Desi Rich Girl Sex
ये कहानी अग्रवाल परिवार की सब से बड़ी बहु दीप्ती अग्रवाल के इर्द गिर्द घूमती और दीप्ती के साथ घटी घटनाओं का संकलन है। संकलन की कुछ कहानियां लम्बी होने के कारण अलग अलग भागों में बांटी गयी है। इन कहानियों को अलग अलग भी पढ़ा जा सकता है – धन्यवाद। Desi Rich Girl Sex
दीप्ती अग्रवाल 23 साल की मध्यम लम्बाई – पांच फ़ीट चार इंच की BSc पास हरियाणवी औरत है। हरियाणा के रोहतक की रहने वाली है। सीधी सादी है मगर भाषा की जरा तीखी है। भोसड़ी के, साले, गांडू उसके लिए अपशब्द नहीं हैं। मगर दीप्ती ये शब्द तभी इस्तेमाल करती है जब या तो वो अति उत्साहित होती है या फिर गुस्से में होती है।
दो साल पहले अजय दIस अग्रवाल से शादी हुई थी, जब वो इक्कीस की थी। शादी से पहले एक ऑफिस में काम करती थी, मगर शादी के बाद अजय ने नौकरी छुड़वा दी। दीप्ती का रंग गोरा है। नैन नक्श तीखे तो नहीं मगर सुन्दर है जैसे कायस्थ होते हैं गोल मटोल – मगर आकर्षक।
गोल मटोल मतलब गदराया शरीर – भारी चूचियां और भारी ही चूतड़ – मगर सख्त। चलने पर दोनों चूचियां और चूतड़ एक लय में हिलते हैं। धक धक धक धक। दीप्ती बाहर अक्सर साड़ी ब्लाऊज़ पहनती है। घर में ब्लाउज और पेटी कोट में ही घूमती है। नीचे ना ब्रा पहनती है ना चड्ढी। जरूरत भी क्या है घर में ही तो रहना है। शायद इसी कारण जब चलती है तो पीछे से चूतड़ मटकते दिखाई देते हैं, और आगे चूचियां ऊपर नीचे होती हैं।
चूतड़ों की ये मटक देख कर देखने वाले का लंड खड़ा होने लगता है – मगर अजय दास अग्रवाल पर इन चूतड़ों की मटकन का कोइ असर नहीं होता। दोनों चूचियों के बीच की लाइन ब्लाऊज़ में से साफ़ दिखाई देती है। कभी नीचे झुकती है तो लगता है चूचियां ब्लाऊज़ से बाहर ही निकल पड़ेंगी।
असल में अजय दास अग्रवाल के लिए पैसा पहले है, बाकी सब कुछ बाद में है। 30 साल का पति अजयदास सांवले रंग औसत नैन नक्श का व्यक्ति है। शरीर का भारी – करोड़पति मारवाड़ियों की तरह। अजय का कपड़े का काम है। त्रिपुरा, सूरत, अमृतसर, लुधियाना, बैंगलोर से कपड़ा ला कर बड़े दुकानदारों को सप्लाई करता है। अजय के पिता भी यही कपड़े का काम करते थे।
बाजार में अजय की अच्छी साख है। दिल्ली के जमुना पार लक्ष्मी नगर मेन मार्किट में अपना ऑफिस है जहां अजय सुबह जाने के बाद रात को ही लौटता है। अब इतनी रात को थका हुआ कोइ आये तो खाने और सोने अलावा और क्या करेगा – कम से कम चुदाई तो दूर की बात ही है।
अजय के पास पैसे की कोइ कमी नहीं। ना ही कभी अजय ने दीप्ती को पैसे की कमी महसूस होने दी। दीप्ती जहां मर्ज़ी खर्च करे, जितना खर्च करे, जैसे खर्च करे – अजय ने इस बारे में कभी कोइ सवाल नहीं किया। लक्ष्मी नगर में ही बड़ा पुश्तैनी दुमंजिला घर है पुराने ढंग का। नीचे दरवाजे से गुजर कर बड़ा सा आंगन है और पांच तरफ कमरे बने हैं।
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किसी ने कोइ बात भी करनी हो तो आंगन में जा कर ही करनी पड़ती है। नीचे के पांच में से चार कमरे गोदाम की तरह प्रयोग होते हैं। एक कमरा सारी सुविधाओं के साथ गेस्ट रूम की तरह इस्तेमाल होता है। बाकी परिवार की रिहाइश ऊपर की मंजिल पर है।
बाल बच्चा अभी नहीं हुआ। काम वाली बाई सुबह आ जाती है और सारा काम निबटा कर ग्यारह बजे तक चली जाती है। इसके बाद घर में दीप्ती दिन भर अकेली रहती है। घर में पूरे समय के लिए नौकर की जरूरत नहीं – ऐसा अजय का सोचना है।
दीप्ती का एक देवर है विनय – 26 साल का। देखने में बिलकुल अपने भाई जैसा। मगर अच्छा पढ़ा लिखा है। कंप्यूटर इंजीनियरिंग में डिग्री की हुई है। विनय की पुश्तैनी कपड़े के काम में कोइ दिलचस्पी नहीं है। नोएडा में एक बहुत बड़ी कंप्यूटर कम्पनी में सीनियर मैनेजर है और विदेश आना जाना लगा रहता है। मोटी तनख्वाह है। नोएडा में ही किराए के मकान में रहता है।
विनय की पत्नी है नेहा, मुंबई के रहने वाली तेज तर्रार लड़की। बात चीत करने में तेज है। उम्र 22 साल कंप्यूटर साइंस का कोर्स किया हुआ है। मुंबई में बॉय फ्रेंड भी बनाये और चुदाई भी करवाई। साल भर ही हुआ है उनकी शादी को। शादी से पहले नेहा नौकरी करती थी, मगर अब नहीं करती। विनय को भी भाई की तरह औरतों का नौकरी करना पसंद नहीं है।
जब विनय विदेश जाता है तो नेहा दीप्ती के पास रहने आ जाती है। दीप्ती का एक देवर और है विपिन – 20 साल का। कुरक्षेत्र में इंजीनियरिंग कर रहा है उसकी एक जुड़वां बहन है शिखा – दीप्ती की ननद – वो चंडीगढ़ में पढ़ती है। शिखा चंडीगढ़ में रहते हुए चंडीगढ़ की लड़कियों की तरह ही स्मार्ट हो गयी है, तेज तर्रार, आत्मविश्वास से भरपूर – मौज मस्ती वालीं।
विपिन और शिखा दोनों छुट्टियों में ही घर आते हैं। शिखा कई बार नहीं भी आती और अपनी एक सहेली के साथ कसौली चली जाती है जो चंडीगढ़ से केवल 57 किलोमीटर है – दो घंटे की दूरी पर है। दोनों भाई बहन अपने दो बड़े भाईयों के विपरीत गोरे छरहरे और लम्बे है।
दीप्ती की देवरानी नेहा का मानना था की मुकेश और शिखा का पिता और बड़े भाइयों अजय और विनय का पिता एक नहीं हैं – मतलब कि विपिन और शिखा किसी दुसरे मर्द से चुदाई की पैदाइश हैं। कोइ बड़ी बात नहीं, दीप्ती और नेहा की सास का किसे दुसरे मर्द से चुदाई का चक्कर हो। अगर ऐसा है तो कोइ तो कारण होगा ऐसे बाहर चुदाई करवाने का।
कोइ भी शादी शुदा औरत यूं ही शौक के लिए बाहर के मर्दों से चुदाई नहीं करवाती। अब दीप्ती और नेहा तो यही करवा रहीं हैं – बाहर के मर्दों से चुदाई, और इसके पीछे भी एक कारण है। अब आते हैं अग्रवाल बहुओं – जेठानी दीप्ती और देवरानी नेहा की कहानी पर।
सारी सुविधाओं के बावजूद दीप्ती और देवरानी नेहा दोनों उदास रहती हैं। कारण एक ही था। सम्भोग – चुदाई – चूत की रगड़ाई, जो ढंग से नहीं होती। अब अजय दास और विनय पांच इंच के लंड भी क्या चुदाई करेंगे। वैसे तो डॉक्टर लोग बोलते हैं कि साढ़े चार इंच का लंड भी काम चला सकता है – अगर वो तब जब आदमी बीस पच्चीस मिनट तक चुदाई करता रहे और ना झड़े।
अजय और विनय के लंड तो चलो डॉक्टरों के हिसाब से आधा इंच फालतू थे, मगर यहां तो दोनों भाई शीग्र पतन से भी ग्रस्त थे – मतलब जल्दी झड़ जाते थे। पांच सात मिनट की चुदाई के बाद ही। जेठानी देवरानी की चूतें अभी गरम होना शुरू होती थीं की भाइयों लंड पानी छोड़ कर ठंडे हो जाते थे। औरतें उंगली से ही काम चलIने की कोशिश करती थीं।
अब तक जेठानी दीप्ती और देवरानी नेहा में इस पर कोइ बात नहीं हुई थी – झिझक कह लो या रिश्तों का लिहाज। मुम्बई की रहने वाली नेहा अपना मन मारने के पक्ष में नहीं थी। इसी लिए उसने एक रबड़ का बैटरी से चले वाला सात इंच लम्बा लंड मंगवा लिया था – जो वो चूत में ले कर मजे लेती थी। लंड के ऊपर उभरे हुई दाने थे जो चुदाई के मजे को दुगना कर देते थे।
मगर फिर भी असली मर्द का लंड तो असली ही होता है। रबड़ का लंड चूत का पानी तो छुड़ा देता था मगर मानसिक संतुष्टी नहीं मिलती थी। नेहा असली लंड की तलाश में भी रहती थी। कभी कभी ऐसा लंड मिल भी जाता था। उधर दीप्ती रोहतक के संयुक्त परिवार से आयी थी। लंड ढूढ़ना उसके बस की बात नहीं थी। वो अपने कंप्यूटर पर ब्लू फिल्में – चुदाई की फ़िल्में – देख कर चूत में उंगली डाल कर काम चला लेती थी।
मगर बात वही थी – उंगली असली लंड का काम तो नहीं दे सकती। विनय एक हफ्ते के लिए कम्पनी के काम से सिंगापुर गया था और नेहा एक हफ्ते के लिए लक्ष्मी नगर दीप्ती के पास रहने आ गयी थी। नेहा ने नोट किया की दीप्ती इस बार ज्यादा ही उदास है – ना समझ में आने वाली उदासी।
नेहा के मन में खटका हुआ कही जेठ जी भी तो उसके पति की ही तरह खस्सी नहीं ? “छोटा लंड और ऊपर से शीघ्र पतन”। नेहा को मालूम था दीप्ती कैसे माहौल से आयी है। रबड़ के लंड और बाहर की चुदाई इसके बस की बात नहीं और झिझक के कारण कुछ बताएगी इस बात की उम्मीद कम ही थी। नेहा ने खुद ही पहल करने का फैसला किया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दोनों बैठी इधर उधर की बात कर रही थी की नेहा ने पूछा, “जीजी क्या बात है, आप कुछ उदास सी लग रही हैं “।
दीप्ती ने सकपका कर कहा, “नहीं नेहा, ऐसी तो कोइ बात नहीं”।
“नहीं जीजी कुछ बात तो है, और अगर मेरा अंदाजा सही है तो मामला जेठ जी से जुड़ा है”।
“नहीं नेहा ऐसा भी क्या हो सकता है जो अजय से जुड़ा हो “।
नेहा बोली “जीजी मैं भी एक औरत हूं इस तरह की बेमतलब उदासी का कारण मैं समझती हूं “।
दीप्ती चुप रही।
“जीजी, क्या जेठजी चुदाई सही नहीं करते “? दीप्ती चुप ही रही। वो नेहा की तरफ देख भी नहीं रही थी।
नेहा ने सोचा की अब बात साफ़ साफ़ करनी ही पड़ेगी। उसने पूछा जीजी,” जेठ जी का भी तो विनय की तरह छोटा लंड तो नहीं – और उनका भी पानी विनय की तरह जल्दी नहीं छूट जाता “?
