Dehati Family Sex Kahani
बात उन दिनों की है जब मैं अपने गाँव गया हुआ था अपनी बुआ के पास जो कि मेरे पापा से 8 साल बड़ी थीं और उनकी उम्र 45 साल थी और उनकी 2 लड़कियाँ भी थीं जो 17 और 19 की थीं। दोनों शादी लायक थीं पर अभी शादी नहीं हुई थी और दोनों ही बहुत खूबसूरत थीं। Dehati Family Sex Kahani
उन दोनों के लाल-लाल गाल, उभरे हुए बूब्स और फूली हुई गांड देखकर किसी के लंड में भी पानी आ सकता था। फिर मैं तो पक्का मदरचोद था। आप लोगों को तो पता ही होगा जैसा कि मैंने अपनी कहानी में बताया था कि मुझे चुदाई का पहला पाठ ही मेरी मम्मी और पड़ोस की चाची ने पढ़ाया था और अभी तक मैंने सिर्फ 2 ही चूतों का मजा लिया है वो भी मम्मी और चाची की।
तब से मेरे मन में बड़ी उम्र वाली को ही देखकर खुशी मिलती है। जब भी किसी 35 से ऊपर की औरत को देखता हूँ बस यही जी करता है कि यहीं पलटकर अपना लंड इसकी चूत में डाल दूँ। मुझे लड़कियों को देखना भी नहीं अच्छा लगता था और जैसा कि मेरी आदत थी.
तो मैं बुआ से ज्यादा हँसता-बोलता था जबकि बुआ की लड़कियों से बहुत ही कम बोलता था। पर एक बात मैंने नोट की थी बुआ की दोनों लड़कियाँ अक्सर कॉलेज से देर से आती थीं और मुझे ये जानते देर न लगी कि वो दोनों बाहर के लड़कों से पट्टी हुई हैं और दोनों ही मुझमें इंटरेस्टेड थीं। दोनों ही मुझे बहुत गौर से देखती थीं।
मैं वहाँ आँगन में ही नहाता था और जब भी मेरी नजर रीना या मीना से टकराती तो उन्हें अपने सामने ही टकटकी बाँधे हुए पाता और कभी-कभी तो रीना मुझसे रगड़ती हुई निकल जाती और कभी-कभी धक्का भी मार देती। मैं कोई नासमझ नहीं था जो समझ न पाता पर फिर भी मैंने कोई इंटरेस्ट नहीं दिखाया और मेरा पूरा ध्यान बुआ की तरफ ही था।
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मेरे मन में हमेशा उनकी नंगी जाँघें और बड़ी-बड़ी चूचियाँ ही उलझी रहतीं। और एक दिन तो गजब ही हो गया। ये कि दोनों लड़कियाँ कॉलेज गई हुई थीं, घर में मैं और बुआ ही थे और उनके हसबैंड शहर गए हुए थे 15 दिनों के लिए। तब मैं बैठा हुआ सी.डी. पर मूवी देख रहा था और बुआ नहा रही थीं।
तब ही वो नहाकर बाहर निकलीं और वो सिर्फ टॉवल में ही थीं। उनकी टॉवल में से घुटनों के ऊपर गोरी-गोरी चिकनी जाँघें साफ नजर आ रही थीं और टॉवल ऊपर से चूचियों के थोड़ा सा ही ऊपर था। हालाँकि बुआ बस मेरे रूम से निकलकर अपने रूम में ही गई थीं और इस जरा सी देर में ही मेरे अंदर का शैतान जाग गया और मैं पूरी तरह जोश में आ गया।
मैंने सोचा आज चोद ही डालूँ साली को, जो होगा देख लेंगे। और मैं उनके रूम की तरफ बढ़ा ही था कि दरवाजा खुल्ला पाया और धीरे से अंदर देखा तो बुआ अपनी टॉवल उतारकर पूरी तरह से नंगी थीं और अपना एक पैर पलंग की पाटी पर रखकर पोछ रही थीं। इस तरह से उनकी झाँटदार कचौड़ी जैसी बुर मेरी आँखों के सामने थी।
