Bihari Chudai Story
मेरा नाम रिमझिम है मै बिहार से हूं। बात 2003 की है मै उस टाईम 32 साल की थी और मेरी शादी हो गई थी और मेरी दो बेटियां थी। मेरी फिगर उस टाईम 36 32 38 होगा। मै काफी गदराई हुई थी। तो बात यूं हुई कि मै अपने ससुराल मे थी और मुझे अपने नानी के घर जाना था। मेरे पति देवर घर पर थे नही तो सासू माँ ने अपने नाती यानि मेरे पति के भांजे को बुला लिया कि जा बहु को छोड़ आ। Bihari Chudai Story
मै और मेरी बेटी जाने वाले थे पर मेरी बेटी ने जाने से मना कर दिया तो सिर्फ मै ही जा रही थी। मेरे पति के बहन का ससुराल नजदीक ही था तो भांजा जिसका नाम अंशु है दोपहर मे आ गया। और हम उसी टाईम निकल भी गए। हमारे पास एक मारुति 800 थी जिससे।
ठंड के दिन थे रास्ता लम्बा था तो जल्द ही शाम होने लगी। मेरे ससुराल से नानी घर लगभग 130 किमी होगा। हम सात बजे तक लगभग 100 किमी चले गए थे और बस 30 किमी दूरी ही बची थी जो काफी सूनसान था और खराब रोड भी। बिहार मे उन दिनो अंधेरा होते ही सब कुछ बंद हो जाता था ये तो आप जानते ही होंगे।
हम सुनसान रास्ते पर जा रहे थे एक भी लाइट दूर दूर तक दिखाई नही दे रही थी और ऐसे मे हमारी गाड़ी भी बन्द हो गई। अब हम तक ना कोई मदद पहुंच सकती थी और ना कोई फोन होता था उस टाईम। अंशु ने कुछ देर ट्राई किया पर गाड़ी नही चली। मै उसे बोली कि गाड़ी की लाइट बन्द कर दो और गाड़ी दोनो मिलकर धक्का दे साईड मे कर दी सड़क से एक ओर।
क्योंकि सुनसान जगह पर लाइट जलता देख कोई भी चोर लुटेरा आ सकता था। अब हम दोनो को रात कैसे भी काटनी थी। दिसम्बर की कड़कड़ाती ठंडी अंधेरी रात मे हम दोनो अकेले थे कार मे। हम पीछे की सीट पर आ गए। हम कुछ देर तो बात किए और मेरे बैग मे कुछ बिस्किट और स्नैक्स थे जो हमने खा पेट भरा और एकदम ठंडा पानी पिया।
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हम कुछ देर बात किए और जब रात गहराने लगी तो ठंड बढ़ने लगी मेरे पास एक ही छोटी सी चादर थी जो मै ओढ़ रखी थी। अंशु पेशाब करने बाहर निकला और जब आया तो उसे काफी ठंड लग रही थी मुझे भी पेशाब लगी तो मै भी उतरी और सूसू करने लगी बाहर काफी ठंडी हवा चल रही थी। मै अन्दर आई।
मै: इधर नजदीक आ जाओ चादर मे।
अंशु: नही ठीक है।
मै: आ जाओ खा नही जाऊंगी मै।
अंशु थोड़ा नजदीक बैठा उसने शर्ट पेंट और सिर्फ एक जैकेट पहन रखा था। मै भी सिर्फ साड़ी और स्वेटर पहन रखी थी तो ज्यादा कपड़े ना पहने होने के कारण ठंड काफी लग रही थी। मै उसे चादर मे ढक ली हम दोनो सट कर बैठे थे। अंशु एक 21 साल का बहुत ही सजीला नौजवान था लेकिन वो थोड़ा शर्मीला था।
मै उसके कन्धे पर सर रख दी कुछ देर बाद वो मेरे कन्धे पर सर रख दिया मै उसे बाहों मे जैसे पकड़ते हैं वैसे पकड़ बैठी थी कुछ देर मे उसने भी एक हाथ मेरी कमर और एक हाथ मेरी पेट पर रख दिया और सहलाने लगा। मै कुछ देर तो कुछ नही बोली उसके बाद उसका सर कन्धे से सरकते हुए मेरे मम्मे पर जा टीका मै रहने दी उसे भी।
अब अंशु के बारे मे एक बात बताती हूं तो जब मै शादी के बाद ससुराल गई थी कोई एक महीने हुए होंगे शादी के अंशु उस टाईम 13 या 14 साल का ही रहा होगा और वहीं पर आया हुआ था। एक शाम मै अपने कपड़े लेने छत पर गई तो मेरी साड़ी पेटिकोट तो थे पर ब्लाउज ब्रा और पैन्टी नही थी।