दीप्ती के मुंह से निकल गया, “क्या ?…..विनय भी ”? वो एकदम चुप हो गयी।
नेहा का अंदाज़ा सही था। दीप्ती की चुदाई भी उसकी चुदाई की तरह अधूरी ही रहती है।
मकुल अभी भी चुप थी।
नेहा ने कहा , “जीजी ऐसे मन मारने से कुछ नहीं होगा उलटा सेहत खराब हो जाएगी “।
अब दीप्ती बोली, “तो क्या करूं नेहा, तू ही बता “?
जीजी कोइ लंड ढूढो, चुदाई का साधन तलाशो।”
दीप्ती ने कहा “कहां ढूंढू, कैसे ढूंढू। अच्छा तू बता तू क्या करती है”।
नेहा ने बताया, “जीजी मैंने तो रबड़ का लंड मंगवाया हुआ है, वही चूत में डाल कर पानी छुड़ा लेती हूं। अगर मौक़ा लग जाये तो किसी बाहर वाले से चुदवा भी लेती हूं “।
दीप्ती ने पूछा, “बहार वाले से मतलब ? किससे – कैसे “?
नेहा ने बताया, “जीजी पिछले हफ्ते एक दिन एक बीस बाईस साल का लड़का किसी के घर का पता पूछते पूछते आ गया था। उसीको मैंने पटा लिया और चुदाई करवा ली “।
दीप्ती ने पूछा, “कैसे “?
जीजी हुआ की उस दिन बड़ी गर्मी थी। मैं AC चला कर जो लेटी हुई थी कि दरवाजे की घंटी बजी। मुझे कोफ़्त तो बड़ी हुई की इस वक़्त कौन आ गया। मैंने मैक्सी पहनी हुई थी – नीचे ना ब्रा पहनी हुई थी ना पैंटी। मैक्सी भी झीनी झीने सी थी। अगर बड़े गौर से देखो तो चूचियों की झलक मिल ही सकती थी।
मैंने मैक्सी के ऊपर ही दुपट्टा ओढ़ लिया और देखने गयी के कौन है। दरवाजे पर एक बीस साल के लगभग उम्र का लड़का था जो किसी का पता पूछ रहा था। मकान नंबर तो हमारा ही था, मगर लग रहा था कि सेक्टर नंबर में कुछ गड़बड़ थी। मुझे बड़ा गुस्सा आया की बेकार में डिस्टर्ब कर दिया।
मैं कुछ बोले ही वाली थी की मेरे नजर उसके चेहरे पर पड़ी – गर्मी के कारण लाल हुआ पड़ा था। मैंने पूछा “इतनी गर्मी में घूम रहा है यहीं से फोन करके सही पता क्यों नहीं पूछ लेता”?
लड़का बोला मैडम, “फोन की बैटरी खत्म हो गयी है”।
अब मैंने उसे गौर से देखा। शरीफ लग रहा था – अच्छे परिवार का। गर्मी बहुत थी, मैंने उसे कहा। अंदर आओ पानी पी लो और फोन चार्जिंग पर लगा लो। गर्मी बहुत है फोन एक बार चार्ज हो जाये तो सही पता पूछ कर चले जाना”। मैंने उसका मोबाइल चार्जिंग पर लगाया और पानी लेने चली गयी। ट्रे में पानी का जग और गिलास ले कर आई तो मुझे लगा कि वो लड़का मुझे कुछ अलग नज़रों से देख रहा है।
मैं हैरान हुई कि मेरे पानी लाने के दौरान ऐसा भी क्या हो गया कि लड़का कुछ अलग ही नज़रों से मुझे देखने लगा है। मेरा ध्यान अपने टांगों की तरफ गया तो मुझे कारण समझ में आ गया। “हल्की पारदर्शी होने के कारण मैक्सी में से मेरी टाँगें दिखाई दे रहीं थीं। अगर टांगें दिखाई दे रहीं थीं तो चूतड़, चूतड़ों के बीच की लाइनऔर चूचियां भी दिख रही होंगी। मैं जब पानी लेने गयी तो लड़के ने मेरे चूतड़ों के झलक देख ली होगी।
नेहा बोली, “सच पूछो तो जीजी मुझे बड़ा अच्छा लगा। चूत में कुछ कुछ होने लगा था”।
नेहा ने बात जारी रक्खी, “मैंने सोचा चलो परखते हैं लड़के को। मैं उसके सामने ही सोफे पर बैठ गयी। दुपट्टा उतार कर मैंने दोनों हाथों से बाल इस तरह पीछे किये कि मेरी छातियां आगे की तरफ तन गयीं”। पानी का गिलास लड़के के हाथ में था। लड़का पानी पीना ही भूल गय। वो मेरी छातियों की तरफ ही देखता जा रहा था। जरूर छातियों के निप्पलों की झलक दिख रही होगी।
“जीजी मेरा मन चुदवाने का होने लगा था। मैं सोफे पर पसर कर बैठ गयी।
मैंने लड़के से पूछा, “नाम क्या है तुम्हारा “।
वो बोला, “जी राकेश “।
मैंने बात जारी रखते हुए फिर पूछा, “कहां और क्या पढ़ते हो”।
“जी, मैं गुडगाँव से इंजीनियरिंग की डिग्री कर रहा हूं। यहां एक बड़ी कम्पनी में कालेज की तरफ से दो हफ्ते की ट्रेनिंग के लिए भेजा गया गया है। मेरा एक दोस्त है मेरे कालेज का ही – मेरा सीनियर है, उसका यहां घर है। उसके घर में एक कमरा खाली रहता है। उसने दो हफ्ते का वहां मेरे रहने का इंतजाम किया है। इसे लिए वहीं जा रहा था”।
लड़का पानी पी कर गिलास मेज पर रख चुका था। मैं गिलास उठाने के बहाने कुछ ज़्यादा ही झुकी जिससे मेरे स्तन उसे दिखाई दें और मैं उसकी नीयत भाप सकूं। राकेश का मुंह खुला का खुला रह गया।
मैं उसे टटोलने लगी, “राकेश तुम्हारे कालेज में ‘को-एजुकेशन’ है ? लड़के लड़किया इक्क्ठे पढ़ते हैं “?
उसकी नजर मेरी छातियों के तरफ ही थी, “जी “।
उसकी नजरें भांप कर मैंने सोचा, “अब खुलना ही चाहिए”।
“कोइ लड़की फंसाई राकेश, कोई गर्ल फ्रेंड बनाई “?
राकेश परेशान कि ये मैं क्या पूछ रही हूं। उसने बड़ी मुश्किल से पूछा , “जी”?
मैंने हंस कर कहा, “अरे भई आसान सी बात है किसी लड़की के साथ दोस्ती हुई, चक्कर चला या नहीं “?
लड़का बोला,” जी एक लड़की के साथ फ्रेंडशिप है “।
अब देर करना ठीक नहीं था। मैंने पूछा, “कहां तक की फ्रेंडशिप है किस किया उसे कभी – चुम्मा लिया “?
लड़का अब सहज हो रहा था। हो सकता है मेरी मंशा जान गया हो। मेरी झीनी मैक्सी, मेरा झुक कर गिलास उठाना और इस तरह के व्यग्तिगत सवाल पूछना ऐसे ही बिना किसी मंशा के तो नहीं हो सकता था।
“और जीजी ये सब बिना मंशा के था भी नहीं। मेरी मंशा ही उससे चुदाई करवाने की थी”। नेहा ने दीप्ती से कहा।
दीप्ती ने पूछा, “नेहा, ऐसे किसी अनजान से चुदाई ? इसमें जोखिम नहीं”?
नेहा ने कहा, ” कैसा जोखिम जीजी ? कोइ चोर लुटेरा आ जाए या चुदाई का भेद खुल जाए “?
“दोनों ही”, मैंने कहा।
नेहा अनजान मर्द से चुदाई करवाने की बात कर रही थी – मगर दीप्ती को लग रहा था कि इसमें जोखिम भी तो हो सकता है -जैसे कोइ लूट पाट, जोर जबरदस्ती। वो समझ नहीं पा रही थी कि कैसे हो अनजान मर्द से चुदाई हो सकती है”I जब दीप्ती ने नेहा से पूछा तो नेहा ने जवाब दिया, “देखो जीजी दिन दिहाड़े कोई अकेला बंदा ऐसे लूटपाट का जोखिम नहीं उठाएगा”।
“फिर शक्ल सूरत से भी अंदाजा हो जाता है। और जीजी जोखिम तो तब नहीं होता जब या तो आपका कोइ पक्का चोदने वाला हो। उसके पास जाओ और चुदाई करवा कर आ जाओ”। “या परिवार में ही कोइ जानकार या रिश्तेदार हो जो आपके घर आता जाता रहता हो और जिस पर किसी को कोइ शक न हो। वो आपके साथ मौका मिलते ही चुदाई कर दे”।
“या फिर ऐसे ही आते जाते को पकड़ लो जिसे आप थोड़ा बहुत जानती हो। जैसे कूरियर वाला, या कोइ इलेक्ट्रिशियन जो बिजली की गड़बड़ देखने आया हो, या जो घर खाना वगैरह पहुंचाने आते हैं – होम डिलीवरी – कोइ इस तरह का “। नेहा अपनी बात जारी रखे हुए थी,
“आज कल ये लोग भी पढ़े लिखे ही होते हैं – कोइ कोइ तो बीए पास – कॉलेज के ग्रेजुएट भी होते हैं। नौकरी नहीं मिलती इस लिए ऐसे काम करते हैं। बस इतना देख लो शकल सूरत ठीक हो स्मार्ट हो और गंदा ना हो साफ़ सुथरा हो”। अब अगर घर वाला ही चुदाई ढंग की ना करे तो बीवी क्या करे “? ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दीप्ती ने पूछा,”लेकिन नेहा अगर ऐसा, मतलब ये कूरियर वाला या वो दुसरे जो तूने बताये, अगर ये पीछे ही पड़ गए और बार बार चुदाई के लिए बोलने लगे तो “?
नेहा बोली, “जीजी ये तो और अच्छा होगा। ये चुदाई ही तो हमारी समस्या है। ना ढंग के लंड हैं, न ढंग की चुदाई। अगर ऐसा साफ़ सुथरा अच्छा दिखने वाला चोदू बार बार चुदाई करने आ जाये तो और क्या चाहिए”।
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दीप्ती ने सोचा बात तो नेहा सही कर रही थी।
दीप्ती ने पूछा, “अच्छा नेहा फिर तेरा क्या हुआ उस लड़के राकेश के साथ “?
नेहा ने बात जारी रखते हुए कहा – जब मैंने उससे पूछा “उस लड़की को किस किया – चुम्मा लिया उसका ? तो जवाब में वो बोला हां जी किया ? जीजी अब राकेश सहज हो रहा था।
“और सेक्स – चुदाई”?
जीजी जब मैंने ये पूछा तो वो हड़बड़ा गयाऔर मेरी तरफ देखने लगा।
“अरे राकेश मैंने आसान सा सवाल किया। चुदाई की उस लड़की की ? चोदा उसे “?
” जी चोदा है “।
“कितनी बार चोदा है ”
“जी कई बार। उसके साथ चुदाई होती रहती है। वो मेरी पक्की गर्ल फ्रेंड है “।
“कैसे चोदता है उसको”? राकेश ने कोइ जवाब नहीं दिया।
मैंने फिर पुछा, “अरे मैं पूछ रहीं हूं कैसे चोदता ऊपर लेट कर कि पीछे से घोड़ी बना कर “?