मैंने उस वक्त उन्हें चोदने का खयाल दिल से निकाल दिया और अंदर का नजारा देखने लगा। पैर पोछने के बाद बुआ अपनी चूची को टॉवल से रगड़ने लगीं। उनकी चूची एकदम लाल हो रही थी। मैं अपना हाथ लंड पर रखकर हिलाने लगा और ऊपर-नीचे करने लगा।
जब बुआ चूची रगड़कर सुखा दीं तब अल्मारी की तरफ बढ़ीं और तब मैंने पहली बार उनकी हौदा जैसी गांड देखी। वाह क्या गांड थी, ऐसे तो मेरी मम्मी और चाची की भी नहीं थी। इनकी गांड मारने में तो बहुत मजा आएगा और मैं ये सोचकर ही खल्लास हो गया।
और फिर बुआ ब्रा निकालकर पहनी फिर उसी की मैचिंग की पैंटी भी पहनकर पूरे कपड़े पहनकर मेरे रूम में आ गईं। उनके बाल अभी भी गीले थे और इस रूप में वो बहुत सुंदर लग रही थीं। मैं एकटक उन्हीं को देख रहा था। तब वो बोलीं कि लल्ला ऐसे क्या देख रहे हो।
मैंने कहा बुआ आज आप बहुत सुंदर लग रही हो। मेरे मुँह से ऐसी बात सुनकर पहले तो वो एकटक मेरा चेहरा देखती रह गईं और फिर शरमाकर बोलीं धत्त अब भला मैं सुंदर कहाँ अब मैं बूढ़ी गई हूँ लड़कियाँ शादी लायक हो चुकी हैं। उन्हें क्या पता कि मुझे बड़ी उम्र की औरतें ही पसंद थीं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
खैर उस दिन बात वहीं खत्म हो गई और दूसरे दिन रात को आखिर मैंने एक फूलप्रूफ प्लान बना ही लिया बुआ को चोदने का। जब दूसरे दिन दोनों लड़कियाँ कॉलेज गईं तब मैं बुआ से ये कहकर बाहर गया कि अभी आता हूँ एक काम निबटा कर। मुझे पता था कि ठीक 10 बजे वो टॉयलेट जाती हैं पर मैं बाहर जाकर चुपके से अंदर घुस आया और टॉयलेट में बैठ गया और दरवाजा भी नहीं बंद किया।
मुझे पता था कि अभी बुआ बस आती ही होंगी और मैंने अपने लंड को पूरी तरह से खड़ा कर रखा था और उसका रुख भी इस तरह कर रखा था कि दरवाजा खोलते ही उन्हें मेरे लंड का दीदार पूरा-पूरा हो। और तब बुआ के आने की आहट हुई और मैं संभलकर बैठ गया।
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तब ही बुआ आईं और मुझे नंगा देखकर सकपका गईं और उनकी नजरें पूरी तरह से मेरे तने हुए लंड पर टिक गईं थीं जो कि पूरा 9″ का किसी साँप की तरह फनफना रहा था। तब ही वो झेंपते हुए वहाँ से हट गईं और मैं निपटकर लुंगी बाँधता हुआ बाहर आया।
तब बुआ ने कहा बेटा तू तो बाहर गया हुआ था फिर अचानक? तब मैंने कहा कि बुआ बहुत जोर की पेशाब लगी हुई थी। तब वो बोलीं कि बेटा दरवाजा तो बंद कर लेना चाहिए। मैंने कहा कि इतनी जोर से पेशाब लगी थी कि हड़बड़ाहट में बंद करना भूल गया।
तब बुआ ने कहा कोई बात नहीं वो तो अच्छा हुआ बेटियाँ कॉलेज गई हैं और किसी ने तुमको उस हालत में नहीं देखा वरना मजाक उड़ातीं और ये कहकर वो फ्रेश होने चली गईं और मैं आगे की रणनीति बनाने लगा। जब वो आईं तब मैंने कहा कि बुआ मैं नहाने जा रहा हूँ.
