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जीजा के भाई के साथ बाथरूम में रोमांस

जनवरी 18, 2026 by hamari Leave a Comment

Young Jija Sali Chudai

रागिनी दीदी कितनी बदल गईं इन दिनों। मुझे तो यक़ीन ही नहीं हो पा रहा था कि शादी के तीन साल बाद दीदी को इतने मॉडर्न आउटफिट में देखूँगी। कहाँ हम दोनों बहनें छत्तीसगढ़ के दुर्ग में रहने वाली सीधी-सादी लड़कियाँ, कहाँ आज वेस्टर्न आउटफिट में बात-बात में “Oh Fuck” कहने वाली, मुझसे दो साल बड़ी रागिनी दीदी। Young Jija Sali Chudai

कपड़े भी क्या थे! छोटा सा स्कर्ट जिसमें से उनकी जाँघें ऊपर तक दिख रही थीं। सामने वाले को उनकी पैंटी के दर्शन करने में शायद ही कोई तकलीफ़ हो। साथ ही टॉप ऐसा कि उनके दोनों मम्मों के बीच की घाटी दूर तक जाती हुई दिखाई पड़ रही थी। सामने वाला आदमी तो भौंचक्का होकर दीदी को ऊपर से नीचे तक देखता रहे।

मुझे याद है जब रागिनी दीदी की शादी मुंबई के उदय शाह के साथ तय हुई थी। रागिनी दीदी का रूप ही ऐसा था कि हर कुंवारे मर्दों में हौड़ लगी रहती थी कि इसे कैसे पाया जाए। लेकिन मेरे दूर के एक रिश्तेदार ने दीदी की शादी उदय से फ़िक्स करवा दी।

उदय तो दीदी को देखते ही फ़िदा हो गए और शादी के लिए तुरंत हाँ कर दी। विवाह दो महीने बाद होना था। उस समय मैं बी.ए. के लास्ट ईयर में पढ़ रही थी। वैसे ख़ूबसूरत मैं भी कम नहीं हूँ। मेरा गोरा बदन और मेरा साँचे में ढला जिस्म कईयों को रात भर तड़पाता है।

ऐसा मेरा नहीं, मेरे बॉय-फ़्रेंड शौर्य का कहना है। जहाँ दीदी का किसी से अफ़ेयर नहीं था, वहाँ मेरा शौर्य के साथ अफ़ेयर एक साल से चल रहा था। हम दोनों के शारीरिक संबंध भी बन गए थे। मैं दीदी के मुक़ाबले काफ़ी फ़ास्ट-फ़ॉरवर्ड हूँ। लेकिन यहाँ आज दीदी को देखकर पता चला कि मैं फ़ास्ट-फ़ॉरवर्ड नहीं, बल्कि स्लो मोशन हूँ।

शादी के दो साल बाद जब जीजाजी उदय ने शेयर मार्केट से काफ़ी पैसा बना लिया तो उन्होंने ये तीन बेडरूम हॉल वाला फ़्लैट मुंबई के प्रभादेवी इलाक़े में ख़रीदा, जो यहाँ का काफ़ी पॉश एरिया माना जाता है। दीदी के साथ उनका देवर शौर्य भी रहता है। संयोग से मेरे बॉय-फ़्रेंड और दीदी के देवर का नाम एकसा ही है।

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मैंने दीदी से चाहते हुए पूछा, “दीदी, जीजाजी ने पैसा कमाते हुए तुझे भी कोहिनूर का हीरा जैसा बना दिया। क्या बात है?”

तब दीदी ने मुझे सब तफ़सील से बताया कि जीजाजी को दीदी का मॉडर्न रूप ही पसंद है। अब ऊँची सोसाइटी वालों के साथ उठना-बैठना हो गया तो रोज़ किसी न किसी पार्टी या क्लब में जाना पड़ता है। वहाँ सब वेस्टर्न आउटफ़िट पहने हुए नाचते-गाते हुए सारी रात मस्ती करते हैं और देर रात घर वापस आते हैं।

दीदी ने कहा, “सौम्या, तेरे जीजाजी को यही सब पसंद है। अब मुझे भी यही सब अच्छा लगने लगा।”

तब ही मुझे जीजाजी और उनके भाई शौर्य का ध्यान आया।

मैंने तुरंत पूछ लिया, “दीदी, जीजाजी और शौर्य नहीं दिखाई पड़ रहे। कहाँ गए हुए हैं?”

दीदी ने कहा, “तेरे जीजाजी और शौर्य बिज़नेस के सिलसिले में कोलकाता गए हुए हैं। कल दोपहर तक आ जाएँगे। अब तू आराम कर और नहा ले। काफ़ी थक गई होगी।”

मैं फिर नहाने चली गई और तैयार होकर फिर से दीदी के बेडरूम में आ गई। फ़्लैट के तीन रूम में से एक दीदी का बेडरूम, एक में शौर्य और तीसरा गेस्ट रूम है जिसमें अभी मेरा सामान पड़ा है। जैसे ही मैं दीदी के रूम में घुसी, दीदी ने कहा, “मुंबई आई है तो ऐसी ड्रेसेस तो छोड़ दे। यहाँ तो वेस्टर्न आउटफ़िट पहनकर मज़ा ले। दुर्ग में तो तुझे पहनने का मौक़ा मिलेगा नहीं।”

मैं हँसते हुए बोली, “सलवार-कमीज़ ठीक नहीं है क्या?”

दीदी ने कहा, “नहीं। ये बात नहीं। यहाँ हम लोग जब पार्टियों में जाते हैं तो वेस्टर्न आउटफ़िट ही पहनते हैं। तू भी वही सब पहन।”

मैंने कहा, “मेरे पास तो वो सब कुछ नहीं है।”

दीदी ने कहा, “तो मेरे वाले पहन ले। एक सी ही फ़िटिंग है हम दोनों की। कोई तकलीफ़ नहीं होगी।”

मेरा भी वेस्टर्न आउटफ़िट पहनने का शौक़ था लेकिन दुर्ग में नहीं चलता था। तब ही दीदी ने अपनी अलमारी से अपनी ढेर सारी ड्रेसेस निकालीं और मुझे दे दीं और बोलीं, “जो पसंद है उसे पहन ले। साथ ही 5-7 ड्रेसेस और निकाल ले ताकि रोज़-रोज़ मेरी अलमारी से निकालना न पड़े।”

मैंने अपनी पसंद की ड्रेसेस निकाल लीं। ज्यादातर स्कर्ट और ब्लाउज़ ही थे। इनमें से एक ड्रेस मैंने अपने कमरे जाकर पहनी। ड्रेस पहनने के बाद जब मैंने आईने में देखा तो शर्मा गई। मेरा रूप कुछ ज़्यादा ही खिल उठा था। साथ ही मेरी देह के दर्शन भी कुछ ज़्यादा ही हो गए थे।

मेरी पतली जाँघें स्कर्ट के नीचे से अपना पूरा जलवा दिखा रही थीं। मेरी नाभि और मेरा पेट शॉर्ट स्कर्ट और शॉर्ट टॉप के बीच चमक रहा था। लो-कट टॉप के कारण मेरे उरोज खिल उठे थे। मेरे हाथ बरबस ही मेरे दोनों उरोज को थाम लिया। मैं चहक उठी। उफ़्फ़ मेरा सेक्सी बदन!!! फिर हम दोनों बैठकर गप-शप करने लगे। लंच और डिनर हम दोनों ने भरपूर बातें करते हुए ही लिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

