Long Paki Incest Sex Story
मैं, इशरत, एक खूबसूरत और पूरी आकर्षक लड़की कराची के एक कॉलेज में इंटर में पढ़ती हूँ। अपनी फूप्पो के यहाँ रिफ़ाए आम मालिर गई हुई थी और मेरा मामूल था कि कभी-कभी उनके यहाँ जाती थी कुछ दिनों के लिए। मेरी फूप्पो की दो बेटियाँ और एक बेटा था और हमारे आपस में बहुत ही दोस्ती थी। Long Paki Incest Sex Story
उस दिन मैं अपने कॉलेज के व्हाइट यूनिफॉर्म में मालिर हॉल्ट पर बस से उतरकर फूप्पो के घर जा रही थी। मैं फूप्पो की गली में थी और रोजाना उसी गली से जाती थी। काफी फासला था और गर्मी भी शदीद थी। पसीने में डूबी हुई जा रही थी कि गली ही में एक घर के दरवाजे पर एक लड़की को देखा जो कि शायद किसी का इंतजार कर रही थी। मैंने उसे पहली बार देखा था और दूर से ही बहुत हसीन लग रही थी।
खैर मैं ज्यों ही उसके करीब आई तो उसने मुझे मुस्कुराकर अपनी तरफ आने का इशारा किया। मैं उसके पास चली गई। उसने मुझे कहा कि क्या मैं एक बुक नोशीन को दे सकती हूँ। नोशीन मेरी फूप्पो की बेटी का नाम था। मैं समझ गई कि ये लड़की मुझे जानती है कि मैं नोशीन के घर रहने के लिए आई हुई हूँ। मैंने कहा कोई बात नहीं।
ये कहकर उसने मुझे अपने घर में अंदर आने को कहा और मैं सख्त गर्मी की वजह से अंदर चली गई। सामने एक लेडी जो कि काफी बूढ़ी थीं बैठी हुई थीं को देखकर मैंने सलाम किया तो उस लड़की ने कहा कि ये मेरी दादी हैं। वो मुझे अपने ड्रॉइंग रूम में ले गई जो कि एयर कंडीशन की वजह से काफी ठंडा था और मुझे बहुत ही सुकून मिल रहा था।
उसने मुझे एक मिनट रुकने को कहा और बुक लाने दूसरे कमरे में चली गई। थोड़ी देर बाद ही वो आई तो उसके हाथों में बुक के साथ-साथ एक ट्रे में शरबत भी था। मैं तो प्यास में मरी जा रही थी, शरबत पीकर कुछ सुकून हो गया। वो मेरे साथ बैठ गई सोफे पर और बुक मुझे थमा दी जो कि मैंने बैग में रख ली।
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उसने अपना नाम हूमा बताया और कहा कि वो नोशीन की क्लास फेलो है। मैंने अब उसे घूरकर देखा तो वो तो मुझसे भी हसीन थी और उसका कद भी काफी लंबा था, खूब गोरा रंगत और बहुत ही पूरी आकर्षक थी। वो अपनी और नोशीन की बातें करते हुए मुझे घूरकर देख रही थी और फिर मेरी तारीफ करने लगी।
मेरी उम्र 18 साल थी और वो नोशीन की क्लास फेलो के लिहाज से मुझसे कुछ बड़ी ही लग रही थी। वो मेरी खूब तारीफ कर रही थी और उसने बताया कि नोशीन ने उसे बताया था कि मैं उनके यहाँ रहने के लिए आई हुई हूँ। वो अब मेरे जिस्म की तारीफ कर रही थी जबकि वो तो मुझसे बहुत ज्यादा हसीन थी और फिर मैंने भी हूमा की तारीफ की।
अब हूमा मेरे जिस्म की तारीफ कुछ इस अंदाज से कर रही थी कि जैसे कोई लड़का तारीफ करता है। मुझे कुछ बुरा लगने लगा कि वो किस अंदाज में तारीफ कर रही थी कि मैं बहुत सेक्सी हूँ, मेरे बूब्स बहुत ही पूरी आकर्षक हैं और ये कहते हुए उसने मुझे किस करना शुरू कर दिया।
मैं घबरा गई, मुझे तो कभी किसी ने भी किस नहीं किया था और न ही इस तरह किसी ने मेरे जिस्म की तारीफ कभी की थी। हूमा ने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और मेरे बूब्स को भी टच करने लगी। मैंने कहा कि हटें, मुझे ये सब कुछ पसंद नहीं है और उससे दूर होने की कोशिश की लेकिन वो मेरी एक न सुन रही थी और इसी कशमकश में उसने मुझे सोफे पर लिटा दिया और मेरे होंठों गालों को चूमना शुरू कर दिया।
मैंने कहा कि हट जाइए वरना मैं शोर कर दूँगी लेकिन उसकी मेरी धमकी पर कोई असर नहीं हुआ और इसी दौरान उसने मेरी शर्ट ऊपर कर दी। मैंने ब्रा नहीं पहना हुआ था और उसने मेरे बूब्स पर अपने होंठ रख दिए। मैं गुस्से और खौफ से पागल हो रही थी लेकिन वो जबरदस्ती कर रही थी।
मैंने चीख मारी कि उसकी दादी सुन लें लेकिन उसने सुनी अनसुनी कर दी और उसी तरह मेरे ऊपर लेट गई। वो ताकत में मुझसे ज्यादा थी और अजीब लड़की थी कि बस दीवानी की तरह मेरे बूब्स को चूम रही थी और इसी दौरान उसने मेरी शर्ट मुकम्मल उतार दी। मैं ऊपर से नंगी हो चुकी थी और वो मेरे ऊपर लेटकर मेरे नंगे जिस्म को चूम रही थी।
मेरी आँखों में आँसू आ गए थे और मैं एक बार फिर चीखने लगी तो उसने कहा कि दादी ऊँचा सुनती हैं, कोई नहीं सुनने वाला। वो कहने लगी कि मेरा जिस्म देखकर वो पागल हो चुकी है। इसी दौरान उसने एक हाथ से अपनी सलवार उतार दी और नीचे से नंगी होकर वो मेरे ऊपर लेट गई। मैं बहुत ही डरी हुई थी और कुछ नहीं समझ में आ रहा था कि क्या करूँ।
मैंने उससे मिन्नत की कि प्लीज मुझे छोड़ दें, मुझे देर हो रही है। वो कहने लगी कि हम दोनों ही लड़कियाँ हैं और तुम भी मुझसे जो दिल चाहे कर सकती हो। मैंने कहा कि मुझे कुछ नहीं करना, बस मुझे छोड़ दो प्लीज। वो नहीं मानी और इसी दौरान उसने अपनी शर्ट भी उतार दी। नंगी होकर मेरे ऊपर लेट गई और खूब वाइड सोफे पर मेरे ऊपर लेट गई।
उसका नंगा होकर मेरे ऊपर लेटना मुझे बहुत ही बुरा लग रहा था। वो मेरे ऊपर इस तरह बैठ गई कि उसकी चूत मेरे बूब्स पर थी और फिर उसने मेरी सलवार उतारना शुरू कर दी। मैंने बहुत कोशिश की कि वो मेरी सलवार न उतार सके लेकिन इलास्टिक वाली सलवार उतारने में उसे कोई भी टाइम न लगा और मुझे नंगा कर दिया।
मेरी सलवार और शर्ट उसने दूर फेंक दी और अब सीधे होकर मेरे ऊपर लेट गई। मैं अब तो भाग भी नहीं सकती थी। मैंने देखा कि ड्रॉइंग रूम के दो दरवाजे हैं, एक जिसमें से मैं दाखिल हुई थी और दूसरा शायद किसी कमरे में जाने का था। भागने का कोई चांस नहीं था।
