Unsatisfied Bhabhi Sex Kahani
ये कहानी नेहा की है। उम्र 24 साल। अभी-अभी अमर के साथ शादी हुई थी। अमर नेहा का पति है, बहुत अच्छा इंसान है, लेकिन शादी के ठीक दो महीने बाद ही उसे अमेरिका जाना पड़ा – दो साल के लिए। नेहा अकेली रह गई। शुरू में सब ठीक था, पर धीरे-धीरे जिस्म ने धोखा देना शुरू कर दिया। रातें लंबी लगने लगीं, बदन में आग सी लगने लगी। Unsatisfied Bhabhi Sex Kahani
मोहल्ले में पंकज रहता है – अमर का बचपन का दोस्त। लंबा-चौड़ा, मज़बूत जिस्म वाला लड़का। शादी के समय से ही नेहा ने नोटिस किया था कि वो मुझे बड़ी भूखी नज़रों से देखता है। नेहा भी कभी-कभी उसकी नज़रों से बचते-बचाते शरमा जाती थी।
अमर के अमेरिका जाने के बाद पंकज का आना-जाना बढ़ गया। कभी कुछ पूछने आता, कभी कुछ देने। नेहा को भी पता था कि वो उसे चाहता है, पर नेहा डरती थी। फिर एक दिन बारिश हो रही थी। नेहा घर पर अकेली थी। पंकज भीगता हुआ आया और बोला, “भाभी, अमर भाई ने फोन किया था, कुछ सामान मंगवाया है।”
नेहा ने उसे अंदर बुला लिया। बातों-बातों में वो पास बैठ गया। उसकी गीली कमीज से उसकी छाती की मांसपेशियाँ साफ दिख रही थीं। उसने नेहा के होंठों को देखा, फिर नेहा के सीने को। नेहा की साँसें तेज हो गईं। नेहा ने नजरें झुका लीं। फिर पंकज बोला भाभी बहुत बारिश हो रही है पूरा भींग गया हूँ ठण्ड लग रही है.
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पर नेहा पर अचानक मौसम का असर हुआ या पंकज का भीगा बदन देख कर चुदाई की हवस उसके मुंह से निकाल गया बिस्तर में चलो गरम कर देती हूँ. पंकज खड़े होकर नेहा को बाहों में लेकर बोला, “आह्ह… बड़ा अच्छा लगा तेरे मुँह से ‘राजा’ सुनने को। मुझे मालूम है कि अब तू भी गरम है चुदवाने को, लेकिन ये बता – वो बिस्तर पर जाकर हम क्या-क्या करेंगे?”
नेहा शरमाकर पंकज के सीने पर अपना मुँह छुपाती है। पंकज उसके मम्मे मसलते बोला, “अरे नेहा जान, क्या मस्त शरमाती है तू! ऐसे शरमाने से तो मेरा लौड़ा और गरम होता है। जान, तूने अभी ठीक से बताया नहीं कि उस बिस्तर पर जाकर क्या-क्या बाकी काम करना है, तो मैं सिर्फ तेरी चूत चाटकर चला जाऊँगा, तुझे चोदूँगा नहीं। फिर तू इस आग में तड़पती रहेगी। अब जब तू पूरी तरह नंगी हो चुकी है, आइश कर, एकदम खुलकर दिल की सारी बातें कर जान।”
नेहा फिर भी शरमाती है तो पंकज उसके बदन से और खेलते उसे गरम करता है। जब पंकज उँगली से नेहा की चूत चोदने लगता है तो नेहा बेहद गरम होकर सीधे पंकज का लौड़ा अंडरवियर के ऊपर से पकड़कर, दूसरे हाथ से पंकज का हाथ अपनी चूत पर दबाते बोली,
“उफ्फ्फ्फ पंकज… आज तूने मेरे बदन की वो आग भड़का दी जो मैंने पहले कभी महसूस नहीं की थी। पंकज, अब तू भी नंगा होकर मुझे उस बिस्तर पर ले जा, जिस पर मैंने सुहागरात मनाई थी। उधर मैं तेरा लौड़ा चूसूँगी और फिर जैसे तू कहेगा, तुझसे आज चुदवाकर लूँगी। पंकज, मुझे अब और मत तड़पाओ प्लीज, मेरी आग बुझा दो मेरे प्यारे राजा।”