रात कब हुई पता ही नहीं चला। ज्यादातर मैं ही बोलती रही। दुर्ग की बातों को याद करते रहे। फिर हम दोनों कपड़े चेंज करके सो गए। सुबह उठने के बाद दीदी तो कहीं चली गईं। मैं घर में अकेली ही थी। दोपहर के बाद वापस आईं तो हम दोनों ने साथ ही लंच लिया। थोड़ी देर बाद जीजाजी और उनका भाई शौर्य भी कोलकाता से वापस आ गए। जीजाजी मुझे देखते ही अपनी बाहों में ले लिया।

“कब आई मेरी साली जी,” जीजाजी ने पूछा।

“कल से आई हूँ लेकिन हमारे जीजाजी को फ़ुर्सत ही कहाँ,” मैंने बनावटी ग़ुस्सा जताते हुए कहा और हम सब हँस पड़े।

तब ही दीदी ने अपने देवर शौर्य से मिलाया।

मैंने कहा, “हाय।”

शौर्य बोला, “ऐसे नहीं। अपने जीजाजी से जैसे मिलीं वैसे ही हमारी बाहों में…”

मैं शर्मा गई और बोली, “धत्त…”

सब हँस पड़े। मैंने शौर्य को अपने जिस्म पर घूरते हुए कई बार पाया। ऐसी मिनी ड्रेसेस मर्दों पर क़यामत ही ढाती हैं। मुझे भी लड़कों को टीज़ करने में बड़ा मज़ा आता है। मेरा साँचे में ढला जिस्म शौर्य का ध्यान मेरी ओर बार-बार खींच रहा था।

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तब ही जीजाजी दीदी से मुसकराते हुए बोले, “रागिनी, आज रात को मिसेज़ एंड मिस्टर अग्रवाल आ रहे हैं। रात को उनके यहाँ पार्टी है। वहाँ जाना पड़ेगा।”

ये सुनते ही दीदी का चेहरा खिल उठा।

दीदी बोलीं, “ठीक है, मैं रात को दस बजे तक तैयार हो जाऊँगी।”

मैंने जीजाजी से शिकायत करते हुए कहा, “क्या जीजाजी? हम तो आए हैं और बाहर रहने की बात करते हैं।”

जीजाजी ने कहा, “एक-दो दिन की ही बात है। फिर फ़ुर्सत से तुम्हारे साथ ही रहेंगे।”

दीदी ने अपने देवर से कहा, “शौर्य, क्यों नहीं तुम सौम्या को यहाँ खुले हुए नए मल्टीप्लेक्स में मूवी दिखा देते। फिर रात को किसी क्लब में ले चलना। बोर नहीं होगी।”

शौर्य बोला, “ठीक है। अभी चार बजे हैं। सौम्या, तुम ठीक छह बजे रेडी रहना। फिर क्लब चैलेंगे।”

शाम छह बजे मैं और शौर्य मूवी देखने पहुँचे। देसी गलियों से भरी हुई मूवी। मूवी के बीच-बीच में शौर्य किसी सीन पर “तो चुदवाएगी”, “तो गांड मरवा ले” या “रगड़ डाल साली को” जैसे कमेंट धीरे-धीरे पास कर रहा था। एक तो मूवी की गालियाँ और दूसरे शौर्य के कमेंट्स, पिक्चर देखने का मेरा मज़ा दुगुना कर रहे थे।

तब ही इंटरवल हो गया। इंटरवल में शौर्य पॉपकॉर्न का बड़ा पैक ले आया। वापस आया तो हॉल की हल्की लाइट के बीच मेरे सामने खड़ा हो गया। मैंने उसकी नज़रों को अपने दोनों उरोज की घाटी के बीच पाया। मैंने महसूस किया कि उसकी पैंट चेन के हिस्से से उठ चुकी थी। वो काफ़ी तनाव में था। मैं हल्के-हल्के मुसकरा उठी। तब ही मैंने जान-बूझकर अपना सिर आगे किया और अपने फ़ोरहेड से उसके तने हुए लंड पर टच कर दिया और बोली, “लो आगे निकलो और बैठो।”

लंड पर मेरे फ़ोरहेड का टच होते ही वो अपनी आँखें बंद कर लीं। मानो उसे बड़ी रिलीफ़ मिली हो। मैं जानती थी कि ये रिलीफ़ नहीं, बल्कि उसके लंड को और बेचैन कर देगा। और वही हुआ। हम दोनों पॉपकॉर्न खाने लगे। पॉपकॉर्न का बास्केट शौर्य ने अपनी पैंट पर रख रखा था और शायद अपने हाथ से अपने लंड को दबा रहा था।

उसके हाथ की हरकत मुझे ये महसूस करवा रही थी। लेकिन उसके मन में तो कुछ और ही चल रहा था। अंधेरे में पॉपकॉर्न खाने के मेरे हाथ बार-बार उसकी पैंट से टकरा रहे थे और इससे उसकी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी। उसके कमेंट्स आने बंद हो चुके थे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

तब ही मैंने महसूस किया कि मेरे हाथ में ये गरम-गरम क्या लग रहा है। अंधेरे में पॉपकॉर्न के लिए मैं अपना हाथ उसकी पैंट के ऊपर घुमा रही थी। एक कड़क और मोटी लंबी सलाख मेरे हाथ में आ गई। उफ़्फ़ ये तो शौर्य का लंड था। उसने अपना लंड अपनी पैंट की चेन खोलकर निकाल लिया था और मेरा हाथ जैसे ही वहाँ पहुँचा, उसने पॉपकॉर्न के पैकेट की जगह अपना लंड खड़ा कर रखा था।

मैं चौंक गई। मुझे ग़ुस्सा भी आ रहा था और मज़ा भी। ग़ुस्सा इसलिए कि उसने मुझे क्या समझ रखा है—एक रंडी? जिसे जब चाहो अपना खिलौना दे दो। मज़ा इसलिए आ रहा था कि कोई लड़का मेरी जवानी के लिए तरस रहा था। लेकिन मैं संयमित होते हुए ग़ुस्से से लेकिन धीरे से कहा, “कोई तमीज़ नहीं है तुममें?”

फिर मुँह घुमा कर चुपचाप बैठ गई। थिएटर में मैं कोई तमाशा खड़ा करना नहीं चाहती थी। बाक़ी की फ़िल्म हम दोनों चुपचाप देखते रहे। जैसे ही मूवी ख़त्म हुई, मैं झट से उठी और बाहर निकलने लगी। बाहर आते ही शौर्य बोला, “आई एम सॉरी। प्लीज़ माफ़ कर दो।”

मैंने ग़ुस्से में बोली, “क्यों माफ़ कर दूँ? तुम किसी भी लड़की के साथ ऐसी हरकत कैसे कर सकते हो?”

