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संध्या मैम ने हार्डकोर चुदाई कराई अपनी

जनवरी 14, 2026 by hamari 3 Comments

Padosan Ka Sexy Jism

हमारे घर के बगल वाले फ्लैट में एक फैमिली रहती है। उसमें चार लोग हैं। पति मर्चेंट नेवी में सर्विस करता है और लेडी संध्या किसी स्कूल में टीचर हैं। दो बच्चों में से बेटी सीमा बी.सी.ए. कर रही है और बेटा मसूरी के किसी मशहूर स्कूल में है। संध्या मैम की उम्र करीब 37 साल है, पर वो बहुत स्मार्ट और गुड लुकिंग हैं। Padosan Ka Sexy Jism

मुझे उनका फिगर पहले दिन से ही पसंद आ गया था और मैं उनसे दोस्ती करने के बहाने ढूंढ रहा था। धीरे-धीरे मेरी जान-पहचान माँ-बेटी दोनों से हो ही गई। सीमा दिखने में बहुत अट्रैक्टिव है पर बहुत सोबर है। मैं भी थोड़ा शर्मीला हूँ और उनसे थोड़ा बड़ा भी हूँ। पहले वो मुझे अंकल कहने लगी तो मैंने कहा कि मैं इतना बूढ़ा नहीं हूँ।

तो वो बोली, “ठीक है, मैं आपको सर बोलूंगी”, क्योंकि मैं कभी-कभी उसकी पढ़ाई में मदद कर देता था। जब मेरा फैमिली से अच्छा इंट्रो हो गया तो मैं रोज़ ही वहाँ जाने लगा। अगर नहीं गया तो संध्या मैम मुझे बुला लेतीं। धीरे-धीरे मुझे महसूस होने लगा कि संध्या मैम तो मुझ पर लाइन मारने लगी हैं।

वो 37-38 की थीं पर बहुत सेक्सी थीं और उनका हसबैंड तो 6 महीने में 1-2 महीने के लिए आता था और वो भी करीब 45-50 का मोटा-काला बंदा था। मैं भी सोचने लगा कि थोड़ी बड़ी ही सही पर पक्का और फ्री का जुगाड़ है। पर जब भी वो मुझे लाइन देतीं, मैं शरमा जाता।

सीमा के सामने तो वो नॉर्मल रहतीं, पर उसकी गैरमौजूदगी में अक्सर मुझे बुलातीं। कभी जानबूझकर साड़ी का पल्लू ब्लाउज़ से नीचे गिरा देतीं, कभी साड़ी को घुटने तक किसी बहाने ऊपर कर देतीं। एक दिन तो ऐसा हुआ कि वो बेडरूम में गईं (जिसका दरवाज़ा ड्रॉइंग रूम से जुड़ा था और दरवाज़ा खुला था) और साड़ी चेंज करने लगीं।

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साड़ी उतारने के बाद उन्होंने पेटीकोट थोड़ा ढीला किया। गलती से या जानबूझकर उनका पेटीकोट सरककर ज़मीन पर आ गया और उनकी गोरी मस्त जाँघें, बड़े-बड़े बट्स मुझे देखने का मौक़ा मिल गया। उन्होंने ब्लैक कलर की पैंटी पहनी थी जो उनके बट्स के बीच में नज़र भी नहीं आ रही थी।

फिर उन्होंने जल्दी से पेटीकोट ऊपर करके पहन लिया और साड़ी चेंज करके वापस ड्रॉइंग रूम में आ गईं। पर उनकी आँखों से मुझे लगा कि उन्होंने ये सब मुझे एक्साइट करने के लिए किया था। मैं एक तो बहुत शर्मीला हूँ, दूसरे मुझे डर था कि कहीं शुरुआत में ही खेल न बिगड़ जाए।

मुझे अब पक्का विश्वास हो गया था कि वो एक मर्द की चाहत रखती हैं और मैं उनके सबसे नज़दीक था। वो मुझे अक्सर जब सीमा नहीं होती तो लेट ईवनिंग में किसी न किसी बहाने बुलाती थीं। पर वो कभी एक्साइट करने वाली बातें नहीं करती थीं, बस अपनी हरकतों से मुझे एक्साइट करने की कोशिश करती थीं।

मैंने एक बार नेट चैटिंग में संध्या की उम्र वाली लेडी से इस बारे में पूछा तो उसने मुझे एडवाइज़ किया कि मैं भी उनको ऐसे ही एक्साइट करूँ। तो उस नेट फ्रेंड की एडवाइज़ के मुताबिक एक दिन जब मैं संध्या मैम के यहाँ गया तो मैंने पायजामा के अंदर अंडरवियर नहीं पहना था।

जब मैं वहाँ गया तो सीमा वहाँ नहीं थी, संध्या मैम किचन में अकेली थीं। उन्होंने ट्रांसपेरेंट पिंक गाउन पहना था। गाउन के नीचे पेटीकोट नहीं था, जिस वजह से उनकी टाँगें, जाँघें और पैंटी नज़र आ रही थीं। ऊपर गाउन के नीचे ब्लाउज़ था। मेरा लंड पायजामे के अंदर एक्साइट हो रहा था।

