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गांड मरवाने दीदी गोवा आई

अप्रैल 5, 2026 by hamari Leave a Comment

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नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम विशाल है। मैं गोवा का रहने वाला हूँ। मेरी फैमिली में 5 लोग हैं – पापा, मम्मी, बड़ा भाई, और सबसे छोटा मैं। मेरा बड़ा भाई विदेश में रहता है, इसलिए गोवा में मैं ही कमाता हूँ। हम मिडिल क्लास फैमिली से हैं। मेरी बड़ी दीदी का नाम जूली है। उनकी शादी को अब 5 साल हो गए हैं। दीदी का रंग साँवला है और उनका फिगर 32-28-34 है। Kamuk Bhai Bahan Incest Chudai

दोस्तों, बात उन दिनों की है जब मैंने पढ़ाई खत्म की थी। उस समय दीदी की शादी नहीं हुई थी। हमारे घर में सिर्फ दो कमरे थे और नहाने के लिए पर्दा लगा हुआ था। दीदी स्कूल में पढ़ती थीं। उनकी हाइट 5 फुट 3 इंच थी। वे हमेशा सलवार और लैगिंग पहनती थीं। उस समय मैं भी घर पर रहता था।

गर्मी का समय था। एक दिन दीदी स्कूल से पढ़कर घर आईं। मैं क्रिकेट खेलकर घर आया। देखा कि दरवाजा खुला है। मैं अचानक अंदर गया और देखा कि दीदी केवल ब्रा और पैंटी में हैं। दीदी हमें देखकर डर गईं और बोलीं, “बाहर जाओ, हम कपड़े बदल रहे हैं।”

उस दिन से मैं रात का इंतजार करने लगा। गर्मी का समय था, इसलिए रात में जूली दीदी मेरे साथ ही सोती थीं। हम दोनों ने साथ में खाना खाया। करीब रात 10 बजे दीदी बिस्तर लेकर मेरे पास आईं। मैंने उन्हें देखा – वे बस नाइटी में थीं। दोपहर में दीदी को ब्रा और पैंटी में देखकर मैं पागल हो गया था। दीदी ने साँवले जिस्म पर काला ब्रा और काली पैंटी पहनी थी। मेरे दिमाग में दीदी का नंगा बदन याद आ रहा था।

मैं दीदी को पाने का प्लान बनाने लगा। रात करीब 11 बजे हम सो गए। जूली दीदी को सुबह जल्दी उठना होता था क्योंकि वे स्कूल पढ़ने जाती थीं। सुबह करीब 8 बजे जब मैं उठा तो देखा कि दीदी नहीं हैं। मैं जल्दी से नीचे गया। दीदी तैयार होकर नीचे नाश्ता कर रही थीं।

वे स्कूल जाते समय नहाकर नहीं जाती थीं, बल्कि स्कूल से वापस आकर नहाती थीं। दीदी ने नीले कलर की सलवार कमीज और सफेद कलर की लैगिंग पहनी थी। दीदी की चूचियाँ करीब 30 साइज की थीं, कमर 28 की और हिप्स 34 की। कमर पतली होने की वजह से दीदी की गाँड निकली हुई दिखती थी।

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मैं इंतजार करने लगा। दीदी स्कूल से दोपहर 2:30 बजे आती थीं। उस दिन मैं पहले से ऊपर जाकर बैठ गया था। दीदी स्कूल से आईं और कपड़े बदलकर नहाने चली गईं। मैं ऊपर से इंतजार कर रहा था कि कब दीदी नहाने आएँगी। अब मुझे रहा नहीं जा रहा था, इसलिए मैं नीचे गया। देखा कि दीदी ने लाल कलर की ब्रा और पैंटी निकालकर रखी थीं।

कुछ समय बाद दीदी नहाने आईं। वे धीरे-धीरे अपना सारा कपड़ा निकालने लगीं। सबसे पहले उन्होंने ब्रा निकाली। दीदी मेरे सामने पूरी नंगी खड़ी थीं। उनकी गाँड बाहर निकली हुई थी और चूचियाँ तनकर खड़ी थीं। उन्हें देखकर मैं पागल हो गया। तब से मैं दीदी को गाँड में चोदने का प्लान बनाने लगा।