जीजी राकेश ने फिर भी जवाब नहीं दिया। लग रहा था शर्मा रहा था, घबरा रहा था या हैरान था कि मैं ये क्या पूछ रही हूं और क्यों।
फिर मैंने आख़री वार किया, “चल अच्छा, तो फिर तू मेरी चुदाई कर के दिखा कैसे चोदता है अपनी गर्ल फ्रेंड को ” और मैंने अपनी मैक्सी उतार दी। नंगा जिस्म छातियां तनी हुई सख्त चूतड़। मैं राकेश के सामने खड़ी हो गयी। मेरी गीली चूत बिलकुल उसके मुंह के सामने थी। उसे मेरी चूत से पेशाब और चूत के पानी की गंध जरूर आ रही होगी। मैंने उसे बाजू से पकड़ा और कहा “चल आ मुझे चोदके बता”।
वो नहीं हिला। मैंने उसे जोश दिलाया, “अबे राकेश यहां तेरी फटी पड़ी है तो उस लड़की को कैसे चोदता है। फिर मैंने उसके पैंट की ज़िप खोली और लंड निकाल लिया। उसके सामने ही घुटनों के बल फर्श पर बैठ कर उसका लंड चूसना शुरू कर दिया। वो मस्त होने लगा। उसने अपनी कमीज और बनियान उतार दिए।
लंड मेरे मुंह से निकाल कर उसने पैंट और अंडरवेअर भी उतार दिए। लंड अपने हाथ से हिलाया और मेरी तरफ इशारा किया, “अब चूसिये “। पांच मिनट की चुसाई के बाद जो मेरे सामने था उसकी मैंने कल्पना भी नहीं की थी। इतनी साधारण से डीलडौल वाले लड़के का लंड गधे के लंड जैसा था – मोटा और कम से कम आठ इंच लम्बा। मेरा तो मन किया अभी लेट जाऊं और बोलूं “चोद साले – फाड़ मेरी चूत”।
नेहा बोली, “जीजी, राकेश का लंड बिलकुल सीधा खड़ा था डंडे की तरह”। फिर राकेश ने मुझे उठाया और मेरे होंठ चूसने लग गया। होंठ छोड़े और मेरी चूचियां चूसनी शुरू कर दी, और अपनी उंगली मेरी चूत में घुसेड़ दी। थोड़ा चूसने के बाद उसने मुझे कहा लेट जाईये मुझे आपकी चूत चूसनी है। चूतड़ों तक शरीर बेड पर। मेरी टांगें चौड़ी कर के अपना मुंह मेरी चूत में घुसा दिया और इतनी जोर से चूसा की मुझे लगा मेरा पानी ही छूट जायेगा।
लग रहा था कि राकेश चुदाई करता रहता था। वैसे भी ऐसे लंड को एक बार लेकर लड़की बार बार चुदाई के लिए कहेगी। कम से कम मेरा तो मन यही कर रहा था। मैंने राकेश को कहा, “अगर तुम ऐसे ही चूसते रहे तो मेरा पानी ऐसे ही छूट जाएगा”।
वो मेरी चूत में से मुंह निकाल कर बोला आप अपना पानी छूट जाने दीजिये। मेरा पानी जल्दी नहीं छूटता। अब आपके साथ पूरे चुदाई के मजे लिए बिना नहीं हटूंगा “। “और जीजी राकेश फिर उसी जोर शोर से मेरी चूत चूसने लग गया। थोड़ी देर में मुझे मजा आने लगा और फिर मेरे चूतड़ आमने आप जोर से हिले और एक सिसकारी आअह आआह के साथ ही मेरा पानी निकल गया”।
राकेश फिर भी मेरी चूत चूसता रहा। फिर ना जाने क्या हुआ एक दम उठा और मुझ से बोला “चूतड़ पीछे कर के खड़ी हो जाईये”। मैंने बेड के किनारे पर कुहनियों के बल चूतड़ पीछे कर के खड़ी हो गयी। राकेश ने एक झटके से लंड चूत के अंदर तक बिठा दिया।
“क्या मजा आ गया जीजी जब ये बड़ा लम्बा लंड रगड़ खाता हुआ चूत के अंदर गया। एक पल को तो ख्याल आया की विनय का इससे आधे साइज़ का लंड है तभी तो हमारी चुदाई अधूरी रहती है और हमारी फुद्दीयां प्यासी रह जाती हैं”।
दीप्ती ने मन ही मन सोचा विनय भी क्यों, अजय भी तो ऐसा ही है झंडू लंड वाला और नक़ली चुदाई वाला।
नेहा दीप्ती को बता रही थी “रकेश जिस जोर से धक्के लगा रहा था में हैरान थी। लड़का हल्का था, शायद इसलिए इतने ज़बरदस्त धक्के लगाने के बावजूद उसको सांस नहीं चढ़ रहा था”। “अगले आधे घंटे तक उसने उसी स्पीड से मेरी चुदाई”। “सच पूछो जीजी मेरे मन में विनय के लिए गंदी बातें निकल रही थी, “साले चूतिये नामर्द – न लंड ढंग के हैं ना चुदाई ढंग से करते हैं”।
“मैंने जोर से चूतड़ घुमाये और राकेश की इस चुदाई से मैं एक बार और झड़ गयी”। “जैसे ही मैं झड़ी, राकेश ने धक्के लगाने बंद कर दिए। खड़ा लंड मेरी चूत में ही था”। “जीजी सच बोलूं, मेरी इच्छा हो रही थी ये लंड ऐसे ही मेरी चूत में खड़ा रहे “। राकेश ने मेरी चूत में से खड़ा लंड निकला और मेरे चूतड़ों पर एक धप्प मार कर बोला “उठिये, चूसिये इसे और निकालिये इसका पानी”।
मैं हैरान हुई। मैंने पूछा, “राकेश तूने मेरी चूत में क्यों नहीं निकाला अपना पानी – अभी – जब तू मुझे चोद रहा था, जब दूसरी बार मेरा पानी छूटा था”? राकेश बोला, “मुझे मुंह में छुड़ाने में मजा आता है। अपनी गर्ल फ्रेंड के भी मैं मुंह में ही छुड़ाता हूं। अब लीजिये मेरे लंड को मुंह में और चूस कर निकालिये इसमें से पानी। निचोड़िये इसे – मेरी हालत खराब हो रही है। फट रहा है मेरा लौड़ा “।
“जीजी उसकी ऐसी बातें मुझे और भी मस्त कर रहीं थीं “। मैंने राकेश का लंड मुंह में लिया और चूसने लग गयी। राकेश बोला, “और जोर से, हां बढ़िया चूस रही हैं आप। चूसिये आआह आआह और चूसिये। बड़ा मजा आ रहा है “। राकेश ने एक हाथ मेरे सर के पीछे रखा हुआ था जिससे मैं लंड को अपनी मर्ज़ी से मुंह से बाहर ना निकल पाऊं।
आधे घंटे की लगातार चुसाई के बाद राकेश मजा निकलने के लिए बेताब था। उसने लंड मेरे मुंह में आगे पीछे करना शुरू कर दिया। साढ़े सात इंच आठ इंच लम्बा लंड कहां तक मुंह में बैठता। आधा भी नहीं जा रहा था। मुझे लग रहा था मेरा दम घुट जाएगा। मगर राकेश को इससे कोइ मतलब नहीं था। वो बोलता जा रहा था … आअह चूसिये चूसिये और जोर से चूसिये … निकले ही वाला है …… आअह”।
“और जीजी की बताऊं, राकेश ने लंड में से गरम चिकने पानी का फव्वारा मेरे मुंह में डाल दिया। मुंह मेरा भरा पड़ा था। मेरे सर को राकेश ने लंड पर दबाया हुआ था। मैं लंड मुंह से निकाल ही नहीं पा रही थी”। आखिर को मैंने राकेश के लंड का सारा पानी पी लिया। हल्का नमकीन, हल्की खुशबू वाला – आधा कप तो होगा। राकेश झड़ चुका था। उसने मेरा सर छोड़ दिया, मगर अब मैंने उसके चूतड़ पकड़ लिए और उसका लंड चूसती रही।
अब उसका लंड चूसने में मुझे मजा आने लगा था। मेरी चूत फिर गरम हो रही थी। पंद्रह मिनट की चुसाई के बाद राकेश का लंड फिर खड़ा हो गया। मैंने नीचे हाथ कर के अपनी फुद्दी रगड़नी शुरू कर दी। ना मैंने राकेश को एक और चुदाई के लिए बोला, ना राकेश ने एक और चुदाई के लिए कहा।
हम दोनों को ही चूसा चुसाई में मजा आ रहा था। मैं झड़ने वाली थी। मैं मजे की सिसकारियां लेना चाहती थी मगर राकेश के लंड से मेरा मुंह भरा पड़ा था। बस मेरे मुंह से हम्म्म्म हम्म्म ही निकल रहा था। मेरे चूतड़ जोर जोर से हिल रहे थे। राकेश ने भी मेरे मुंह में ध्क्के लगाने शुरू किये – मेरे मुंह की चुदाई हो रही थी।
तभी मुझे मजा आ गया ह्म्म्मम्म ह्म्म्मम्म हम्म्म्म और एक ऊंची आवाज अअअअअह हरररररर आअह आह आह के साथ राकेश ने फिर मेरा मुंह मलाई से भर दिया। इस बार राकेश ने मेरा सर भी नहीं दबाया था। मैंने खुद ही सारा गर्म लेसदार पानी पी लिया। राकेश के लंड की एक एक बूंद उसके वीर्य की चूस ली और लंड मुंह से निकल कर खड़ी हो गयी।
राकेश ने मेरी ओर देखते हुए पूछा, “आया मजा”?
मैंने कहा “पूरा – बहुत ज्यादा”।
राकेश चलते हुए बोला, “मैडम आप चूसती बहुत अच्छा हैं। चलो देखता हूं मोबाइल की बैटरी चार्ज हो गयी होगी”।
पीछे पीछे मैं भी चल पडी नंगी ही। राकेश फोन पर बात कर चुका था। मुड़ कर बोला, “सेक्टर का ही चक्कर था। ये पंद्रह है, उनका घर पंद्रह – ए में है”।
फिर मुझे नंगी देख कर कहा, क्या हुआ मैडम ? फिर चुदाई करवानी है क्या ?
मैंने भी पूछा “चोदोगे क्या”?
राकेश बोला,”हां अगर आपका मन है एक और चुदाई का तो चोद दूंगा। मुझे तो वैसे ही आपकी टाइट चूत चोदने में बड़ा मजा आया है।और इस बार ऊपर लेट कर और लंड का गर्म पानी भी चूत में ही छुड़ाऊंगा”।
हम फिर कमरे में आ गए। मैं जा कर बेड पर लेट गयी। राकेश फिर कपड़े उतरे। एक मोटा तकिया मेरे चूतड़ों के नीचे रख कर मेरी चूत उठा दी। टांगें अपनी बगलों में ले कर थोड़ी ऊपर की,लंड चूत के छेद पर रखा और झटके से पूरा अंदर डाल दिया। मेरे मुंह से सिसकी निकली आह …… आआआह मजा आ गया – क्या बैठा है तेरा लंड राकेश मेरी चूत के अंदर। भर गई मेरी फुद्दी”।
नेहा बता रही थी, “जीजी आधे घंटे मुझे राकेश ने चोदा और पूछा जब आप का झड़ने वाला हुआ तो बताना। मैंने अपना रोका हुआ है इक्क्ठे झड़ेंगे। बड़ा मजा आएगा आपको”। “जीजी मैंने क्या सोचा था इस लड़के के बारे में ये तो पक्का चुदक्क्ङ निकला”।
नेहा बता रही थी ,”जीजी मैंने राकेश से कहा, मेरा पानी चूत में अटका ही हुआ है। लम्बे धक्के लगाओ, पूरा बाहर निकाल कर पेलो दस धक्कों में पानी छोड़ देगी मेरी चूत”। और जीजी उसने वो धक्के लगाए की मेरी चीखें निकाल दी – मजे की चीखें…. आआह ….चोद लड़के… लगा जोर ……झटके लगा…. इस लम्बे लंड के ….और लगा…. आअह…आयहा … राकेश और में जड़ गयी और साथ ही घरररर की आवाज की साथ राकेश ने मेरी चूत भर दी।
जीजी हमारे चोदू तो डेढ़ चमच्च भी मलाई नहीं गिराते। राकेश जाने लगा तो मेने बोला। राकेश मस्त चोदता है तू। अब कब आएगा। राकेश बोला “मेरा नंबर ले लीजिये। मैं दो हफ्ते के लिए हूं यहां। जब प्रोग्राम बने फोन कर दीजियेगा मैं आ जाऊंगा”। और जाते जाते वो फिर रुका और कहा, “अगर हो सके तो पूरी रात का प्रोग्राम बनाईये। तस्सली हो जाएगी आपकी चूत की”।
दीप्ती ने एक हाथ से अपनी फुद्दी रगड़ते हुई पुछा,”तो नेहा बना क्या रात का प्रोग्राम “?