हूमा मेरी दोनों टाँगों के दरमियान थी और मेरे ऊपर लेटकर मेरे पूरे जिस्म को चाट रही थी और चाटते चाटते मेरी चूत पर आ गई। उसने मेरी चूत को चाटना शुरू कर दिया और बहुत अजीब लगा कि कोई चूत को भी चाट सकता है। मेरी चूत में उसकी जुबान थी और हाथों से मेरे बूब्स को मसल रही थी।
मुझे यकीन करें कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था और मैं मजबूर थी और अब कर भी क्या कर सकती थी, आँसू थे कि मेरी आँखों से बह रहे थे। वो मेरे पूरे जिस्म को अपनी जुबान से चाट रही थी और मैं बस यही सोच रही थी कमबख्त जल्दी मुझे छोड़ दे।
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मैं देख रही थी कि हर बात से बेखबर बस मेरे जिस्म को चाट रही थी। वो न जाने क्या सोचकर उठी और मुझसे कहा कि आओ बेड पर चलते हैं। इस से पहले कि मैं कुछ कहती उसने मुझे हाथों से पकड़ा और मुझे घसीटते हुए ड्रॉइंग रूम के दूसरे दरवाजे से एक कमरे में ले गई।
वो बेड रूम था और वहीं उसने मुझे लिटा दिया। मैंने कहा कि प्लीज मुझे छोड़ दें, मैं फिर आऊँगी। हूमा मुस्कुरा रही थी और उसके चेहरे पर कोई घबराहट नहीं थी। उसने मुझे बेड पर धकेलकर लिटा दिया और खुद भी मेरे ऊपर लेट गई। वो कहने लगी कि इशरत आई एम सॉरी, तुम हो ही इतनी हसीन कि मैं खुद पर काबू नहीं कर सकती।
मैं बेबस थी और वो फिर से मेरे ऊपर लेट गई और दोबारा मुझे पूरे जिस्म पर किस करने लगी। वो न जाने क्या चाह रही थी, मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा था। इस बेड रूम में भी एयर कंडीशन ऑन था और पूरा कमरा ठंडा था। मैंने सोचा जो कर रही है करने दो ताकि जल्दी जान छूटे।
वो मेरी दोनों टाँगों के दरमियान बैठी हुई मेरी चूत को चाटने के बाद मेरे बूब्स को चूस रही थी और मैं बेजान लेटी हुई थी और सोच रही थी कि मैं क्यों उसके घर में आई। हूमा लगता था कि लेस्बियन है जो इस तरह मेरे साथ कर रही थी। वो उठकर मेरे एब्डोमेन पर बैठ गई इस तरह कि उसके दोनों पैर मेरे दोनों तरफ थे।
वो मेरे ऊपर झुककर मेरे बूब्स को चूसने लगी और साथ ही साथ अपनी चूत से मेरी चूत को रगड़ने लगी। मुझे कोई अच्छा नहीं लग रहा था। कुछ देर के बाद वो मेरे होंठों पर आ गई और मेरे होंठों को चूसने लगी। वो अब भी अपनी चूत को रगड़ रही थी लेकिन अब मेरी चूत के ऊपर नाफ से नीचे थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने फिर कहा कि प्लीज मुझे जाने दो लेकिन वो तो पागल हो चुकी थी। मेरी परेशानी बढ़ रही थी और बस ये चाह रही थी कि मुझे जाने दे। वो अपनी चूत को मेरे जिस्म पर रगड़ रही थी और इसी दौरान मैं चौंक गई कि मेरी चूत पर कुछ महसूस हुआ। मैं एकदम घबरा गई और एक झटके से हूमा को धक्का देकर उसे अपने पर से हटा दिया।
उसके हटते ही देखा कि कोई मेरी चूत को चाट रहा था। उसे देखकर मैंने जोर-जोर से चीखना शुरू कर दिया। लेकिन किसी पर कोई भी फर्क नहीं पड़ा। हूमा मेरे पहलू से उठकर फिर से मेरे ऊपर आ गई लेकिन मैंने अब और जोर से चीखना शुरू कर दिया और उसे फिर से अपने ऊपर से हटाने लगी।
दूसरी तरफ मेरी चूत को चाटा जा रहा था। मेरी चीख कमरे में बुलंद हो रही थी लेकिन हूमा पर कोई असर नहीं हो रहा था और मैं मजबूर सिर्फ चीख ही सकती थी। हूमा मेरे पहलू में थी और फिर मैंने देखा कि मेरी दोनों टाँगों के दरमियान से एक चेहरा नुमायाँ हुआ और वो एक लड़का था जिसके लंबे बाल थे जो उसने रबर बैंड से छोटी की तरह बाँधे हुए थे।
वो लड़का बिल्कुल नंगा था और वो मुझे देखकर मुस्कुराने लगा। मैंने उस लड़के को कभी नहीं देखा था। जैसे ही वो मेरी टाँगों के दरमियान बैठा, हूमा फिर से मेरे पेट पर बैठ गई और मेरे ऊपर लेटकर मेरे होंठों को चूसने लगी। हूमा ने मुझे अपने नीचे दबा लिया और दो-चार किस करने के बाद उसने कहा कि शमी देखो इशरत को तकलीफ न हो।
उस लड़के का नाम शमी था और फिर शमी ने मेरी दोनों टाँगों को फैलाया और मेरी चूत में अपना लंड डालने लगा। मैं समझ गई कि अब क्या होने वाला है। शमी के लंड ने उसी की जुबान से गीली चूत में अंदर आना शुरू कर दिया। मैंने बहुत कोशिश की कि हूमा को हटाऊँ लेकिन मैं तो अब दोनों तरफ से फँसी हुई थी।
उधर शमी का लंड अभी जरा ही अंदर आया था कि मेरे बर्दाश्त से बाहर हो गया और दर्द के मारे मेरी चीख हूमा के होंठों की वजह से बाहर नहीं जा रही थी। हूमा ने मुझे बुरी तरह से जकड़ हुआ था और दूसरी तरफ शमी का लंड मेरे अंदर आ रहा था और तकलीफ बढ़ रही थी। जालिम शमी ने मेरी दोनों टाँगों को जरा सा ऊपर उठाया और मेरे घुटने हूमा के बटॉक को टच कर रहे थे।
शमी का लंड आहिस्ता-आहिस्ता अंदर आ रहा था और मैं दर्द के मारे ऐसा लग रहा था कि मर जाऊँगी। शमी का लंड एक ही झटके में अंदर आ चुका था और मेरी आँखों के सामने अंधेरा छा चुका था, तकलीफ का दर्द पूरे जिस्म और रूह में फैल चुका था।
मैं तो बेहोश होने के करीब थी और देखा कि हूमा मेरे ऊपर से हट गई। हूमा के हटते ही शमी मेरे ऊपर लेट गया और अपने लंड को अंदर बाहर करने लगा। हूमा मेरे पहलू में लेट गई और शमी की कमर को सहला रही थी। शमी मुझे किस करने लगा और साथ ही साथ उसका लंड भी तेजी से अंदर बाहर हो रहा था।