और फिर वॉशरूम में गया और सारे कपड़े उतारकर नंगा हो गया मगर मुझे नहाना कहाँ था सो मैंने बहुत जोर से डोंगा पटका और चिल्लाने लगा। तब ही बुआ बाहर आईं और बोलीं कि बेटा क्या हुआ तू चिल्ला क्यों रहा है। तब मैंने कहा बुआ पैर फिसल गया है बहुत दर्द हो रहा है।
तब बुआ ने कहा बेटा दरवाजा खोल। मैंने कहा नहीं बुआ मैं नंगा हूँ आप क्रीम दे दो मैं लगा लूँगा। तब बुआ ने कहा बेटा तू दरवाजा तो खोल मैं देखती हूँ क्या हुआ और मैंने थोड़ा नाटक करने के बाद दरवाजा खोल दिया। मैं पूरा नंगा था और वहीं जमीन पर पैर फैलाकर बैठा हुआ था।
तब बुआ आईं और मेरे पैर को देखने लगीं बोलीं कहाँ चोट आई है। मैंने जाँघों की तरफ इशारा किया तब वो घुटनों के ऊपर हाथ रखती हुई बोलीं यहाँ पे? मैंने कहा जी। वो बहुत परेशान दिखाई पड़ रही थीं मुझे तकलीफ में देखकर और मैं मजे ले रहा था।
तब उन्होंने कहा बेटा तू रूम में चलकर आ तब देखती हूँ और पहले अपनी कच्छी तो पहन ले मुझे शरम आ रही है। मैंने कहा दर्द बहुत हो रहा है बुआ पहले तेल या क्रीम वगैरह लगा दीजिए। तब मैंने उनकी बात रखने को अपनी लुंगी लपेट ली और उनका सहारा लेता हुआ रूम की तरफ बढ़ने लगा और उनकी चूची को अपने सीने से दबाता जा रहा था पर उनकी जरा भी परवाह नहीं थी वो तो बस मेरे लिए परेशान थीं।
थोड़ी देर बाद बेड पर लेटने को बोलीं और मेरे पैर पर मालिश करने लगीं। मैंने धीरे से अपनी लुंगी एक तरफ सरका दी और मेरा लंड उनके नरम हाथ का स्पर्श पाकर तन चुका था। तब ही मैं कराहने लगा। तब बुआ ने घबड़ाकर पूछा क्या हुआ बेटा? मैंने कहा वहाँ बहुत दर्द हो रहा है। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने अपने लंड के बिल्कुल करीब इशारा किया और लुंगी को पूरी तरह हटा दिया। अब बुआ ने मेरे लंड के पास हाथ रखते हुए मालिश करना शुरू कर दी। मैंने देखा वो कनखियों से मेरा तना हुआ लंड देख रही थीं और मैं मजे ले रहा था। तब ही मैंने कहा बुआ अब कुछ राहत मिल रही है प्लीज जरा ये भी दबा दीजिए।
वो धत्त्त्त्त कर दीं और बोलीं ये तो तेरी बीबी ही दबाएगी लल्ला। मैंने कहा आप दबा देंगी तो क्या हो जाएगा। तब वो बोलीं तू समझता क्यों नहीं मैं तेरी बुआ हूँ मैं ऐसा नहीं कर सकती। तब मैंने उनका हाथ अपने लंड पर रखते हुए कहा अब दबा भी दीजिए मुझे तकलीफ हो रही है मैंने मजे लेने के लिए नहीं कह रहा और फिर बुआ अपने हाथ को शरमाते हुए लंड पर भी फिराने लगीं।
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अब उनका चेहरा भी लाल हो रहा था और उनकी आँखों में भी लाल डोरे तैर रहे थे। मैं समझ रहा था कि अब पटरी पर आ रही हैं बुआ। मैंने भी अब अपना हाथ उनकी चूची पर रख दिया। वो एकदम से पीछे हट गईं और आँखें दिखाते हुए बोलीं लल्ला ये क्या बदतमीजी है।
तब मैंने कहा बुआ सॉरी मैं बहक गया था प्लीज आप मालिश कीजिए और वो फिर से मालिश करने लगीं। अब मेरा लंड पूरा ताव में आ चुका था और मैं समझ रहा था कि अब ये भी मना नहीं करेगी चुदवाने में। मैंने धीरे से बुआ के होठ चूम लिए। तब बुआ थोड़ा सा सकुचाईं और फिर मुझे परे धकेलने लगीं मगर मैंने उन्हें पकड़कर अपनी गोद में बैठा लिया और उनकी बड़ी-बड़ी चूची को दबाने लगा।
