Real Hindi Chudai Story
मेरी ये स्टोरी लेटेस्ट है, सिर्फ़ 1 महीने पुरानी है। मेरी वाइफ़ प्रेग्नेंट थी तो हमने मेरी साली की लड़की को बुला लिया अपने घर काम के लिए। मेरी साली मुझसे भी 10 साल बड़ी है। उसकी लड़की 18 साल की है, स्वाति। जब वो आई तो मैं लेने स्टेशन गया। उसे देखके दंग रह गया। Real Hindi Chudai Story
2 साल में कम्पलीट चेंज हो गई थी। वो दुबली पतली लड़की से भड़ी हुई सेक्स बॉम्ब बन गई थी। मुझसे गले लगी तो बूब्स के कड़े होने का अहसास हुआ। तभी लंड में उत्थान आ गया। रास्ते में बाइक के बार-बार लगते ब्रेक ने उसे मेरी नीयत का अहसास करा दिया था। इसलिए वो कुछ दूर रहने लगी।
2 दिन बाद हम जब सब सो रहे थे, एक ही रूम में, मैंने अपना हाथ मोनिका के ऊपर से ले जाकर उसे लगाया (बीवी बीच में और स्वाति दूसरी तरफ़ थी)। उसने कोई रिएक्ट नहीं किया। हिम्मत बढ़ी और हाथ बूब्स पर रखा। फिर हल्के से दबाया। तभी उसने हाथ पकड़ के फेंक दिया।
हलचल से मोनिका की आंख खुली। उसने पूछा क्या हुआ। स्वाति कुछ नहीं बोली। मैं भी चुपचाप लेट गया। थोड़ा डर भी गया था कि कहीं स्वाति कुछ कह न दे। इसके अगले दिन मोनिका अपनी सहेली के यहां गई थी। मैंने मौक़ा देखके स्वाति से बात की।
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स्वाति, सॉरी, क्या नाराज़ हो?
स्वाति.. मुझे आपसे बात नहीं करनी..
पर क्यों।
क्योंकि आप गंदे हैं।
मैंने कहा क्या किया है मैंने??
आपने मुझे वहां हाथ क्यों लगाया..
मैंने कहा कहां हाथ क्यों लगाया।
वो शरमाते हुए बोली मेरे फिगर पर।
मैंने कहा वो ग़लती से लग गया था।
उसने कहा झूठ, आपने दबाया भी था।
मैंने कहा दबाया नहीं, सिर्फ़ ऐसे सहलाया था।
कहते हुए फिर से उसके बूब्स को सहला दिया। वो कुछ न बोली।
मैंने कहा क्या हुआ अगर मैंने सहला दिया तो..
वो बोली मासी जाग जाती तो..
मैंने कहा अच्छा बाबा सॉरी बस..
ये कहते हुए मैं उसके क़रीब गया और उसे अपनी बाहों में लेने लगा। वो छिटक के दूर चली गई। मैंने उसका हाथ पकड़ के कहा क्या हुआ, अभी तो मासी नहीं है घर में..
तो क्या हुआ, ये कह के वो विरोध करने लगी।
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मैंने उसे खींच के अपने सीने से लगाया और ज़बरदस्ती उसे फ्रेंच करने लगा। वो मेरी पकड़ में छटपटाने लगी। कुछ 10 मिनट के बाद उसका हिलना डुलना, हाथ पैर फेंकना बंद हुआ। मैंने मौक़े का फ़ायदा उठाते हुए अपना एक हाथ उसके लेफ़्ट बूब्स पर ले गया और उसे मसलने लगा।
अब उसका विरोध बंद हो चुका था। मैंने उसके होंठ छोड़ दिए और उसके गाल, नेक, शोल्डर पर किस करने लगा। वो अब मदहोश हुई जा रही थी। मैं एक हाथ से उसके बूब्स को दबा रहा था और दूसरे हाथ को धीरे-धीरे उसकी बैक पर ले गया। उसकी गांड सहलाने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
अब वो सिसक रही थी। उसकी गांड की दरार से उंगली जैसे ही चूत के मुहाने पहुंची, वो चिहुक गई। तभी डोरबेल बज उठी। हम दोनों कुछ लम्हों के लिए छिटक कर खड़े हो गए। जब डोरबेल दुबारा बजी तो हमें होश आया। वो भाग के ऊपर चली गई और मैं दरवाज़ा खोलने.. मोनिका वापस आ गई थी।
अब हम दोनों बचैन रहने लगे, मैं और स्वाति.. मौक़ा मिलता ही मैं उसे दबोच लेता। कभी फ्रेंच करता, कभी बूब्स दबा देता तो कभी गांड में उंगली कर देता। पर चोदने का मौक़ा नहीं मिल रहा था। इस बीच वो अब मुझे पूरा सहयोग करने लगी थी। थोड़ी ना नुकुर तो करती ही थी पर किस बराबर दे देती, गाल पर या होठ पर। दो बार लंड भी पकड़ाया उसे पर वो भाग जाती थी।