ब्रा पैंटी मै पेटीकोट के नीचे छुपा कर सूखने दी थी तो मुझे समझते देर नही लगी कि किसी ने हटाए हैं। मै इधर उधर देखी तो मेरी नजर बगल मे जो दालान थी वहां गई। मै देखी कि अंशु मेरी ब्रा पैंटी और ब्लाउज लिए हुए था। मै छत पर से ही छुप कर देखने लगी कि ये क्या करता है। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मै देखी कि पहले तो उसने मेरी ब्रा पैंटी और ब्लाउज को अपने नाक के पास ले जा सूंघा। उसके बाद उसने अपने सारे कपड़े निकाल दिए उसका बड़ा सा लण्ड फुंफकार रहा था फिर उसने मेरी पैंटी पहन ली और ब्रा को अपने लण्ङ पर लपेट ब्लाउज को नाक से लगा सूंघता रहा। उसका लण्ड 135° मे खड़ा था।
वो कभी ब्रा को सुपाड़े से लपेट सहलाता तो कभी ब्लाउज को तो कभी पैंटी को ऐसे करते हुए वो झड़ गया उसके लण्ड के पास मेरी ब्रा लपटी थी और मेरी पैंटी उसने पहन रखी थी। स्खलन के बाद उसने इधर उधर देखा और दालान के जमीन पर पड़ी अपने माल पर पानी डाला और अपने लण्ङ को मेरी ब्रा पैंटी से साफ किया और उन्हें उतार कर अपने कपड़े पहन लिया।
मै समझ गई कि ये अब मेरे कपड़े रखने वापस ऊपर आएगा तो मै अपनी साड़ी और पेटिकोट वापस पसार दी और नीचे आ गई। मै नीचे आ उसका ही वेट कर रही थी आने का घर मे भी सभी लोग थे मै सीढ़ी के पास ही मंडरा रही थी। वो घर आया उसके हाथ मे एक झोला था मै समझ गई कि इसमें ही मेरे कपड़े हैं।
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मै: मेरे कपड़े लाईए।
वो एक दम हड़बड़ा गया, और डर गया।
अंशु: का क्या?
मै: (हँसते हुए) इतना घबरा क्यों रहे हो कहीं चोरी किए हो क्या। मेरे कपड़े ऊपर हैं आप जा रहे हो तो लेते आना।
अंशु: आप खुद ले आइएगा!
मै: ठीक है मै ले आती हूं।
अंशु: अच्छा आप यहीं रुकिए मै लेकर आता हूं।
वो हड़बड़ा गया था, तो मै भी ज्यादा नही छेड़ी उसे। वो ऊपर चला गया और मै अपने कमरे मे वो काफी देर बाद आया कपड़े ले कर। मै अपनी ब्रा पैन्टी को देखी उसने अपने रस के दाग को मिटाने की बहुत कोशिश करी थी। अब कुछ दिन नॉर्मल बीते पर अब शायद उस दिन के बाद उसकी हिम्मत नहीं हुई कुछ ऐसा करने की हालांकि मै कुछ बोली नहीं थी उसे।
क्योंकि मुझे गुस्सा नही आया था बल्कि हँसी ही आई थी और मन मे एक ऐसे ही विचार आया था उसका कुंवारा लण्ङ देख कर कि अगर फ्यूचर मे किसी और लण्ङ कि जरूरत हुई तो इसका लण्ङ ट्राई करूंगी। जिस दिन वो जा रहा था मै अपनी एक न्यू पैंटी अपनी चूत रस से पूरी गीली कर चुप चाप उसके बैग मे डाल दी।
उसके बाद ऐसा कुछ नही हुआ हम मिलते भी तो बस नॉर्मल। हां पर जब मै कुछ साल बाद उसके घर गई थी और उसके कमरे मे थी तो मुझे वो पैन्टी उसके बेड के नीचे मिली थी। पहले तो मुझे याद ही नही आ रहा था कुछ मै उससे पूछने वाली थी कि ये किसकी है लेकिन वो कमरे मे नही था तो कुछ देर मे मुझे याद आया कि ये तो मेरी ही है।
मै उसे वापस बेड के नीचे छुपा दी। मुझे लगा कि इसने आज तक इसे संभाल कर रखा है। अब उसके बाद जब वो मेरे घर यानि कि अपने नानी घर आया तो मै उसके जाते टाईम अपनी एक और पैन्टी उसे अपनी चूत रस से गीली कर उसके बैग मे डाल दी।
उसके बाद जब भी वो आता मै अपनी ब्रा या पैंटी उसके वापस जाते वक्त उसके बैग मे डाल देती। ऐसा करने मे मुझे पता नही क्या मजा मिलता पर ये मेरा हर बार का हो गया था। पर इससे आगे ना मै बढ़ी ना वो, और ना कभी हमने कुछ ऐसी बात करी। शायद कभी ना मौका मिला दोनो को और ना मुझे जरूरत हुई। पर मै मजाक करती थी जो मामी भांजे मे नॉर्मल होता है।
अब वापस कहानी पर आते हैं। हम कार मे थे और ठंड काफी लगने लगी थी दोनो को। वो मेरी पेट को सहला रहा था।
मै: क्या कर रहे हो।
अंशु: इससे थोड़ा गर्म लगेगा आपको।
मुझे उसके सहलाने से अच्छा लग रहा था।
मै: और गर्म जगह छूना है?