उसके बाद मैं रोज-रोज दीदी को देखता था और उनके साथ एन्जॉय करता था। एक दिन दीदी की शादी हो गई। उनकी शादी बंबई में हुई। जीजा जी बिजनेस करते हैं। दीदी की शादी के कुछ साल बाद दीदी का फोन आया। उन्होंने बोला, “हम घूमने जा रहे हैं।” जूली दीदी ने बताया कि तेरे जीजा जी कहीं काम से बाहर जा रहे हैं। कुछ दिन बाद मैं तेरे पास भी आऊँगी। फिर दीदी ने हमें अपना फोटो शेयर किया।

मैंने दीदी से पूछा, “कहाँ जा रही हो?”

 वो बोलीं, “हम खाना खाने बाहर जा रहे हैं।”

मैं बोला, “अकेले-अकेले?”

दीदी बोलीं, “तेरे पास जब आऊँगी तो तुम्हारे साथ भी चलूँगी।”

फिर मैं दीदी से बोला, “दीदी आप कब आ रही हो?”

दीदी ने बोला, “10 दिन में आऊँगी।”

मैं खुशी से पागल हो गया। मुझे लगा कि इस बार दीदी की गाँड जरूर पेलूँगा।

फिर मैंने दीदी से पूछा, “आप कितने दिन के लिए आ रही हो?”

दीदी बोलीं, “1 महीने के लिए।”

मैं और भी खुश हो गया। मैं बोला, “दीदी आप सामान रख ली हो?”

दीदी बोलीं, “हाँ, बस वहाँ पर कुछ सामान ले लेंगे।”

मैं बोला, “ठीक है।”

दीदी का फोटो देखकर मैं पागल हो गया। मैं बस दीदी का इंतजार करता रहा। कुछ दिन बाद दीदी का फोन आया। दीदी बोलीं, “आज निकल रहे हैं, तुम स्टेशन पर आ जाना।” दीदी करीब रात 11 बजे आएंगी। मैं दीदी के ट्रेन का इंतजार करने लगा। मैं आधा घंटा पहले स्टेशन पर चला गया। करीब आधे घंटे बाद दीदी की ट्रेन आई। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

दीदी का फोटो देखकर मैं पहले ही पागल हो चुका था। कुछ देर बाद ट्रेन से दीदी नीचे आईं। उन्हें देखकर मैं पूरा पागल हो गया। दीदी गजब की माल लग रही थीं। उनकी गाँड बाहर निकली हुई थी। दीदी सेक्सी ड्रेस पहनकर आई थीं। मैंने दीदी से बोला, “साड़ी नहीं पहनी?”

दीदी ने बोला, “वहाँ पर तो रोज ही पहनते हैं, यहाँ पर कौन देख रहा है?”

मैं मुस्कुराकर बोला, “दीदी आप पूरी बम लग रही हो।”

दीदी मुस्कुराकर बोलीं, “पागल।”

दीदी के पास दो बड़े बैग थे। मैंने उनका सामान उठाया।

दीदी से बोला, “इतना?”

दीदी बोलीं, “सब मेरे कपड़े हैं। मैं यहाँ घूमने आई हूँ, तुम मुझे घुमा देना।”

मैं बोला, “ठीक है।”

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फिर हम गाड़ी में बैठे और घर चले गए। मेरे पास एक ही रूम था और एक ही बाथरूम। रास्ते में मैंने दीदी को बता दिया।

दीदी बोलीं, “ठीक है।”

मैंने दीदी से बोला, “दीदी गोवा में कोई किसी के साथ नहीं रह सकता। जूली दीदी, मैं आपको एक बात बताना भूल गया – यहाँ अगर कोई तुमसे पूछे कि आप कौन हैं तो बता देना कि मैं इनकी पत्नी हूँ।”

दीदी हँसकर बोलीं, “पागल।”

फिर हम रूम पहुँच गए। दीदी का ड्रेस पागल बना रहा था। जब हम घर पहुँचे तब मैं दीदी से बोला, “कपड़े बदल लो।” फिर दीदी कपड़े बदलने चली गईं। कुछ समय बाद दीदी नहाने के बाद आईं और फिर हम साथ में खाना खाए। दीदी बोलीं, “हम कल कहाँ जाएंगे घूमने?”