शौर्य ने नज़रें झुकाए बोला, “मैं अपने आप में नहीं रहा। प्लीज़ माफ़ कर दो ना।”

मैंने तमाशा न खड़े करते हुए कहा, “ठीक है। माफ़ किया। लेकिन आगे से मेरे साथ ऐसा नहीं करोगे। समझे।”

फिर हम दोनों बग़ैर क्लब गए घर पर आ गए। डिनर भी नहीं ले पाए। घर पहुँचा तो पाया दीदी और जीजाजी जा चुके थे। एक्स्ट्रा चाबी शौर्य के पास थी। मैं सीधे अपने रूम में चली गई और ग़ुस्से में बग़ैर ड्रेस चेंज किए सीधे बिस्तर पर लेट गई। शौर्य हॉल में बैठा टीवी देख रहा था।

टीवी की आवाज़ कुछ देर तो सुनाई दी, फिर मुझे नींद आ गई। भूखी सोई थी। अचानक उठ बैठी। घड़ी देखी। घड़ी में सुबह के चार बजे थे। उफ़्फ़ कितना सोई मैं, वो भी बग़ैर ड्रेस चेंज किए। उठकर पानी पिया और किचन की तरफ़ गई, शायद कोई बिस्किट वग़ैरह मिल जाए।

हॉल की लाइट जल रही थी। शौर्य वही सोफ़े पर ही सोया हुआ था। अल्बत्ता उसने कपड़े ज़रूर चेंज कर लिए थे। इस समय उसने केवल बॉक्सर पहन रखा था। बनियान या टी-शर्ट नहीं पहने हुए थी। शौर्य का बलिष्ठ शरीर बड़ा ही दिलकश दिखाई दे रहा था।

चेहरे पर मासूमियत और हल्की मुस्कान। सीना नंगा और उस पर काले-काले गहरे बाल। मज़बूत फूली हुई बाहें। हाथ अपने बॉक्सर पर। बॉक्सर का आगे का हिस्सा फूला हुआ। शायद मुझे ही सपने में देख रहा हो, इसलिए उसका लंड अकड़ा हुआ लग रहा था।

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अब मेरा ध्यान उसके बॉक्सर पर ही टिक गया। थिएटर में जब उसने अपना लंड पॉपकॉर्न की जगह मुझे पकड़ाया था, वो सब अब मुझे ध्यान आने लगा। उसका लंड बहुत ही गरम था। काफ़ी लंबा और मोटा लंड था उसका। मैंने ध्यान दिया कि मेरा हाथ उसे पूरी तरह से पकड़ नहीं पाया था, कारण कि उसका लंड काफ़ी मोटा था।

पॉपकॉर्न की तलाश में मैंने उसका पूरा लंड नाप लिया था। काफ़ी लंबा भी था। उसे सोचते ही मैं अब उसके एकदम क़रीब आकर बॉक्सर को देखने लगी। वाक़ई में काफ़ी लंबा और मोटा लंड था उसका। मैंने अपने बॉय-फ़्रेंड का लंड अपने मुँह और चूत में लिया था लेकिन शौर्य का लंड काफ़ी बड़ा लग रहा था।

मेरे मुँह से एक सिसकारी निकल पड़ी। फिर मैं किचन की तरफ़ गई मगर मुझे कुछ नहीं मिला। दीदी शायद कहीं और रखती थीं स्नैक्स। लेकिन कहाँ, ये मुझे नहीं मालूम। एक बार सोचा शौर्य को उठा कर पूछूँ मगर मैंने इस वक़्त उसे उठाना मुनासिब नहीं समझा।

पेट में चूहे दौड़ रहे थे लेकिन क्या करती। वापस अपने रूम की तरफ़ आने लगी। फिर से शौर्य के बॉक्सर की तरफ़ नज़र गई। शौर्य मस्ती में सोया हुआ था, अपने तने हुए लंड को अपने हाथ से पकड़े हुए। मेरी चूत में इसे देखकर पानी आने लगा। बेकार में ही उससे ग़ुस्सा कर बैठी।

भूखी भी रही और एक मतवाले दिलवाले सांड को छोड़ कर सो गई मैं। रूम की तरफ़ जब बढ़ने लगी तो दीदी के बेडरूम का दरवाज़ा बहुत ही हल्का खुला हुआ दिखा। रूम में लाइट जल रही थी। मैंने सोचा शायद जीजाजी और दीदी वापस आ गए हैं। या शायद अभी ही आए हैं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

ये सोचकर कि दरवाज़ा लॉक नहीं है तो उसे लॉक कर दूँ। शायद दीदी लॉक करना भूल गई हों। जब बेडरूम के दरवाज़े के पास पहुँची तो मुझे अजीब आवाज़ें सुनाई दीं। ये आवाज़ें मुझे हॉल में नहीं सुनाई दी थीं। मैं उत्सुकता के कारण दरवाज़े के पास खड़ी हो गई और दरवाज़े के क़रीब अपना कान लगा दिया।

ये क्या? उम्म्म… हाँ… उफ़्फ़्फ़… जैसी सिसकारियाँ सुनाई दे रही थीं। ये लोग क्या टीवी पर ब्लू फ़िल्म देख रहे हैं? सोचते ही मन में और देखने की तमन्ना जाग उठी। दीदी के बेडरूम का टीवी रूम के दरवाज़े से साफ़ दिखता था। मैं भी क्यों न इस ब्लू फ़िल्म को देखूँ, ये सोचकर दरवाज़े को थोड़ा और खोल दिया।

देखते ही मैं सन्न रह गई। यहाँ टीवी पर ब्लू फ़िल्म नहीं, बल्कि लाइव टेलीकास्ट चल रहा था। बेड पर दो नहीं, बल्कि चार जन थे। ग्रुप चुदाई चल रही थी। क्या है ये सब? कौन हैं ये लोग? दिल में कई प्रश्न थे। ग़ौर से देखा तो मालूम पड़ा कि नीचे कोई एक मर्द लेटा हुआ अपने ऊपर रागिनी दीदी को लिटा रखा था और अपना लंड दीदी की चूत में डाल रखा था।

दीदी की पीठ पर जीजाजी सोए हुए थे और अपना लंड दीदी की गांड में पेल रखे थे। तीनों के सामने एक लड़की पलंग के ऊपर बैठी हुई थी। उसकी चूत को नीचे सोया हुआ आदमी अपनी जीभ से चाट रहा था और दीदी उसके एक उरोज को अपने मुँह में ले रखी थी।

दूसरा उरोज उस लड़की ने आँखें बंद किए हुए पकड़ रखा था। मेरे जीजाजी दीदी की गांड मारते हुए उस लड़की के होंठ और चेहरा चूम रहे थे। उफ़्फ़्फ़! दीदी और जीजाजी ऐसी हालत में। मेरा दिमाग़ ही घूमने लगा। मेरी आँखें ही बंद होने लगीं। दीदी इतनी मॉडर्न हो गईं।

कल तक की एक छोटे शहर की सीधी-सादी लड़की आज ब्लू फ़िल्मों की हिरोइनों को भी मात दे रही थी। वाक़ई में कोई कितना जल्दी बदल जाता है। अब मैंने फिर से आँखें खोलीं और उन्हें हैरत से देखती रही। एक धक्का नीचे से लग रहा था, तब ही दूसरा धक्का ऊपर से—जीजाजी गांड में मार रहे थे।