अंशु: हां।
मै अपनी साड़ी ऊपर करी और उसके हाथ को अपनी चिकनी बुर पर रख दी। उसने भी अपने पंजे मे मेरी पूरी बुर को भर दबोच लिया।
मै: आह, ओह, हां ऐसे ही करते रहो।
मै पैंटी उतार दी और वो मेरी अब नंगी बुर को दबाने लगा। कुछ 20 30 बार दबाने पर मै भड़भड़ा कर झड़ गई। मै टॉवेल से अपनी बुर और उसके हाथ को साफ करी। अब हम दोनो को ही थोड़ी कम ठंड लग रही थी। मै उसके पेंट में हाथ डाल दी और उसके लन्ड को पकड़ ली उसकी आह निकल गई। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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उसका कड़क लन्ड एक दम गर्म था और काफी हार्ड हो गया था। मै उसके होंठ से होंठ मिला दी और चूमने लगी। वो भी साथ देने लगा और मेरे गाल गले कान होंठ सब जगह चूसने लगा मुझे कस कर बाहों मे भर लिया मै भी भर अकवार उसे दबोच ली। मै टांग खोल दी और सीधा उसके लन्ड को पकड़ अपनी बुर से सटा दी.
उसने भी धक्का मारा और लन्ड सरसराते हुए मेरी चूत मे उतर गया मेरी आह निकल गई और उसने भी हल्की आह भरी। कुछ देर मै उसे वैसे ही दबोचे रही फिर वो धक्के लगाने लगा। मै मजे लेते हुए चुदाने लगी। वो मेरी चूचियां पीना चाहता था तो ब्लाउज खोल पीने लगा मै कुछ देर में झड़ गई और वो भी मेरे अंदर ही झड़ गया।
रात भर मे उसने मेरी तीन बार चूदाई करी। और हमने सारी रात जाग कर बाते करते हुए काटी। मै उससे पूछी की पहले किसी की ली है तो उसने कहा नही। अब हमने वो सारी बाते की कि कैसे वो मेरी ब्रा पैन्टी मे मूठ मारता था और मै हर बार उसे अपनी पैन्टी चुपके से उसके बैग मे रख देती थी।
और सुबह होने पर एक कस्बे से मिस्त्री किसी ने भेजा तो हम नानी घर पहुंचे। अब मै आपको बताती हूं कि मै नानी घर क्यूं आई थी। दरअसल मेरी नानी की तबियत बिगड़ी थी और वो मुझे देखना चाहती थी इसलिए बुलाया था। पर मेरे जाते ही नानी ठीक हो गई थी।
नानी घर पर और भी लोग नानी को देखने आए हुए थे। नानी मेरी सबसे छोटे मामा के साथ रहती है बड़े मामा भी पास मे ही रहते हैं। छोटे मामा की एक 19 साल की बेटी और एक 18 साल का बेटा है। मै और अंशु तो रात भर के जगे थे तो थक कर दिन भर सो ही गए थे।
शाम 3 बजे मै उठी और नानी के पास जा खूब बात करी और उसे तेल लगा दी। अब खाना खा रात को सब थोड़ी देर बात किए। ओर सब सोने का इंतजाम करने लगे। मेरे और अंशु के सोने का इंतजाम मामा के बेटी के कमरे में था जिसमे एक बेड पर ही मै मेरी ममेरी बहन निशा एक रजाई मे ओर अंशु ओर गोलू एक रजाई मे लेट गए।
निशा दीवाल के साईड थी उसके बाद मै, मेरे बाद गोलू ओर उसके बाद अंशु था। मुझे जल्दी नींद आ गई पर दिन मे सोने की वजह से 2 बजे खुल भी गई। अंशु की भी नींद खुल गई थी अब हम दोनों को ही नींद नहीं आ रही थी हम दोनों धीरे-धीरे आपस में धीरे धीरे बात करने लगे।
अंशु का हाथ बढा मैं अपनी चूचियों पर रखवाली वो गोलू के ऊपर से हाथ कर ला रहा था क्योंकि गोलू बीच में सोया था वह मेरी चूचियों का धीरे-धीरे मर्दन करता है। मैं आनंद से सी सी कर रही थी धीरे-धीरे। उसकी मर्दन से मेरी चूचियां दर्द करने लगी। मैं उसे हाथ हटाने बोली तो उसने हाथ हटा लिया अब हम।
मैं अपनी सारी अपने पेट तक उठा लिया रजाई के अंदर ही और उसका हाथ सीधा अपने बुर पर रखवा ली। उसको बाया हाथ मेरी बुर पर था। बहुत धीरे-धीरे मेरी बुर सहला रहा था। तभी मेरे ममेरे भाई गोलू ने मेरे ऊपर टांग चढ़ा दी नींद में।
मैं अंशु का हाथ हटा जल्दी से अपनी साड़ी नीचे की। मैं और अंशु दोनों सहम गये और थोड़ी देर चुप रहे। मैं चेक करी कहीं गोलू जग तो नहीं गया पर वह नींद मे ही था। मै चित लेटी थी अब मै करवट कर लेट गई और गोलू को थोड़ा नीचे कर दी और मै और अंशु फिर बात करने लगे।
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अंशु: मामी एकदम खड़ा हो गया है।
मामी: मै भी झड़ने वाली थी।
अंशु: मामी मैं एक बात बोलूं बुरा तो नहीं मानोगे।
मै: नहीं मानूंगी बोलो।
अंशु: कभी मामा ने आपके पीछे से किया है?
