Big Boob Erotic Fantasy Story
ये तो हम सब जानते ही हैं कि सारे मर्द औरतों के बूब्स को पसंद करते हैं। लेकिन इस विषय पर जो कुछ रोचक बातें मेरे या अन्यों के सामने आई हैं, उन्हें इकट्ठी करके पेश की हैं। ये कोई कहानी नहीं है, मेरे या अन्यों के अनुभव हैं। पर इन सारे अनुभव एक ही सूत्र से बंधे हैं। Big Boob Erotic Fantasy Story
शुरुआत मेरे ही अनुभव से करती हूं। मेरी शादी से पहले की बात है। मेरी एक सहेली, कविता, की शादी हो चुकी थी और शादी के एक ही साल में उसने जुड़वां बच्चों को जन्म दिया था। एक बेटा और एक बेटी। मैं उसके वहां गई तो वे करीब तीन महीने के थे।
काफी समय बाद हम मिले थे, तो बहुत सी पुरानी बातें याद कर रहे थे। बीच-बीच में बच्चे उठ जाते थे। वो उन्हें अपना दूध पिलाती थी। दोनों साथ ही भूखे होते थे। शायद, जुड़वें थे इसलिए। कविता अपने दोनों बूब्स से उन्हें साथ में ही पिलाती थी। दोनों को तो एक साथ गोद में ले नहीं सकती थी।
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इसलिए दोनों बाजू डबल तकिए रखती थी, ताकि दोनों को एक साथ पिला सके। अब उनका सिर्फ सिर ही गोद में रखती थी, बाकी बदन तकिए पर रखती थी। उस दिन वो मुझे घर पर छोड़ के थोड़ी देर के लिए बाहर गई थी। मैं अकेली ही घर पर थी।
उसके जाने के कुछ समय बाद ये दोनों जाग उठे और रोने लगे। मैंने खिलौनों से उनका ध्यान आकर्षित करने का और उन्हें शांत करने का प्रयत्न किया। पर वे रोए ही जा रहे थे। तो मैंने सोचा, क्यों न उन्हें बूब्स पर लगा के देखूं? दूध तो नहीं है, पर देखूं तो सही, क्या होता है?
मैंने स्कर्ट-ब्लाउज पहन रखा था। अपना ब्लाउज खोला, और बिल्कुल कविता की तरह दोनों को मेरे बूब्स पर लगाया। निप्पल मिलते ही दोनों शांत हो के उसे चूसने लगे। मेरे लिए भी नया अनुभव था। मजा आ रहा था। लेकिन बूब्स में दूध तो था नहीं।
थोड़ी ही देर में, बेटी ने निप्पल छोड़ दिया। लेकिन मैंने आश्चर्य के साथ देखा कि बेटा बड़ी मस्ती से निप्पल चूस जा रहा था!!!!! मर्द था न? बूब्स कैसे छोड़ता? चाहे दूध हो या न हो!!!! उतने में कविता आ गई। इस बात पर हम दोनों बहुत हंसे।
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एक बार मेरी एक और सहेली की बड़ी दीदी, मालिनी, की शादी थी। तो मैं वहां गई थी। सारी औरतें तैयार होने के लिए एक कमरे में थीं। करीब 8 औरतें और उनके 4 बच्चे, करीब 3-4 साल के, कमरे में थे। सब ड्रेस बदल रही थीं, तो सब के बूब्स खुले हुए थे।
किसी ने सेक्स की बात चला दी। सब हंस-हंस के अपने अनुभव कह रही थीं। मैंने मालिनी से कहा, वाह मालिनी, क्या बूब्स पाए हैं! जीजाजी तो ऐसे मसलेंगे!! ऐसा कह के मैं मसलने लगी। बाकी औरतें खिलखिलाकर हंस रही थीं। मालिनी शर्मा रही थी।
इतने में कमरे में जो बच्चे थे, उसमें से एक बच्चा बेड पर चढ़ते हुए बोल उठा: ऐसे नहीं, इस तरह से मसलते हैं!! 3 साल के बच्चे के मुंह से ऐसा सुन के और उसे स्तन मसलता देख के सब हैरान हो गए। उसकी मां वहीं थी, उसने पूछ लिया, अरे, तूने कहां से सीखा?