नेहा ने कहा, “बना जीजी। विनय ने दो दिनों के लिए चंडीगढ़ जाना था, कोइ सेमिनार था। मैंने राकेश को फोन कर के बुला लिया”। “एक एक रात में चार चार बार चुदाई हुयी। मेरी चूत का भुर्ता बना दिया उसने। दूसरी रात की चुदाई का बाद तो मेरी चूत ही फूल गयी थी जैसे किसी ने जम कर पिटाई की हो”।
“वैसे तो जीजी, मेरी चूत की मस्त पिटाई ही हुई थी। अब तो मन कर रहा था रोज़ ही ऐसी पिटाई हो। पंद्रह दिनों में वो चार बार दिन में और दो रातें – कम से कम उन्नीस बीस चुदाईयां हुई होंगी – इतनी तो हमारी छः महीनो में नहीं होती”। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
नेहा की नॉएडा में राकेश से हुई चुदाई की बातों ने दीप्ती की चूत गर्म और गीली कर दी थी। दीप्ती अब जोर जोर से अपनी चूत रगड़ रही थी। नेहा ने पुछा, “जीजी गर्म हो रही है क्या आपकी चूत ? लाईये चूस कर निकाल दूं चूत का पानी ”।
तभी बाहर से आवाज आयी , “ज़िप वाला …… ज़िप ठीक करवा लो। बहन जी कोइ ज़िप ठीक करवानी है क्या”?
नेहा ने दीप्ती से पुछा, “जीजी ये कौन हैं “?
दीप्ती बोली ,”ये दो लड़के आते हैं। पेंट की बैग वगैरह की खराब ज़िपें ठीक करते हैं। महींने में एक बार इधर का चक्कर लगाते हैं। मैंने दो बार ज़िप ठीक करवाई है, इस लिए जब भी आते हैं पूछ कर जाते हैं “।
नेहा ने पूछा,” देखने में कैसे है”।
दीप्ती बोली, “अच्छे हैं, उन्नीस बीस साल के। बोल रहे थे बाहरवीं पास हैं और प्राइवेट बीए की तैयारी कर रहे हैं। मगर तू क्यों पूछ रही है”।
“मैं आती हूं देख कर” नेहा जवाब दिया और बाहर की तरफ चल पडी।
दीप्ती हैरान थी। नेहा क्यों क्या देखने गयी है इन लड़कों में और क्यों ? कहीं इन्हीं को तो चुदाई के लिए नहीं तैयार कर लेगी ?
सात आठ मिनट में नेहा आई और पीछे पीछे दोनों लड़के थे। ठीक थे लड़के देखने में। साफ सुथरे कपड़े – पेण्ट टी शर्ट पहनी हुई थी। दीप्ती तो उनको पहले भी मिल चुकी थी जब ज़िप ठीक करवाई थी। नेहा आयी और पीछे पीछे दोनों लड़के भी थे।
दीप्ती सोच रही थी, क्या करने वाली है नेहा ?
नेहा ने लड़कों पूछा “कहां से आते हो तुम दोनों “?
एक लड़का बोला, “जी गांधी नगर से”।
नेहा ने बात जारी रक्खी “ये तो लक्ष्मी नगर के पास ही है। अच्छा ये बताओ, कितना पढ़े हो”?
“जी हम दोनों ने बाहरवीं पास हैं। बीए की तैयारी कर रहे हैं – प्राइवेट पास करने की”।
“बाहरवीं पास हो तो यह काम क्यूं करते हो “।
वो बोले ,”मैडम असल में यहां बड़ी फैक्ट्रियां तो हैं नहीं, छोटे छोटे कारखाने हैं – वर्कशॉप टाइप के। वो पैसे कहां देते हैं, ऊपर से चार घंटे ओवर टाइम जरूरी बोलते हैं। अब आप ही बताईये बारह घंटे की ड्यूटी।आना जाना मिला कर तेरह चौदह घंटे हो जाते हैं”।
“मैडम हम दोनों के पापा एक ही दुकान में काम करते हैं। वो भी नहीं चाहते हम वर्कशॉप में काम करें। इस लिए जी हम पांच छः घंटे ये काम करते हैं करते हैं। चार सौ पांच सौ दिन के बन जाते हैं। फिर दोस्तों के साथ गप शप करते हैं, थोड़ी मस्ती करते हैं और फिर पढ़ाई कर लेते हैं”।
“अच्छा ये बताओ दोस्तों के साथ मस्ती में क्या करते हो”।
लड़के एक दुसरे को देखने लग गए। दीप्ती हैरान थी – दीप्ती का शक सही था कि नेहा के दिमाग में कुछ चल रहा है। दीप्ती को नेहा की कूरियर वाले और डिलीवरी बॉय वाली बात याद आ गयी। “कहीं इनसे चुदाई करवाने की तो नहीं सोच रही नेहा “? अब दीप्ती ने दोनों लड़कों की तरफ अलग ही नजरिये से देखा – चुदाई करवाने के नजरिये से।
दीप्ती ने सोचा, “बुरे तो नहीं अगर लंड बढ़िया हुए और चोदते अच्छा हुए तो “।
तो क्या आज नेहा दीप्ती की चूत के आग बुझाने की तैयारी में है ?
“जी ? मस्ती मतलब ऐसे ही इधर उधर घूमना, पार्क में चले जाते हैं “।
“पार्क में ? पार्क में तो लड़किया भी आती हैं। क्या लड़कियां देखने जाते हो “?
लड़के अब नीचे देखने लगे – जवाब नहीं दिया।
“अरे बताओ तो, मैंने तो ऐसे ही पूछ लिया – मेरा क्या लेना देना। खाली लड़कियां देखो या कुछ और भी करो। वैसे लड़के ही देखते हैं लड़कियां”।
“जी लड़कियां तो आती हैं वहां तो …….”।
“आती हैं तो ? तो मतलब देखते हो। अच्छा छोड़ो ये बताओ देखते ही हो या कोइ पटाई भी है? फंसाई कोइ ”?
लड़के अब परेशान से होने लग गए थे।
मगर नेहा नहीं रुक रही थी।
नेहा ने उनसे पूछा,”अरे जवाब दो। मैंने कोइ तेरह का पहाड़ा तो सुनाने के लिए नहीं कहा। सीधा सवाल पूछा है – कोइ लड़की पटाई या नहीं। अच्छे खासे हो दिखने में। रंग भी साफ़ है। साफ़ सुथरे भी हो। किसी को न बताओ की ज़िप ठीक करते हो, तो ज़िप ठीक करने वाले लगते भी नहीं। लड़की तो जरूर पटाई होगी”।
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“जी….. जी”?
लड़कों ने जी जी किया मगर जवाब अभी भी नहीं दिया।
“क्या बात है, खस्सी हो क्या”?
“नहीं जी”। अब एक लड़का बोला, “हमारी दोनों की एक लड़की से दोस्ती है”।
“दो लड़के एक लड़की”?
“जी नहीं, उसकी की फ्रेंड भी है”।
“मतलब दो लड़के दो लड़कियां”i
“जी”
नेहा बोली ,”ये हुई ना लड़कों वाली बात। “अब एक आख़री सवाल। ये बताओ उनकी चुदाई की है”।
एक लड़के के हाथ से तो ज़िप ठीक करने वाला बैग ही छूट गया।
“अरे क्या हुआ। लड़के हो भई, मर्द हो। मर्द ही लड़कियों की चुदाई करते हैं। की है तो बोल दो हां चुदाई की है- नहीं की है तो बोल दो ना”।
एक लड़के ने अपना लंड खुजलाया ,”जी की है”।
और तूने ? नेहा ने दुसरे से पूछा।
“जी मैने भी की है। हम इक्क्ठे ही करते हैं “।
अब लड़के भी खुल रहे थे। झिझक दूर हो रहे थी।
“अपनी अपनी वाली को चोदा या अदल बदल कर चोदा – देखो झूठ मत बोलना”। नेहा ने थोड़ा हंस कर पूछा।
“जी अदल बदल कर किया “।
“क्या किया”? नेहा ने कुरेदना जारी रखा।
“जी चुदाई की”।
लड़के अब खुल चुके थे। लंड खुजला रहे थे। पेण्ट में से उभार साफ़ दिखाई दे रहा था।
“क्या हुआ ? खड़े हो रहे हैं क्या “?
लड़कों ने एक दुसरे की तरफ देखा।
“अच्छा इधर आओ”।
लड़के नेहा के सामने जा कर खड़े हो गए।
“निकालो लंड पेण्ट में से”।
लड़कों ने ऐसा कुछ नहीं किया बस चुपचाप खड़े रहे।
“क्या हुआ क्या पेण्ट की ज़िप खराब है क्या”? नेहा जोर से हंसी और एक लड़के ज़िप खोलने लगी।
“नहीं जी, मैं करता हूं”। और उसने लंड बाहर निकाल लिया। सात इंच से कम लम्बा क्या होगा।
दीप्ती ने सोचा इन सब के सात सात आठ आठ इंच लम्बे हैं एक हमारे वाले ही पांच इंच पार नहीं कर पाए।
नेहा ने दूसरे वाले को बोला, “अब तू भी निकाल ले अपना – तुझे अलग से बोलना पडेगा क्या “?
अब तो उन लड़कों को भी मजा आ रहा था। पहले वाले का लंड तो लगभग खड़ा ही था। दुसरे ने भी लंड निकाल लिया। उसका उतना ही बड़ा था। नेहा ने दोनों के लंड अपने हाथ के अंगूठे और बीच कि उंगली से पकड़ कर देखा की कितने मोटे हैं। दीप्ती हैरान हो रही थी की ये नेहा क्या कर रही है। हैरानी के भाव तो लड़कों के चेहरे पर भी थे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
नेहा ने कहा। लंड तो अच्छे हैं तुम्हारे। ये कह कर उसने एक लड़के का लंड मुंह में ले लिया। दूसरा लड़का हैरान से नेहा को अपने साथी का लंड चूसते देख रहा था और अपना लंड हाथ में ले कर दबा रहा था। नेहा ने पहले का लंड छोड़ कर दुसरे का मुहं में ले लिया। पहले वाले का तो खड़ा ही था। दुसरे का भी खड़ा हो गया। पांच मिनट की चुसाई की बाद नेहा सोफे पर सीधे हुई और लड़कों से पूछा, “नाम क्या है तुम्हारा”।
“जी मेरा जनक इसका अशोक”।
“अच्छा जनक अशोक ये बताओ चुदाई करोगे “?
सकपकाए से जनक ने पूछा “जी किसकी”? खड़े लंड हाथों में ले कर सहला रहे थे।
नेहा हंसी, “हम दो ही तो हैं”। नेहा ने दीप्ती और अपनी तरफ इशारा कर के कहा “हम दोनो की चुदाई।चूत की भी और गांड की भी “।
लड़कों को तो लग रहा था विश्वास ही नहीं हो रहा था। चुदाई ? दो दो लड़कियों की ? दो दो चूतें और दो दो ही गांड के छेद “?
नेहा बोली, “देखो जनक अशोक ये कोइ ज़बरदस्ती नहीं है। तुम दोनों हम दोनों को चोदना अदल बदल कर आगे से पीछे से – गांड में चूत में मुंह में – जो मर्ज़ी करना, जैसे मर्जी चोदना जितनी बार मर्जी चोदना। बस पानी निकलना है हमारा। मजा देना है हमे। समझे “?