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एक दिन बिल्ली के भाग खुल ही गए। मोनिका को डॉक्टर को दिखाने जाना था और इत्तेफ़ाक़ से उसकी सहेली को उसी एरिया में कुछ काम था तो मोनिका मेरी या स्वाति की बजाय अपनी सहेली के साथ चली गई। मुझे उसने मोबाइल करके जैसे ही कहा कि वो अपनी सहेली के साथ जा रही है स्वाति के साथ नहीं, मैं घर की ओर भागा।
जैसे ही स्वाति ने दरवाज़ा खोला डोरबेल के जवाब में, मैंने उसे वहीं दबोच लिया और उसे बेतहाशा चूमने लगा। गेट को पैर से बंद करके उसे मैंने बाहों में उठा लिया। वो उस वक़्त मुझे वज़न में फूल से भी हल्की लग रही थी। उसे उठा कर मैं ऊपर अपने बेडरूम में ले आया और बेड पर फेंक दिया। वो शरमा भी रही थी, घबरा भी रही थी और चुदने को बेक़रार भी हो रही थी।
मैंने उसे कहा देखो स्वीट हार्ट अगर चुदना है तो शरम छोड़के खुलके बात करो।
वो मुस्कुराने लगी और कहा मैं आपको फोन करने ही वाली थी।
ये सुनके मैं बहुत खुश हुआ और मैं भी उसके बगल में बेड पर कूद पड़ा और मैंने उसको फिर से चूमना चाटना चालू किया। वो बोली प्लीज़ ज़रा ठहरो। मैंने कपड़े आज ही चेंज किए हैं, ख़राब हो गए तो मौसी शक करेगी.. ये कह के उसने अपनी सलवार कुर्ती खुद ही उतार दी। अब वो सफ़ेद ब्रा और पिंक पैंटी में थी।
पिंक पैंटी में स्वाति को देखके लंड सीधा खड़ा हो गया। मैंने भी देर न करते हुए अपने कपड़े उतारे। जैसे ही अंडरवियर उतारा लंड ने उछल के स्वाति को सलामी दी। मैं बेड पर जाकर उसकी बगल में घुटनों के बल खड़ा हो गया और लंड उसके मुंह से लगा दिया।
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वो उसे हाथ में लेकर सहलाने लगी। मैंने कहा स्वाति प्लीज़ इसे चूसो। उसने अपना मुंह खोल के मेरा 8 इंच लंबा लंड का 2.5 इंच मोटा सुपारा मुंह में ले लिया और चूसने लगी। 1 मिनट बाद ही उसने उसे हटा दिया। बोली ज़्यादा दुखता है। मैंने उसे अपनी बाहों में लेकर उसकी ब्रा की स्ट्रिप खोल दी और स्वाति की पिंक पैंटी भी उतार दी।
अब 2 जवान बदन नंगे एक ही बिस्तर पर जवानी की आग बुझाने को बेक़ाबू थे। मैं उसे चूमते हुए अपना हाथ उसकी चूत पर ले गया। चूत भट्टी की तरह गरम, बेहद गीली और मक्खन सी चिकनी हो रही थी। तभी बाहर घनघनाहट के साथ तेज़ बारिश शुरू हो गई। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने सब खिड़कियां खोल दीं जिससे कमरे में ताज़ी हवा आने लगी। अब वापस आके मैं उसके पैरों के क़रीब बैठ गया और उसकी टांगों को चौड़ी करके उसकी चूत निहारने लगा। स्वाति की चूत उसके नाम की तरह पिंक थी। मैंने अपनी एक उंगली चूत में घुसेड़ी। बहुत टाइट और गरम थी उसकी चूत। मुझसे रहा नहीं गया।
मैंने अपने होंठ उसकी चूत से लगा दिया। मुंह लगते ही वो उछल के बैठ गई। मैंने पूछा क्या हुआ। वो मुस्कुराते हुए बोली गुडगुडी होती है। उसे वापस लेटा के मैं उसकी चूत चाटने और चूसने लगा। उसने मेरा सिर पकड़ लिया और उसे अपनी चूत की ओर दबाने लगी।
फिर अचानक वो चिल्ला के शांत हो गई। वो हांफ रही थी जैसे बहुत दूर से दौड़के आई हो.. मैं समझ गया उसका काम हो गया है। अब वो कुछ आराम भी महसूस कर रही थी। मैं भी उसके बगल में लेट गया कुछ देर के लिए.. थोड़ी देर बाद वो मेरी तरफ़ करवट ली और मुझे देखके मुस्कुराई.. मैंने पूछा मज़ा आया।
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उसने आंख के इशारे से हां कहा और बोली सचमुच बहुत मज़ा आया। क़रीब 5 मिनट बाद मैं उठा और ऑइल की बोतल ले आया। उसने पूछा ये किसलिए। मैंने कहा देखती जाओ। बाहर बारिश झूम झूम के बरस रही थी। अब मैंने उसे फिर से फ्रेंच करना चालू किया।