मै: नही, क्यों?
अंशु: मुझे आपके पीछे से करना है।
मै: धत पागल;!
अंशु: मामी, प्लीज मना मत करना।
मै: ठीक है पर मौका मिलेगा तब ना। पर तुम्हें भी मेरी एक बात मानी होगी।
अंशु: क्या?
मै: मेरी बुर चाटनी होगी!
अंशु: ठीक है पर, आपने जो गाड़ी में कहा था कि किसी की कुंवारी बुर दिलवाओगी उसका क्या?
मै: ठीक है देखती हूं, पहले तुम मेरी बुर सहलाओ।
अंशु: मेरा भी लन्ड दर्द कर रहा है।
मै: उसका मैं कल इंतजाम करूंगी।
मैं अब गोलू का पैर हटाती हूं और अपनी साड़ी वापस ऊपर कर अंशु का हाथ मेरे बुर पे रखती हुं। वो मेरी बुर सहला रहा था मै झड़ने वाली थी मेरी सांसे भारी हो गई थी और मै झड़ गई। कुछ देर मे मै सो गई। रात मे छोटे से बेड पर सोने में बहुत दिक्कत हुई थी। सुबह हुई तो सब घूमने चले गए थे खेतों में मैं और निशा घर में थे कमरे में अकेले थे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
निशा: दीदी कल रात में आप क्या कर रही थी।
मै समझ गई कि वो रात मे कुछ सुन ली होगी तो मै उससे कुछ छुपाना नही चाहती थी।
मै: जवानी के मजे ले रही थी।
निशा: पर गलत नहीं है वह आपका भांजा है।
मै: कुछ गलत नहीं है वैसे भी मामी पर भांजे का हक होता है।
निशा: किसी को पता चल गया तो।
मै: किसी को पता नहीं चलेगा, तू भी अगर जमाने का मजा लेना चाहती है तो मैं तुझे भी दिलवा सकती हूं।
निशा: कैसे दीदी?
मै: वह सब तो मुझ पर छोड़ दे।
निशा: नहीं दीदी मुझे डर लगता है।
मै उसकी दोनो चूचियां पकड़ ली।
निशा: आह दीदी छोड़ो दर्द होता है।
मै: दर्द होता है, तेरा मर्द दवायेगा का तो तुझे मजा आएगा।
मैं उसे दबोच ली थी वह भी मुझे पकड़ ली।
निशा: दीदी आपकी चूचियां इतनी बड़ी कैसे हो गई हैं।
मै: तेरे जीजू ने कर दी है बोल तो तेरे भी करवा दूं।
अब धीरे धीरे मै उसे खोलने लगी और उसे कहा कि रात मे उसे मजा करवांगी पर उसने बोला नही दीदी बस जाग कर आप लोगो की बात सुनूंगी, और आप कुछ करोगी तो देख भी लूंगी।
मै: ठीक है पर हमें करने का मौका कब मिलेगा। गोलू भी तो होगा।
निशा: गोलू को किनारे छोड़ अंशु जी को आप इधर बुला लेना।
मै: ठीक है!
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अब दिन भर ऐसे ही बात चली और रात को एक कमरे में पुयाल लगा था और हम सब टीवी देख रहे थे. मामी खाना बना रही थी और हम सब सब टीवी देख रहे थे. कमरे में मैं मामा अंशु गोलू निशा ओर मेरी एक बड़ी मौसी थीं। सभी लोग आगे की ओर बैठे थे बस मै ओर अंशु ही पीछे थे दीवाल से सट कर सबने रजाई डाल रखी थी।
मै अंशु के दाएं ओर थी मैं रजाई के अंदर उसका लन्ड पकड़े थी और सहला रही थी वो भी लन्ड सहलाने का मजा ले रहा था। इतने में गोलू भी मेरे दाई ओर आकर बैठ गया। अब मैं उसे असमंजस मे थी अंशु का कड़क लैंड छोड़ भी नहीं सकती थी. मै रजाई के अंदर अंशु के लन्ड का मर्दन करती रही। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
गोलू: (मेरे कान मे धीरे से बोला!) क्या कर रही हो दीदी।
मै समझ गई कि इसे शक हो गया है। उसने रजाई थोड़ी हटा कर भी देख लिया मेरे हाथ मे अंशु का कड़क मोटा लन्ड था। अंशु को पता चला कि गोलू ने रजाई हटा दी है तो वो हड़बड़ा गया पर मै घबराई नहीं. मै रजाई सही करी और अपना दायां हाथ सीधा गोलू के लन्ड पर रखा पजामे के ऊपर से वो शरमा गया मै उसके पजामे में हाथ डाल दी और उसके लन्ड को पकड़ ली उसका लन्ड धीरे-धीरे कर कड़क होने लगा।
अब मेरे दोनों हाथ में लन्ड था मै दोनों को सहला रही थी। गोलू की आंखें मजे से बंद होने लगी मैं समझ गई यह ज्यादा देर नहीं टिकेगा उसके मुंह से आवाज भी निकल सकता था तो मैं उसका मुंह बंद कर दी और उसके लन्ड को कस कर ऊपर नीचे करने लगी उसका लन्ड पत्थर की तरह हो गया था।