दोनों लड़के हैरान थे ….. या परेशान थे ? दो दो जवान लड़कियां चोदने के लिए बोल रहीं थीं। सोच रहे होंगे ऐसा भी हो सकता है ? अब नेहा ने आख़री वार किया, “देखो भई अगर चोदना है तो पैंटें उतार दो और आ जाओ, नहीं तो अपने अपने लंड पैंटों के अंदर करो, पैंटों की ज़िपें बंद करो, बैग उठाओ और जाओ”।
दीप्ती सोच रही थी नेहा ने तो चूत प्लेट में सजा कर लड़कों को परोस दी थी। अब लड़के मना भी करें तो कैसे। लड़कों के सामने नेहा कोइ चारा ही नहीं छोड़ा था। दोनों ने अपनी अपनी पैंटें उतार दी। खड़े लंड देख कर दीप्ती मस्त गयी। नेहा बोली, “चलो बाकी के कपड़े भी उतार दो और आ जाओ और अपने अपने हथियारों का करतब दिखाओ।
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फिर नेहा ने दीप्ती से कहा “जीजी हो जाओ तैयार। और नेहा ने अपने कपड़े उतार दिए। एक लड़का जल्दी से आगे आया और फर्श पर बैठ कर खड़ी नेहा की चूत चाटने लगा।
नेहा बोली “अरे क्या कर रहा है। क्या नाम है तेरा, अशोक ? अशोक सबर कर ले ऐसे नहीं चाट पायेगा चूत को। खड़ी चूत में जुबान नहीं घुसती। सबर कर ले चूत गांड सब चटवाएंगी तुम दोनों से और चुदवाएंगी भी”।
दीप्ती भी कपड़े उतार चुकी थी। दोनों लड़कों – जनक और अशोक को पकड़ कर दीप्ती और नेहा कमरे की तरफ ले गयीं। पुरानी तरह के मकान का फर्नीचर भी पुरानी तरह का ही था। बेड इतना बड़ा था की चार औरते और चार मर्द इक्क्ठी चुदाई कर सकते थे। ग्रुप सेक्स के लिए भी बिलकुल सही था।
अच्छा एक बात बताओ, चूत ही चोदते हो या गांड चुदाई भी करते हो।
लड़कों ने एक दुसरे की तरफ देख। अशोक बोला, “जी गांड तो मैं भी चोदता हूं, मगर कभी कभी, जब लड़की की चूत न मिले। मगर इस जनक को गांड चोदना ज़्यादा अच्छा लगता है”।
नेहा बोली, “हमारी गांड भी चोदोगे “?
जनक बोला, “हां जी मैं तो चोद दूंगा”। फिर अशोक की तरफ इशारा करके बोला, “ये भी चोद देगा। लड़कों की भी तो चोदता ही है। तो फिर आप की चोदने में क्या परेशानी है”?
नेहा दीप्ती से पूछा, “क्रीम कहां हैं जीजी “?
दीप्ती बोली, “मैं लाती हूं”।
दीप्ती चूतड़ मटकाती हुई गयी क्रीम ले आई। क्रीम ले आयी और नेहा के हाथ में पकड़ा दी।
दीप्ती के चूतड़ों की मटकन देख कर दोनों लड़कों के मुंह खुले के खुले रह गए।
“सोच रहे होंगे, ये चूतड़ चोदने हैं आज हमें “?
नेहा ने क्रीम अशोक को दी।
नेहा ने कहा, “अब सुनो तुम दोनों। आज तुम दोनों ने चूत के साथ साथ हमारी गांड भी चोदनी है – समझे “?
नेहा ने फिर कहा, “और एक बात और ध्यान से सुनो। माना तुम लड़कों की गांड चोदते हो। लेकिन यहां तुमने लड़कियों की गांड चोदनी है। अब तुम पूछोगे की फरक क्या है ? गांड तो गांड ही है”।
नेहा का लेक्चर जारी था। “अब सुनो भोसड़ी वालो दोनों अशोक और जनक। जब तुम किसी लड़के की गांड चोदते हो तो तुम ये अपनी मर्दानगी साबित करने लिए गांड चोदते हो। बाद में उस लड़के को बोलते हो अबे भूल गया साले कैसे तेरी गांड मारी थी मैंने”?
दोनों लड़के अशोक और जनक ही ही ही ही करके हंसने लगे। मुम्बई वाली तजुर्बेकार नेहा बात करने में कुशल थी, “यहां तुमने लड़कियों की गांड चोदनी है मजे देने के लिये और मजे लेने के लिए। लड़कों की गांड समझ कर मत चोदना – आराम से चोदना धीरे धीरे ….खुद भी हमारी गांड चोदने के मजे लेना और हम दोनों को गांड चुदाई के मजे देना – जीजी को ख़ास करके। समझे “?
दोनों ने सर हिलाये – दोनों इक्क्ठे बोले “हां जी समझ गए”।
नेहा ने अशोक को कहा, ”अशोक तू जीजी के पीछे जा। बढ़िया चुदाई कर जीजी की गांड की। जीजी को आज तारे दिखादे। बस गांड में लंड आराम से बिठाना – जीजी की गांड कुंवारी है। एक बार तेरा लंड जीजी की गांड में बैठ गया तो बस फिर मत रुकना चाहे जीजी भी बोले तो भी नहीं “।
फिर नेहा ने जनक से कहा, “चल जनक हो जा शुरू। दिखा दे आज कैसा बढ़िया गांडू है तू “।
जनक हे हे ही ही कर के हंसा, “बढ़िया गांड चुदाई करूंगा जी आप की। मैंने भी कई दिनों से गांड नहीं चोदी “।
नेहा ने सोचा कहीं सच ही तो गांडू – समलिंगी नहीं ये जनक।
अच्छा है अगर ऐसा यही तो। बढ़िया गांड चोदेगा। जनक नेहा कि गांड पर क्रीम मल रहा था। उधर अशोक ने ढेर सारी क्रीम लगा कर उंगली दीप्ती कि गांड के छेद में घुसेड़ दी। आआआह आआह, दीप्ती ने आवाज निकली। अशोक को पता था कि उंगली गांड में डालने से दर्द नहीं होता। ये मजे कि ही आवाज थी।
अशोक सोच रहा था कि अगर आज इस भारी चूतड़ों और भारी चूचियों वाली की चुदाई की तस्सली करवा दी तो आगे के लिए चुदाई का रास्ता खुल जाएगा। अशोक ने क्रीम गांड पर अच्छे से मली। पहले आठ दस बार एक उंगली अंदर कि फिर पंद्रह बीस बार दो उंगली अंदर। गांड का छेद मुलायम हो गया था।
अशोक दीप्ती के भारी चूतड़ों को मसल रहा था बीच में एक हल्का धप्प भी लगा देता – चट्ट चट्ट कि आवाज़ के साथ। अशोक को मोटी गांड पर धप्प लगाने में मजा आ रहा था। अशोक के हर धप्प के साथ ही दीप्ती की आवाज आती आआह अशोक। मजे की आवाज।
अशोक ने लंड दीप्ती कि गांड पर रक्खा और धीरे धीरे अंदर डाला। पांच मिनट के अंदर बाहर करने के बाद लंड का सुपाड़ा अंदर बैठ गया। एक कुशल गांडू के तरह सुपाड़ा वहीं घुमाया। बाहर निकाला – क्रीम लगाई और फिर बिठा दिया। काफी बार ऐसा करने के बाद जब सुपाड़ा आराम से फिसल कर अंदर जाने लगा तो अशोक ने आधा लंड अंदर डाल दिया।
दीप्ती सोच रही थी “अशोक का आधा लंड भी दीप्ती के पति अजय के पूरे लंड के बराबर था”। अशोक लंड बाहर निकालता अंदर करता – बाहर निकालता अंदर करता – मगर आधा ही। अशोक को मालूम था जल्दी ही दीप्ती चूतड़ हिला कर पूरा लंड मांगेगी।
जब वो किसी लड़के की पहली बार गांड चोदता था तो वो भी चूतड़ हिला कर पूरा लंड अंदर डालने का इशारा करता था। दीप्ती का मन अब पूरा लंड लेने का हो रहा था। उसने चूतड़ हिलने शुरू कर दिए। आगे पीछे – दांयें बाएं। गांड में क्रीम तो लगी ही हुई थी। अशोक का आधा लंड अंदर ही था। वहीं से अशोक ने थोड़ा थोड़ा थोड़ा कर के पूरा लंड अंदर बिठा दिया और रुक गया।
दीप्ती ने सर घुमा कर अशोक कि और देखा – मगर बोली कुछ नहीं। क्या दीप्ती गांड चुदाई के लिए तैयार हो चुकी थी”? गांड चुदाई में कुशल अशोक के हिसाब से तो हो चुकी थी। अशोक ने लंड एक बार और बाहर निकला। क्रीम लगाई लंड पर भी, गांड पर भी और गांड के अंदर भी।
“मुर्गी झटकने का वक़्त आ गया था”। अशोक ने लंड गांड के छेद पर रखा और एक ही बार में झटके से अंदर डाल दिया। दीप्ती ने एक लम्बी सिसकारी ली “आआआआह”। अशोक के लिए अब सोचने का वक़्त नहीं था की ये दर्द कि सिसकारी थी या मजे की। उसका अपना लंड फनफना रहा था। उसने धक्के लगाने शुरू कर दिए – पूरा लंड बाहर फिर पूरा अंदर।
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गाड़ी का इंजन स्टार्ट हो चुका था बस अब इंजन ने स्पीड पकड़नी थी। पंद्रह बीस धीरे के धीरे धक्कों के बाद अशोक शुरू हो गया – एक पेशेवर गांडू कि तरह। दीप्ती को चूतड़ों से पकड़ कर ताबड़तोड़ धक्के लगा रहा था। दीप्ती कसमसा रही थी ऊई उई कर रही थी – शायद पहली गांड चुदाई का दर्द था। मगर अब अशोक नहीं रुकने वाला था।
एक तो उसे भी टाइट गांड को रगड़ने का मजा आ रहा था, दुसरे चुदाई की तजुर्बेकार नेहा ने भी यही कहा था, “जीजी को आज तारे दिखादे। बस गांड में लंड आराम से बिठाना – जीजी की गांड कुंवारी है। एक बार तेरा लंड जीजी की गांड में बैठ गया तो फिर मत रुकना “। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
वही अशोक कर रहा था। कुंवारी गांड वाली दीप्ती को तारे दिखा रहा था। पूरा लंड ले रही थी। मस्त चुदाई करवा रही थी दीप्ती। चूतड़ों को झटके दे दे के एक तो अशोक को भी टाइट गांड को रगड़ने का मजा आ रहा था, दुसरे नेहा ने भी यही कहा था, “जीजी को आज तारे दिखादे। बस गांड में लंड आराम से बिठाना – जीजी की गांड कुंवारी है। एक बार तेरा लंड जीजी की गांड में बैठ गया तो फिर मत रुकना “।
वही अशोक कर रहा था। कुंवारी गांड वाली दीप्ती को तारे दिखा रहा था। पंद्रह मिनट कि गांड चुदाई से गांड पर लगी क्रीम की झाग बन गयी थी। दीप्ती कि चूत भी पानी पानी हो रही थी। वो जोर जोर से चूत का दाना रगड़ रही थी कभी भी झड़ सकती थी। दीप्ती ने से घुमा कर अशोक को कहा, “अशोक मेरी चूत झड़ने वाली है। चूत का पानी निकल दे फिर आ जाना गांड पर”।
अशोक ने लंड गांड में से निकाला, दीप्ती के चूतड़ों को जरा सा ऊपर उठाया। अब चूत लंड के बिकुल सामने थी। चूत में से लेसदार पानी नीचे टपक रहा था। एक ही झटके से अशोक ने लंड अंदर डाल दिया। लंड फिसल कर अंदर चला गया। आवाज आयी “फच्च”। लंड का सिरा पानी पानी हुई चूत पर टकराने के आवाज।
उधर जनक नेहा कि मस्त गांड चोद रहा था। जिस तरीके से जनक नेहा की गांड चोद रहा था, नेहा को यकीन हो गया था कि जनक लौंडेबाज़ ही था। गे – समलिंगी – गांडू। नेहा ने सोचा अच्छा ही है एक बार गांड कि बढ़िया चुदाई कर के गांड में अपना गर्म चिकना पानी छुड़ा दे फिर अशोक से चूत चुदवायेगी।
सच भी यही था। जनक जितने मजे से नेहा की गांड चोद रहा था – क्या गज़ब के धक्के लगा रहा था। जनक ने नेहा की कमर टाइट पकड़ी हुई थी। धक्के लगाता था मगर चूतड़ों को आगे नहीं जाने देता था। नेहा ने सोचा ऐसी चुदाई तो कभी भी नहीं हुई।