वो आआह आह करने लगीं। तब मैंने उनकी ब्लाउज खोल दी और ब्रा भी उतारकर फेंक दी। उनकी चूची के निप्पल्स को होठों के बीच में रखकर दबाने लगा और उनके पेटीकोट के अंदर ले जाकर उनकी झाँटदार चूत पर फिराने लगा। अब वो भी गरमा गई थीं उनको भी मजा आने लगा था।
मैंने उनका पेटीकोट भी उतार दिया और अब वो पूरी तरह से नंगी हो गईं और अपने हाथ से अपनी चूची और जाँघों से अपनी चूत को छिपाने का असफल प्रयास कर रही थीं पर नाकाम हो रही थीं। मैंने अपने गरम होठों को उनकी चूत पर रखकर एक जोरदार चुम्बन लिया। तब वो सिसकार पड़ीं आह्ह्ह्ह।
वो मेरे लंड पर मालिश कर रही थीं तब ही मैंने उनकी चूची ब्लाउज के ऊपर से दबाई तो वो चिहुँक पड़ीं और दूर हट गईं कहने लगीं लल्ला क्या बात है आज बहुत बदतमीजी कर रहे हो। तब मैंने कहा बुआ जी गलती हो गई अब नहीं करूँगा। मैं डर गया था पर इरादा तो उनकी चूत मारने का पक्का था।
वो फिर से लंड हिलाने लगीं और मेरे लंड को बहुत चाव से देख भी रही थीं जिसे मैं बाखूबी समझ रहा था और वो चुदासी भी हो गई हैं इसका भी मुझे पता था पर वो शरमाने का नाटक कर रही थीं। मैंने कहा बुआ जी आपकी एक पप्पी ले लूँ।
तब उन्होंने मना कर दिया पर मैंने फिर भी उनके होठों पर अपने होठ रख दिए और वो मुझे पीछे की तरफ धक्का देने लगीं मगर मैं उनके नरम होठों को चूसता ही रहा। फिर मैंने उनकी ब्लाउज के ऊपर से ही उनकी बूब्स पर हाथ रखा और हिलाने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
वो अब भी विरोध कर रही थीं पर मैं उनके होठ चूसता हुआ उनकी चूची को जोर-जोर से दबाता जा रहा था। तब ही मैंने झटके से उनकी ब्लाउज उतार दी। अब बुआ अपनी दोनों चूचियों को हाथ से छिपाने लगीं पर मैंने अपना मुँह उनकी चूची पर रख दिया और अपनी जबान निकालकर उनकी घुंडी को चूसने लगा।
अब भी वो मुझे पीछे की तरफ धकेल रही थीं पर मैंने भी अपना काम जारी रखा और अब तो अपने हाथ को उनके पेटीकोट के अंदर ले जाने लगा। तब वो बोलीं कि लल्ला अब रहने दे ये अच्छी बात नहीं है मैं तेरी बुआ हूँ। तब मैंने कहा साली जब मैंने अपनी माँ को नहीं छोड़ा तो तू क्या है आज तुझे भी अपने लंड से चोदकर तेरी चूत का मजा लेना है।
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तब मेरी बात सुनकर बुआ ने कहा क्या बात कर रहा है तू भाभी को चोद चुका है? मैंने कहा हाँ अब तो माँ खुद ही अपनी चूत फैलाकर मुझसे जब तक चुदवा नहीं लेती उसको नींद ही नहीं आती और उसने पड़ोस की चाची को भी मुझसे चुदवाया है।
मेरी बातें सुनकर बुआ का विरोध कुछ हद तक कम हो चुका था और अब वो नॉर्मल हो रही थीं। मैंने मौके का फायदा उठाया और उनका पेटीकोट कमर तक उठा दिया। तब वो कहने लगीं बेटा जरा आराम से कहीं फट न जाए। तब मैंने कहा किसकी बात कर रही हो? चूत की या पेटीकोट की।
बुआ हँसने लगीं और बोलीं कि लगता है तुझे तेरी माँ ने पूरा ट्रेंड कर दिया है। तब मैंने कहा बुआ अब तो मुझे माँ की और आपकी तरह ही औरतों के साथ ही चूत का खेल खेलने में मजा आता है। तब बुआ ने कहा बेटा असली मजा तो हम ही लोगों में होता है कुँवारी लड़कियाँ भला कहाँ चुद पाती हैं और फिर तेरा लंड भी तो इतना बड़ा और मोटा है इससे तो अच्छी-अच्छी चुदक्कड़ भी पानी माँग जाएगी.