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मुझे सिवाय पेन के कुछ भी महसूस नहीं हो रहा था। शमी मेरे होंठों को काटे डाल रहा था और इसी दौरान हूमा ने कहा कि शमी आज हमारी ख्वाहिश पूरी हो गई। नोशीन ने सही कहा था कि इशरत हीरा है हीरा। हालाँकि हूमा मेरे पहलू में लेटी हुई थी लेकिन उसकी आवाज मुझे मीलों दूर से आती हुई महसूस हो रही थी।
मुझ पर पेन की वजह से घुनूदगी महसूस हो रही थी और न जाने कितनी देर तक शमी लंड को अंदर बाहर कर रहा था कि फिर वो मेरी चूत में ही डिस्चार्ज हो गया। डिस्चार्ज होने के कुछ देर तक वो मेरे ऊपर लेटे हुए किस करता रहा और फिर हट गया। शमी मेरी इज्जत लूटकर हट चुका था और उठकर कमरे ही के बाथ रूम में चला गया। हूमा ड्रॉइंग रूम से मेरे कपड़े ले आई और मुझसे पहनने के लिए दे दिया।
मैंने कपड़े पहन लिए और इसी दौरान हूमा ने भी कपड़े पहन लिए। मैंने बैग उठाया और ड्रॉइंग रूम से बाहर निकली तो हूमा की दादी वहीं बैठी हुई थीं। उन्होंने मुझे देखा तो मेरे सर पर हाथ फेरा और कहा कि बेटी फिर आना। मैं सुनी अनसुनी करके बाहर आ गई और दरवाजे पर हूमा ने कहा कि इशरत तुम बहुत ही हसीन हो, फिर आना जरूर। मैंने कुछ न कहा और न ही उसकी तरफ देखा और फूप्पो के घर चल पड़ी।
चलने में मुझे बहुत ही तकलीफ हो रही थी और बड़ी मुश्किल से कदम बढ़ा रही थी। मुझे अपनी चूत से कुछ बहता हुआ लग रहा था और वो शमी का डिस्चार्ज ही था जो बह रहा था। घर पहुँचकर मैं बाथ रूम में चली गई और शीशे में अपना चेहरा और बिखरे हुए बाल देखे। कपड़े बदले और मेरी सलवार चूत के पास गीली हो चुकी थी। मैंने कपड़े बदले और हाथ मुँह धोकर कमरे में आ गई।
नोशीन ने मुझे देखते ही खाना लगा दिया था बेड पर ही और मैं बैग समेत वहीं बैठ गई। नोशीन ने कहा कि उसे हूमा ने फोन पर बता दिया था कि उसने तुम्हें बुक दी है। मैंने कोई जवाब नहीं दिया और बुक नोशीन को थमा दी। नोशीन कहने लगी कि इशरत आज तो बहुत गर्मी है और तुम बहुत थकी थकी लग रही हो।
मैंने हाँ कहा और बदिली से खाना खाने लगी। नोशीन ने कुछ देर बाद पूछा कि कैसी लगी मेरी सहेली और कहने लगी कि मेरी बहुत प्यारी और फास्ट फ्रेंड है हूमा। मेरी क्लास फेलो है। वो पूछ रही थी कि हूमा कैसी है, मैंने जान झुंझलाकर के लिए कहा कि अच्छी है। नोशीन कह रही थी कि हूमा उसकी सबसे करीबी फ्रेंड है और हम दोनों एक दूसरे से बहुत मोहब्बत करते हैं।
नोशीन कहे जा रही थी और मैं सुन रही थी लेकिन कोई जवाब नहीं दे रही थी। नोशीन हूमा की तारीफ कर रही थी और फिर कहा कि उसका भाई शमी भी हमारे कॉलेज में पढ़ता है। भाई…… ये सुनते ही मेरे तो हलक में निवाला फंस गया। मैंने बेसाख्ता कहा कि सगा भाई। नोशीन चौंककर मुझे देखने लगी और कहा कि तुम मिली थीं, हूमा ने इंट्रोडक्शन नहीं कराया।
मैं क्या कहती, मैंने कहा कि मैंने ख्याल नहीं किया। अब तो मुझसे खाना भी नहीं खाया जा रहा था और हैरान थी कि हूमा और शमी सगे भाई बहन हैं। मैं तो अपनी लूटी हुई इज्जत भूलकर भाई बहन के बारे में सोचकर शर्म ओ हया में डूब गई थी कि क्या ऐसा भी हो सकता है।
मैंने जैसे तैसे खाना खत्म किया और आराम करने के लिए लेट गई। मेरे जिस्म में अभी तक दर्द हो रहा था और उससे ज्यादा इस बात का सोच रही थी कि वो दोनों भाई बहन हैं। तकलीफ और इस इंकशाफ के बाद मैं क्या सोती और शाम होते ही मैं अपने घर चली गई। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
रात को मैं सारी रात सोचती रही हूमा और शमी के बारे में और अचानक ये ख्याल भी आया कि कहीं नोशीन भी तो उनसे सेक्स तो नहीं करवाती क्योंकि वो तो बहुत ही करीब है उन दोनों के। रात को न जाने किस वक्त नींद आई, सुबह उठी तो मेरी तकलीफ में कुछ कमी आ गई थी।
सारा दिन कॉलेज में खोई हुई थी और अब अपने साथ होने वाले वाकये से ज्यादा उन दोनों के बारे में सोच रही थी। रात को अपने कमरे में लेटी हुई उस दिन के बारे में सोच रही थी कि किस तरह उन दोनों ने मेरी इज्जत लूटी और मैं न तो कुछ कर सकी और न ही किसी को बता सकती हूँ।
मेरी निगाहों में सारा नजारा था और फिर न जाने क्यों मुझे ऐसा लगा कि उन दोनों भाई बहन ने जो मेरे साथ किया, काश मैं उन दोनों को देख सकती कि क्या वो दोनों भी सेक्स कर सकते हैं। ये सोचा और फिर मुझे जो नफरत उन दोनों से हो चुकी थी उसमें कुछ कमी आ गई।
नहीं मालूम क्यों लेकिन अब वो नजारा मुझे अच्छा लग रहा था और ये सोचते हुए मेरे हाथ मेरे बूब्स पर चल गए और मैं खुद ही मुस्कुरा दी। अब तो वो नजारा मुझे अच्छा लगने लगा और मैं एक नए एहसास में डूब गई। मैं सोच रही थी कि हूमा किस कदर हसीन लड़की थी और उसका जिस्म कितना सेक्सी था, उसकी बड़ी आँखें, लंबा कद, ब्राउन हेयर्स और किस कदर गोरा रंग था।
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शमी को तो मैंने सही तरह देखा भी नहीं था लेकिन अब वो मुझे अपने ऊपर महसूस हो रहा था और अच्छा लग रहा था। मैं एक नई दुनिया में खो गई थी और मेरी इज्जत लूटने वाला मंजर मुझे भला लग रहा था। मैं कई दिन तक बस यही सोचती रही और ऐसा लग रहा था कि वो मेरी जिंदगी का हसीन लम्हा था। शमी का लंड जो जिसने मुझे तकलीफ दी थी अब मुझे हर वक्त अपनी चूत में महसूस हो रहा था।
भाई बहन ये ख्याल अब नफरत अंगेज नहीं बल्कि बहुत दिलकश लग रहा था। मेरा बड़ा भाई अब जब मेरे सामने आता बस यही ख्याल आता कि वो भी… लेकिन मैं सोचकर भी कंप जाती कि हम दोनों भी सेक्स कर सकते हैं। मैं हर बार अपने भाई खालिद के बारे में सोचती और खुद ही इस ख्याल को झटक देती।