नेहा के मुँह से ऐसी खुली बातें सुनकर पंकज बहुत खुश हुआ और नंगी नेहा को उठाकर बिस्तर पर बिठाकर उसके सामने खड़े रहते बोला, “वाह नेहा वाह! तेरे मुँह से ये सब बातें सुनकर मेरा मुसलमानी लौड़ा अब और बेरहमी से तुझे चोदेगा। मैं तेरा प्यारा राजा और तू मेरी गरम जान है नेहा। नेहा, अब तू खुद मेरी अंडरवियर नीचे करके मुझे नंगा कर और मेरा लौड़ा चूसकर उसे तेरी गरम चूत चोदने के लिए तैयार कर।”
नेहा पंकज की अंडरवियर देखती है जिसमें उसका लौड़ा तंबू बनाकर खड़ा है। नेहा अब आहिस्ता-आहिस्ता पंकज की अंडरवियर नीचे करती है। जैसे ही पंकज के लौड़े से अंडरवियर निकलती है, उसका लौड़ा उछलकर बाहर आता है। नेहा पंकज को नंगा देखकर खुश होती है।
नेहा ने इसके पहले अमर का लौड़ा देखा था, लेकिन पंकज का लौड़ा अमर के लौड़े से काफी मोटा और लंबा था। नेहा देखती है कि पंकज के लौड़े पर चमड़ी नहीं है और उसके लौड़े की टोपी प्रीकम से गीली हो चुकी है। नेहा झुककर पंकज की अंडरवियर पूरी नीचे करती है। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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फिर सीधी होकर थोड़ी शरम से वो नीचे से पंकज का लौड़ा पकड़ती है और उसकी गोटियों को सहलाते पंकज की तरफ देखती है। पंकज प्यार से उसका चेहरा सहलाकर लौड़ा नेहा के होंठों पर रखता है। नेहा के होंठों पर पंकज का प्रीकम लगता है, जिससे नेहा हल्के से जीभ चाट लेती है।
पंकज अब कमर हिलाते लौड़ा नेहा के होंठों पर घुमाता है। नेहा अब पंकज का लौड़ा पकड़कर उसकी टोपी को हल्के से काटते चूमती है। नेहा के लौड़ा काटने से पंकज उछलते खुश होकर नेहा के मम्मे मसलता है। नेहा फिर मुँह खोलकर एक बार पंकज का पूरा लौड़ा अंदर लेकर उसे मस्ती से चूसती है और फिर बार-बार चूमती है। तीन-चार बार के बाद अब नेहा बराबर से पंकज की गोटियाँ मसलते उसका लौड़ा चूसती है।
पंकज भी आँखें बंद करके नेहा का सिर पकड़कर हल्के-हल्के नेहा का मुँह चोदते बोला, “आह्ह्ह्ह्ह्ह… और चूस मेरी जान, तेरे मुँह की गरमी मेरे लौड़े को और बेताब बना रही है। बहुत गरम जिस्म और मुँह पाया है तूने। देख मेरा लौड़ा और टाइट हुआ तेरे मुँह में जाकर। लगता है मेरे दोस्त ने तुझे सब बात सिखाई है नेहा। और चूस… और अंदर ले मेरा लौड़ा… तेरे राजा का लौड़ा अच्छे से चूस जान।”
नेहा बार-बार पंकज का लौड़ा मुँह से निकालकर जीभ से अच्छे चाटकर फिर चूसती थी। पंकज का लौड़ा पूरी तरह गीला करके फिर नेहा ने पंकज का लौड़ा ऊपर करके दूसरे हाथ से उसकी गोटियाँ मसलते मुँह में लेकर चूसने लगी। पंकज खुशी से नेहा का नंगा जिस्म सहलाते अपना लौड़ा और गोटियाँ चुसवाकर ले रहा था।