और ये कहकर मेरे लंड पर खुद ही हाथ रगड़ने लगीं और अब मैं इत्मिनान से उनकी चूची चूस रहा था और दोनों हाथ से हिला भी रहा था। जब मैं उनकी निप्पल्स को मुँह में दबाकर चिप करता तो उनकी सिसकी निकल जाती। वो बोल पड़ीं आआआह्ह्ह्ह्ह आह्ह्ह साले पी जा सारा दूध और अपने हाथ से अपनी बड़ी-बड़ी चूचियाँ मेरे मुँह में ठेलने लगीं.
और अपने सीने का जोर मेरे मुँह पर देने लगीं। अब तो मेरी चाँदी ही चाँदी थी। मैंने उनकी चूची चूसते हुए उनकी चूत की तरफ हाथ बढ़ाना शुरू किया और थोड़ी देर बाद ही घने बालों के बीच उनकी गुफा मिल गई। मैंने कहा बुआ आपकी झाँटें तो बुर को ऐसे छुपाए हुए हैं जैसे कि पेड़ किसी गुफा को छुपाते हैं।
तब वो हँस पड़ीं और बोलीं साले मदरचोद गुफा बहुत गहरी है इसमें तो तू भी अपने लंड समेत समा जाएगा और मैं अपने हाथ को उनकी झाँटदार बुर पर हिलाने लगा और थोड़ी देर बाद ही बुआ अपनी चूत को उभारने लगीं और अब वो इतना गरमा गई थीं खुद ही मुझे चोदने को बोलने लगीं आह्ह्ह आह्ह इस्स ओओफ्फ्फ लल्ला अब रहा नहीं जा रहा जल्दी से अपना लंड मेरी चूत में डालो बहुत खुजली हो रही है।
मैंने इतना सुनते ही उनकी चूत को फैलाया और दोनों टाँगों को चीर दिया यहाँ तक कि उनकी दोनों टाँगें काफी हद तक एकदम सीधी हो गई थीं जिससे उनकी चूत का मुँह खुल गया था और उनकी टाँगों को और ज्यादा फैलाते हुए मैं उनके चूत की तरफ झुकने लगा। तब वो बोलीं साले हरामी टाँगें इतनी फैलाकर क्या खुद अंदर चूत में घुसने की तैयारी कर रहा है।
तब मैंने कहा कि बुआ अभी चुप रहो और देखती जाओ आज तुम सारी जवानी की चुदाई भूल जाओगी इस तरह से चोदूँगा तुम्हें और मैंने उनकी फैली हुई लाल और उभरी हुई चूत पर अपना मुँह रख दिया और अपनी जबान से उनकी चूत हिलाने लगा। बुआ सिसियाकर बोलीं आह्ह्ह्ह लल्ला क्या कर दिया आह्ह्ह्ह हाय्य्य बहुत गुदगुदी हो रही है आह्ह्ह.
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और मैं अपनी जबान से उनकी चूत को चाटने लगा और फिर बुआ ने कहा क्या ऐसा भी किया जाता है? आज तक मेरे पति ने कभी भी ऐसा मजा नहीं दिया आह्ह्ह्ह बेटा तू तो कमाल का है वाह्ह्ह्ह चूस और जोर से चूस्स्स आह्ह्ह्ह साले हरामी चाट मेरी चूत को। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
तब ही मैंने अपनी जबान को उसकी चूत में घुसेड़ दिया और बुआ उचक पड़ीं आह्ह्ह्ह क्या कर रहा है हरामी मैं कहती हूँ अब मान जा नहीं तो मैं झड़ने ही वाली हूँ आह्ह्ह्ह और मुझे पता था कि अब बुआ झड़ने वाली हैं तब मैं अपनी जबान को जोर-जोर से चलाने लगा.