तो वो फट से बोल उठा, मैंने एक रात को डैडी को देखा था तुमसे ऐसा करते हुए!!! उसकी 4 साल की बहन भी वहां मौजूद थी। पर उसने कभी नहीं देखा! और ये मर्द था न? बड़े इंटरेस्ट से देखा होगा!!!! मेरी एक सहेली, शर्मिला, का अनुभव भी जानने जैसा है। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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उसके स्तन बहुत बड़े मगर शेपली थे। और उसे अपना क्लीवेज दिखाके मर्दों को अपनी ओर आकर्षित करना पसंद था। तो कपड़े भी ऐसे ही पहनती थी। उसका टॉप हमेशा लो-कट हुआ करता था। आगे की बात उसके मुंह से ही सुनिए।
“उस दिन मैं कोलकाता से सिलिगुड़ी जा रही थी। बस जर्नी थी। शाम को बस चलती थी, और दूसरे दिन सुबह पहुंचाती थी। मुझे विंडो सीट मिली थी। मैं अकेली थी और लंबा सफर था, तो मैं सोचती थी कोई नौजवान बाजू में आए तो अच्छा। लेकिन हाय रे किस्मत! एक 80 साल का बुढ़ा बाजू में आ गया।
मैंने भाग्य को कोसा और विंडो से बाहर देखती रही। लेकिन बुढ़ा मेरे स्तनों की ओर देख रहा था। मुझे उसकी आंख में वासना नजर आई। थोड़ी देर में वो सो गया, और उसका सिर मेरे शोल्डर्स पर गिर गया। मैं हल्का झटका देती तो वो जाग के सिर उठा लेता था। पर फिर वही होता था।
शाम ढलने लगी थी। मुझे मजाक सूझा। मैंने अपना दायां हाथ उठाके उसके सिर के पीछे सीट के हैंडल बार पर रख दिया। वो थोड़ी देर में फिर लुढ़का, मेरे शोल्डर की ओर। लेकिन क्योंकि मेरा हाथ पीछे फैला हुआ था, उसका सिर झुक के मेरे स्तन पर ठहर गया।
अब बस उछलती थी तो उसका सिर भी उठ-उठ के मेरे स्तन पर गिरता था। उसे पता नहीं था, लेकिन मुझे मजा आता था। मैंने ऐसे ही चलाने दिया। कुछ देर के बाद बस डिनर के लिए ढाबे पर रुकी। जब फिर चली तो रात हो गई थी और अंधेरा छा गया था।
मुझे भी नींद आ रही थी। मैं अपने दोनों हाथ आगे की सीट के हैंडल बार पर क्रॉस करके, आगे झुक के, अपना सिर उसके सहारे रख के सो गई। बुढ़ा भी ऐसे ही सोया। मेरी नींद लग गई। थोड़ी देर में एक सपना सा महसूस हुआ, जिसमें कोई मेरे बूब्स को सहला रहा था।
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फिर खयाल आया कि, ये सपना नहीं, सच है। मेरे टॉप पर बुढ़े का हाथ फिर रहा था। मैंने सोने का ढोंग चालू रखा। बुढ़ा अब हाथ फिराने के बजाय, स्तनों को टॉप के ऊपर से ही हल्के से मसल रहा था। थोड़ी ही देर में उसने क्लीवेज के नजदीक मेरे स्तन के खुले भाग को दबाना चालू किया। अब मैंने ढोंग बंद किया, और दबे स्वर से उसे बोला, ये क्या कर रहे हो? शर्म नहीं आती? बुढ़ा भी दबे स्वर में बोला, जब तेरे स्तन पर मेरा सिर उछल-उछल कर ठहरता था, तब तो अच्छा लग रहा था!
जमाना मैंने भी देखा है लड़की, मुझे मालूम है तू भी यही चाहती है!! ऐसे ही सोई रहे!!! मैं कुछ सोचूं-समझूं उससे पहले वो मेरे टॉप के आगे के बटन खोल चुका था, और देखते ही देखते ब्रा भी खोल डाली। मेरे दोनों स्तन खुली हवा का स्पर्श पाते हुए लटक रहे थे। बुढ़ा उस पर चालू हो गया। मैंने सोचा, इसीके लिए तो मैं नौजवान को चाह रही थी। बुढ़ा वही कर रहा है तो क्या बुरा है? उस रात उसने खूब मजा लिया और मुझे भी आनंद दिया। वो सही में बूब्स से खेलने में निपुण था।” तो दोस्तो, देखा न? बच्चे हों या बुढ़े, मर्द सारे….बूब्स के दीवाने…..हमेशा।
Rakeshh says
8598839589 whatsapp karo jaldi
Rk says
@biswajit_karqn_12 , msg me on insta
rinkurahul says
kya story hai