कई बार नेहा पंकज का पूरा लौड़ा हलक तक लेकर चूस रही थी। पंकज का लौड़ा अच्छे से चूसने के बाद नेहा ने उसकी कमर में हाथ डालकर उसे अपने नंगे सीने से लगाकर बोली, “पंकज अब तो आओ राजा और मेरी प्यास बुझाओ। मैं बहुत तड़प रही हूँ राजा। अब तेरी सब बात मान ली मैंने तो आओ और मुझे जी भरके प्यार करो।”
नेहा की बात मानकर पंकज ने नेहा को उसी बिस्तर पर सुलाया जिस पर उसकी सुहागरात हुई थी। नेहा की टाँगें फैलाकर पंकज उसमें बैठा और अपना लौड़ा नेहा की गरम गीली चूत पर रगड़ने लगा। नेहा कमर उठाकर पंकज का लौड़ा चूत में घुसाने की कोशिश करने लगी, पर पंकज उसे सताने के लिए लौड़ा चूत पर रगड़ता रहा, घुसाता नहीं था।
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नेहा ने बेशर्मी से पंकज का लौड़ा पकड़कर अपनी चूत पर रखकर कमर उठाकर लौड़े पर रगड़ते बोली, “प्लीज पंकज… अब क्यों तड़पा रहे हो मुझे? घुसाओ ना ‘वो’ मेरे अंदर… प्लीज अब रहा नहीं जाता मुझसे।”
पंकज नेहा को तड़पाने के लिए लौड़ा थोड़ा चूत पर दबाते बोला, “नेहा जान, ठीक से बोल… मैं क्या अंदर डालूँ और कहाँ अंदर डालूँ?”
नेहा पंकज की बात से शरमाकर जवाब नहीं देती तो पंकज उसे और तंग करता है। आखिर में नेहा पंकज का लौड़ा प्यार से सहलाते शरमाकर बोली, “बड़े नालायक हो तुम पंकज। कितना सता रहे हो। अब प्लीज तेरा लौड़ा मेरी चूत में डाल और मुझे चोदकर मेरी प्यास बुझा राजा। इतना गरम किया है तूने मुझे कि मैं बेशरम होकर तुझसे गंदी बात कर रही हूँ पंकज। अब तो मुझे चोदो मेरे राजा।”
इतना बोलकर नेहा उठकर शरमाकर पंकज के सीने में अपना चेहरा छुपाते उसका सीना चूमती है। पंकज खुश होकर नेहा के मम्मे चूमते नेहा के हाथ में लौड़ा देता है। नेहा पंकज का लौड़ा अपनी चूत पर रखती है। पंकज नेहा की कमर पकड़कर लौड़ा उसकी चूत में दबाने लगता है।
जैसे-जैसे चूत खुलती है, पंकज का लौड़ा अंदर घुसता है। बहुत दिनों बाद लौड़ा घुसने से नेहा को थोड़ा दर्द होता है और वो होंठों को दाँतों में दबाती है, लेकिन फिर भी पंकज की कमर अपने बदन पर खींच लेती है। पंकज ऊपर से लौड़ा दबाता है और आधा लौड़ा घुसाता है।
नेहा दर्द से तड़पती है, फिर भी कमर उठाकर लौड़ा अंदर लेती है। पंकज अब नेहा की कमर पकड़कर गाँड पीछे करके जोर से लौड़ा नेहा की चूत में घुसाता है। इस दर्द से नेहा छटपटाते चिल्लाती है, “पंकज नह्ह्हीईईई बहुतततत दर्र्र्द्द्द्द हो रहाआआ हैएएएए।”
पंकज नेहा की कोई बात बिना सुने थोड़ा रुककर 4-6 धक्के देकर लौड़ा अच्छे से चूत में घुसाते बोला, “होने दे दर्द साली… बहुत गरम माल है तू… दर्द होगा तो अच्छे से चुदेगी। खुदा कसम तू बड़ा मस्त माल है। क्या टाइट चूत है तेरी साली… लगता है सील-पैक माल चोद रहा हूँ। अच्छा हुआ अमर अमेरिका चला गया, उस वजह से उसकी ये माल बीवी तो मिली चोदने… बहुत मजा आएगा तुझे चोदने नेहा माल।”
नेहा पंकज को जकड़ लेती है और जैसे-जैसे उसका दर्द कम होता है, वो अपनी चूत पंकज के धक्कों से चुदवाने लगती है। अब पंकज का लौड़ा मस्ती से नेहा की चूत चोदने लगता है। नेहा की गीली चूत को चोदते वक्त फचाक-फचाक की आवाज सुनकर पंकज और जोर से चूत चोदते नेहा के मम्मे मसलते बोला,