फिर दिमाग़ में आया “ऐसी क्या उनकी तो कैसी भी चुदाई नहीं हुई”। अशोक के धक्कों ने दीप्ती को झड़ने के निकट ला दिया था। अशोक के लम्बे लम्बे धक्कों ने दीप्ती को जन्नत की सैर करवा दी थी ….आआह अशोक मजा आ रहा है लगा दम फाड़ दे …. अशोक ….आअह आअह ….आअह। हो गया अशोक निकल गया मेरा पानी।
अशोक इतनी जोर धक्के लगा रहा था की आठ फुट लम्बा चौड़ा बेड भी हिल रहा था। जैसे ही दीप्ती हिलनी बंद हुई। अशोक ने दीप्ती के चूतड़ छोड़ इसकी कमर पकड़ ली ताकि वो मजा आने के बाद आगे लेट ही ना जाये। अशोक ने लंड चूत में से निकाला और एक झटके साथ गांड में डाल दिया।
गांड के अंदर क्रीम की झाग, अशोक के लंड पर दीप्ती की चूत का चिकना पानी। लंड गांड को चौड़ा करता हुआ फिसल कर अंदर चला गया। दीप्ती ने सिसकारी ली, “अब आया मजा “। अशोक लग रहा था अभी भी नहीं झड़ने वाला था। उधर उंगली से चूत रगड़ रगड़ कर नेहा भी अपना पानी छुड़ा चुकी थी, मगर जनक का लंड अभी भी खड़ा था तना हुआ सख्त।
पांच सात मिनट के बाद जब नेहा का मजा उतर गया तो धक्के लगा रहे जनक से कहा, “जनक अब जा तू जीजी की गांड चोद। पूछ लेना लंड का पानी जीजी को चूत में लेना है या गांड में”। जनक खुश हो गया। इस लिया नहीं कि नेहा की गांड चोदने में उसे मजा नहीं आ रहा था।
इसलिए की दीप्ती के भारी चूतड़ देख कर किसी का भी मन उन चूतड़ों को पकड़ने का हो सकता था, चूमने,चूसने, चाटने और दांतों से हल्का हल्का काटने का हो सकता था। और अब वही हो रहा था। जनक चूतड़ों पर जहां क्रीम नहीं नहीं लगी थी वह चूतड़ चाट रहा था और हल्के हल्के दांत मर रहा था।
दीप्ती ने पीछे मुड़ कर देख कर कहा, “जनक क्या कर रहा है, बड़ा मजा आ रहा है। थोड़ा और जोर जोर से काट”।
जनक पक्का ही लौण्डेबाज़ था। गांड के साथ क्या करते हैं उसको पता था। दीप्ती को मस्त कर दिया था उसने।
नेहा ने अशोक को बुलाया, “आजा अशोक मेरी चूत रगड़, अपना गर्म पानी मेरी चूत में डालना”।
अशोक नेहा पास गया और चूत में लंड पेल कर चुदाई करने लगा। उधर दीप्ती जोर जोर से चूतड़ हिलने लगी। सर घुमा कर दीप्ती ने कहा, “जनक पेल गांड में, रगड़ मेरी गांड। जनक ने लंड गांड के छेद पर रक्खा और अंदर डालते ही धक्के लगाने लगा”।
दस मिनट चोदने के बाद जनक रुका और दीप्ती से पूछा “मैं झड़ने वाला हूं। बताईये गांड में डालूं या चूत में डलवाना है”।
दीप्ती जरा जोर से बोली, “तू रुक क्यों गया जनक। जहां मर्जी डाल मगर धक्के लगा जोर जोर से लगा। सुजा मेरी गांड आज”।
दस मिनट तक जोरदार धक्के लगाए जनक ने और डाल दिया ढेर सारा गर्म पानी दीप्ती की गांड में। दीप्ती ने जोरदार सिसकारी ली, “अअअअअह जनक …..आअह भर दी तूने आज मेरे गांड। मेरी चूत भी फिर से पानी छोड़ गयी है साले “।
दीप्ती सीधी आगे ढेर हो गयी। गांड में जनक का सफ़ेद लेसदार पानी बाहर निकल रहा था। जनक वहीं बेड पर बैठ गया और दीप्ती के चूतड़ चाटने लगा। लौण्डेबाज़ों की पक्की निशानी।
दीप्ती ने जनक से कहा, ”जनक वो कुर्सी पर तौलिया पड़ा है, जरा ला अपनी गांड साफ़ कर लूं। जनक तौलिया लाया और बोला मैं साफ़ करता हूं। दीप्ती की गांड में से अपना वीर्य साफ़ करने लगा, साथ ही दांतों से काटने लगा।
दीप्ती बोली, “भोसड़ी के जनक क्या कर रहा है, फिर गरम हो जाएगी मेरी गांड। दुबारा चोदनी है क्या ?
जनक भी बेशर्मी से बोला, “जी हां चोदनी है “।
दीप्ती बोली “और कितना चोदोगे सालो तुम लोग। चल आ जा फिर काट मेरे चूतड़ों पर। आजा लेट जा मेरे ऊपर। भींच मुझे, चोद मुझे। साले फिर से गरम हो गयी मैं”। वाह री हरियाणवी भाषा।
कमाल था। ये दीप्ती और नेहा तो लगता था कभी ढंग से चुदी ही नहीं थी। सच भी तो यही था। अशोक मजे से नेहा की गांड और चूत पीछे से चोद रहा था। गज़ब का पक्का चुदकड़ लग रहा था अशोक। अशोक ने नेहा की कमर टाइट पकड़ी हुई थी। धक्के लगाता था मगर चूतड़ों को आगे नहीं जाने देता था।
जनक दीप्ती की गांड और चूत चुदाई में मस्त था और अशोक नेहा की चूत चोदने में। कौन कितनी बार झड़ गया इसकी कोइ गिनती नहीं थी। किसके लंड का पानी किसकी चूत में गिरा, किसके लंड का पानी किसकी गांड को गरम कर गया, कुछ पता नहीं।
बारह बजे के आस पास लड़के आये थे, चार बज गए थे। मतलब चार घंटे चुदाई चली थी। सब थक चुके थे। लड़के ज़्यादा ही थके पड़े थे। मेहनत तो उनकी ही हुई थी। दोनों ने उठ कर कपड़े पहने और चलने के लिए तैयार हुए। दीप्ती ने कहा “रुको”। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
और दीप्ती गांड मटकाती अंदर दुसरे कमरे में गयी। वापस आ कर 2000 का नोट उसने अशोक के हाथ में दे दिया। “हजार तेरा और हजार जनक का”।
अशोक ने कहा “नहीं जी हम ऐसे पैसे नहीं लेंगे। काम तो हमने कुछ किया नहीं”।
“अबे काम नहीं किया तो क्या हुआ। मगर जो कुछ किया उसके बदले में काम का नुक्सान तो हुआ। बाप पूछेगा तो क्या बोलोगे – चुदाई करते रहे ? और अगर उसने कह दिया हमे भी करवाओ चुदाई तो फिर” ?
लड़के ही ही ही ही करके हंस पड़े और रूपए ले लिए।
दीप्ती ने पूछा, “अब कब आओगे” ?
“जल्दी ही आएंगे जी। अशोक ही बोला”। और वो बाहर की तरफ निकल गए।
दीप्ती ने नेहा से कहा, “नेहा दरवाजा बंद कर आ, थोड़ी एक दूसरी की चूत चूस लें”।
“ठीक है जीजी”। नंगी नेहा दरवाजा बंद करने उठी – दरवाज बंद करने ही वाली थी कि अशोक आता दिखाई दिया – अकेला ही।
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नेहा दरवाजे के पास ही थी। उसने पूछा, “क्या हुआ अशोक, फिर चोदना है क्या”?
अशोक ने कहा, “नहीं जी कुछ बात करनी थी। जनक के सामने नहीं करना चाहता था “।
“आजा”, नंगी नेहा चूतड़ हिलाती हुई आगे आगे और अशोक पीछे पीछे – दोनों अंदर आ गए।
नेहा ने कहा, “हां बोल”।
अशोक ने कहा, “बात ये है जी कि कल हमारे पापा हम दोनों को कही और भेज रहे हैं। परसों जनक दो दिनों के लिए दादरी अपनी दीदी की ससुराल जा रहा है। उन दो दिनों में यहां आ सकता हूं”।
दीप्ती ने पूछा, “तो क्या अकेला तू आएगा ? देखा नहीं कैसे चुदवाती हैं हम दोनों। गांड भी और चूत भी। दो दो तीन तीन बार मजा आता है हमें दो दो तीन बार पानी छोड़ती हैं। दोनों को संभाल लेगा तू अकेला”?
“जी आप अगर मान जाएं तो मेरा एक दोस्त है साहिल।अच्छे घर का है। इतना बड़ा लंड है उसका”। अशोक ने उंगली कर अंगूठे को गोल कर के बताया। “खाली गांड ही चोदता है वो भी लड़कों की। कोई लड़की पटी नहीं उससे अभी तक। आधे आधे घंटे एक नहीं झड़ता और चार चार बार गांड चोद देता है और खुद एक बार ही झड़ता है”।
“बढ़िया मजा आएगा जी आपको उससे गांड चुदवाने में – कसम से”। अशोक अपने गले पर हाथ रख कर बोला।
दीप्ती ने कहा, “अबे जब दो दो गर्म चूतें सामने होंगी तो चूतों कि चुदाई क्यों नहीं करेगा तेरा ये दोस्त” ?
अशोक सकपकाया, “नहीं जी मेरा मतलब था कि गांड बहुत बढ़िया से चोदता है”।
दीप्ती बोली, “तुझे कैसे पता, तेरी गांड भी चोदता है क्या वो “?
नेहा ने पूछा, “और ये साहिल – ये तो शहरों वाला नाम लगता है रमेश विनय जनक ये तो कुछ पुराने से नाम हैं”।
अशोक बोला, “असल में जी वो हमारे दुकान के मालिक सेठी जी का बेटा है। बाहरवीं पास कर ली है। अब कहता है बीए प्राइवेट करूंगा। सेठी जी कहते हैं जो मर्ज़ी कर, संभालनी तो तूने दूकान ही है। इस लिए इधर उधर घूमता रहता है”।
दीप्ती और नेहा ने एक दुसरे के तरफ देखा। नेहा बोली। “ठीक है ले आ। पर एक शर्त है”।
“जी”? अशोक के चेहरे पर असमंजस के भाव आये।
“दोनों को दोनों दिन आना पडेगा”।
अशोक बोला, “जी ठीक है”।
नेहा बोली “एक बात और बता अशोक। तुम सालो इतनी गांड चोदते हो, लंड डालने से पहले गांड पर लगाते क्या हो जो लंड आराम से गांड के अंदर चला जाए”।
अशोक ने जवाब दिया, “जी मैं तो थूक ही लगा लेता हूं या दस रुपये वाली ‘बोरो प्लस’ की ट्यूब ले लेता हूं। साहिल कुछ ले कर आता है केमिस्की की दूकान से। जब वो लाता है मुझे भी लगाने देता है। उसको लगाने से लंड फिसल कर गांड में चला जाता है”।
नेहा बोली, ” जैल लगाता है तेरा ये साहिल। साहिल को बोलना साथ ले कर आएगा खूब सारी, दो दो गांडों को चोदना है तुम लोगों ने”।
अशोक बड़ा ही खुश हुआ, ”जी अच्छा “। और वो तेज तेज चलता हुआ चला गया।
नेहा दीप्ती से बोली “चलो जीजी अब एक दूसरी की फुद्दी चूसें चाटें। इन बाहर वालों से तो खूब चुदवा लिया आज”।
दीप्ती नीचे लेट गयी। बड़े बड़े चूड़ों के कारण नीचे तकिये की तो जरूरत ही नहीं थी। चूट वैसे ही उठी हुई थी। नेहा ऊपर लेट गयी और दोनों एक दूसरी की चूट चाटने लगी। झड़ने का तो पता नहीं चला क्यों की इतनी चुदाई के बाद तो पहला मजा ही अभी तक खत्म नहीं हुआ था। आधे घंटे की चूट चुसाई, के बाद दोनों नहाने चली गयी। नहा कर कपड़े पहन कर बेड पर ही लेट गयी।
नेहा बोली “जीजी अब दो दिन तो मेरी भी चूत और गांड की ईद हो जाएगी। फिर हफ्ता खत्म। मैं नॉएडा जा कर आपका रबड़ का लंड आर्डर कर दूंगी। ये बता दो कितना बड़ा चाहिए”।
दीप्ती ने पूछा,” तुम्हारा वाला कितना बड़ा है”।
“जीजी मेरा सात इंच लम्बा है और दो इंच से थोड़ा कम मोटा है। आप सात इंच लम्बा और दो इंच मोटा मंगवा लो। अशोक के लंड के बराबर लम्बा और उसके लंड से थोड़ा मोटा। और लंड के ऊपर उभरे हुए दाने घिसाई रगड़ाई के लिए”।
दीप्ती बोली, ठीक है लेकिन एक बात बता, तूने इन दोनों, अशोक और जनक के लंड हाथ के अंगूठे और उंगली में क्यों पकड़े थे ? क्या देख रही थी कितने मोटे हैं “?