आवाज़ें अब साफ़ सुनाई दे रही थीं। सब लोग उफ़्फ़… हाई… अह्ह्ह… करते हुए सिसकारियाँ ले रहे थे। “Ohhh Fuck… Suck Me… Ram your Cock Deep Inside Me… Fuck Me Hard… Bite My Nipple… Suck My Pussy…” जैसी आवाज़ें धड़ल्ले से आ रही थीं।

तब ही दीदी बोलीं, “अग्रवाल… स्टॉप… अब मैं तुम्हें चोदूँगी। लेट स्टिल देयर।”

अब मुझे समझ में आया कि ये कौन हैं। दोपहर में जब जीजाजी ने कहा था कि मिसेज़ एंड मिस्टर अग्रवाल आ रहे हैं और दीदी का चेहरा खिल उठा था। यानी ये ग्रुप में चुदाई के लिए एकत्र हुए थे। उनकी चुदाई देखते हुए मैं मस्त हो गई। मेरा हाथ मेरी मिनी स्कर्ट के अंदर चला गया और भीगी हुई चूत को सहलाने लगा।

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दूसरा हाथ मेरे टॉप के ऊपर से ही अपने मम्मों को दबाने लगा। मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थीं। बेडरूम में से कोई बाहर आने वाला नहीं था। सिवाय मिसेज़ अग्रवाल के किसी की नज़र मुझ पर नहीं पड़नी थी। और मिसेज़ अग्रवाल का चेहरा जीजाजी ने दबा रखा था उसका चुम्बन लेने के लिए।

मैं बेख़ौफ़ होकर अपनी चूत में पैंटी को साइड कर अपनी अंगुली डाल दी। लाइव टेलीकास्ट के साथ मैं भी चुदसी हो गई। कोई मुझे भी अपनी बाहों में ले। कोई मेरे भी मम्मे चूसे। कोई मुझे भी चोदे। मैं आँखें बंद किए हुए अपनी चूत को अपनी अंगुली से रगड़ और चोद रही थी।

मेरी सिसकारियों की आवाज़ तेज़ हो रही थी कि अचानक किसी ने मुझे अपनी बाहों में ले लिया और मेरे होंठों को चूमने लगा। मैं घबरा कर अपनी आँख खोली। ये तो शौर्य था। मैंने उसे अपने से अलग करना चाहा और कुछ बोलने लगी ही थी कि शौर्य ने अपने होंठ पर एक अंगुली रख कर मुझे चुप रहने का इशारा किया।

फिर उसने मुझे अपनी बाहों में उठा लिया। मैं विरोध करने की स्थिति में नहीं थी। मेरे पूरे बदन में समूहिक चुदाई को देखते हुए वासना की लहरें उठ रही थीं। मेरी साँसें गरम हो चुकी थीं। मेरे मम्मे उन गहरी साँसों के साथ काफ़ी ऊपर-नीचे हो रहे थे।

शौर्य के नंगे सीने पर हाथ रख कर मैं और मतवाली हो गई। तब ही शौर्य ने मुझे कोई विरोध न करते हुए देख मुझे बाहों में लिए-लिए मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए। मैं तड़प उठी। उसकी बाहों में मेरा तन-बदन मचल उठा। उसने अपनी गिरफ़्त बढ़ा दी और अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी।

शौर्य के बेडरूम में पहुँचते ही मैं उसकी बाहों से उतर गई लेकिन शौर्य ने मुझे अपनी बाहों से आज़ाद नहीं किया और न ही मेरे सुलगते होंठों को छोड़ा। उसने अपने आलिंगन में मुझे कस कर जकड़ लिया और मेरे सुरख़ गुलाबी होंठों को चूमता ही जा रहा था। मुझे ऐसी दीवानगी ही पसंद थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

मैं चाह भी रही थी कि शौर्य मेरे होंठों का सारा रस पी ले। तब ही शौर्य ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और मेरे बदन पर छा गया। उसने अपने बदन से मेरे बदन को मसलते हुए मेरे गाल, मेरे कान और मेरी गर्दन को चूमता रहा। अपने गरमा-गरम चुम्बनों की छाप छोड़ता रहा।

मैं सुलग उठी। मुझसे रहा नहीं जा रहा था। अब मैं भी उसके चुम्बनों का जवाब अपने गर्माते चुम्बनों से देने लगी। उसके कान और उसकी गर्दन बेतहाशा चूमने लगी। उसे चूमते हुए मेरा दिल धड़क रहा था। और मन में ही ये शायरी आ गई:

चूम लूँ आपके लबों को, दिल की ये ख़्वाहिश है!

ये ख़्वाहिश हमारी नहीं, ये तो दिल की फ़रमाइश है!

काफ़ी देर की चुम्मा-चाटी के बाद हम दोनों की साँसें उखड़ने लगी थीं। तब ही शौर्य खड़ा हो गया और मुझे फिर अपनी बाहों में उठा कर बाथरूम की ओर ले चला। बाथरूम में पहुँचते ही उसने शावर चालू कर दिया। मैं और शौर्य आपस में चिपके हुए शावर के नीचे भीगने लगे।

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सुबह-सुबह का ठंडा पानी पड़ते ही मैं और शौर्य दोनों काँपने लगे। लेकिन दोनों के चिपके हुए जिस्म आपस में एक-दूसरे को गर्मी भी दे रहे थे। मेरे टॉप में से अब मेरी ब्रा झाँकने लगी। शौर्य ने अपने मुँह को मेरी गर्दन से नीचे लाते हुए मेरे दोनों उरोज के बीच की घाटी में अपनी जीभ डालने लगा।

उसने अपने दाँतों से मेरे टॉप के बटन खोलने लगा। दो-तीन मिनट की कोशिश के अंदर ही मेरा टॉप सिर्र्र से नीचे उतर गया। अब मेरी ट्रांसपेरेंट ब्रा में से मेरे उरोज की गोलाई और निप्पल का रंग दिखाई पड़ रहा था। शौर्य ने अपने हाथ आगे बढ़ाते हुए मेरे दोनों गोलाइयों को चोली के साथ ही थाम लिया और अपनी अंगुलियों से दबाने लगा।

मैं सिहर उठी। मारे उत्तेजना के मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थीं। मैंने शौर्य की कमर को कस कर जकड़ लिया और उसकी जाँघों के बीच अपनी जाँघें घुसाने लगी। इधर शौर्य ने मेरी चोली के ऊपर से ही मेरे दोनों उरोज को बारी-बारी से अपने गाल से रगड़ने लगा।

अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था। मैंने सिसकारी भरते हुए कहा, “शौर्य… निकाल फेंको मेरी चोली को और मेरे दोनों कैद कबूतरों को आज़ाद कर दो। इनको अपने मुँह में लेकर चाटो… शौर्य…!” मेरी बात सुनकर शौर्य ने अपने हाथ से मुझे दीवार की ओर धकेल दिया और मुझे पलट दिया।