मैंने दीदी से बोला, “आप जहाँ बोलो।”

दीदी बोलीं, “ठीक है।”

फिर हम खाना खाते रहे। कुछ समय बाद हम सोने लगे। दीदी बोलीं, “रुको, हम कपड़े निकालकर आते हैं।” फिर दीदी कुछ समय बाद आईं। उन्हें देखकर मैं पागल हो गया। जूली दीदी केवल ब्रा और पैंटी पहने हुई थीं। मैंने दीदी से बोला, “आप कपड़े नहीं पहनकर सोती हो क्या?”

दीदी बोलीं, “बहुत गर्मी है।”

मैं बोला, “हाँ दीदी, कोई बात नहीं। आपको जो ठीक लगे।”

फिर दीदी मेरे पास आकर सो गईं। दीदी लाल कलर का ब्रा और पैंटी पहने हुई थीं। दीदी के जिस्म से अच्छी महक आ रही थी। दीदी मेरी तरफ गाँड करके सो गईं। दीदी का साँवला रंग पागल बना रहा था। कुछ देर हम दोनों बातें किए फिर सो गए क्योंकि सुबह जल्दी उठना था।

सुबह जब मैं उठा तो दीदी बिस्तर पर नहीं थीं। वो बाथरूम में हग रही थीं। मैं उठा और दीदी के पास चला गया। दीदी बोलीं, “पागल, मैं बाथरूम में हूँ, तुम बाहर जाओ।” मैं बाहर आ गया। दीदी गाँड खोलकर हग रही थीं। मैं बाहर आया और देखकर पागल हो गया।

फिर मैंने प्लान बनाया कि जूली दीदी को कैसे पेलूँ। कुछ समय बाद मेरा दोस्त आने वाला था। ये बात दीदी को नहीं पता थी। दीदी बाथरूम से बाहर आईं। दीदी को देखकर मैं पागल हो चुका था। कुछ समय बाद वो नहाने चली गईं और मैं उन्हें हगते हुए देखकर पागल हो चुका था कि अब इनको पेलना है। कुछ समय बाद दीदी नहाकर बाहर आईं। वो केवल ब्रा और पैंटी में थीं। दीदी लाल कलर ब्रा और पैंटी में थीं।

दीदी ने बोला, “जल्दी से तुम तैयार हो जाओ, हम बाहर खाना खाएंगे।”

दीदी बोलीं, “हमको कुछ सामान भी लेना है।”

मैं दीदी से बोला, “दीदी कुछ देर बाद चलते हैं।”

दीदी बोलीं, “क्यों?”

फिर मैं बोला, “दीदी मेरा दोस्त आ रहा है आपसे मिलने। मैंने उसको बताया कि मेरी बीबी आई है तो वो बोला आज हम तुम्हारे घर पर आएंगे।”

दीदी गुस्से में बोलीं, “ये गलत है, मैं तुम्हारी सगी बहन हूँ।”

फिर मैं बोला, “दीदी और रास्ता नहीं था। यहाँ पर तुमको कौन जानता है कि तुम मेरी क्या लगती हो। बस 1 महीने की बात है और किसी को कुछ पता नहीं चलेगा।”

दीदी बोलीं, “ये गलत है।”

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फिर मैंने दीदी को मनाया और दीदी मान गईं। कुछ समय बाद मेरा दोस्त आया और कुछ सामान लेकर आया था जिसमें माला और सिंदूर था।

उसने मुझसे पूछा, “भाभी कहाँ है?”