मैं जानती थी कि खालिद हमारे पड़ोस की लड़की के इश्क में गिरफ्तार था, वो तो कभी किसी कीमत पर मेरे बारे में सोच भी नहीं सकता। वो तो मुझे फूप्पो के घर भी नहीं जाने देता था कि वहाँ मेरी फूप्पो का लड़का भी था। एक हफ्ता हो चुका था उस वाकये को और मुझे एक-एक मंजर मेरी रूह में खुशियों की तरह लग रहा था।
मैं अब हर वक्त हूमा और शमी के बारे में ही सोचती रहती थी और दिल चाहता था कि काश वो दोनों फिर मेरे साथ वही करें लेकिन उससे ज्यादा दोनों भाई बहन को सेक्स करते हुए देखने को दिल चाहता था। क्या करूँ, कैसे करूँ, वो दोनों मुझे बहुत अच्छे लग रहे थे।
मैंने सुबह को अम्मी से कहा कि मैं कॉलेज से वापसी में नोशीन के घर जाऊँगी। खालिद भी वहीं था और उसने मना किया कि वहाँ क्यों बार-बार जाती हूँ लेकिन मैंने कोई जवाब नहीं दिया। मैं कॉलेज से फारिग होकर मालिर हॉल्ट स्टॉप पर उतरकर उसी गली में जा रही थी और बस एक खौफ था कि कहीं हूमा और शमी घर पर न हों। इस वक्त कॉलेज से नोशीन घर आती है और वो दोनों भी आ गए होंगे।
मैंने धड़कते दिल से बेल बजाई और थोड़ी ही देर बाद हूमा दरवाजे पर थी। मुझे देखते ही वो तो खुशी से पागल हो गई। मैंने कहा कि अंदर नहीं बुलाओगी। उसने मुझे एकदम अंदर कर लिया और ड्रॉइंग रूम के बजाय अपने बेड रूम में ले गई।
कमरे में आते ही उसने मुझे गले लगा लिया और मैं भी उसके साथ चिमट गई। हूमा कह रही थीं कि मैंने और शमी ने तुम्हें कई बार नोशीन के घर जाते हुए देखा था और हम दोनों ही तुम्हारे लिए पागल हो गए थे और नोशीन ने तुम्हारी इतनी तारीफ की इतनी तारीफ की कि हम दोनों तो दीवाने हो गए तुम्हारे।
उसने मुझे बेड पर बिठाया और कहा कि बैठो मैं ड्रिंक लाती हूँ। हूमा इतनी खुश थी कि लग रहा था कि उसे कोई दौलत मिल गई हो। मैं उसी बेड पर बैठी हुई थी जहाँ एक हफ्ता पहले मेरे साथ जबरदस्ती हुई थी और आज मैं खुद आई थी। मैं शमी के बारे में सोच रही थी कि न जाने वो घर पर है भी कि नहीं।
बेड रूम में एक तो दरवाजा वॉश रूम का था जिसमें उस दिन शमी फारिग होकर गया था और एक दरवाजा ड्रॉइंग रूम का था। हूमा ड्रिंक लेकर आ गई और मेरे साथ बैठ गई और बार-बार मुझे गले लगा रही थी। अभी हम ड्रिंक से फारिग ही हुए थे कि शमी आ गया।
शमी ने आते ही बहुत ही खुशी से मुझसे हाथ मिलाया और सामने सोफे पर बैठ गया। वाओ शमी किस कदर जबरदस्त था, खूब वाइड शोल्डर और बहुत ही मजबूत बाजू टी-शर्ट से निकले हुए थे। अपने लंबे बालों को उस दिन की तरह रबर बैंड से बाँधा हुआ था।
उस दिन मैंने उसे सही तरह देखा भी नहीं था और वाकई मुझे बहुत ही प्यारा लग रहा था। हंसमुख और हूमा की तरह बड़ी-बड़ी चमकती हुई आँखें और खूब पिंक होंठ। हूमा ने ट्रे टेबल पर रखी और बेड पर आ गई। हूमा ने बेड पर आते ही मुझे चिमटा लिया और शमी से कहा कि मैं कहती थी कि इशरत जरूर आएगी।
और मेरे उनके घर आना उनको भी मालूम था कि क्यों आई हूँ। हूमा ने मुझे बेड पर लिटा लिया और मुझे शमी के सामने ही किस करने लगी। शमी सोफा से उठा और मेरा बैग बेड से उठाकर टेबल पर रख दिया और खुद भी बेड पर आ गया। हूमा तो मेरे साथ चिमटी हुई थी और मैंने भी हूमा को किस करना शुरू कर दिया, ये मेरी जिंदगी का किसी को पहला किस था।
हूमा मुझे किस कर रही थी और मेरी सलवार उतार रही थी। दूसरी तरफ शमी भी बेड पर था और वो हूमा के पीछे से उसके कपड़े उतार रहा था। हूमा ने मेरी शर्ट और सलवार उतार दी थी और दूसरी तरफ शमी ने अपनी सगी बहन को नंगा कर दिया था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
हूमा कमर के बल लेट गई और मुझे अपने ऊपर लिटाकर मेरे होंठों और गालों को चाटना शुरू कर दिया। मैं भी हूमा को किस कर रही थी और मैंने जब हूमा के बूब्स देखे तो वो मेरे बूब्स से काफी बड़े लेकिन सख्त थे। मैंने बूब्स पर अपने होंठ रख दिए और उन्हें चूसने लगी। हूमा का सीना बहुत ही कुशादा था और मैं बुरी तरह उसके सीने को चाट रही थी।
दूसरी तरफ शमी उस दिन की तरह मेरी चूत पर चला गया और उसकी गरम-गरम जुबान मेरी चूत पर महसूस हो रही थी। शमी की जुबान ने मुझे पागल कर दिया था। शमी की जुबान न सिर्फ मेरी चूत बल्कि मेरी हिप के होल को भी चाट रही थी। और लग रहा था कि वो मेरे साथ-साथ हूमा की चूत को भी चाट रहा था।
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मैं बहुत खुश थी और दिल चाह रहा था कि शमी हूमा के साथ सेक्स करे और मैं देखूँ। मैं हूमा को चूमते हुए उसके कानों के करीब गई और सरगोशी में कहा कि पहले आप। हूमा ने सुना तो वो एकदम मेरी आँखों में देखने लगी और मुस्कुरा दी।
उसने मुझे हटाकर अपने पहलू में लिटा दिया और शमी से कहने लगी शमी पहले मैं। शमी ने सुना तो मुस्कुरा दिया और मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा दिया। शमी का लंड देखा तो वो बहुत ही सेक्सी था, न जाने कितना बड़ा लेकिन था बहुत ही पूरी आकर्षक, बिल्कुल टमाटर की तरह सुर्ख।
शमी को नंगा देख रही थी और क्या कयामत का हसीन नौजवान था। हूमा बैठ गई और शमी बेड पर लेट गया। अब हूमा उसके पेट पर बैठी थी और शमी के लंड को चाटने लगी। वाओ ये तो मैंने सुना भी नहीं था कि लंड को चूसा भी जाता है और उसका लंड था ही इतना हसीन कि देखते ही दिल चाहता है कि चूम लें।