“मजा आ रहा है ना नेहा? चूत को तसली मिल रही है ना? साली बहुत दिन मैंने अपने आप को रोका, आज पूरी भड़ास निकालूँगा साली। आह्ह्ह क्या गरम चूत है तेरी। देख कैसे भूखे जैसे मेरा लौड़ा खा रही है तेरी चूत। ये बोल साली गरम मस्त चूत… तू कब से मुझे चाहने लगी और चुदवाने क्यों तैयार हुई?” ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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नेहा मस्ती से चूत चुदवाते लेटी पंकज के मुँह से ‘साली’ शब्द सुनकर थोड़ी शरमाती है। अब वो नीचे से कमर उठाकर पंकज का लौड़ा चूत में लेकर बोली, “पंकज अब मुझे बड़ा मजा आ रहा है… और जोर से चोदो मुझे। इतने दिन मैं प्यासी थी, आज तेरा लौड़ा मिला तो जान में जान आई। मैं बहुत तड़प रही थी अमर के जाने के बाद और चाह रही थी कि तू आए।
मैं शादी के वक्त ही तेरी नजर समझ गई थी और जान गई थी कि तुझे जब भी मौका मिलेगा तू मुझे जरूर चोदेगा। अमर यहाँ होता तो मैं कभी तुझसे नहीं चुदवाती, पर जैसे ही अमर शादी के बाद अमेरिका चला गया मैं बेहाल होने लगी। अमर तो जाते-जाते मुझे चुदाई का चसका लगाकर गया।
मैं पहले-पहल कैसे तो दिन काट लेती, पर फिर जिस्म धोखा देने लगा। जैसे-जैसे दिन गुजरते गए मैं लौड़े के लिए तरसती रही। मेरा पूरा बदन हवस की आग में जलने लगा। मैं चाहती थी कि कोई मेरे बदन से खूब खेले, मम्मे चूसे और मुझे जी भर के चोदे। जब तू रोड से आते-जाते मेरा जिस्म देखने मुझसे बातें करने लगा तो मैं समझी कि पंकज भी मुझे चोदना चाहता है।
तब मैंने डिसाइड किया कि अगर तू मुझे चोदने घर आएगा तो मैं भी पीछे नहीं हटूँगी। तू रोड पर मिलने लगा तो मैं समझी कि तू मुझे तड़पा रहा है। मुझे काफी दिन लौड़े के लिए तड़पाएगा, जिससे जब तू मुझे चोदने आएगा मैं आसानी से तेरे हाथ लगूँ। इसलिए मैं भी उस दिन से सजने-सँवरने लगी, जिससे जब कभी तू आए तुझे मैं ऐसे ही रूप में दिखूँ।
मैं गए 8-10 दिन से ऐसे सज रही थी। आज तू आया तो मैं समझी भगवान ने मेरी बात सुनी। मैं भी तुझसे चुदवाना चाहती थी पर इज्जत के लिए घबरा रही थी। शादी के दो महीने में ही किसी गैर मर्द से चुदवाना नहीं चाहती थी, इसलिए पहले ना-ना कर रही थी, लेकिन तुझे घर से जाने भी नहीं कह रही थी।
मैं आहिस्ता-आहिस्ता शरमाते तेरे हाथ आने लगी। वैसे मुझे पटाने का तेरा आइडिया भी अच्छा था पंकज राजा। पंकज अब जी भर के मैं तुझसे चुदवाकर लेती रहूँगी। तू मुझे बहुत प्यार देता रह और मैं भी तुझे मेरा जिस्म और प्यार दूँगी। पंकज तुम मुझे ‘साली, गरम माल’ ये सब मत बोलो, मुझे लगता है जैसे मैं कोई गिरी हुई औरत हूँ।”