और थोड़े देर में ही बुआ मेरे मुँह में ही झड़ गईं और मेरे सिर को पकड़कर अपनी चूत पर दबाने लगीं और फिर झड़ने के बाद वो शांत हो गईं और एक तरफ लेट गईं बोलीं कि बेटा तूने तो बिना लंड डाले ही जन्नत का मजा दे दिया जब लंड मेरी चूत में डालेगा तब तो स्वर्ग ही नजर आ जाएगा।
मैंने उनको अपना लंड पकड़ाते हुए कहा साली चिनार खुद तो चुसवाकर झड़ गई और मेरा लंड अब कौन चुसेगा? और उनके मुँह में अपना लंड ठेलने लगा। तब वो बोलीं लल्ला नहीं ऐसा न करो मुझे घिन आती है। तब मैंने कहा बुआ मजा लो आज मेरे साँड़ लंड का और उनके मुँह को अपने लंड को उनके होठों पर रख दिया।
तब वो झिझकते हुए लंड पर अपनी जबान फेरने लगीं और मैंने जोर से अपनी उंगली उनकी चूत में डाली जिसे वो चीखने के लिए जैसे ही मुँह खोली मैंने अपना लंड मुँह में घुसेड़ दिया और धक्के लगाने लगा। थोड़ी देर बाद ही उन्हें मजा आने लगा और अब वो बड़े प्यार से मेरा लंड मुँह में चूसने लगीं.
और मैं उनके मुँह को ही चूत समझकर धक्के लगाने और थोड़ी देर बाद ही उनके मुँह में खलास हो गया वो मेरे रस को चूसने लगीं। मैंने उनको खाली अपना लंड चुसाकर अपना माल उनकी चूत में झाड़ दिया था मगर वहीं पर कहानी खत्म हो गई थी अब बात आगे बढ़ाता हूँ।
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मैं पहले ही बता चुका हूँ कि मेरी आदत बड़ी उम्र की औरतों की चूत और गांड मारने की हो चुकी थी पर बुआ की 2 जवान और खूबसूरत लड़कियाँ भी मुझसे चुदवाना चाहती थीं और वो दोनों कभी-कभी मुझे अश्लील इशारा भी करती थीं पर मैं नजरअंदाज कर देता।
दूसरे दिन बुआ खुद ही अपनी भक्कड़ चूत लेकर आईं रात को और अब तो वो भी मेरी तरह ही खुलकर बात करती थीं। वो मेरी लुंगी खींचते हुए बोलीं कि लल्ला कल तो तूने आग लगाकर छोड़ दिया था पर आज तो तुझे मेरी चूत की प्यास बुझानी ही पड़ेगी।
और मैंने उनकी झाँटों भरी चूत पर अपने हाथ से फैलाकर एक चुम्मा ले लिया। मेरी बुआ सिसक पड़ीं आह्ह्ह राजा तेरे साथ चुदवाने में यही तो मजा आता है कि तू पूरा मजा देकर चोदता है जबकि तेरे फूफा खाली टाँगें उठाकर चोदना जानते हैं बस कभी-कभी तो वो कपड़े भी नहीं उतारते बस ऐसे ही ऊपर से चोद देते हैं।
मैंने अपनी जीभ उनकी चूत में घुसेड़ दी और नचाने लगा। थोड़ी देर बाद ही उनकी चूत से भल-भला कर पानी निकल आया और मैंने अपना एक हाथ उनकी भारी और उभरी हुई गांड पर फेरने लगा। तब वो चिहुँक पड़ीं और बोलीं कि लल्ला इरादा क्या है। मैंने कहा जब से तेरी हौदा जैसी गांड देखी है मैंने तब ही सोच लिया था कि तेरी गांड न मारी तो कुछ नहीं किया।
ये बात सुनकर बुआ डर गईं और बोलीं बेटा ऐसे बात न करो मैंने आज तक गांड नहीं मरवाई है और मेरी एक सहेली जिसका पति बिना उसकी गांड मारे सोता नहीं है वो बता रही थी कि गांड मरवाने में बहुत दर्द होता है जबकि उसके पति का लंड तो सिर्फ 6″ का है और तेरा मूसल तो पूरा 9″ लंबा है ना बाबा ना मैं तो गांड हरगिज नहीं मरवाऊँगी तुम चाहे जैसे भी मेरी चूत 4-6 बार चोद लो पर मैं गांड नहीं मरवाऊँगी।