मैंने बताया, “वो कमरे में है।”

फिर मैंने दीदी को आवाज लगाई और बोला, “जूली, तुमसे मेरे दोस्त मिलना चाहता है।”

वो तुरंत बाहर आईं और बोलीं, “हाँ बोलिए, मैं तैयार हो रही थी।”

फिर मेरा दोस्त बोला, “भाई तू यहाँ की रीति-रिवाज से शादी कर ले।”

मैं बोला, “इसकी जरूरत नहीं है, ये एक महीने बाद चली जाएगी।”

फिर भी वो नहीं माना और अपने बैग से सामान निकाला। उसमें माला और सिंदूर था। उसने एक-दूसरे को माला पहनने को बोला। हम दोनों ने एक-दूसरे को माला पहनाई और दीदी को सिंदूर लगाने को बोला। फिर मैंने दीदी को सिंदूर लगाया। कुछ समय बाद मेरा दोस्त चला गया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

फिर दीदी जल्दी से तैयार होकर आईं। दीदी जब कपड़े बदलकर आईं तो पूरी माल लग रही थीं। दीदी की गाँड बाहर निकली हुई थी। और दीदी के साथ घूमने चला गया। दीदी को कुछ सामान खरीदना था तो दीदी बोलीं, “चलो शॉपिंग मॉल।”

मैंने दीदी से बोला, “क्या खरीदना है?”

दीदी मुस्कुराकर बोलीं, “मेरे पास ब्रा और चड्ढी नहीं है।”

मैं दीदी से बोला, “ठीक है दीदी, चलो खरीद लो।”

दीदी ने 2-4 कलर की ब्रा-पैंटी खरीदीं और दीदी बोलीं, “चलो हमको अब घुमा दो।”

तब मैं दीदी से बोला, “दीदी समुद्र के किनारे चलते हैं।”

दीदी बोलीं, “ठीक है।”

तब मैं दीदी से बोला, “दीदी वहाँ पर लोग ब्रा और चड्ढी में जाते हैं।”

दीदी बोलीं, “कोई बात नहीं।”

फिर हम सब वहाँ गए और दीदी ब्रा को कच्छी जैसी पहनी थी। उन्हें देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया। दीदी पूरी आइटम माल लग रही थीं। दीदी की गाँड बाहर निकली हुई थी।

फिर दीदी मेरे पास आईं और बोलीं, “मेरा फोटो क्लिक करो।”

मैं तुरंत बोला, “ठीक है दीदी, चलो।”

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फिर हमने दीदी का फोटो निकाला। दीदी नीले रंग का ब्रा और चढ़ी पहने हुए थीं और कान में बाली थीं। दीदी का साँवला रंग हमें पागल बना रहा था। दीदी की गाँड देखकर उन्हें चोदने का मौका ढूंढने लगा। दीदी की काली चूचियाँ और गाँड देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया। दीदी मेरे साथ पूरे दिन घूमीं। फिर हम लोग रात में घर आए और दीदी बहुत थक चुकी थीं।

तो मैंने दीदी से बोला, “दीदी आप बहुत ज्यादा थक गई हैं, आप आराम कर लो।”

दीदी तुरंत बाथरूम गईं और बोलीं, “अभी हम आ रहे हैं, कपड़े बदलकर।”

मैंने कहा, “ठीक है।”

दीदी बाथरूम में जाकर अपना पूरा कपड़ा निकालकर हग रही थीं। फिर मुझे रहा नहीं गया। मैं भी तुरंत अंदर चला गया। दीदी हग कर खड़ी थीं। दीदी को देखकर मेरा मन किया कि दीदी को वहीं चोद दूँ। फिर मैंने अपने आप को रोका। फिर दीदी आईं और बोलीं, “दरवाजे में कुंडी नहीं लगवा पा रहे हो?”

मैं दीदी से बोला, “दीदी क्या जरूरत है, हम ही तो बस अकेले रहते हैं।”

दीदी बोलीं, “अच्छा।”

फिर दीदी मेरे पास आईं ब्रा और चड्ढी पहनकर। मैं उन्हें देखता रहा गया। फिर मैं दीदी से बोला, “दीदी आप तो बिना कपड़ों की क्यों हो?”