मैं बराबर नंगी लेटी हुई थी और मैं देख रही थी कि शमी का लंड इतना बड़ा था कि हूमा के मुँह में पूरा नहीं आ रहा था। हूमा ने शमी के लंड को चूसे जा रही थी और पीछे से हूमा की हिप देखी तो दंग रह गई क्या हसीन थी उसकी हिप। शमी हूमा की चूत को चाट रहा था और मैं बैठकर हूमा की कमर को सहलाने लगी।
कुछ देर के बाद हूमा लंड से हट गई और बेड पर कमर के बल लेट गई। शमी उसकी टाँगों के दरमियान आ गया और उसने अपना लंड हूमा की चूत में डालना शुरू कर दिया। उसने लंड डाला और उसी वक्त मुझे तसव्वुर में अपना भाई खालिद आ गया कि वो मेरे साथ सेक्स कर रहा हो।
हूमा ने मुझे अपने ऊपर आने का इशारा किया और मैं फौरन ही उसके ऊपर चली गई इस तरह कि मेरा मुँह शमी की तरफ था। मुझे हूमा पर पकड़ उसका लंड उसकी बहन की चूत में था मेरे सीने से चिमट गया। मैंने भी उसे गले लगा लिया।
क्या गर्म जिस्म था कि एयरकंडीशन के बावजूद आग में दहक रहा था। मैंने उसके होंठों को अपने होंठों में लेकर किस करना शुरू कर दिया। मेरी जिंदगी का किसी मर्द को पहला किस था। दूसरी तरफ हूमा ने मेरी चूत को चाटना शुरू कर दिया। मैं तो इस एहसास से पागल हो गई, दीवानी हो गई और शमी के होंठों को काटे डाल रही थी।
एक भाई का लंड उसकी सगी बहन की चूत में, यही तो मैं देखना चाहती थी। भाई बहन के सेक्स से मैं तो खुद ही मस्त हो गई थी। शमी मेरे साथ चिमटा हुआ था और कभी होंठों को कभी मेरे बूब्स को चूस रहा था, मैं खुश बहुत ही खुश, मैं शमी जैसे के साथ चिमटी हुई थी।
शमी का लंड हूमा की चूत में अंदर बाहर हो रहा था और दूसरी तरफ हूमा की जुबान ने मेरी चूत को मुश्तैल कर दिया था। शमी एक लम्हे को रुका और मुझसे कहा कि आप हूमा पर लेट जाएँ। हाँ मैं मस्त हो चुकी थी और जो वो लोग कह रहे थे खुशी-खुशी मान रही थी।
मैं हूमा के पहलू में कमर के बल लेट गई। शमी ने लंड अपनी बहन की चूत से निकाला और मेरी टाँगों के दरमियान बैठ गया। मैं तो दोनों भाई बहन का सेक्स देख किसी और दुनिया में थी और बार-बार खालिद का ही ख्याल आ रहा था। मेरी चूत हूमा के चाटने की वजह से बुरी तरह गीली हो चुकी थी।
शमी ने अब मेरी चूत में अपनी बहन की चूत से निकला हुआ गीला लंड डालना शुरू कर दिया और तकलीफ फिर शुरू हो गई। हूमा ने मेरे दर्द को भाँप लिया और मेरे पहलू में लेटी लेटी उसने शमी से कहा कि प्लीज जरा आहिस्ता करना, इशरत को तकलीफ होगी।
शमी ने मेरी टाँगों को खूब फैला दिए बल्कि मैंने खुद ही टाँगें फैला दीं। शमी ने अपने लंड मेरी चूत में डालना शुरू कर दिया। और अभी जरा ही गया था कि फिर से तकलीफ होने लगी लेकिन आज तो मैं खुद ही आई थी और मजों के लिए मुझे बर्दाश्त करना ही होगा।
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शमी मेरे सामने था और उसके सेक्सी जिस्म ने मुझे पागल कर दिया था। उसका लंड आहिस्ता-आहिस्ता अंदर आ रहा था और एक-एक लम्हे में सेक्स के मजे में डूब रही थी। हूमा मेरे पहलू में लेटी हुई थी और अपने हाथों से मेरे बूब्स को सहला रही थी।
शमी का लंड अंदर ही आ रहा था और मेरी चूत में दर्द लेकिन मीठा दर्द फूट रहा था। मैं तकलीफ के बारे में सोच भी नहीं रही थी और सेक्स की खुशी मेरे दर्द पर छाई हुई थी। शमी का लंड काफी अंदर आ चुका था और अब शमी मेरे ऊपर लेट गया। मेरे ऊपर लेटने से मुझे महसूस हुआ कि वो किस कदर मजबूत जिस्म का मालिक था। इसका चेस्ट बहुत ही कुशादा था और उसका पेट बिल्कुल कमर से चिपका हुआ।
अपने ऊपर लेटने से लग रहा था कि मैं उसके जिस्म में छुप गई हूँ। मैं नाजुक सी दुबली पतली लड़की और वो एक मुकम्मल बॉडी बिल्डर मर्द मुझ पर छा गया था। शमी का लंड अब भी अंदर आ रहा था और वो मेरे बूब्स को चूस रहा था, मैं उसके भारी बोझ में दबी हुई थी लेकिन बहुत अच्छा लग रहा था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
उसका लंड अब भी मुसलसल अंदर आ रहा था और पेन की शिद्दत भी बढ़ रही थी लेकिन अपनी चूत में उसका लंड और मेरे जिस्म पर वो लेटा हुआ कयामत का मजा दे रहा था। मैंने उसे दोनों हाथों से चिमटा लिया और अब शमी मेरे होंठों पर अपने हसीन और महकते हुए होंठों से प्यार कर रहा था।
मैं भी उसे प्यार कर रही थी। हूमा मेरे पहलू से उठी और मेरी टाँगों के दरमियान में बैठ गई। काफी बड़ा बेड था वो वहाँ से मेरी चूत को चाटने लगी। वाओ………… क्या मजा आ रहा था, किस-किस मजे का बताऊँ। हूमा मेरी चूत के साथ-साथ अपने भाई के लंड को भी चाट रही थी।
शमी का लंड अब पूरी तरह मुझे दर्द में डुबोकर अंदर आ चुका था और अब वो अपने लंड को अंदर बाहर कर रहा था। हूमा खूब मजे से मेरी चूत और हिप को चाट रही थी। हूमा अपनी जुबान मेरे बैक होल को चाटते हुए ऊपर की तरफ चूत पर आ रही थी और वहाँ अपने भाई के लंड को मेरी चूत में दाखिल होते हुए चाट रही थी।
शमी को मैंने गले लगाकर उसके होंठों और सीने को हजारों किस किए हुए थे बल्कि उसके सीने को काटे डाल रही थी। मैंने अपनी टाँगों को उसकी कमर के गिर्द कर लिया था और उसके लंड को अपनी चूत में आने का मजेद मोका दे रही थी।
हर बार जब-जब उसका लंड अंदर आता और एक जगह जाकर रुक जाता मेरे जिस्म के रोएँ-रोएँ में खुशी की चिंगारियाँ मचल रही थीं। शमी ने मेरे बाजूओं के दरमियान अपने मजबूत हाथों को डालकर मेरे कंधों को थामा हुआ था और अब उसके लंड की रफ्तार और भी तेज हो रही थी।