अब मेरी पीठ शौर्य के सामने थी। शौर्य ने अपनी जीभ से मेरी पूरी पीठ को चाटने लगा। जिससे मेरे पूरे जिस्म में वासना की लहरें और ज़ोर मारने लगीं। मैं काँप रही थी। इस बार पानी के ठंडेपन से नहीं, बल्कि उसकी हरकतों के कारण। मैंने सिसकारी लेते हुए अपना चेहरा ऊपर उठाया और शावर के पानी को अपने चेहरे पर पड़ने दिया।

तब ही शौर्य ने अपने दाँत से मेरी चोली का हुक खोल दिया और मुझे पलट कर अपनी बाहों में जकड़ लिया। अब मेरे दोनों कबूतर चोली से आज़ाद होकर शौर्य के सीने से सट गए। मैं सेक्स के हिलोर लेते हुए अपने दोनों उरोज को उसके सख़्त सीने से रगड़ने लगी।

ऐसा करते देख शौर्य ने मेरे होंठों को फिर अपने होंठों की गिरफ़्त में ले लिया और लगा मेरे मदक होंठों का रस पीने। मुझसे रहा नहीं जा रहा था। मैंने शौर्य के दोनों हाथों को पकड़ा और अपने दोनों उरोज उसकी हथेली की गिरफ़्त में दे दिए। और बोली,

“शौर्य… अब रहा नहीं जा रहा। पकड़ के रगड़ दो इन शैतानों को। मुझे अपनी बाहों में लेकर मेरे दोनों उरोज को मसल दो। इन्हें अपने मुँह में लेकर चूसो शौर्य…!” शौर्य ने अब अपने दोनों हाथों से मेरे भरे हुए सख़्त उरोज को जकड़ लिया और लगा उन्हें मसलने। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

मसलने के साथ ही मेरी सिसकारियाँ बढ़ गईं। मैं झूम उठी। मैं पानी से भीगते हुए शौर्य की हरकतों का मज़ा ले रही थी। शौर्य मेरे दोनों कबूतरों को मसलते हुए चूम रहा था। मेरे दोनों निप्पल उसके मुँह में बारी-बारी से जा रहे थे। साथ ही मैं उसके सिर को पकड़ कर मेरे सीने पर ज़्यादा से ज़्यादा दबाने में लगी हुई थी।

अब शौर्य ने अपने एक हाथ से मेरी स्कर्ट की ज़िप खोल दी। मेरी स्कर्ट मेरी टांगों से चिपकती हुई नीचे गिरने लगी। शौर्य ने अपने मुँह को और नीचे किया और मेरी नाभि को चाटने लगा। ये सब मेरे बर्दाश्त से बाहर हो रहा था। मैं आँखें बंद किए शावर के ठंडे पानी से भीगती हुई ज़ोर-ज़ोर से साँसें ले रही थी।

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शौर्य ने अपनी एक हथेली मेरी पैंटी पर रख दी और… और… मेरी चूत को रगड़ने लगा। हा… मेरी तो जान ही अटक गई। एक तो शौर्य की थिएटर की हरकत और दूसरी दीदी के रूम में चल रही समूहिक चुदाई ने मुझे वासना से भर कर रख दिया था। अब शौर्य की भरपूर हरकतों ने मुझे उतावला कर दिया।

शौर्य ने अपने दूसरे हाथ से मेरी पैंटी को नीचे उतार दिया और मैं एकदम मदराजात नंगी उसके सामने भीगती हुई खड़ी थी। शौर्य अब थोड़ी दूर होकर मुझे निहारने लगा। मेरे जिस्म की शराब को अपनी आँखों से पीने लगा। तब ही तो किसी शायर ने क्या ख़ूब कहा है:

“हुस्न पे जब मस्ती छाती है, शायरी पर बहार आती है,

पी के महबूब के बदन की शराब, ज़िंदगी झूम-झूम जाती है।”

ऐसा ही हाल उसके लंड का था जो बॉक्सर के अंदर झूम रहा था। मेरे बदन की शराब का नशा मैं उसके लौड़े पर देख रही थी जो बॉक्सर के बटन के बीच अटका हुआ था। उसका लंड मेरे हुस्न का दीदार करने को उतावला हो चुका था। ये कमीना बॉक्सर ही उसके आड़े आ रहा था।

उसका लंड बॉक्सर के बटनों के बीच से चीख़-चीख़ कर कह रहा था:

पलट के देख ज़ालिम, तमन्ना हम भी रखते हैं,

हुस्न तुम रखती हो तो जवानी हम भी रखते हैं।

गहराई तुम रखती हो तो लंबाई हम भी रखते हैं!

अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था। दिल तड़प रहा था लाइट के उजाले में उसे भरपूर देखने के लिए। मैं जैसे ही नीचे झुक कर उसे आज़ाद करने के लिए झुकी, शौर्य ने मुझे रोक दिया और मेरे होंठों का चुम्बन लेते हुए बोला, “रुको हुस्न की देवी। ज़रा अपने सेक्सी जिस्म का दीदार तो करने दो।”

और इसके साथ ही उसने मुझे बाथरूम की दीवार से सटा कर खड़ा कर दिया और मुझे ऊपर से नीचे देखते हुए बोला, “उफ़्फ़ क्या जवानी है सौम्या तुम्हारी। तब ही तो मैं थिएटर में बेचैन हो गया था। उफ़्फ़ ये हसीन चेहरा, गहरी आँखें, भीगे होंठ, चिकने गाल तुम्हारे, तराशी हुई लंबी गर्दन, पूरी हुस्न की देवी लग रही हो। अब मेरे लंड का क्या क़सूर जो तुम्हें देख कर मेरी पैंट से बाहर आ गया था। तुम्हारे पॉपकॉर्न को ढूँढते हाथ मेरे लंड को दीवाना बना रहे थे।”

मैं अपनी प्रशंसा सुनकर फूली न समा रही थी। मेरे बॉय-फ़्रेंड ने भी ऐसी तारीफ़ नहीं की थी जितनी शौर्य कर रहा था। मैं शावर के पानी से भीगते हुए आँखें बंद किए शौर्य को सुन रही थी। फिर शौर्य ने मेरे उरोज पर अपने हाथ फेरते हुए कहने लगा,

“सौम्या, इन भीगते उरोज को देख कौन पागल न होगा। ये बरसता पानी तुम्हारे उरोज पर पड़ कर मेरे होंठों पर गिर रहा है मानो अमृत की बूंदें छलक रही हैं। टप-टप गिरती हुई बूंदें तुम्हारी निप्पल्स से मुझे मदहोश बना रही हैं। उफ़्फ़ क़यामत ढा रहे हैं तुम्हारे कड़क गोरे-गोरे उरोज। और ये ज़ालिम तुम्हारी पतली कमर। इनको जैसे अपनी बाहों में लपेटे हुए ही पड़ा रहूँ तुम्हारे साथ। हाथ लगाता हूँ तो लगता है जैसे टूट न जाए। इतने भारी उरोज को संभाले हुए कैसे तुम्हारी नाज़ुक कमर खड़ी है। उफ़्फ़्फ़…”

फिर धीरे से मेरी कमर को अपनी बाहों में लेकर मेरे उरोज को चूम लिया और मेरे निप्पल्स को अपने दाँतों से रगड़ दिया। मेरी सिसकारी ज़ोर से निकल गई। फिर शौर्य ने अपना चेहरा मेरी चूत के सामने लाकर मेरी गोल्डन झाँटों को सहलाने लगा। उफ़्फ़्फ़… मैं तड़प उठी।