दीदी बोलीं, “बहुत गर्मी है यहाँ पर।”

दीदी मेरे बगल में गाँड झुककर बिस्तर सही कर रही थीं और दीदी की गाँड बाहर निकल गई थी। दीदी को देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया। दोस्तों, मैं अपने दीदी का गाँड वाला फोटो शेयर कर रहा हूँ। आप भी मेरे दीदी को पूरी नंगी तरह से देख लो। आप भी मेरे जूली दीदी के नाम मुठ मार लो या फिर मेरी पूरी कहानी का मजा लेने के लिए कुछ समय और कहानी सुनो।

फिर दीदी बिस्तर सही करके मेरे बगल में आकर सो गईं और मेरा लंड खड़ा हो गया। दीदी की साँवली गाँड का छेद साफ नजर आ रहा था। गाँड बाहर निकला हुआ था इसलिए गाँड का छेद दिखाई दे रहा था। जूली दीदी के काले गाँड में काला बुर और काला झाट था। हमें रहा नहीं गया। मैंने दीदी के ऊपर हाथ रख दिया।

दीदी बोलीं, “दूर हटो।”

मैं दीदी से बोला, “दीदी मेरी आदत है पकड़कर सोना और मेरा तकिया आप ही हो।”

दीदी बोलीं, “ठीक है, आराम से सो जाओ। अब कौन सा शर्म? तुम तो मेरे भाई हो। तुम तो मेरा सब कुछ देख चुके हो और आज तो तुमने हमसे शादी भी कर ली। क्या शर्म?” फिर जूली दीदी मुस्कुरा दीं।

फिर मैंने भी अपना हाथ दीदी की गाँड पर रख दिया।

दीदी बोलीं, “ठीक है, लाइट ऑन कर दें। इस गर्मी में कुछ काटेगा तो पता तो चलेगा।”

मैं बोला, “ठीक है दीदी।”

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मैंने लाइट ऑन की। दीदी मस्त माल लग रही थीं, जो मैं 5 साल पहले चुपके से देखा था, आज एकदम पास से देख रहा था। फिर मैंने दीदी के गाँड पर हाथ रख दिया और सहलाता गया। जूली दीदी पता नहीं कब सो गईं, पता ही नहीं चला। फिर मैंने दीदी के बुर में हाथ रख दिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

उसके बाद मेरा हाथ फिर से दीदी के गाँड पर गया। फिर मैंने दीदी का गाँड दोनों हाथों से फैलाया और दीदी के गाँड के छेद में उंगली डाल दी। दीदी तुरंत पाद मार दीं। दीदी जग गईं और बोलीं, “क्या कर रहे हो तुम? मेरे भाई हो, यह गलत है।” दीदी तुरंत उठकर बैठ गईं और मुस्कुराईं।

दीदी से मैंने पूछा, “अगर गलत है तो आप हँसीं क्यों?”

फिर दीदी बोलीं, “अरे पागल, वो मेरी पाद निकल गई है इसलिए।”

फिर मैं दीदी से बोला, “दीदी अभी तो आप यहाँ पर हैं तो यहाँ का परंपरा निभाओ।”

दीदी बोलीं, “ठीक है, बताओ क्या करना है।”

दीदी एक बार मेरे तैयार होकर नंगी हो जाओ। मैं पत्नी को नहीं, अपनी दीदी को सिंदूर लगाने के बाद देखना चाहता हूँ।

दीदी बोलीं, “ठीक है, अब तो मैं तुम्हारी सगी बहन नहीं, पत्नी ही हूँ।”

दीदी गईं तैयार होने। वो भी पूरी नंगी होकर आईं। दीदी एकदम मस्त माल लग रही थीं। दीदी एक बात बोलूँ?

दीदी बोलीं, “बोलो।”

दीदी मैं आपको पत्नी समझकर नहीं देख रहा हूँ।

दीदी बोलीं, “फिर क्या समझ रहे हो?”