हूमा अभी तक मेरी चूत और हिप को चाट रही थी। मैं बयान नहीं कर सकती कि ऐसी भी लज्जत होती है सेक्स में। हूमा वहाँ से उठकर मेरे पास आ गई और फिर शमी ने खुद ही अपना लंड बाहर निकाल लिया। मैं समझ गई कि अब कोई और नया तरीका होगा सेक्स की दुनिया का।
शमी मेरे पहलू में लेट गया और हूमा ने कहा इशरत अब तुम शमी से सेक्स करो। मैं कुछ देर तक तो कुछ न समझी और फिर जब शमी के अजीम लंड को देखा जो बिल्कुल लोहे की तरह खड़ा हुआ खूब नजारा दे रहा था। मैं समझ गई और मैं उठकर शमी के लंड पर चूत रखकर बैठने लगी।
मेरे दोनों हाथ शमी के सीने पर थे और उसके लंड को मेरी चूत अपने अंदर ले रही थी। मैं घुटनों के बल झुकी हुई लंड को अपने अंदर दाखिल कर रही थी और शमी मुझे देखकर मुस्कुरा रहा था। अब तो पेन वगैरह की कोई फिक्र नहीं थी, सेक्स का मजा था ही इतना खुशगवार कि बस लुत्फ ही लुत्फ था।
शमी का पूरा लंड मेरी चूत में दाखिल हो चुका था और लग रहा था कि इस बार तो कुछ ज्यादा ही अंदर आ गया था। मैं पेंस पर बैठ गई और वो पूरी तरह अंदर था। मैं सोच ही रही थी कि ऊपर नीचे होना शुरू करूँ कि हूमा शमी के सीने पर बैठ गई और मुझे गले लगाकर मेरे होंठों पर किस करने लगी। वाकई मैंने हूमा से ज्यादा हसीन लड़की नहीं देखी थी।
शमी ने हूमा की चूत को अपने होंठों पर रखकर चाटना शुरू कर दिया और मैं हूमा के मीठे होंठों को चूसने लगी। हूमा ने दोनों हाथों को मेरे बगल में लेकर मेरी हिप को थाम लिया और मैंने हूमा की गर्दन को अपनी बाँहों में थाम लिया और खूब जोर-जोर से उसे किस करने लगी।
हूमा मेरी हिप को चीरकर मुझे ऊपर उठाती और मैं अब खुद ही हूमा के हाथों के सहारे ऊपर नीचे होने लगी। हूमा ने मेरे कानों में सरगोशी की और पूछा कि मजा आ रहा है। मैंने हूमा को अपने सीने से भींच लिया और कहा कि बहुत ज्यादा मजा आ रहा है।
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मैं तेजी से ऊपर नीचे हो रही थी और शमी भी उछल उछलकर मेरा साथ दे रहा था। हूमा की चूत में शायद शमी की जुबान दाखिल थी कि वो भी खूब बुरी तरह उछल रही थी। मेरे अंदर तेजी आ रही थी और फिर हूमा वहाँ से हट गई। उसके हटते ही मैं शमी पर झुक गई और उसने मुझे गले लगाकर प्यार करना शुरू कर दिया।
हूमा फिर से मेरे पीछे आ गई और मेरी हिप होल में जुबान डालने की कोशिश कर रही थी और साथ ही साथ मेरी चूत समेत अपने भाई के लंड को चाट रही थी। मैं तेजी से ऊपर नीचे हो रही थी और शमी भी मेरा साथ दे रहा था। मैं खुश थी कि दोनों भाई बहन मुझे सेक्स का मजा देने के लिए क्या कुछ नहीं कर रहे थे।
मंजिल करीब आ चुकी थी और मैं जिंदगी में पहली बार डिस्चार्ज हो रही थी। आखिरी शदीद तरीन झटकों से लग रहा था कि मैंने शमी के लंड को जख्मी कर दिया था। हूमा उस लम्हे मेरी हिप होल को चाट रही थी और मैंने महसूस किया कि शमी भी डिस्चार्ज हो गया था कि उसका तूफानी गरम-गरम लावा मेरे जिस्म के अंदर बह रहा था।
मैं निढाल होकर शमी पर लेट गई और उसके कान में कहा कि थैंक यू शमी इट वाज ग्रेट। शमी शायद कम बोलता है लेकिन उसने मेरी बात सुनी तो आहिस्ता से कहा कि तुम बहुत ही सेक्सी हो, मैं तुम्हें कभी भुला नहीं सकूँगा। मैंने सोचा कि पागल मैं कब भुलाने दूँगी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैं कुछ देर लेटी रही और फिर एक मजेदार थकान और जिस्म में मीठे-मीठे दर्द को महसूस करती हुई शमी पर से हट गई। मैं शमी और हूमा के दरमियान में लेटी हुई थी और दोनों मेरी तरफ करवट करके मुझे जगह-जगह से किस कर रहे थे।
कुछ देर बाद शमी ने मेरे होंठों पर किस किया और थैंक्स कहकर अपने कपड़े उठाकर वॉशिंग रूम चला गया। हम दोनों नंगे लेटे हुए एक दूसरे से चिमटे हुए थे और मैंने हूमा से कहा आप दोनों बहुत अच्छे हैं, मैं फिर आऊँगी। हूमा खुश हो गई और कहा कि जब दिल चाहे आओ, ये राज सिर्फ हम तीनों के दरमियान रहेगा।
मैंने नोशीन के बारे में पूछा तो हूमा ने कहा कि नहीं नोशीन से नहीं और न कभी होगा, बस मैं और मेरा भाई, वो तो तुम्हारे जिस्म ने हम दोनों को पागल कर दिया था। तुम्हारे साथ मैं और शमी बहुत ही ज्यादा खुश हैं, उस दिन के लिए हमें माफ कर दो प्लीज।
और मैं खुश-खुश नोशीन के बजाय अपने घर आ गई। मैं बहुत ही मसरूर थी और वो लम्हे जो मैंने शमी और हूमा के साथ गुजारे थे मेरी जिंदगी का कीमती सरमाया थे। मेरे दिमाग में अब खालिद था और हूमा की तरह मेरी भी ख्वाहिश थी कि मैं भी अपने भाई के साथ सेक्स करूँ लेकिन कैसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था।
गो कि शमी मेरे भाई खालिद के मुकाबले में बहुत ही हसीन और सेक्सी था और शमी के साथ तो मैं या हूमा क्या कोई भी लड़की उसे देखते ही सेक्स के लिए दीवानी हो सकती है। इस सब के बावजूद जो मेरे जेहन और रूह में बस एक ही जज्बा था कि मेरा भाई और मैं।
घर में कई दिन तक सोचती रही कि क्या करूँ और कैसे खालिद में वो जज्बा पैदा करूँ जो कि मेरी रूह में समा चुका था और तड़पा रहा था। एक दिन मैं अपने कमरे के बाथ रूम में नहा रही थी और मुझे बाथ रूम से अपने कमरे के टीवी की आवाज आई तो मैं समझ गई कि खालिद ही होगा क्योंकि और कोई तो मेरे कमरे में टीवी नहीं देखता।