अब वो खुलके साथ दे रही थी। वो अब मुझे किस कर रही थी। अब मेरे हाथ उसके चिकने शरीर पर घूम रहे थे। वो धीरे-धीरे फिर से गरम हो रही थी। मेरा लंड अब फिर से तन चुका था। अब मैंने देर करना मुनासिब नहीं समझा। ऑइल की बोतल से ऑइल लेकर अपने लंड पर और उसकी चूत में बराबर उंगली डालके अंदर तक तेल लगाया।
तकिया लेकर उसकी गांड के नीचे रखा। अब मैं पोज़िशन में था। मैंने उसकी चूत की फांक अपने हाथों से फैलाते हुए लंड का सुपारा चूत के मुंह पर रखा। अपने दोनों हाथों से उसके कंधे पकड़े और उससे कहा वो अपनी चूत को फैला ले। उसने अपने हाथों से चूत फैलाई और मैंने एक जोरदार धक्का मारा…
आआआईईईईई उसके मुंह से चीख़ निकल पड़ी जिसे उस तेज़ बारिश में सुनने वाला कोई नहीं था। उसकी आंखों से बेतहाशा आंसू निकल पड़े। प्लीज़ अपना निकाल लीजिए, मुझे बहुत दर्द हो रहा है। मैंने अनसुनी करते हुए अपना लंड न निकाला। मुझे मालूम था एक बार बिना चुदे अगर इसे छोड़ दिया तो ये कभी नहीं हाथ आएगी।
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मैंने उसके शानदार गुलाबी और कड़क बूब्स को सहलाना और चूसना जारी रखा। कुछ देर बाद वो शांत हुई तो मैं थोड़ा थोड़ा हिलने लगा। अभी लंड पूरा नहीं जा पाया था। जब थोड़ा लंड आसानी से आने जाने लगा तो मैंने पास ही रखी ऑइल की बोतल से तेल निकाल के बचे हुए लंड पर लगाया। वो समझ गई मैं क्या करने वाला हूं।
उसने हाथ जोड़ के प्लीज़ कहा। मैंने उसे दिलासा दिया और कहा कि मुझ पर यक़ीन करो, मैं तुम्हें कुछ नहीं होने दूंगा। वो मना कर रही थी कि आपका बहुत बड़ा है प्लीज़.. पूरा नहीं डालो। मैंने उसे बांहों में लगाते हुए एक जबरदस्त स्ट्रोक लगाया… उईईई मां मैं मर गईईई.
अब लंड महाराज पूरे चूत में प्रवेश कर चुके थे। मैं उसके ऊपर लेट गया और उसे फ्रेंच किस करने लगा। हाथों से उसकी बॉडी को सहलाने लगा। चूत बहुत ही ज़्यादा टाइट थी। लंड बुरी तरह फंसा हुआ था जैसे मुट्ठी में जकड़ लिया हो किसी ने। इतनी टाइट चूत तो मेरी बीवी की भी नहीं थी क्योंकि शादी के वक़्त वो 23 की थी और ये सिर्फ़ 18 की है। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
धीरे-धीरे वो थोड़ा नॉर्मल होने लगी। मुझसे बोली आज के बाद आप मुझसे बात मत करना। मेरे दर्द की आपको चिंता नहीं, मुझे बहुत दर्द हो रहा है। मैंने कहा देखो ये तुम्हारा पहली बार है इसलिए ये दर्द हुआ। अब दूसरी बार नहीं होगा। मैंने लंड को धीरे-धीरे आगे पीछे करना चालू किया।
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वो हर आहट पर कराह रही थी। सचमुच उसे तकलीफ़ हो रही थी क्योंकि उसने अपनी चूत में कभी उंगली भी नहीं डाली। फिर ये तो 8 इंच लंबा 2.5 इंच चौड़ा लंड था। मैंने अपने धक्कों को देना चालू किया। अभी थोड़ा लंड आना जाना चालू किया ही था कि घंटी बज उठी। रिलैक्स, दरवाज़े की नहीं, मोबाइल की। मोनिका का फोन था.. राज बारिश बहुत तेज़ है तुम प्लीज़ घर जल्दी चले जाना। मैं डॉक्टर के यहां से सीधे अपनी सहेली अंजू के घर पर आ गई हूं और मैं बारिश रुकने के बाद आ जाऊंगी।
फोन बंद करके मैंने अपनी स्पीड थोड़ी बढ़ाई। अब भी थोड़े तेज़ धक्के से उसकी चीख़ निकल रही थी पर अब उसे फिर से मज़ा आने लगा था। अब वो भी थोड़ा थोड़ा सपोर्ट कर रही थी। कुछ ही देर में हम दोनों का पानी निकल गया। उस दिन मोनिका के आने तक हमने तीन बार चुदाई की। स्वाति बहुत ही प्यारी है। वाइफ़ की डिलेवरी के बाद यानी अब तक उसकी चुदाई चालू है। अब वो लंड मज़े से अपने मुंह में, अपनी चूत में और अपनी गांड में ले लेती है।
Ak says
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