मैंने कहा नहीं बुआ आज तो तेरी गांड ही मारूँगा और मैंने उन्हें बिस्तर पर धकेल दिया और उनके संभलने से पहले उनकी पीठ पर चढ़ गया और उनकी गांड को हिलाने लगा। बुआ अभी बहुत ज्यादा विरोध कर रही थीं एक तरह से गिड़गिड़ा रही थीं बेटा मैं हाथ जोड़ती हूँ मुझे जाने दो मेरी गांड मत फाड़ो बहुत दर्द होगा मगर मैं तो पूरा पागल हो चुका था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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उनकी गांड पर अपने हाथ से हिलाने लगा और कभी-कभी चुटकी भी काट लेता था। अब उनका विरोध कुछ कम हो रहा था पर वो बहुत डरी हुई थीं और अपने ऊपर से मुझे हटाने की पूरी कोशिश कर रही थीं। तब ही मैंने उनकी गांड पर बहुत जोर से हाथ मारा और उनकी फूली हुई गांड लाल हो गई।
तब मैंने एक हाथ और मारा छटाआआक की आवाज के साथ ही बुआ की चीख निकल पड़ी। वो बोलीं लल्ला मार क्यों रहे हो। मैंने कहा तू चिल्ला बहुत रही है ना रंडी आज देख तेरी गांड का क्या हाल करता हूँ और मैंने बहुत सारा थूक उनकी गांड पर थूक दिया और अपने लंड से हिलाने लगा।
उनकी लाल-लाल गांड पर मेरा थूक बहुत अच्छा लग रहा था। तब ही मैं उनके ऊपर से उठ गया और उनको किसी कुतिया की तरह दोनों हाथों और घुटनों के सहारे खड़ा किया और उनकी पेट के नीचे 2 तकिए लगा दिए जिससे कि मेरा धक्का खाने के बाद वो बेड पर न पसर जाएँ और मेरा मजा किरकिरा हो जाए।
तब ही बुआ ने कहा लल्ला देख मैं आज जिंदगी में पहली बार गांड मरवाने जा रही हूँ प्लीज धीरे-धीरे अपना लंड घुसेड़ना और हो सके तो पूरा लंड न घुसेड़ना। मैंने उनका मन रखने को कह दिया जी बुआ आप खामखा डर रही हैं अगर आपको तकलीफ होगी तो मैं आधे लंड से ही काम चला लूँगा।
और उनकी गांड को अपने दोनों हाथ से चीरकर अपने लंड की टोपी को उनकी गांड के लाल छेद से भिड़ाया और एक थाप मारा। मेरा 3″ लंड अंदर घुस गया। बुआ की चीख निकल पड़ी आह्ह्ह्ह उउईई आह्ह्ह मार डाला आह्ह्ह्ह निकालो साले मदरचोद बहुत दर्द हो रहा है आह्ह्ह्ह भोसड़ी के साले निकाआअल्ल्ल ले अपनी माँ की गांड मार लेना अह्ह्ह्ह और मुझे गुस्सा आ गया।
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तब ही मैंने एक जोरदार धक्का मारा आह्ह्ह्ह्ह आह्ह्ह बुआ जोर-जोर से चिल्लाने लगीं और तब ही शायद उनकी दोनों लड़कियाँ भी कॉलेज से आ गई थीं जो पर्दे की आड़ से अपनी माँ को गांड मरवाता देख रही थीं और मेरी नजर भी उन पर पड़ चुकी थी पर उन दोनों को नहीं पता था कि मैं उनको देख चुका हूँ। मैं अपना काम जारी रखते हुए बुआ को जोरदार धक्के मार रहा था। अब बुआ की आँख से आँसू निकल रहे थे और वो कराह रही थीं बोलीं साले भड़वे माना नहीं और फाड़ ही दी मेरी गांड।
मैंने कहा क्या अभी भी तकलीफ हो रही है। तब बुआ ने कहा अब तो गांड फट ही गई अब पूरी तरह ही फाड़ डाल मेरी गांड को उड़ा दे गांड की धज्जियाँ और फिर मैं जोर-जोर से धक्के लगाते हुए अपने माल को उनकी गांड में उड़ेलने लगा जिसे दोनों लड़कियाँ अपनी आँखें फाड़कर देख रही थीं और साथ ही मेरे हलाबी लंड को बहुत भूखी आँखों से देख रही थीं। उसके बाद मैंने उन दोनों लड़कियों की न चाहते हुए भी चुदाई की जिसका जिक्र मैं अगली बार बताऊँगा।
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