मेरे दिमाग में खालिद को अपनी तरफ मुतवज्जह करने के लिए एक ख्याल आया और नहाकर मैंने भीगे बदन पर मलमल का बारीक कुर्ता बगैर शमीज के पहन लिया। मैंने देखा कि गीला जिस्म होने की वजह से मेरे बूब्स का एक-एक हिस्सा वाजेह है। मैंने कुर्ते के ऊपर से कुछ पानी और अपने चेस्ट पर डाल लिया जिससे लग ही नहीं रहा था कि मैंने कुछ पहना हुआ है।
मैं बाहर आ गई और खालिद जो कि मेरे बेड पर बैठा था उसके सामने ही बेड पर बैठ गई। खालिद की नजर मेरे भीगे हुए बूब्स पर पड़ी और मैं देख रही थी कि वो चौंक गया। हालाँकि खालिद इस मामले में बहुत रोक टोक करता था कि मोटे कपड़े पहनो, जिस्म को ढांपकर रखो। और आज वो टोक नहीं रहा था बल्कि चुप-चुपकर देख रहा था।
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मैं उसके सामने ही बैठी हुई थी और टॉवल से अपनी गर्दन पीछे करके खुश्क कर रही थी इस तरह मेरे बूब्स और भी नुमायाँ हो गए थे और मैं भी चुप-चुपकर देख रही थी कि वो देख रहा था और उसकी आँखों में एक चमक थी। मैं खुश थी कि मेरा पहला तीर निशाने पर था। मैं काफी देर तक बालों को खुश्क करती रही और खालिद मुसलसल देखे जा रहा था। भीगे हुए और हसीन बूब्स इस तरह देखकर कौन नहीं पागल हो सकता।
कुछ देर बाद मैं वहाँ से उठ गई, मेरा मकसद पूरा हो चुका था और मैं पूर उम्मीद थी कि खालिद जरूर मेरे बूब्स और मेरे बारे में कुछ और अंदाज में सोच रहा होगा। अब मैंने कई दिन तक महसूस किया कि खालिद की मुझमें दिलचस्पी बढ़ गई थी। वो हर बार मुझे नए अंदाज में देख रहा था और मैं उसे पूरा मोका दे रही थी कि वो मुझे दिलो जान से देखे।
अब मैं जान गई थी कि खालिद मेरे अंडर गारमेंट्स को भी इधर उधर करने लगा था और मेरे करीब रहने की कोशिश कर रहा था। मैंने अम्मी से कहा कि मुझे कुछ कॉपी मँगवाएँ और उन्होंने खालिद को मोबाइल पर कह दिया। आज मैं दूसरी बार कुछ करने जा रही थी।
शाम हो चुकी थी और मैं खालिद का इंतजार कर रही कि वो कब आएगा। मैं तैयार थी कुछ करने के लिए और वो लम्हा भी आ गया कि खालिद की बाइक की आवाज आ गई। मैं अपने बेड रूम में चली गई। लाइट ऑन कर दी, कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर दिया और बिल्कुल नंगी हो गई। बेड पर मैंने नए कपड़े फैला दिए कि जैसे मैं पहनने जा रही हूँ।
अब सब कुछ तैयारी मुकम्मल थी। कुछ ही देर बाद दरवाजे पर नॉक हुई और मैं समझ गई कि खालिद होगा। बेधड़ी किसी घबराहट के मैं दरवाजे पर आ गई और जोर से कहा कि अम्मी दरवाजा खोल रही हूँ। मैंने दरवाजे की चिटकनी खोली और ये देखे बगैर कि कौन है मैं बेड की तरफ आ गई और कहने लगी कि अम्मी दर्जी ने अच्छे कपड़े सिले हैं अभी आपको पहनकर दिखाती हूँ और मैंने फिर मुड़कर देखा था तो सामने खालिद खड़ा था।
उसे देखते ही मैं चीखने लगी अरे आप क्यों आ गए, मैंने तो अम्मी को बुलाया था और बजाय इसके कि मैं बेड शीट या कपड़ों से खुद को छुपाती मैंने दोनों हथेलियों से चेहरा छुपा लिया। चेहरा छुपाकर मैं चीखकर कह रही थी कि बाहर जाओ मैं नंगी हूँ। हथेलियों को इसलिए चेहरे पर रखा कि खालिद अपनी सगी बहन के नंगे जिस्म को खूब अच्छी तरह देख ले। मैं खालिद से सिर्फ चंद फीट के फासले पर थी।
खालिद मुझे नदीदों की तरह देख रहा था और मैं बाहर जाओ बाहर जाओ कह रही थी। वो इस कदर तो मदहोश था कि कॉपी देने के बजाय बाहर चला गया। मेरा काम पूरा हो चुका था और मैं खालिद में वो चिंगारी जला चुकी थी और अब आग भड़कने में कोई देर नहीं थी। मेरा दिल तो चाह रहा था कि खालिद मुझे गले लगा ले लेकिन उसमें शायद हिम्मत नहीं थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
वो हर वक्त घर में मुझे उसी नजर से देख रहा था जैसे मेरी ख्वाहिश थी। मैं भाई के साथ सेक्स करने की आग में जल रही थी और खालिद का भी यही हाल होगा मुझे यकीन था। अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था और मैं आखिरी तीर चलाने का मंसूबा बना चुकी थी। मैंने फैसला कर लिया कि अगर आज की रात खालिद मेरा न बना तो कल मैं हूमा के घर जरूर जाऊँगी।
खालिद दोस्तों के साथ कहीं गया हुआ था और रात देर से आने को कहा लेकिन ये मालूम था कि हमारे यहाँ हर सूरत में 12 बजते तक वापस आना होता है। हमारे घर में तीन बेड रूम हैं और सब में एसी है। एक अब्बू अम्मी का, एक मेरा और एक खालिद का।
मैंने खालिद के कमरे में जाकर एसी के वायर को दरमियान में से काट दिया और जानती थी कि रात को आएगा तो एसी बंद पाकर इस गर्मी में न तो सो सकेगा और न ही इतनी रात को वायर ठीक करेगा। खालिद मेरे कमरे में आकर सोफे पर सोएगा और ये कोई नई बात नहीं थी, वो अक्सर एसी खराब की वजह से मेरे कमरे में सोफे पर सो जाता था लेकिन आज उसका आना मेरे लिए और उसके लिए बहुत यादगार होने वाला था।
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मैंने सारी तैयारी मुकम्मल कर ली थी और ज्यों ही उसकी बाइक की आवाज आई मैंने कमरे की लाइट ऑफ कर दी और नाइटी पहनकर बेड पर लेट गई। मैंने करवट लेकर नाइटी को सामने से बिल्कुल अलग कर दिया और मैं सीने से लेकर टाँगों तक नंगी हो गई।
थोड़ी ही देर बाद दरवाजे पर दस्तक हुई और जवाब न पाकर खालिद अंदर आ गया। मैंने आँखें बंद कर लीं और मेरा काम खत्म हो चुका और जो कुछ करना था खालिद ही को करना था। कमरे की लाइट खालिद ने ऑन की और बंद आँखों से ही मालूम हो रहा था कि कमरा रोशन है। नहीं मालूम क्या हो रहा था लेकिन काफी देर के बाद मैंने खालिद को अपने बेड पर कमर की तरफ महसूस किया।