मैंने अपनी जाँघों को भींच लिया। अपनी चूत को अपनी दोनों जाँघों के बीच छुपा लिया। ये मैंने कोई शर्म के मारे नहीं, बल्कि चूत में उफान लेती हुई मस्ती को दबाने के लिए किया। लेकिन शौर्य ने अपना हाथ मेरी जाँघों के बीच फँसा दिया। शौर्य ने मेरी दोनों जाँघों को अलग करते हुए मेरी चूत को सहलाते हुए बोला,

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“हाई… इस ज़ालिम जवानी को न छुपाओ। हमें इसका लुत्फ़ लेने दो। अपनी चूत की दोनों पंखुड़ियों को खोलो। इसका गुलाबीपन देखो। इसका जूस निकलते हुए देखो। मेरा लंड तड़प रहा है इससे मिलने के लिए। मेरे होंठ बेक़ाबू हो रहे हैं इसे चूमने के लिए।”

ये कहकर उसने अपना सिर मेरी दोनों जाँघों के बीच डाल दिया। मैं काँप उठी। उसके होंठ मेरी चूत के होंठ से जा चिपके। मेरी चूत का रस बरबस निकलता गया और शौर्य उसे पीकर मस्ती से झूम रहा था। मैं ज़ोर-ज़ोर से साँसें लेते हुए अपनी मस्ती को चूत के रास्ते उसके मुँह में डाल रही थी।

मेरे चूतड़ थिरक रहे थे। मैं बाथरूम की दीवार से सटी हुई अपनी दोनों टांगों को खोलती जा रही थी। अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था लेकिन शौर्य भी मुझे छोड़ नहीं रहा था। उसका उतावलापन मुझे बेक़ाबू कर रहा था। मेरे होश उड़ रहे थे। मुझे लग रहा था कि:

शावर की बारिश, मेक्स मी वंडर,

इज़ दिस फ़क, दे कॉल, टेस्ट द थंडर?

तब ही मेरे मुँह से निकल गया, “शौर्य, अब मुझसे रहा नहीं जा रहा। प्लीज़ अब मेरी चूत को चूसना छोड़ो। अब मुझे अपनी बाहों में लेकर मुझे मसल दो। मेरे बदन को रगड़-रगड़ कर चोदो।”

शौर्य ने मेरी फ़रियाद सुन ली। वो मेरे सामने खड़ा हो गया। मैंने देर न करते हुए उसके बॉक्सर को झट से नीचे की और खींच दिया। अह्ह… ये क्या! इतना मोटा! उफ़्फ़्फ़… लंबा! ये उसका लंड! लंड है या कुछ और। मेरे दिमाग़ पर बवंडर आ गया। अरे ये कैसे किसी को चोद सकता है। इतना मोटा और लंबा लंड कैसे कोई लड़की अपनी चूत में लेगी। मर न जाएगी। ना… बाबा… मैं नहीं ले सकती इतना मोटा और लंबा लंड।

तब ही मेरे दिमाग़ में जीजाजी का लंड आ गया। उनका भी लंड शायद इतना ही बड़ा था। हाँ इतना ही बड़ा था। दो सगे भाई के लंड एक जैसे तो हो ही सकते हैं। लेकिन दीदी इतने बड़े लंड को कितनी आसानी से अपनी गांड में ले रही थीं। और साथ में कह भी रही थीं कि और अंदर डालो। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

तो शौर्य का लंड मैं नहीं ले सकती? ले लूँगी। अब मुझे वासना की आंधी के सामने कुछ भी नहीं दिखाई दे रहा था। मैं बेचैन थी चुदवाने के लिए। मैंने शौर्य के लंड को थामा और अपनी चूत के नज़दीक खींच ली। शौर्य का गरमा-गरम लौड़ा मेरी चूत के सामने आते ही ऊपर-नीचे होने लगा।

उसने अपने लंड को पकड़ा और पास पड़ी साबुन का थोड़ा सा अपने लंड पर मला। शौर्य को अपने लंड की साइज़ का ख़याल था। वो भी जानता था कि कोई लड़की पहली बार में उसके लंड को सहन नहीं कर सकती। साबुन लगाने से चिकना लंड मेरी चूत के अंदर घुसने लगा।

उसका सुपारा मेरी चूत में धँसने लगा। मुझे थोड़ा दर्द हुआ। लेकिन शौर्य रुका नहीं। उसने अपने लंड का ज़ोर मेरी चूत पर बढ़ाते हुए अंदर घुसाने में कामयाब हो गया। मैं अपने होंठ भींचते हुए दर्द को सहन करने की कोशिश कर रही थी। लेकिन दर्द बढ़ता ही जा रहा था।

मैंने अपने हाथ से उसके सीने पर धक्के मारते हुए कहा, “निकालो शौर्य, सहन नहीं हो रहा।” शौर्य ने कहा, “हाँ निकालता हूँ।” ऐसा कहकर उसने लंड बाहर निकाला। लेकिन पूरा कमीना था वो। थोड़ा सा बाहर निकाला और फिर जड़्ड्ड से एक करारा धक्का दे दिया।

मेरी तो साँसें ही अटक गईं। ज़बान से कुछ भी नहीं निकल रहा था। निकल रहे थे तो मेरे आँसू। शौर्य का लंड मेरी चूत की भीतरी दीवार से जा टकराया। उसे मालूम था ऐसा होना है। उसने झट से मेरे होंठ को अपने होंठ की गिरफ़्त में ले लिया और अपने हाथों से मेरे उरोज को मसलने लगा।

मैं छटपटा रही थी। लेकिन बोल नहीं पा रही थी। मैंने अपने बदन से उसके बदन को धकेलने की कोशिश की लेकिन उसके सामने मेरा बस नहीं चला। उसके धक्के रुके हुए थे। मेरे चुम्बन लेते हुए मेरे उरोज को मसल रहा था। फिर उसने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए।

मैं अब भी छटपटा रही थी। मेरे होंठों को अपने होंठों से जकड़े हुए मुझे कुछ भी बोलने नहीं दे रहा था। लेकिन धीरे-धीरे दर्द कम होने लगा। मुझे अपनी पहली चुदाई ध्यान आ गई। उस दिन भी इससे कुछ ज़्यादा ही दर्द हुआ था लेकिन बाद में उस दिन मुझे काफ़ी मज़ा आया था।

जब आप मस्ती में हों तो दर्द जल्द ही काफ़ूर हो जाता है। यही हुआ—मेरा दर्द कम होता गया। मेरे हाथ जो शौर्य को धकेलने की कोशिश कर रहे थे, अब उसे अपने में समेटने की कोशिश करने लगे। ये देखकर शौर्य ने अपने होंठ मेरे होंठों से हटा लिया। जैसे ही मेरे होंठ मुक्त हुए, मैं ज़ोर-ज़ोर की साँसें लेने लगी।

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फिर संभलते हुए बोली, “तुमने तो मुझे मार ही दिया था।”

शौर्य अब अपनी स्पीड बढ़ाते हुए बोला, “लेकिन अब मज़े ले रही हो। है ना?”