गोलू कुछ देर में हाँफते हुए झड़ गया मेरे हाथ में ही। मै उसे रजाई के अंदर कर दी अपना हाथ साफ करने बाहर आ गई अंशु भी मेरे पीछे पीछे आ गया था। अब सब खाने के लिए बाहर आ गए थे गोलू अभी भी रजाई मे ही था मामी उसे बुलाने निशा को भेजी पर मैं उसे मना कर खुद चली गई।
मैं गोलू को रजाई से उठाकर बोली कि अपने रूम में भी पुआल बिछा दो रात में मजा करेंगे। अब हमने खाना खाया और सोने की तैयारी करने लगे कमरे में आई तो गोलू ने पुआल बिछा रखा था। हम चारों अब जैसे कल सोए थे सो गए। आज जगह काफी थी तो सोने मे तकलीफ नही थी।
मैं पहले गोलू का काम निपटा देना चाहती थी। जैसे ही मुझे लगा कि निशा सो गई है मै ओर गोलू एक दूसरे के तरफ हो गए और रजाई मे घुस गए कमरे मे अंधेरा तो था ही मै उसके होंठ चूसने लगी उसके गाल पर सब जगह मम्मे को ब्लाउज से बाहर कर उसके मुंह में भर दी वो मेरी चुचीया पीने लगा। मेरे निप्पल को दांत से काटने लगा मेरी सिसकी निकल गई मैं उसके बाल को खींची मैं अपना साड़ी कमर तक उठा ली।
और उसका हाथ अपनी चूत पर रखवा दी। मै उसके पजामे को नीचे कर दी और उसके लन्ड को पकड़ सहलाने लगी उसका लन्ड कड़क हो चुका था। वो मेरी बुर सहला रहा था और मै उसका लन्ड। कुछ ही देर मे वो झड़ गया। मै भी झड़ गई थी। अब हम दोनों ही सो गए रात 3:00 के निशा पेशाब करने उठी तो मेरी भी नींद खुल गई। मैं भी किसके साथ मुतने चली गई।
निशा: अब आप और अंशु कुछ करो मुझे कुछ देखना है मैं देखूंगी।
निशा ओर मै घर के आंगन मे एक साथ बैठ मूत रही थी। मैं मूतने के बाद पानी से अपना बुर धोई। हम दोनों कमरे में आ गए। निशा अपनी जगह पर लेट गई। मैं धीरे से अंशु को जगा कर अपनी ओर कर ली। अंशु अब गोलू और मेरे बीच था। मैं उसे खुद पर चढ़ा ली, अब एक रजाई में मैं अंशु और निशा थे। निशा चुपचाप सोने का नाटक कर रही थी। अंशु मेरे ऊपर चढ़कर मुझे चूमने लगा। मेरे गले गाल कान सब जगह चूसा मै ब्लाउज खोल उसे अपनी चूंची चुसाने लगी।
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मै: मेरी बुर चूसो ना प्लीज।
वो नीचे को सड़का मेरे पेट पेडू को चूमते चूसते हुए मै अपनी साड़ी ऊपर करी वो धीरे धीरे मेरी बुर पर पहले चूमा सूंघा फिर चाटने लगा मै अपनी टांग फैला ली। वह मेरी गद्देदार बुर चाट रहा था मै सिसकने लगी। मै बाए हाथ से अंशु का सर दबा रही थी और दाई हाथ मै निशा की तरफ बढ़ा उसकी चूंचियां टटोलने लगी। निशा बाई करवट हो रजाई के अंदर से हमें देख रही थी मैं उसकी चूचियों पर हाथ रख दी और मर्दन करने लगी।
उसने एक बार हाथ हटाए फिर मैं रख दिया मैं उसके सूट के अंदर से उसके चूचियों को छूने लगी। इधर अंशु की बुर चटाई से मैं झड़ने के करीब आ गई थी। कुछ देर में मैं झड़ गई। अंशु वापस मेरे ऊपर चढ़ गया मैं उसका पजामा नीचे कर उसके कड़क लन्ड को बुर में घुसा ली। वह मुझे अब जमकर चोदने लगा मैं आहे भरने लगी। मैं उसे कसकर पकड़ रखी थी कुछ देर के चूदाई के बाद अंशु बोला-
अंशु: मामी मुझे आपके पीछे से करना है।
मै: ठीक है कर लो।
मै दाई करवट हो गई ओर निशा से चिपक गई अंशु मेरे पीछे हो गया मैं अपनी गांड पीछे की और उसे पीछे से लैंड डालने के लिए कहा। उसे बेवकूफ ने गांड की जगह बुर में ही लन्ड डाल दिया। मैं भी चुप रही, क्योंकि मेरी गांड कुंवारी थी अंशु को लग रहा था कि वह मेरी गांड मार रहा है पर लैंड मेरी चूत में था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