मैं बोला, “मैं तो सगी बहन समझकर देख रहा हूँ।”

दीदी फिर मुस्कुराईं।

फिर मैं दीदी से बोला, “एक और लुक।”

दीदी हँसीं और बोलीं, “ठीक है आई फिर से।”

दीदी क्या लग रही हो? पूरा बारूद। दीदी एक और।

दीदी बोलीं, “ठीक है लेकिन हम दोनों का मैं खुश।”

मैं बोला, “ठीक है।” एकदम मस्त लग रहा है।

दीदी बोलीं, “हाँ मस्त लग रहा है, चल अब सोते हैं।”

मैं बोला, “ठीक है।”

फिर मैं दीदी से बोला, “दीदी हम लोग सुहागरात कब मनाएंगे?”

दीदी बोलीं, “आज कुछ नहीं, अब जो भी होगा कल।”

फिर हम लोग सो गए। अगले दिन दीदी तैयार होकर मेरे सामने पूरी नंगी खड़ी थीं।

दीदी से बोला, “अभी भी आप कुछ नहीं पहने?”

दीदी बोलीं, “तुम ही पहनो, यहाँ बहुत गर्मी है।”

दीदी बोलीं, “वो बीच वाला फोटो भेजना हमको।”

मैं बोला, “ठीक है।” दीदी फोटो मस्त आई है।

दीदी बोलीं, “चलो अभी सुहागरात मनाया जाए। आज तो कहीं जाना नहीं है।”

दीदी बोलीं, “ठीक है।”

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दीदी फिर गईं तैयार होने। मैं इंतजार कर रहा था। जूली दीदी तैयार होकर आईं, पूरी नंगी खड़ी हुईं। फिर दीदी मेरे पास आईं और बोलीं, “आओ कर लो मेरे साथ सुहागरात।” रात में तुरंत दीदी को अपनी ओर खींचा। तुरंत अपना लंड दीदी के काले बुर में डाल दिया। दीदी कूद पड़ीं और बोलीं, “तेरा तो लंड बहुत मोटा है।”

दीदी से पूछा, “क्या हुआ दीदी?”

दीदी बोलीं, “कुछ नहीं, कुछ ज्यादा बड़ा है भाई। तेरा लंड भाई।”

दीदी कह रही थीं, “उफ्फ आह, दर्द हो रहा है भाई, निकाल ले। अब नहीं रहा जा रहा।”

मैं बोला, “दीदी आज तो हमारी सुहागरात है। पहली बार काले बाल और काली बुर और उस पर झाट। और हम पूरी रात आपको पेलते रहेंगे।”

दीदी बोलीं, “नहीं, कल और भी काम है। अभी तो पूरी रात बाकी है मेरे पति जी। आज से आपकी सगी दीदी आपकी पत्नी है।”

और मैं दीदी से बोला, “दीदी क्या मैं आपको जूली कहकर बुला सकता हूँ?”

दीदी बोलीं, “आज के बाद मैं जब भी तुम्हारे पास आई तो मेरे पर तुम्हारा हक रहेगा।”

मैं बोला, “सच में दीदी?”

दीदी बोलीं, “मेरे पति जी।”

कुछ समय बाद दीदी बोलीं, “अच्छा चलो और बताओ।”

हम दीदी से पूछे, “दीदी अब तुम हमको क्या नाम से बुलाओगी?”

दीदी बोलीं, “अब तो नाम भी नहीं ले सकती, अब तो जी और सुनो जी बोलना पड़ेगा।”

तब मैं दीदी से बोला, “ठीक है।” और फिर मैं दीदी से बोला, “दीदी मैं आपका गाँड चाटकर पेलना चाहता हूँ।”

दीदी बोलीं, “आज नहीं, कल।”

उस दिन पूरी रात बुर पेला।

फिर दीदी बोलीं, “ठीक है, अब सोते हैं।”

मैं बोला, “ठीक है।”

दीदी को पूरी रात पेला। फिर हम सो गए।

फिर दीदी सुबह उठीं तो पूरी रात नंगी सोई थीं। दीदी उठीं और बोलीं, “सुनिए जी।”

मैं बोला, “क्या जूली डार्लिंग?”

