपने हाथ फंसा लिए, जिससे मेरे पैर हवा में उठ गए और चूत भी कुछ ऊपर को उठ गई, जिससे उन्हें और अच्छे से शॉट मारते बनने लगी. अब लंड चूत की गहराई तक जा रहा था और उनके धक्कों की फट फट की आवाज जोर जोर से गूंजने लगी थी.
कुछ 5 मिनट की चुदाई के बाद मेरा बदन अकड़ने लगी और मैं उनसे चिपक कर झड़ गई. आज मुझे जिंदगी में पहली बार वह मजा मिला था, जिसके लिए मैं सालों से तरस रही थी. आज पहली बार चूत की गहराई तक किसी मर्द का लंड पहुंचा था. चूत ज्यादा गीली होने से फच फच फच की आवाज आने लगी.
मुनीश जी ने भी अपनी रफ़्तार और तेज कर दी और मुझे जोर से जकड़ लिया. मैं कुछ समझ पाती, इससे पहले ही उन्होंने अपने लंड का सारा पानी मेरी चूत में भर दिया और मुझे बुरी तरह चूमने लगे. हम दोनों जोर जोर से हांफ रहे थे और पसीने से भीगे हुए थे. कुछ देर मेरे ऊपर लेटे रहने के बाद वे मुझसे अलग हुए और मेरे बगल में लेट गए.
वो बोले- शिप्रा अब तेरी गांड मारने की तमन्ना है.
मैंने मुस्कुरा कर राजमंदि दी और और घोड़ी बन गई. मुनीश जी ने पीछे से लंड लगीकर घुसाने की कोशिश की लेकिन मेरी गांड बहुत टाइट थी, लंड अन्दर नहीं जा रहा था. मैं बोली –मुनीश जी रहने दीजिये, गांड टाइट है और आपका लंड काफी मोटा है, नही घुस्सेगा.
मुनीश जी मेरे होटों को चूमकर बोले- “पहली बार में तेरी चूद भी तो टाइट थी न, इकबार चुदने के बाद अब खुली कि नहीं, तेरी गंद तेरे पति ने मारी होती तो तेरी गांड भी खुल जाती, पर अब तेरी गांड खोले की मेहनत मुझे ही करना पड़ेगा, तू तेल लेकर आजा.”
मैंने ड्रेसिंग टेबल से मेरे पति का बॉडी आयल लाकर उन्हें दिया. उन्होंने तेल अपने लंड पर लगाया, मेरी गांड में भी थोड़ा तेल लगाया, फिर पुनः लंड घुसाने की कोशिश की. जैसे ही लंड का टोपा अन्दर गई, मैं जोर से चीखी – आआह्ह्ह. मर गई ईईई आह्ह्ह्ह छोड़ दो मुनीश जी दर्द हो रहा है. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मुनीश जी ने मुझे फिर दबोचा और. और धीरे-धीरे पूरा लंड गांड के अन्दर डालने लगे. मैं जोर-जोर से चिल्लाने और छटपटाने लगी. इस बार मुनीश जी ने मेरे दोनों कंधों को ताकत से पकड़ रखा था. मैं आगे नहीं हो पा रही थी. वे लंड पेल कर थोड़ी देर के लिए रुक गए.
कुछ देर में मुझे भी अच्छा लगने लगी तो मैं आगे-पीछे होकर लंड को धीरे-धीरे गांड में अन्दर लेने लगी. मुनीश जी ने अपने लंड की स्पीड तेज़ कर दी. मैं भी मजे से चुदवाने लगी और जोर-जोर से चिल्लाने लगी. ‘आह मुनीश जी मेरी गांड फाड़ दो!’
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मुनीश जी लगीतार जोर-जोर से चुदाई करते रहे. करीब 20 मिनट की जबरदस्त चुदाई के बाद मुनीश जी थक गए, पसीने से तर-बतर हो गए और मेरे ऊपर ही लेट गए. मैंने उनके लंड को फिर से अच्छे से साफ किया और उसे चूस कर दोबारा से खड़ा करने की कोशिश करने लगी. जैसे ही दूसरी बार लंड पूरा खड़ा हुआ, मुनीश जी ने मुझे लिटा दिया, वे मेरे ऊपर चढ़ आए और बेदर्दी से मेरी गांड मारने लगे. वे हर पोजीशन में मेरी चुदाई कर रहे थे. कभी पीछे से, कभी सामने से, कभी पैर उठाकर.
बड़ा मजा आ रहा था. मुनीश जी ने मेरी गांड का बाजा बजाते हुए मेरी चूद को भी सहलाना चालू कर दिया था तो मुझे बेहद सनसनी होने लगी थी. कुछ देर बाद मैं झड़ गई और मुनीश जी ने भी अपने लौड़े का माल मेरी गांड में भर दिया. वे 3 दिन मेरे साथ थे और उन 3 दिनों में मेरी करीब 15 बार चुदाई हुई. इसके बाद भी वे मुझे चोदने आते रहे. जब भी पति ऑफिस में होते, वे मुझे चोदने आ जाते. मैं कई बार प्रेग्नेंट हुई पर उन्होंने हर बार मेरा अबोर्शन करवा दिया.
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