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पंकज अब और जोर से नेहा को चोदने लगा। नेहा के मुँह से ‘चुदाई, लौड़ा, चूत’ और खुद चुदवाने की बात सुनकर उसे और जोश आया। पूरा लौड़ा चूत में घुसाकर मम्मे मसलते, चूमते पंकज नेहा को चोद रहा था। नेहा भी पंकज का चेहरा चूमते उसे कसके पकड़ते अपनी कमर उठा-उठाकर चुदवा रही थी।
पंकज की चुदाई अमर की चुदाई से अलग थी। पंकज पूरे जोश और ताकत से उसे चोद रहा था। अमर चोदते वक्त सिर्फ चोदता था, पर पंकज उसके पूरे बदन से खेलते चोद रहा था। नेहा सिसकारियाँ भरते अपने मम्मे खुद पंकज के मुँह में देती चुदवा रही थी।
पंकज अब नेहा की गांड सहलाते बोला, “अरे क्यों नहीं तुझे ‘साली, गरम माल’ बोलूँ? तू है एक गरम चूत समझी? देख कैसे एक गैर मर्द से चुदवा रही है। अरे तू आगे-आगे देखती जा और क्या-क्या बोलता हूँ मैं। हाँ नेहा जान, मैंने तुझे जानबूझकर तड़पाया रानी, क्योंकि मैं चाहता था कि जब मैं तुझे चोदने आऊँ तू बेताब रहे, उससे मेरा काम आसान होने वाला था।
और हुआ भी वैसे ही। साली अब देख अमर आने तक तुझे जैसे मस्ती से चोदूँगा। तुझे इतना मजा दूँगा कि तू मेरी गुलाम बनकर रहेगी। नेहा साली, ये बता तू इतनी अच्छी लड़की होकर भी चुदना, लौड़ा-चूत ये सब शब्द कैसे इतनी फ्रीली यूज करती है?”
गांड पर पंकज की उँगली लगते ही नेहा सिहर उठती है और पंकज को पैरों में पकड़कर बोली, “पंकज देखो प्लीज मुझसे गंदी बातें मत करो। मुझे खराब लगता है राजा। मैं मानती हूँ कि मैं गैर मर्द से चुदवा रही हूँ, पर मुझे नीचा मत दिखा मेरे राजा। रही बात मेरे मुँह से गंदे शब्दों की तो ये सब मुझे अमर ने सिखाए और चोदते वक्त वो मुझे ये शब्द इस्तेमाल करने लगाता था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
आज इतने दिनों बाद चुदवाने लगी तो आदत से मजबूर होकर मैं सब वर्ड्स कहने लगी जो मुझे मालूम थे। पंकज राजा बहुत अच्छा लग रहा है तुझसे चुदवाते हुए। मेरे बदन का रोम-रोम निचोड़ रहा है तू। राजा ऐसे लौड़े के लिए मैं खुद गुलाम बनने तैयार हूँ। ले पंकज और जोर से चोद मुझे। पूरी हवस निकाल दे आज मेरी राजा।”
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पंकज अब जानवरों जैसे नेहा को चोदने लगता है। नेहा की चूत बेरहमी से चोदते, उसके मम्मे रबड़ के बॉल समझकर मसलते, दूसरे हाथ की उँगली नेहा से चुसवाकर वही उँगली अब नेहा की गांड में घुसाते पंकज बोला, “साली नेहा, तेरे मुँह से राजा-राजा सुनने बड़ा अच्छा लगता है रानी। ये बात मेरे दोस्त ने अच्छी की जो तुझे सब बोलना सिखाया।
इससे मेरे जैसे चोदने वाले को और मस्ती आती है और फिर तेरी गरम चूत को और बेरहमी से चोदता हूँ। चोदते वक्त गालियाँ देना भी बड़ा मजा आता है समझी? मेरी पहली गर्लफ्रेंड को माँ-बहन की गालियाँ देकर चोदता था। पहले उसे खराब लगता था, पर फिर और गांड उठा-उठाकर गालियाँ खाकर चुदवाने लगी। बोल तुझे भी गालियाँ देकर चोदूँ नेहा जान? मेरे मुँह से गालियाँ सुनकर तुझे बड़ा मजा आएगा, तू पूरा दिल खोलकर चुदवाएगी समझी?”