दीदी बोलीं, “मेरे बुर में पूरा बीज भरा है और बुर दर्द कर रहा है।”

मैं बोला, “कोई बात नहीं, आप नहा लो।”

दीदी बोलीं, “आज हमारी सुहागरात है।”

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दोस्तों, आज मैं आपको बताता हूँ कि किस तरह से दीदी की गाँड पेली। दीदी सोकर उठीं और बाथरूम में जा रही थीं तो वो दरवाजा बंद कर रही थीं।

तो मैं दीदी से बोला, “जूली दरवाजा मत बंद करो।”

दीदी बोलीं, “क्यों?”

फिर मैं बोला, “दीदी मैं आपको हगते हुए देखना चाहता हूँ।”

दीदी बोलीं, “ठीक है।”

दीदी फिर हँसीं और चली गईं। दरवाजा खोलकर दीदी हगने बैठ गईं। दीदी हग रही थीं। तभी कुछ देर बाद दीदी पाद मार दीं। आवाज हमें सुनाई दी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

तो मैं दीदी से बोला, “क्या हुआ जूली?”

दीदी बोलीं, “कुछ टट्टी कर रही हूँ, पाद निकल गया।”

मैं बोला, “ठीक है, जल्दी आओ। आज गाँड मारना है।”

दीदी बोलीं, “ठीक है, आ रही हूँ।”

फिर दीदी मेरे पास आईं और बोलीं, “क्या बोल रहे थे आप?”

मैं बोला, “डार्लिंग इतना टाइम क्यों लग रहा था?”

दीदी बोलीं, “पता नहीं क्यों, टट्टी नहीं हो रही। कोई बात नहीं, बाद में दीदी आप हग लेना।”

दीदी बोलीं, “ठीक है, और बताओ क्या करना है।”

मैं बोला, “आओ जूली डार्लिंग।”

फिर दीदी मेरे पास आईं और बोलीं, “बताओ क्या करना है।”

मैं बोला, “आपको मेरा लंड चटाना है।”

वो बोलीं, “ठीक है।”

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फिर मैंने दीदी के मुंह में लंड खड़ा करके दे दिया। दीदी तुरंत उसको चूसने लगीं। फिर मैंने दीदी को उल्टा किया और अपने लंड का टोपा दीदी के गाँड में डाल लिया। दीदी तुरंत कूद पड़ीं और रोने लगीं। बोलीं, “अब नहीं।” मैंने दीदी को तुरंत मारा और बोला, “रंडी साली, आज तो तेरी गाँड चाटकर पेलूँगा।” फिर दीदी को घोड़ी बनाकर दीदी के गाँड में लंड डाल दिया। दीदी पाद मार दीं और हग दीं। दीदी रो रही थीं। मैंने उनके गाँड में लंड पूरा डाल दिया और वो पाद मार रही थीं और हग भी रही थीं और बोल रही थीं, “विशाल राजा पेलो अपनी सगी दीदी को और माँ बना दो।”

इस तरह हम पूरी रात दीदी को पेलते रहे। दीदी को रात में 5 बार गाँड मारी थी। दीदी सुबह उठीं तो चल नहीं पा रही थीं। इस तरह हम रोज सेक्स करते रहे। जब तक दीदी मेरे पास रहीं, तब तक बिना कपड़ों की रहीं। कुछ दिन बाद वो अपने घर चली गईं और फोन पर बोलीं, “क्या कर रहे हो आप?” मैं बोला, “तुमको याद कर रहा हूँ दीदी।” दीदी बोलीं, “अच्छा सुनो, मैं माँ बन गई और ये बच्चा तुम्हारा है और उनको पता भी नहीं है।” फिर दीदी मेरे साथ रहने चली आईं और हम गोवा में पति-पत्नी की तरह रहते हैं। दोस्तों, कैसी लगी मेरी कहानी? आज हम और दीदी एक साथ रहते हैं।

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