नेहा बोली ,” हां जीजी, ये पते कि बात है। जो लंड हाथ के अंगूठे और बीच कि उंगली में ना समाये, ऐसे मोटे लंड से गांड नहीं चुदवानी चाहिए। गांड का कचरा हो सकता है। हमने गांड मजे लेने के लिए चुदवानी है, फड़वाने के लिए नहीं”।
“नॉएडा में राकेश से भी मेरा गांड चुदवाने का बड़ा मन था मगर उसका लंड ज्यादा मोटा था”।
“और एक बात और जीजी। इंडिया में अभी ये सेक्स टॉयज ऑन लाइन नहीं आते। ये एक ख़ास दुकान वाले को बोलना पड़ता है। वो मंगवा कर फिर अपने ख़ास कूरियर वाले से ये पैकेट भेजता है। पैकेट के ऊपर कुछ और लिखा होता है मगर अंदर क्या है ये कूरियर वाले को ही पता होता है। ये पैकेट किसी के हाथ न पड़ जाए इस लिए कूरियर वाला अपने सामने पैकेट खुलवाता है।
दीप्ती बोली ,”तो “?
“तो जीजी कूरियर वाला आप को लंड दिखायेगा, और इस बीच उसका अपना लंड खड़ा हो गया तो ? जीजी अगर कूरियर वाला देखने में मस्त हुआ तो देख लेना क्या हो सकता है – मेरा मतलब अगर उससे चुदाई की बात बनती हो तो देख लेना “।
लेटे लेटे नेहा बोली, “जीजी एक बात बोलूं। इस बार विपिन आये तो उसको ट्राई करो। जवान लड़का है, बढ़िया मोटा लम्बा अलग तरह का लंड है – अलग तरह का मजा देने वाला। अगर पट गया तो सही चोदेगा। घर की बात घर के अंदर रहेगी। और साल में तीन चार बार तो आता ही है।
बात जारी रखते हुए नेहा ने कहा, “फिर ये जनक, अशोक, साहिल और बीस साल का विपिन। आपका तो चूत और गांड चुदाई का काम बढ़िया हो जाएगा”।
दीप्ती नेहा से बोली, ” नेहा तू ये कैसे कह रही है। क्या तूने चुदवाई है विपिन से ?
“नहीं जीजी चुदवाई तो नहीं मगर चुदवाते चुदवाते रह गयी”।
दीप्ती हैरान हो गयी, “वो कैसे नेहा, पूरी बात बता”।
“जीजी आपको याद है जब वो पिछली छुट्टियों में यहां आया था तो उसे विनय से अपनी पढ़ाई के बारे में कुछ बात करनी थी और वो दो दिन के लिए हमारे पास नोएडा आया था”?
दीप्ती बोली, “हां याद है”।
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“एक दिन विनय ने लेट आना था। ऑफिस में कुछ काम था। उस रात को मैं पानी लेने रसोई की तरफ गयी तो विपिन के कमरे का दरवाजा पूरा बंद नहीं था। मैंने ऐसे ही अंदर देखा तो विपिन लंड हाथ में ले कर मुट्ठ मार रहा था”।
“मेरी तो चूत फड़कने लग गयी। मैं अंदर गयी और बेड पर बैठ कर विपिन से बोली, “विपिन मुट्ठ क्यों मार रहा है, मुझे बोलता मैं तेरा काम कर देती। ये कह कर मैंने उसका लंड मुंह में ले लिया”।
“जीजी हैरानी की बात है विपिन ने मुझे कुछ नहीं कहा, उलटा मेरी चूचियां दबाने लगा। जीजी उसके लंड के खासियत है की उसके लंड का टोपा या सुपाड़ा जो भी कह लो लंड से बहुत बड़ा है। ऐसे लंड किसी किसी के होते हैं और चुदाई में बहुत मजा देते हैं”।
नेहा दीप्ती से बोली, “जीजी विपिन का लंड सख्त होने लगा। वो मस्ती में आ ही रहा था कि दरवाजे के घंटी बज गयी – विनय आ गया था”।
“साले चूतिये से खुद से तो चुदाई होती नहीं किसी और से भी चुदाई होने नहीं देते”।
“मैं उठ गयी, विपिन ने भी उठ कर दरवाजा बंद कर लिया ”।
नेहा की बात सुन कर दीप्ती खुश हो गयी, “कमाल है !!! अच्छा हुआ तूने बता दिया”। बीस साल के लड़के से चुदाई करवाने का तो मजा भी बड़ा आएगा – और लंड भी कैसा कमाल वाला – घर की बात घर में। इस बार आएगा तो देखती हूं कैसे पटाया जा सकता है “?
नेहा ने कहा “जीजी ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। मुझे भी उसने कहां ना बोला जब उसका लंड मैंने मुहं में लिया। उल्टा मेरी चूचियों के निप्पल मसलने लगा था”।
रात को आठ बजे अजय आया। आते ही हाल दुहाई मचा दी। अजय ने दीप्ती को बैग तैयार करने को बोला। अगले दिन सुबह आठ बजे की सूरत की फ्लाइट थी तीन दिन का ट्रिप था। चार बजे सुबह घर से निकलना था।
अजय बोला मैं नीचे वाले कमरे में सो जाऊंगा सुबह टैक्सी आ जाएगी। चलो खाना लगा दो जल्दी सोना है। थका हुआ भी हूं नेहा तो तुम्हारे साथ ही है। विनय बता रहा था हफ्ते के लिए सिंगापुर जा रहा है। कितने दिनों का प्रोग्राम है नेहा का ? ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दीप्ती बोली “एक हफ्ते का ही है। मगर नेहा बोल रही थी अगर विनय का प्रोग्राम आगे बढ़ा तो वो फोन कर देगा”।
अजय बोला, “तो ठीक है, मैं नहा कर फ्रेश हो जाता हूं। तुम खाना लगा दो”।
खाना खा कर अजय बैग ले कर नीचे सोने चला गया। नेहा और दीप्ती भी लेट गयीं एक दुसरे को बाहों में ले कर – चूचियों से चूचियां सटा कर – दबा कर। हो सकता ही रात को एक दूसरी की चूत, चूतड़ों की चुसाई भी कर लें। अजय भी तो नहीं था आस पास। बस दो अकेली प्यासी चूतें।
दीप्ती और नेहा के लिए अगला दिन गुजारना भारी हो रहा था क्योकि कोइ चुदाई नहीं थी। सूखा ही निकलने वाला था वो दिन। हालांकि पिछले दिन की जनक और अशोक की चुदाई ने दीप्ती और नेहा की तस्सली कर दी थी और अब दस बारह पंद्रह दिन चुदाई न भी हो तो भी चल सकता था।
मगर नेहा नॉएडा वापस जाने से पहले दीप्ती की चुदाई का पक्का इंतज़ाम का के जाना चाहती थी जिससे दीप्ती किसी गलत आदमी के हत्थे ना चढ़ जाए और पूरी ज़िंदगी का बवाल पाल ले। दीप्ती लाख जबान की तेज थी मगर चालाक नहीं थी।
दीप्ती को याद आया की उन्होंने अशोक और साहिल को आने का टाइम तो दिया ही नहीं। चुदाई के शौक में कहीं सुबह जल्दी ही ना आजायें। उसने नेहा को ये बात बताई। नेहा ने भी कहा “बात तो सही है जीजी। काम वाली के होते हुए ही ना जाएं चुसाई चुदाई के शौक में”।
फिर नेहा बोली, “जीजी काम वाली को बोलो हमने सुबह कहीं जाना है इस लिए नौ बजे तक काम कर के चले जाये। दोनों ने गांधी नगर से आना है। नौ के तो बाद में ही आएंगे”।
काम वाली आयी तो दीप्ती ने उसको अगले दिन जल्दी काम खत्म करने को कह दिया। वही हुआ। अगले दिन काम वाली पूरे नौ बजे काम खत्म कर के चली गए और दस बजे दोनों लड़के स्कूटी पर आ गए। स्कूटी वो अंदर ही ले आये और नीचे आंगन में खड़ी कर दी।
अशोक ने भी बढ़िया कपड़े डाले हुए थे लग ही नहीं रहा थी की यही कल वाला खराब ज़िपें ठीक करने वाला लड़का है। साथ वाला लड़का तो लग ही किसी कालेज का स्टूडेंट रहा था। साफ़ सुथरा, सुन्दर ब्रांडेड कपड़ों में सजा हुआ। लंड खुजलाता आ रहा था। दीप्ती और नेहा एक दूसरी को देख कर हंस दी।
आते ही बोला नमस्ते मैडम। उसको देख अशोक ने भी नमस्ते की।
नमस्ते का जवाब दे कर नेहा ही बोली, “तुम हो साहिल “?
“जी मैडम”, साहिल बोल। और साहिल ने एक बार फिर लंड को खुजला कर पैन्ट में ठीक से बिठाया।
नेहा की फिर से हंसी छूट गयी, “क्या हुआ बड़ा खुजला रहे हो। बड़ी खुजली मची हुई है क्या “? नेहा ने साहिल के लंड की तरफ इशारा कर के कहा।
वो भी बड़ी ढिठाई के साथ बोला, “मैडम इसमें तो परसों से ही खुजली मची हुई है जब से इसने आपके दोनों के बारे में बताया”। साहिल ने अशोक की तरफ इशारा कर के कहा।
“आओ बैठो, फिर भी आ तो बड़ी जल्दी गए तुम लोग “।
साहिल वैसे ही फुकरों की तरह बोला, “मैंने तो इसको कहा था की ग्यारह बारह बजे चलेंगे। सुबह सुबह कौन सेक्स करता है। हमे जल्दी आना पड़ा इसके बाप के कारण। जैसे ही उसे पता लगा की आज ये ज़िप ठीक करने नहीं जाएगा, इसको बैंक का काम बता दिया। पता था ना की आज चार सौ पांच सौ घर नहीं लाएगा ”।
दीप्ती और नेहा फिर हंस पडी, “कोइ बात नहीं, तू तो है। जब तक ये अपना बाहर का काम करेगा, तू यहां अपना काम करना। बाहर का काम भी तो जरूरी है – कब जाएगा ये “?
“अभी जाएगा, घंटे में लौट आएगा” और फिर स्कूटी की चाबी अशोक को दे कर बोला, “जा बे। मगर अब अगर बाप ने कुछ और काम बोला तो साफ़ मना कर देना “।
दीप्ती और नेहा को साहिल की बातों में मजा आ रहा था। सोच रहीं थीं, दोनों आये हैं तो चुदाई तो अब करके ही जायेंगे ही। जल्दी भी क्या है – पूरा दिन ही अपना है।
“और वैसे तो रात भी अपनी ही है”। घर वाला घर नहीं हमे किसी का डर नहीं।
“अच्छा साहिल ये बता तू करता क्या है। अशोक और जनक बता रहे थे की बाहरवीं पास के तुम प्राइवेट बीए की तैयारी कर रहे हो”।
साहिल बोला, “मैडम आधी बात सही है, मैंने बाहरवीं पास की है। प्राइवेट बीए वाली बात मैंने इनको बताई है, मगर मैं ऐसा कुछ नहीं कर रहा।
“मैडम एक बात बताओ आप, अगर मैंने दूकान पर ही बैठना है तो मुझे तो नोट गिनने आने चाहियें। बीए पास करके मैं कौनसी दूकान की कमाई बढ़ा लूंगा”।
“आज कल कंप्यूटर का जमाना है मैडम, इस लिए कंप्यूटर चलाना आना चाहिए। इस लिए मैं कंप्यूटर सीख रहा हूं”।
नेहा बोली “और तेरे पापा ? वो क्या कहते हैं “?