वह पीछे से दनादन चोदने लगा। मै इधर निशा को दबाने लगी। निशा के होंठ को चूसने लगी उसके गाल गर्दन सीने सब जगह चूसने चूमने लगी। उसके सूट के ऊपर से उसकी चूचियां निकाल उसकी छोटी सी चूचियों के मुंह में भर ली और चूसने लगी उसके मसूर के दाने जैसे निप्पल थे। अब मैं अपना हाथ निशा के सलवार में डाल दी उसकी बुर सहलाने लगी।
गोवा वॉच निकलने लगी तो मैं उसका हॉट चूसने लगी अब मैं अपना पतली ऊंगली उसकी बुर में डाल दी। उसकी बुर एकदम भट्टी की तरह गर्म थी। इधर अंशु मुझे पीछे से मेरी पीठ चूमते हुए चोदे जा रहा था। इधर मैं निशा का बुर अच्छे से सहला रही थी और एक उंगली कर रही थी निशा मेरे नंगे मम्मे से खेल रही थी। कुछ देर में मैं हाँफते हुए झड़ गई निशा भी झड़ चुकी थी और अंशु भी मेरे अंदर ही झड़ गया।
अंशु: मामी आपकी गांड बहुत मस्त लगा।
मै मन ही मन हंसने लगी अब हम कपड़े सही कर अपनी अपनी जगह सो गए। अब अगले दिन गोलू मेरे आगे पीछे हीं दिन भर डोलता रहा मैं भी उसका कभी चुपके से लन्ड पकड़ लेती कभी उसको अपनी चूचियां दिखा कर दिन भर सताती रही। वह मेरी चूदाई करने को मरा जा रहा था। इधर निशा भी मेरी चूदाई देख और मेरे छूने से गर्म हो चूदाई के लिए मरी जा रही थी।
रात को खाने से पहले सब टीवी देख रहे थे कल की तरह गोलू मेरी दाएं और आकर बैठ गया और मेरे हाथ से खेलने लगा मैं रजाई के अंदर है उसके पैन्ट पर हाथ ले गई। धीरे-धीरे पैन्ट के अंदर हाथ डाल उसका लन्ड पकड़ सहलाने लगी। उसका कड़क गर्म लन्ड मै मर्दन करने लगी। कुछ देर बाद वो झड़ गया। गोलू धीरे से मेरे कान में बोला दोगी नहीं क्या।
मैं उससे बोली आज रात हम एक ही रजाई में सोएंगे और तुम मेरी जमकर मार लेना। कुछ देर में सब खाना खा सोने की तैयारी करने लगे। मै निशा और अंशु का काम बढ़ा देना चाहती थी इसलिए गोलू को कंडोम लाने के बहाने से भेज दिया। मै अंशु ओर निशा कमरे मे आ गए मै गेट अंदर से बन्द कर दी। निशा चूदाई के लिए उतावली थी लेकिन वो शरमा रही थी।
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मै: जल्दी से गोलू के आने से पहले अपना काम शुरू कर दो।
निशा शरमा ही रही थी तो मै अंशु को खड़ा करी और सीधा उसका पजामा नीचे कर दी और उसका कड़क लन्ड सहलाने लगी। मैं निशा को भी पकड़ने बोली, वो पहले शरमाई फिर पकड़ ली। अब मैं दीवार पे पीठ सट्टा बैठ , निशा को मैं अपने गोद में बैठा ली और उसकी सलवार नीचे कर पैन्टी भी उतार दी।
अब निशा की गोरी चिकनी बुर अंशु के सामने थी। निशा शर्मा रही थी और अपनी बुर को हाथों से ढक रही थी। मैं उसका हाथ हटाई और अंशु को निशा का बुर चाटने को बोली। अंशु नीचे उसकी जांघों के बीच लेट गया और निशा की बुर चूमने चाटने लगा। निशा सिसकने लगी। मैं निशा की चूचियां मसल रही थी। निशा पूरी तरह गर्म हो गई थी।
मै: अब जल्दी करो गोलू कहीं आ ना जाए।
मै अंशु को घुटने के बाल लन्ड निकाल निशा के बुर के पास बैठने को बोली ली। मै अंशु का लन्ड पकड़ निशा के बुर पर घिसने लगी। अब अंशु को उसकी बुर में लन्ड घुसाने बोली। अभी इतना ही हुआ था कि गोलू ने दरवाजे पर दस्तक दी। अंशु ओर निशा घबरा गए और रजाई के अन्दर चले गए और अंदर ही कपड़े सही किए। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मै: तुम दोनों चुप हो जाओ और सोने का नाटक करो।
मै कमरे का लाइट बंद कर दरवाजा खोली। मै गोलू को कमल के बाहर ही ले गई।
मै:(धीरे से) लाया कंडोम।
गोलू: नही मिला।
मै: अच्छा ठीक है ऐसे ही करेंगे सबके सोने के बाद।
हम अब कमरे में आए और पहले जैसे सोते थे वैसे ही सो गए। मै और गोलू एक ही तरफ मुंह कर अलग-अलग रजाई मे सो रहे थे। मै धीरे से गोलू को बोली कि हम एक ही रजाई मे हो जाते हैं। गोलू ओर मै धीरे धीरे अंशु को खिसका कर निशा की रजाई मे कर दिए। गोलू को लगा कि अंशु सो रहा है पर वह सोने का नाटक कर रहा था।