गांड में उँगली और चूत में लौड़ा एक साथ महसूस होते ही नेहा आसमान में थी। उसे मालूम ही नहीं था कि ऐसी भी चुदाई होती है। वो जान गई कि पंकज चुदाई के मामले में बड़ा महिर खिलाड़ी है। पंकज अगर बोलता है कि गालियाँ सुनकर और मजा आता है तो जरूर आता होगा।
उसका दिल गालियाँ खाने तैयार नहीं था, पर बदन चाहता था कि पंकज उसे जिस तरह चाहे इस्तेमाल करे। पंकज के चेस्ट को सहलाते नेहा बोली, “पंकज मैं पूरा दिल खोलकर तुझसे चुदवाना चाहती हूँ। तुझे जैसा चाहे मुझे चोद, गालियाँ भी दे ले, लेकिन मुझे माँ की गालियाँ मत देना।
मैं इतना जानती हूँ कि अमर के न होने पर भी तू मुझे चोदकर मेरी प्यास बुझा रहा है तो मुझे भी तेरे लिए तू कहे वो सुनना चाहिए राजा। बोल तुझे जो बोलना है, आज तेरी नेहा जान दिल और गांड खोलकर तेरी हर बात मानेगी पंकज राजा।”
नेहा की रजामंदी सुनकर पंकज खुश होकर उसे कसके पकड़ते बेड पर पलटकर नेहा को अपने ऊपर लेटाते बोला, “ये हुई ना सच्चे प्यार की निशानी नेहा रानी। साली मुझे मालूम नहीं था कि तू मेरे लिए कुछ भी कर सकती है। बेहनचोद तुझे तो मैं रंडी बनाकर रखूँगा, रंडी तुझे इतना चोदूँगा कि मुझे देखते ही तेरी चूत गरम होगी।
नेहा मेरी रंडी जान, साली शादी के दिन से ही मेरा लौड़ा तेरी चूत चोदने बेताब था। तेरी चूत चोदूँ साली रखैल… बहुत मजा आ रहा है तुझे चोदने। बोल मेरी रंडी बनेगी ना साली? तुझे मेरी पर्सनल छिनाल बनाकर रखूँगा। चल साली अब खुद मेरे लौड़े से तेरी गरम चूत चुदवाकर ले और मैं तेरे उछलते मम्मे मसलकर मस्ती करूँगा। तू खुद अपने मुँह से बोल कि तू मेरी क्या बनकर रहेगी नेहा रांड।”
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नेहा पहले तो पंकज के बदन पर आकर और फिर उसकी गंदी गालियाँ सुनकर हड़बड़ाती है। उसे गालियाँ सुनकर खराब लगता है, पर मम्मे मसलवाने और नीचे पंकज के लौड़े से चुदवाने से वो सब भूल जाती है। नेहा पंकज के सीने पर दोनों हाथ रखकर ऊपर से पंकज के लौड़े से अपनी चूत चुदवाने लगती है। अपनी चूत को चुदवाते उसके हिलते मम्मों को पंकज बेरहमी से मसलता है।
नेहा अब स्पीड बढ़ाते बेशरम होकर बोली, “पंकज राजा, मुझे भी बहुत मजा आ रहा है तुझसे चुदवाने। आज से मैं तेरी गुलाम बन गई हूँ। तू मुझे जिस नाम से चाहे बुला, मैं तेरे लिए सब बनने तैयार हूँ। तू कहे तो रंडी बनूँगी तेरी क्योंकि मुझे आज चोदकर तूने मुझ पर बड़ा अहसान किया है। तेरी हर बात सिर-आँखों पर राजा, मुझे तू रंडी, छिनाल या रखैल कुछ भी बोल ले, बस मुझे कभी प्यासी मत रख मेरे पंकज राजा।”
पंकज खुश होकर बेरहमी से मम्मे मसलते और गंदी गालियों के साथ नीचे से और जोर से नेहा की चूत चोदने लगता है। नेहा भी पीछे नहीं रहती, ऊपर से अपनी गरम प्यासी चूत में पंकज का लौड़ा लेकर चुदवाती है। नेहा पूरी तरह बेशरम होकर गालियाँ खाकर पंकज को उसकी चूत और बेरहमी से चोदने लगाती है। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