मैं सिसकारी लेते हुए बोली, “हाँ। अब धीरे-धीरे क्यों। अब तो ज़ोर-ज़ोर के धक्के मारो।”

शौर्य ने ये सुनते ही अपनी जाँघों की स्पीड बढ़ा दी और मैं दनादन-दनादन आते हुए धक्कों का स्वागत अपनी जाँघों को खोलते हुए करने लगी। कुछ ही देर में मेरे सब्र की सीमा टूट गई और चीख़ मारते हुए शौर्य से लिपट गई। मेरी चूत का बाँध खुल गया। उसमें भरा हुआ पानी छूटने लगा।

उसका कड़क लंड मेरी चूत की दीवारों पर अब भी शॉट लगाए जा रहा था। वो रुका नहीं रहा था। मैं फिर से छूटने लगी। अबकी बार मेरी सिसकारियाँ ज़्यादा ज़ोर से निकल रही थीं, “उफ़्फ़… शौर्य… क्या चोद रहे हो तुम। मेरी चूत दो बार छूट चुकी है। तुम्हारा लंड मेरी चूत को रौंद कर रख दिया। अब बस करो। अब मुझे थोड़ा आराम करने दो।”

शौर्य ने अपने धक्कों को बंद किया और अपने तने हुए मोटे लंबे लंड को बाहर निकाल लिया। उसका लंड तो अब ज़्यादा ही बड़ा लग रहा था। मेरे रस से भीगा हुआ लंड मेरी चूत की ओर ही तना हुआ था। मैं शौर्य की बाहों में समा गई। शौर्य ने मुझे फिर अपनी बाहों में उठा लिया और हमारे भीगे हुए बदन चल पड़े बेडरूम के बिस्तर की ओर।

उसने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और मेरी बग़ल में लेट गया। हम दोनों अपनी उखड़ी हुई साँसों को नियंत्रण में लाने की कोशिश करने लगे। मैं आँखें बंद कर अब तक की हुई चुदाई का रिप्ले देखने लगी। अब तक मैं निढाल हो चुकी थी। शौर्य भी आँखें बंद किए हुए लेटा था।

मैं सोने की कोशिश तो नहीं कर रही थी लेकिन मेरा बदन टूट रहा था। करीब पंद्रह मिनट बाद मेरी आँखें खुलीं। थकान कम हो चुकी थी। मैंने देखा शौर्य आँखें बंद किए हुए ऐसे ही पड़ा है। मेरा ध्यान उसके बदन पर था। उसका लंड अब एकदम तना हुआ नहीं था लेकिन एकदम लूज़ भी नहीं हुआ था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

उसका हल्का लूज़ लंड अपने पूरे साइज़ से शायद 2-2.5 इंच घट चुका था। लेकिन उसका लूज़ लंड भी कई लोगों के एकदम टाइट लंड के बराबर था। उफ़्फ़… ज़ालिम ने स्टैमिना भी पूरा पाया है। तब ही तो इतना चोदने के बाद और आराम करने के बाद भी उसका लंड सिकुड़ा नहीं था।

मैंने करवट बदलते हुए अपनी एक टाँग उसकी टाँगों पर रखी और उसके चेहरे को चूमती हुई बोली, “सो गए क्या?”

शौर्य ने अपनी आँख खोलते हुए बोला, “नहीं। तुम्हारा ही इंतज़ार कर रहा था।”

मैं अब शौर्य के लंड को अपने हाथ में थामते हुए बोली, “तुम्हें पता था कि दीदी के रूम क्या चल रहा है।”

शौर्य बोला, “मैं भैया और भाभी के पर्सनल मैटर्स में ध्यान नहीं देता। उनकी ज़िंदगी है तो उन्हें अपने तरीक़े से जीने दो। अब मैं तुम्हारे साथ हूँ और ये सब भाभी को मालूम पड़े तो तुम्हें कैसा लगेगा। तुम अपनी ज़िंदगी जियो और तुम्हारी दीदी को उनकी ज़िंदगी जीने दो।”

मैंने कुछ बोलना अब मुनासिब नहीं समझा। मैं अपनी ज़िंदगी भी तो अपने तरीक़े से ही जी रही थी। मैंने अपने जहन को झटका देते हुए अपना ध्यान शौर्य के लंड पर लगा दिया। शौर्य का लंड अब अपने रंग में रंगने लगा। उसका साइज़ बढ़ता गया।

शौर्य भी मेरे उरोज को दबा रहा था और मेरे निप्पल्स को खींच रहा था। मेरे जिस्म में अब वासना की लहरें हिलोरें मारने लगीं। मैं उठ कर लंड को अपनी मुट्ठी में जकड़ने लगी। लेकिन एक हाथ की मुट्ठी में वो कहाँ आने वाला था। दोनों हाथों में लेकर उसे हिलाने लगी।

फिर कुछ देर हिलाने के बाद अपना मुँह नीचे किया और उस मूसल को चाटने लगी। उसके लंड को नीचे से ऊपर तक अपनी जीभ से चाट रही थी। उसके सुपारे को अपने होंठों के बीच दबा कर चूस रही थी। उसका लंड का सबसे मोटा भाग उसका सुपारा ही था।

उसे लेने में मुझे काफ़ी मुँह खोलना पड़ा। फिर मैंने उसके लंड को अपने मुँह में लेने की कोशिश करने लगी। काफ़ी मशक्कत के बाद आधा लंड ही मुँह में जा पाया। इस पर भी शौर्य को मज़ा आ रहा था। जब मेरा मुँह दुखने लगा तो लंड को मैंने बाहर निकाल दिया।

अब मेरे अंदर चुदवाने की इच्छा इतनी बढ़ गई कि मैंने शौर्य को बताए बिना, जो आँखें बंद किए अपने लंड का मज़ा ले रहा था, उसके ऊपर चढ़ गई और उसके लंड को अपनी चूत में लेने की कोशिश करने लगी। ये देखकर शौर्य मुसकराया।

मैं समझी नहीं। मैंने पूछा, “क्यों? क्या हुआ?”

शौर्य ने कहा, “अभी बाथरूम में तुम मेरे लंड को बाहर निकालने का प्रयास कर रही थीं और अब तुम मेरे लंड को अपनी चूत में लेने को आतुर हो?”