अब हम और गोलू एक रजाई में आ गए। गोलू एक साइड में था मैं उसे अपने ऊपर चढ़ा ली और उसे चूमने लगी उसके होंठ चूसने लगी उसके गले गाल गर्दन को चूमने चूसने लगी। वो भी मेरे ऊपर लेट मेरे होंठ गले गाल गर्दन पर चुम्बन करने लगा मै अपनी बड़ी-बड़ी चूचि उसे चूसाने लगी।
वह मेरे निप्पल को चूस रहा था मैं उसको पजामा नीचे कर दी और अपनी साड़ी पेट तक उठा ली। मैं अपने हाथ से उसके कड़क लन्ड को पकड़ कर अपनी बुर पर सेट कर दी। उसका कुंवारा कड़क लन्ड की बुर में उतर गया। मेरी आह निकल गई। गोलू भी आनंद से सीत्कार उठा।
मैं उसके चूतड पकड़ दना दन धक्के लगाने लगी। कुछ देर में वो थक गया तो मैं उसे नीचे लिटा दी और खुद उसके ऊपर आकर लन्ड पर बैठ गई और धक्के लगाने लगी हम दोनों रजाई के अंदर ही थे मैं आह आह कर रही थी। दे दना दन धक्के लगा रही थी और गोलू को पकड़ चूम चूस रही थी, मैं पूरा उसे निचोड़ लेना चाहती थी ताकि थक कर वो रात मे ना जगे।
कुछ देर बाद हम दोनो ही झड़ गए। और थक कर सो गए। अब रात में 2:00 बजे मुझे अंशु ने जगाया मुझे लगा था कि अंशु ने अब तक निशा की चूदाई कर दी होगी। निशा भी उठ गई थी उन दोनों की चूदाई नहीं हो पाई थी। मैं अब गोलू को छोड़ उनके रजाई में आ गई थी।
मैं सीधा निशा को सलवार उतरने बोली उसने घुटने तक उतार दी अंशु का लन्ड पकड़ मै निशा के बुर पर घिसने लगी। अंशु को निशा पर चढ़ने बोली वो चढ़ गया मैं अपने हाथ से उसके लन्ड को निशा के बुर में दबाने लगी। पूरा लन्ड घुसा तो निशा की चीख निकल गई, मैं अपने हाथ से उसका मुंह बंद करी।
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धीरे धीरे वैसे ही अंशु को करने बोली कुछ देर में निशा को अच्छा लगने लगा अब थोड़ा और अंदर तक उतार दिया निशा को थोड़ा दर्द हुआ मैं उसका मुंह बंद कर अंशु को जोर से धक्का लगने बोली उसने वैसा ही किया। लन्ड अब पूरा का पूरा बुर में उतर चुका था निशा की चीख मेरे हाथ की वजह से मुंह में दब गया था।
कुछ देर मे निशा को अच्छा लगने लगा वह हल्के हल्के से सीसक रही थी और आह आह कर मजे ले रही थी। कुछ देर में निशा झड़ गई और अंशु भी झड़ने वाला था और हाँफने लगा था तो मै उसको निशा के ऊपर से उतार दी और उसका लन्ड हाथ से हिला झाड़ दी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
वह दोनों थक कर सो गए और मैं भी सो गई। दिन में निशा की बुर मे दर्द से चलने में उसे दिक्कत हो रहा था। अब दिन भर सब इधर उधर रहे और रात मे भी जल्दी सो गए। आज भी मैं गोलू की रजाई में और अंशु और निशा एक रजाई में सो रहे थे। रात 12:00 बजे निशा पेशाब करने उठी तो मेरे भी नींद खुल गई हम दोनो आंगन में आ मूतने लगी।
निशा: अभी तक दर्द कर रहा है दीदी।
मै: पर मजा तो आया ना।
निशा: हां बहुत मजा आया।
मै: और करवाएगी।
निशा: नही दर्द कर रहा है।
मै: ठीक है जरा रसोई से सरसों तेल ले आ।
वो तेल ले आई, हम तेल ले वापस कमरे में आ गए। मैं निशा की सलवार खोल उसके बुर पर तेल लगाती हूं। और खुद की साड़ी उठा बुर और गांड को तेल से चिकना कर देती हूं। अंशु भी अब जाग गया था , और सीधा मूतने बाहर चला गया। निशा रजाई में जाकर सो गई।
अंशु बाहर से अंदर आया। उसके अंदर आते ही मैं लाइट जला दी मैं अंशु कब पजामा उतार उसके लन्ड में तेल मालिश करने लगी, उसे एकदम चिकना बना दिया। मैं अपनी पूरी साड़ी कमर तक उठाकर घोड़ी बन गई मै उकडू बन बैठी थी और अपनी गांड़ अंशु की और कर दी अंशु भी घुटने के बाल मेरी गांड के पीछे बैठ गया और अपना लन्ड मेरी गांड में से डालने लगा।