“मैडम उनके पास फुरसत कहां इन बातों के लिए ? वो तो इस अशोक के बाप से भी ज़्यादा खड़ूस हैं”।
अब तो दीप्ती और नेहा खुल कर हंसी, “अच्छा ? ऐसा क्यों”।
साहिल बोला, “अब मैडम आप से छुपाना”।
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“मेरे पाप की बिजली के सामान की दूकान है – बड़ी दूकान। आस पास की बड़ी बड़ी फैक्ट्रियों में हमारी सप्लाई है ग़ाज़ियाबाद नॉएडा तक। मेरा बड़ा भी भाई – दो साल बड़ा भाई – बाहर का काम देखता है। मेरा पापा गल्ले पर किसी को नहीं बैठने देता। महीने की आठ से दस लाख से ज़्यादा हमारी आमदन है मैडम – मतलब एक करोड़ से डेढ़ करोड़ से ज़्यादा हर महीने की बिक्री”।
“अब देखो आप”, साहिल दीप्ती और नेहा दोनों को बता रहा था। “तीन साल पहले जब मेरी मां को ब्रेस्ट कैंसर हुआ तो मेरा ये बाप ? मेरा बाप मेरी मां को उसको सरकारी हस्पतालों के चक्कर कटवाता रहा। ये नहीं हुआ की बढ़िया इलाज करवा के बचा ले उसे। विदेश ले जाए। इतना पैसा क्या गांड में लेना है या छाती पर रख के नरक में ले कर जाना है”।
दीप्ती और नेहा की तो हंसी ही नहीं रुक रही थी। दोनों सोच ये साहिल आज पहली बार घर आया है और इतना खुल कर बात कर रहा है। कमाल का लड़का है – मगर बातें तो कांटे के कर रहा है ?
साहिल बोलता रहा, “मर गयी मेरी मां। मैं तो कहता हूं, मेरे बाप ने मार दी”।
“और फिर पिछले साल 23 साल के मेरे भाई की शादी करवा दी – ये बोल कर कि घर में कोइ औरत होनी चाहिए – लक्ष्मी होनी चाहिए घर में। 20 साल की लड़की गुंजन के साथ – मेरे से चार छः महीने छोटी ही होगी लड़की और मेरी भाभी बन कर आ गयी”।
“अब मेरा बाप और भाई कहते हैं इसको भाभी जी बोलो। मैं नहीं बुलाता जी उसको भाभी जी, मैं तो गुंजन ही बुलाता हूं “।
“और मैडम और क्या बताऊं ? इतने जवान पति पत्नी – मेरे बाप ने शादी के बाद इनको हनी मून मनाने के लिए भी कहीं नहीं भेजा – कि चलो ढंग से चुदाई ही कर लेंगे”।
“शादी के महीने दो महीने ही तो होते हैं जब नए बियाहे जोड़े दिन में तीन तीन चार चार बार सेक्स करते हैं”।
“पैसा पैसा पैसा। काम का नुक्सान हो जाएगा। और मेरा भाई ? वो भी एक नंबर का भोसड़ी वाला है, बाप के सामने फटती है उसकी”।
दीप्ती और नेहा को साहिल की बातों में मजा आ रहा था। दीप्ती और नेहा तो जैसे कोइ कॉमेडी फिल्म देख रही थीं।
दीप्ती और नेहा ने मजे लेते हुए हंसते हुए उन्होंने पूछा, “अच्छा ? फिर “?
“फिर क्या, इन्हीं घटिया हरकतों के कारण मेरी मेरे बाप से नहीं बनती। हमारी रोज लड़ाई होती है। मैंने तो अपने बाप को बोल दिया है, मैं इस कचरे की दूकान में नहीं बैठूंगा”।
दीप्ती और नेहा सोच रहीं थीं कि दस लाख महीने की आमदन वाली दुकान को ये लड़का कचरे की दूकान बोल रहा है।
“मैडम हमारे साथ वाली दूकान भी हमारी ही है, मेरे दादा जी ने किराये पर दी थी। हलवाई की दुकान है – अब उसका काम नहीं चल रहा”।
“अब आप ही बताओ मैडम कहां हल्दीराम, बीकानेर, नत्थू स्वीट्स, अन्नपूर्णा और कहां ये चूतिये वर्मा स्वीट्स, शर्मा स्वीट्स”?
“अब हालत ये है की बुड्ढा किराया भी नहीं निकाल पाता। दूकान छोड़ने के बीस लाख मांग रहा है। मेरे हिसाब से तो ठीक ही है। बुड्ढे को और कुछ करना भी तो नहीं आता। बच्चे तो हलवाई बने नहीं – और अब बाप को पूछते तक नहीं”। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
“कम से कम मैडम बुड्ढे का मरने तक का तो खाने पीने रहने का इंतजाम होना चाहिए”। फिर उसने दोनों कि तरफ मुंह करके पूछा “ठीक है ना मैडम “?
“बिलकुल ठीक है”। दीप्ती और नेहा एक साथ बोलीं।
“और एक बात बताऊं मैडम, ये बुड्ढा हलवाई तो दस ही मान रहा था, मैंने ही कहा ताऊ बीस मांग – देगा मेरा बाप। तेरे बच्चे भी तेरा ध्यान तभी रखेंगे जब तेरे पास रोकड़ा होगा”।
दीप्ती और नेहा तो हंसते हंसते ही दोहरी होती जा रही थीं – “ये लड़का चुदाई करने आया है “?
नेहा बोले, “अच्छा फिर”?
साहिल बोला “फिर क्या, मैंने अपने बाप को बोला, मान जा मेरे बाप। वो बुड्ढा एक वकील को बुलाने की बात कर रहा है। वकील कह रहा था इन बिजली वालों को अदालतों के चक्कर कटवाऊंगा, तुझे चालीस दिलवाऊंगा”।
“और अब मेरा बाप बीस पर तैयार हो गया है। सही पूछो तो सीधी उंगली से घी निकलने का तो ज़माना ही नहीं”।
“अब वहां मैं अपनी अलग की दूकान – दूकान क्या जी, शो रूम खोलूंगा कम्प्यूटर्स, लैप टॉप, और मोबाइल फोन का”।
दीप्ती ने मजे लेते हुए कहा, “अच्छा एक बात बता साहिल, ये जनक और अशोक बता रहे थे तुझे खाली लौंडे ही चोदने का शौक है। लड़कियां तू नहीं पटाता”।
“इसमें भी उनको आधी बात ही पता है”।
“इनके साथ मैं लौंडे ही चोदता हूं। मगर मैडम एक बात बोलूं। लड़के चोदना कोइ सेक्स नहीं है। ये तो पानी छुड़ाने वाली बात होती – एक ठरक, दिमाग़ी फितूर। मुट्ठ मार के लंड हल्का कर लो या लौंडा चोद के एक ही बात है “।
“चूत हो या गांड। लड़की की ही होनी चाहिए l भगवान ने लड़की का शरीर इसी लिए तो सुन्दर बनाया है। सुन्दर चेहरा। चूचियां और मोटे चूतड़ जो चलते वक़्त ऐसे हिलते हैं। साहिल ने दोनों हाथ आगे पीछे बताया। बताते वक़्त वो दीप्ती को देख रहा था।
नेहा और दीप्ती की तो हंसी ही बंद नहीं हो रही थी।
नेहा ने पुछा, “और वो लड़कियां पटाने वाली बात “?
साहिल बोला, “मैं नहीं पटाता जी लड़कियां, ये बेकार के चक्कर होते हैं ये।यहीं एक गेस्ट हाउस वाला मेरा दोस्त है। कालेज की लड़कियां वहां गेस्ट हाउस में मजे के लिए चुदवाने आती हैं। लड़के चोदने के लिए जाते हैं। लड़के लड़कियां दोनों गेस्ट हाउस वाले को कमरे के लिए पैसे देते हैं। आपस में पैसे का कोइ लेन देन नहीं। चुदाई करो, मजे लो और छुट्टी”।
“लड़के लड़की को अपनी चुदाई के लिए जगह चाहिए होती है, वो ये गेस्ट हाउस वाला दे देता है। और मैडम कई बार तो ऐसा होता है लड़के लड़की एक दुसरे को जानते तक नहीं और चुदाई हो जाती है। मुझे तो ऐसी चुदाई में बड़ा मजा आता है”।
“अब ये बात मैं इन दोनों जनक और अशोक को क्या बताऊं। ये कर ही नहीं पाएंगे ऐसी चुदाई। एक बार जाने में दो ढाई तीन हजार तक भी लग जाते हैं “।
“और एक बात बताऊं जी आपको ? अशोक और जनक को पता नहीं चलनी चाहिए”।
दीप्ती बोली, “हां बता”।
” ये गुंजन चुदवाती है मुझसे”।
“तेरी भाभी “? दीप्ती होठों पर हाथ रख कर बोली।
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“हां जी लेकिन इसमे भी कसूर मेरे गधे भाई का ही है। बीस साल की नई ब्याही लड़की को तो रोज लंड चाहिए वो भी लम्बा और सख्त। अब उसे ये सब ना मिले तो वो क्या करे ? मन मार कर बैठ जाए ”?
“मैडम, सही पूछो तो लड़की की सही चुदाई की उम्र ही बीस और पचीस के बीच की होती है जब चूत अंदर से भी टाइट होती है। लंड जब अंदर जाता है तो चूट की साइडों से रगड़ खाता जाता है। वहीं तो लड़की को असली मजा आता है। एक बच्चा हो गया तो चूत अंदर से ढीली हो जाती है, फिर ये रगड़ाई का मजा नहीं आता, बस चुदाई के बाद पानी छूटने का मजा आता है। चूत की रगड़ाई तो खत्म सी ही हो जाती है”।
“और सुना है मैडम की विदेशों में तो तीस पैंतीस की उम्र के बाद लड़कियां अपनी चूत टाइट करवाती हैं, ऑपरेशन करवा के। अगर ऐसा है तो मैडम इस तरह के ऑपरेशन तो यहां भी होते ही होंगे। हमारे देश में ना तो पैसे की कमी है ना डाक्टरों की और ना ही चूत टाइट करवाने वालियों की।
साहिल की ये बात सुन कर दीप्ती और नेहा फिर हंसी और एक दूसरी की तरफ देखा। उन्हें भी तो इसी रगड़ाई का मजा आता है। सोच रही थी सही तो कह रहा है साहिल।
दीप्ती ने पूछा, “अच्छा ये बता साहिल, तूने गुंजन को कैसे पटाया”।
“मैंने नहीं पटाया जी। मैंने तो आपको बताया ही है, मैं नहीं पटाता लड़कियां। लड़कियों को खराब करने की मेरी आदत नहीं। ये तो मेरा भाई गुंजन के साथ बढ़िया और मनमाफिक चुदाई नहीं कर रहा था तो उसने मेरे साथ ट्राई मार ली”।
साहिल बोला, “हुआ ये जी की मैं एक दिन दोपहर में घर पर अपने कमरे में लेटा था कि गुंजन आ गई और मेरे पास ही बेड पर बैठ गयी। बोली कुछ नहीं”।
मैंने पूछा “क्या हुआ गुंजन”?
वो बोली “साहिल तेरे भैया क्या ऐसे ही हैं”?
मैंने गुंजन से पूछा ,”गुंजन मैं कुछ समझा नहीं, ऐसे मतलब कैसे?”
आगे की कहानी अगले भाग में… तब तक पढ़ते रहिये हमारी वासना डॉट नेट…
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