मैंने कहा, “अब मुझे इससे प्यारी चीज़ कोई नहीं लग रही जिसे मैं अपने अंदर छुपा लूँ।”

शौर्य बोला, “पगली ये ऐसे थोड़े ही जाएगा। जा वहाँ ड्रेसिंग टेबल से क्रीम ला और मेरे लंड पर और तेरी चूत में लगा। तब ही ये अंदर जाएगा। नहीं तो तू इस पूरे घर को दर्द के मारे उठा लेगी।”

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मैंने वैसा ही किया। उसके लंड को ऊपर से नीचे तक पूरा क्रीम से रगड़ कर चिकना कर दिया और थोड़ी क्रीम मैंने अपनी चूत के अंदर मल ली। फिर मैं शौर्य के ऊपर बैठ कर उसके लंड को अपनी चूत के मुँह पर लगा लिया और अपने चूतड़ उठाते हुए उसके लंड पर धक्का मारा।

इस धक्के से उसके लंड का सुपारा अंदर चला गया और निकल पड़ी मेरे मुँह से चीख़। मैं दर्द से बिलबिला उठी। शौर्य ज़ोर से हँस पड़ा और बोला, “देखा। बग़ैर क्रीम मेरे लंड को लेने चली थी।”

मैंने झल्लाते हुए कहा, “तुम्हें मज़ाक़ सूझ रहा है। यहाँ मेरा दर्द के मारे बुरा हाल है। कुछ करो, शौर्य।”

तब शौर्य ने मेरे दोनों उरोज को अपने हाथों में लिया और लगा वर्जिश करने। जिससे मुझे थोड़ी राहत मिली। मेरे जिस्म में धक्का मारने की इच्छा बढ़ने लगी। और मैंने फिर से एक ज़ोर का धक्का मार दिया। अबकी बार लंड आधे से ज़्यादा घुस गया लेकिन दर्द बढ़ गया।

मैंने रुआँसी आवाज़ में शौर्य से कहा, “शौर्य मेरे दोनों उरोज को कस-कस कर मसलो। दबा दो इन्हें। तब ही मुझे मज़ा आएगा।”

शौर्य ने अब अपना एक हाथ हटा लिया और दूसरे हाथ से मेरे एक उरोज को कस कर मसलना शुरू कर दिया। साथ ही पहले हाथ से मेरी कमर को जकड़ते हुए मुझे अपने लंड पर हिलाने लगा। थोड़ी ही देर में मेरा दर्द ग़ायब हो गया और मैंने उसका दूसरा हाथ भी कमर पर लगा दिया।

अब मुझे धक्का नहीं मारना पड़ रहा था, बल्कि शौर्य अपने दोनों हाथों से मेरी कमर को आगे-पीछे कर रहा था जिससे मेरी चूत को उसके लंड की रगड़ मिल रही थी और साथ ही उसका लंड धीरे-धीरे मेरे अंदर घुसता जा रहा था। अब मैं भी अपनी कमर को हिलाने लगी।

रगड़ लंड और चूत दोनों को मिल रही थी। मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था। उसका लंड और मेरी चूत की रगड़ मेरे जिस्म में सग पैदा कर रही थी। ये वासना की ज्वाला थी। ये चुदाई की सग थी। इस आग में हम दोनों के बदन झुलस रहे थे। इस चुदाई में हम दोनों ख़ूब मज़ा ले रहे थे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

तब ही मेरी चूत बौखला गई और इस बौखलाहट में अपना पानी छोड़ दिया। मैं रुकी नहीं। न ही शौर्य के हाथ की स्पीड को कम होने दिया। इस आग में मैं पूरी तरह झुलसना चाहती थी। मैं चुदाई जहाँ तक हो सके जारी रखना चाहती थी। फिर कुछ देर और ऐसे ही चुदवाने के बाद मेरा पानी तीन बार निकल चुका था।

शौर्य ने अब मेरे बदन को बिस्तर पर लिटा दिया और लंड को चूत में डालते हुए मुझ पर छा गया। मेरी टाँगों पर उसकी टाँग, मेरी जाँघों पर उसकी जाँघ, मेरी चूत में उसका लंड, मेरे सीने पर उसका सीना और मेरे होंठों पर उसके होंठ। उफ़्फ़्फ़! अब स्वर्ग का मज़ा भी कुछ बाक़ी रह गया था।

नहीं। बिल्कुल नहीं। यही तो था जन्नत का मज़ा। ऐसी चुदाई में और क्या बाक़ी रह जाता है। शौर्य ने अब अपनी स्पीड बढ़ाते हुए मुझे कस-कस कर चोद रहा था। उसकी थाप का जवाब मैं अपने चूतड़ उठा कर दे रही थी। तब ही शौर्य बड़बड़ाते हुए अपना पानी मेरी चूत में छोड़ने लगा।

मैं निहाल हो गई। मैंने भी इसका जवाब अपनी चूत का पानी छोड़ कर दे दिया। हम दोनों निढाल हो कर पड़े रहे। फिर थोड़ी देर बाद शौर्य मेरे ऊपर से उतर कर मेरी बग़ल में सो गया। मैं शौर्य से चिपटी हुई पड़ी रही। थोड़ी देर बाद घड़ी देखी तो सुबह के सात बज चुके थे।

तीन घंटे की चुदाई ने मेरे बदन के पोर-पोर ढीले कर दिए थे। एक-डेढ़ घंटे बाद मेरी आँखें खुलीं तो देखा कि शौर्य अभी भी सोया हुआ है। उसका लंड अभी भी कड़क था। लगता है सपने में मुझे अभी चोद रहा था। मैंने उसे झट से जगाया और कहा, “अब जा रही हूँ अपने रूम में।”

शौर्य कुनमुनाते हुए बोला, “अभी कहाँ। अभी हमें कौन डिस्टर्ब करने वाला है। यहाँ मेरी बाहों में सो जाओ।”

मैंने कहा, “सुबह की नौ बजने वाली है। दीदी उठ जाएँगी।”

शौर्य बोला, “वो लोग ग्यारह से पहले नहीं उठने वाले। अभी मुझे एक राउंड और चलाना है।”

मैंने कहा, “हद करते हो। मेरे बदन के हड्डी-पंजर ढीले कर दिए और कहते हो कि एक राउंड और चलाना है। ना बाबा ना…”

लेकिन उसने मुझे झटके से अपने ऊपर गिरा लिया और लगा मेरे होंठों के फटाफट चुम्बन लेने। फिर मेरे उरोज से खेलते हुए मुझे घोड़ी बना दिया और अपने कड़क लंड को मेरी चूत से सटा दिया।

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मैंने उससे कहा, “रुको। क्रीम तो लगा लो।” उसने कहा, “अब तुझे क्रीम की नहीं मेरे लंड की ज़रूरत है। अब तेरी चूत मेरे लंड को एकदम से कस कर पकड़ कर धक्का खाएगी और ख़ूब हिला-हिला कर चुदवाएगी।” फिर उसने अपना थूक लंड पर लगाया और कस कर धक्का मारते हुए मेरी चूत को चीर दिया। मैंने कैसे भी करके अपने दर्द को रोका और लगी चुदाई का मज़ा लेने। इस बार मुझे चुदवाने में बड़ा मज़ा आ रहा था। 15-20 मिनट की चुदाई के बाद शौर्य के लंड ने पानी छोड़ दिया.

और तब तक मैं भी दो बार झड़ चुकी थी। फिर थोड़ा सुस्ताने के बाद मैंने उसके लंड का चुम्बन लिया और अपने कपड़े पहन लिए। तब ही शौर्य बोला, “रात को ध्यान नहीं रहा। केमिस्ट से दवाई ले कर खा लेना। समझ गई ना।” मैं समझ गई। अभी मुझे तो जवानी का ख़ूब मज़ा लेना था। मैं दीदी के इधर चार दिन और रही। इन चार दिनों में मैंने क्या-क्या मज़े नहीं लिए। शौर्य के फ़्रेंड्स सर्कल के साथ भी रात बिताई। उसके फ़्रेंड्स सर्कल में मुझे मिलाकर चार लड़कियाँ और छह लड़के थे।

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