वह और तेल मेरी गांड में भर रहा था उसकी उंगलियां मेरी गांड में जा रही थी मुझे बहुत गुदगुदी हो रही थी धीरे से उसने से सुपाड़ा मेरी गांड में डाला। मेरी चिख निकल गई। तेल की चिकनाई से लन्ड थोड़ा और गांड में घुस गया। धीरे-धीरे उसने आधा लन्ड घुसा दिया।
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मुझे थोड़ा दर्द हो रहा था पर मजा भी आने लगा था। गोलू की रजाई में हरकत देख अंशु जल्द से खड़ा हो लाइट बंद किया। इतनी देर हम रजाई से बाहर ही चूदाई कर रहे थे। गोलू उठकर मुतने गया। मैं रजाई में लेट गई और अंशु की तरफ गांड कर मै लेट गई।
हमने रजाई से खुद को ढक लिया और अंशु ने धीरे-धीरे लन्ड मेरी गांड में पीछे से घुसा दिया। गोलू वापस मूत कर आ गया था वह मेरे सामने आकर रजाई में लेट गया उसने हाथ मेरी जॉब पर रखा मेरी साडी पूरी कमर तक उठी हुई थी। पीछे से अंशु मेरी गांड में लन्ड डाले हुए था। मै और अंशु हील भी नहीं रहे थे।
गोलू मेरे होठों को चूमने लगा मैं भी उसे चूमने लगी। उसे नहीं पता था कि अंशु पीछे से मेरी गांड मार रहा है इसलिए वह मुझे चित लेटा कर मेरे ऊपर चढ़ना चाहता था। पर मैं वैसे ही उसके पजामे में हाथ डाल ली उसके लन्ड को पकड़ ली उसके पूरे पजामी को उतार दी और अपने बुर में सटा ली उसका लन्ड।
धीरे धीरे उसके लन्ड को अपने बुर में घुसा ली अब मेरे बुर और गांड दोनों में लन्ड था। मैं अपना ब्लाउज खोली और अपनी चूचियों को गोलू के मुंह में भर दी वह बेदर्दी से मेरी चूचियों को चूसने काटने और मेरी चूत चोदने लगा। पीछे से अंशु सटा सट मेरे गांड में लन्ड डाल रहा था और आगे से गोलू मेरी बुर चोद रहा था मेरी दो तरफा चूदाई हो रही थी मैं आनंद से सीत्कार रही थी और खूब मजे ले रही थी।
अब मैं पलट गई गोलू का लन्ड पहले मैं अपने हाथ से अपनी गांड में डाली अंशु धीरे से अपना लन्ड मेरी बुर में घुसा दिया। दोनों खपाखप मुझे चोदे जा रहे थे गोलू गांड में तो अंशु चूत में चोद रहा था मुझे काफी मजा आ रहा था कुछ देर में मैं झड़ गई वो दोनों ही मेरे अंदर ही निकाल दिए। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
अब तक दोनो को ही पता चल गया था कि वो दोनो मिलकर ही मेरी चूदाई कर रहे हैं। मै नंगी ही उठी और आंगन में जो अपनी बुर और गांड साफ करी। वह दोनों भी बारी बारी बाहर जा खुद को साफ कर आ गए। दोनों ही मेरे अगल-बगल लेते थे दोनों को ही पता था कि मैं बिल्कुल नंगी थी वह दोनों भी रजाई के अंदर पजामा उतार रखे थे।
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मैं वापस दोनों का लन्ड पकड़ ली और सहलाने लगी जो तुरंत ही खड़ा हो कड़क हो गया। मैं गोलू की तरफ घूम गई वह मेरी चूचियां पीने लगा पीछे से अंशु ने मेरी गांड में लन्ड घुसा दिया इधर में गोलू का लन्ड बुर में घुसा ली। मेरी वापस से दो तरफा चूदाई होने लगी। गोलू मेरी चूचियों को पिए जा रहा था अंशु मेरा पीठ को चूम चूस रहा था और गांड में दम घुस आए जा रहा था। दोनों ही जी जान लगाकर मेरी चूदाई कर रहे थे। मै इस बार दो-तीन बार झड़ चुकी थी.
कुछ देर बाद वह दोनों भी मेरे अंदर ही झड़ गए कुछ देर में हम अपने कपड़े पहन सो गए अब अगले दिन में अंशु के साथ वापस अपने ससुराल आ गई। वह तीन-चार दिन मेरे जिंदगी के सबसे हसीन दिन थे उन दिनों की याद आज भी आती है तो शरीर में रोंगटे खड़े हो जाते हैं उसके बाद से कभी पैसा मौका चारों के साथ नहीं मिला पर अंशु कभी-कभी मौका मिलता था तो वह मुझे चोद लेता था। कहानी पूरी पढ़ने के लिए धन्यवाद। lovesingh171099@gmail.com