मंसूबा कामयाब हो चुका था और वही होने वाला था जिसके लिए मैं मरी जा रही थी। खालिद ने आहिस्ता से मेरे बूब्स पर हाथ रखे और लग रहा था कि वो लेटा हुआ था। वो बूब्स को हाथ लगाते हुए डर रहा था और बहुत ही आहिस्तगी से सहला रहा था।
मैं खामोश सोने की अदाकारी कर रही थी और खालिद को अपनी कमर से चिपका हुआ महसूस कर रही थी। अब तो सब कुछ होने वाला था और मैं ज्यादा इंतजार करने के काबिल नहीं थी। मैंने करवट बदली और खालिद की तरफ चेहरा करके करवट हो गई। खालिद कुछ देर रुका और फिर उसने मुझे सीने से लगा लिया। खालिद ने कपड़े नहीं उतारे थे और मेरे बूब्स उसके सीने से लगे हुए थे।
मैं सामने से बिल्कुल नंगी थी और खालिद ने अपने होंठ मेरे करीब कर लिए। वो मुझे किस कर रहा था लेकिन बहुत ही आहिस्ता से। मैं खामोश थी और कुछ नहीं कर रही थी और खालिद कुछ हिम्मत और उसने अपने कपड़े उतार लिए थे।
मैं उसे टच करके महसूस कर रही थी कि वो बिल्कुल नंगा हो चुका था। उसका लंड मेरी चूत के दरमियान टाँगों के पास था और मैंने खुद ही टाँगों को जरा सा खोलकर लंड को अंदर आने दिया। उसका लंड मेरी चूत से चिमटा हुआ टाँगों के दरमियान था।
अच्छा लग रहा था और उसे मुझे चिमटा लिया था, मैंने भी अपना हाथ खालिद की गर्दन पर रख लिया था और इस तरह वो और भी आसानी से चिमट गया। भाई का लंड मेरी चूत से चिमटा हुआ था और बहुत भला लग रहा था। खालिद मेरे होंठों को बहुत ही आहिस्तगी से चाट रहा था और फिर मैंने आँखें खोल दीं और खालिद के होंठों को किस करने लगी।
खालिद ने मेरी आँखें खुली देखीं तो उसका रंग फक हो गया। मैंने भाई को देखा तो मुस्कुरा दी। खालिद के चेहरे पर कुछ सुकून आ गया। मैंने खालिद से खुद ही बात की और कहा कि खालिद क्या कोई अपनी सगी बहन से भी सेक्स कर सकता है। वो खामोश रहा और मैंने फिर कहा कि अगर किसी ने भी अपनी बहन से सेक्स किया हो तो ठीक है।
खालिद ने कहा हाँ मैं जानता हूँ कि मेरे एक दोस्त अपनी बहन से सेक्स करता है। मैंने पूछा नाम बताओगे तो उसने अपने दोस्त मसूद का नाम लिया और मैं उनको जानती थी। मैंने कोई जवाब नहीं दिया और खालिद के सीने से चिमट गई। खालिद ने भी मुझे चिमटा लिया और अब रजामंदी का लम्हा शुरू हो चुका था।
खालिद ने मेरी नाइटी को मेरे वुजूद से अलग करके अपनी बहन को नंगी कर दिया। मैं खालिद को किस करने लगी और फिर खालिद ने मुझे सीधा लेटकर मेरे बूब्स को चूसने लगा। मैं खुश थी और बहुत ही अच्छा लग रहा था। खालिद मेरे जिस्म को चाट रहा था और इसी तरह वो मेरी चूत को चाटने लगा।
मैं समझ गई कि खालिद अनाड़ी नहीं है, उसे मालूम है कि चूत को भी चाटा जाता है। मैं सीधी लेटी हुई थी और फिर खालिद ने मेरी टाँगों को फैलाया उसी तरह बैठ गया जिस तरह शमी बैठा था। खालिद का लंड नजर आ रहा था काफी हेल्दी था लेकिन शमी का सामने कुछ नहीं था।
खालिद ने मेरी चूत पर लंड रखा और अंदर करने लगा। मैं खामोश थी लेकिन इस एहसास से कि मेरे सगे भाई का लंड अंदर आ रहा है बहुत अच्छा लगा। हालाँकि शमी की बात ही कुछ और थी लेकिन भाई प्यारा भाई कि जिससे मैं दुनिया में सबसे ज्यादा मोहब्बत करती हूँ आज हमारी मोहब्बत की इंतेहा हो रही थी। सगे भाई के साथ सेक्स वाओ मेरे लिए मेरा सब कुछ था।
शमी के मुकाबले में भाई से बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था। खालिद ने लंड को कुछ अंदर डाला और मेरे ऊपर लेटकर मुझे किस करने लगा और मैं भी भाई को किस करने लगी। मैंने भाई को चिमटा लिया और भाई का लंड अंदर आ चुका था और कोई भी तकलीफ नहीं हो रही थी बल्कि मजे की इंतेहा थी। भाई के नीचे मैं सिमटी हुई थी और मैंने भाई की कमर के गिर्द अपनी टाँगें लिपट ली थीं।
भाई का लंड अंदर बाहर हो रहा था और मेरी चूत में भाई के लंड ने बहार पैदा कर दी थी। मैं बहुत ही खुश थी और भाई भी बहुत मसरूर थे। भाई मेरी गर्दन को काट डाल रहा था और बुरी तरह किस कर रहा था, दूसरी तरफ मैं भी भाई को काटे डाल रही थी। भाई ने लंड को अंदर बाहर करते हुए पूछा कि इशरत तकलीफ तो नहीं हो रही। मैंने कहा कि हो तो रही है लेकिन अच्छा भी बहुत लग रहा है।
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भाई सुनकर खुश हो गया और कहा कि इशरत तुमसे हसीन तो कोई हो ही नहीं सकता। मैंने कोई जवाब नहीं दिया बस उसे प्यार करती रही किसी भूखी शेरनी की तरह। भाई की रफ्तार में तेजी आ गई थी और भाई ने मेरी टाँगों को समेत कर अपने शोल्डर मेरे टाँगों के दरमियान करके लंड की रफ्तार तेज कर दी। मैं भाई की गर्दन पकड़कर उसे चिमटा लिया और उसके सीने को काटने लगी। भाई की रफ्तार तेज तर होती जा रही थी और मैं भी दीवानी हो रही थी। मंजिल करीब थी और फिर भाई ने मेरी टाँगों को आजाद करने के बाद मेरे होंठों पर आ गया।
वो मुझे किस करते हुए लंड को पूरी तरह तकरीबन बाहर निकालकर अंदर कर रहा था और भाई शमी के मुकाबले में कुछ ज्यादा ही शिद्दत से सेक्स कर रहा था। हम दोनों डिस्चार्ज हो गए और भाई मेरे पहलू में लेट गया, हम दोनों एक दूसरे से चिमटे हुए सेक्स की ही बातें करते हुए सो गए। अब तो मेरे ऐश हो गए, भाई के साथ रोज ही सेक्स करती हूँ और हूमा के साथ भी सेक्स मेरा मामूल है लेकिन न तो भाई को मालूम है मेरे और शमी के बारे में और न ही हूमा को मालूम था कि मेरे भाई के साथ भी सेक्स करती हूँ।
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