पंकज नेहा के बदन को नोंच-नोंचकर चोदता रहता है। दोनों के नंगे जिस्म पसीने से भीगे हैं और नाखूनों के निशानों से सज गए हैं। नेहा के मम्मों को तो पंकज ने बहुत बुरी तरह मसला था, पर नेहा को कोई दर्द महसूस नहीं हो रहा था। इतने दिनों से प्यासी चूत को वो मस्ती से चुदवा रही थी। 15 मिनट तक ये चुदाई एकदम तेज चलती रहती है।
जब पंकज को एहसास हुआ कि अब वो झड़ने वाला है तो उसने झट से नेहा को फिर अपने नीचे लिटाया, उसे चोदते बोला, “ले रंडी, हरामी छिनाल… बहुत चुदवाना चाहती थी ना रांड। ये ले मेरे लौड़े, बेहनचोद… आज के बाद हमेशा मेरे लिए अपनी चूत खुली रखना, तेरी बहन की चूत चोदूँ साली… ये ले… ये ले… मेरा लौड़े का पानी साली हराआआआमीईईई राआआन्न्न्नड आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह नेह्ह्ह्हाआआअ मेरी राआअन्न्नड.”
लौड़ा झड़ते ही पंकज ने नेहा को और कसके दबोचा। जैसे ही पंकज का पानी नेहा ने अपनी चूत में झड़ते पाया, उसकी चूत भी झड़ने लगी और उसने अपनी चूत पंकज के लौड़े पर और दबाते हुए कहा, “दे तेरा पानी तेरी नेहा रांड को। आज के बाद तेरी ये छिनाल तेरी गुलाम है राजा। जी भर के मुझे चोदते रहो। दे तरे लौड़े का पानी। आज के बाद मेरी चूत हमेशा तरे लंड के लिए तरसती रहेगी राजा।”
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दोनों पूरी तरह झड़ गए लेकिन हाँफ रहे थे। नेहा के निप्पल्स हल्के-हल्के चूमते हुए असलम बोला, “क्यों नेहा रंडी, मज़ा आया? तेरी गरम चूत को ठंडक मिला क्या मेरी प्यारी छिनाल? तूने जैसा सोचा था, वैसा ही था ना मेरा लौड़ा? अब हर दिन तेरा जिस्म मुझे मेरा बिस्तर गरम करने नंगा मिलेगा ना मेरी मस्त रखैल?” नेहा झड़ने के बाद अब ज़रा शरमाकर कुछ जवाब नहीं दे रही थी। लेकिन नेहा को अब ऐसे ही असलम की ज़रूरत पड़ने वाली थी, इसलिए असलम के कई बार पूछने पर नेहा आख़िर बोली,
“हाँ मेरे असलम राजा, आज बहुत दिनों के बाद मुझे अच्छा लग रहा है। तेरा लंड तो मैंने सोचा था उससे भी मस्त है और मैं तुझसे ये वादा करती हूँ कि जब तक तू चाहेगा, मैं तुझसे चुदवाती रहूँगी। यहाँ तक कि अमर आने के बाद भी मौक़ा निकालकर मैं तुमसे मिलती रहूँगी और चुदवाती रहूँगी। आज के बाद मैं तेरी रंडी बनके रहूँगी और तेरा हर कहा मानूँगी असलम राजा।” इतना कहते हुए नेहा ने अपना मुँह शरमाते हुए असलम के सीने में छुपा लिया। उस दिन के बाद अमर आने तक इन दोनों प्रेमियों में और बहुत सी रंगीन रातें और पल गुज़रते रहे।
Ak says
@Killer_boyyyy_2233 id pe msg karo , 7 inch ke land se maja dunga