तभी संध्या मेरे पास आकर मुझसे बातें करने लगीं। पर उनकी नज़र मेरे पायजामे में थी। फिर मैम ने जानबूझकर मुझे एक्साइट करने के लिए ऐसे ही मच्छर काटने का प्रिटेंड किया और अपना गाउन घुटने से भी ऊपर ले जाकर देखने लगी। संध्या मैम की नंगी स्मूद टाँगें और आधी जाँघें देखकर मेरा लंड काबू से बाहर हो गया और पायजामे से बाहर निकलने की कोशिश करने लगा।

फिर जैसे ही संध्या ने गाउन नीचे किया तो फिर से मेरे पायजामे में देखने लगीं। संध्या मैम ने फिर मेरे पास आकर एकदम से मेरा लंड पायजामे के बाहर से ही अपने हाथ में लेकर पूरा पकड़कर झटक दिया और फिर मेरी जाँघ पर एक चुटकी काटी और बोलीं, “लो मच्छर तुमको भी काट लिया।”

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जब संध्या ने मेरा लंड अपने हाथ में लिया तो मैं इतना एक्साइट हो गया कि अगर वो उसे तुरंत नहीं छोड़तीं तो मेरा माल बाहर आ जाता। पर संध्या की हिम्मत देखकर मुझे मज़ा आने लगा और मेरी हालत ही खराब हो गई। मेरे लिए ये अनएक्सपेक्टेड था और मैं एक्साइटमेंट और एम्बैरसमेंट दोनों ही फीलिंग में था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

शर्म की वजह से मैं कुछ कर नहीं पाया पर एक्साइटमेंट की वजह से मैं बहुत खुश था। एक दिन सीमा अपने मामा के यहाँ गई हुई थी और संध्या मैम घर पर अकेली थीं तो उन्होंने मुझे नाइट में डिनर पर बुलाया। हम लोगों ने उस दिन नॉर्मल बातें कीं और 9:30 पर डिनर फिनिश करके जब मैं आने लगा तो संध्या बोलीं, “राजू थोड़ी देर रुक जाओ, मैं ज़रा काम निबटा लूँ और तुम टीवी देखो, फिर चले जाना।”

मैंने कहा ठीक है और मैं करीब 10:00 बजे तक टीवी देखता रहा और संध्या मैम किचन का काम फिनिश करने लगीं। करीब 10:00 बजे जब मैंने संध्या को गुड नाइट कहा तो वो बोलीं, “राजू ऐसा करो यहीं रुक जाओ, यहाँ भी कोई नहीं है। थोड़ी देर टीवी देखते हैं, फिर सुबह चले जाना।”

मुझे संध्या का इरादा समझ में आने लगा और मेरे लंड की एक्साइटमेंट ने मुझे रुकने का ऑर्डर दे दिया। मैं बोला ठीक है, पर मैं अब सोने जाऊँगा, आप टीवी देखना चाहें तो देखो। वो बोलीं, “राजू मुझे नींद नहीं आ रही, चलो मेरे बेडरूम में चलो, मैं सोने की कोशिश करती हूँ, तब तक कुछ बातें करते हैं। तुम्हारे सोने का अरेंजमेंट यहीं ड्रॉइंग रूम वाले कॉट पर कर देती हूँ। कोई परेशानी हो तो मुझे कॉल कर लेना।”

मैं संध्या के पीछे-पीछे बेडरूम तक आ गया और फिर हम दोनों बातें करने लगे। पहले ऐसे ही फिल्मों की बातें चलीं और बातें करते-करते अचानक संध्या बोलीं, “राजू ये बताओ तुमको सबसे सेक्सी हीरोइन कौन लगती है?” मैं थोड़ा शरमाया पर नॉर्मल होते हुए मैंने बताया कि मल्लिका शेरावत।

तो वो बोलीं, “क्यों, उसमें ऐसा क्या है?”

मैंने कहा, “उसका फिगर बड़ा जबरदस्त है।”

तो वो बोलीं, “जबरदस्त से तुम्हारा क्या मतलब है?”

मैंने कहा, “मुझे उसके बड़े-बड़े बूब्स, पतली कमर और जाँघें अच्छी लगती हैं।”

फिर वो बोलीं, “राजू, व्हाट यू थिंक अबाउट माइसेल्फ?”

और उन्होंने अपना गाउन एक झटके में निकाल दिया। फिर ब्लाउज़ के बटन खोलकर ब्लाउज़ भी उतार दिया और बोलीं, “अब बताओ मैं कैसी लग रही हूँ?”

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दोस्तों, उस टाइम संध्या का फिगर सचमुच मुझे मल्लिका से कम नहीं लग रहा था। मैं एक्साइटमेंट में कुछ भी नहीं बोल पाया पर हिम्मत करके संध्या के होंठों पर अपने होंठ रख दिए। फिर आगे का सारा काम संध्या ने कर दिया। वो मुझे पकड़कर डीप किस करते हुए मेरी टी-शर्ट के अंदर हाथ डालकर मेरी पीठ पर मसाज करने लगीं.

तो मैं भी उनकी पीठ पर मसाज करने लगा और उनके किस का रिप्लाई दिया। फिर उन्होंने मेरी टी-शर्ट उतार दी और मुझे ऊपर से नंगा कर दिया। अब वो मेरे अपर बॉडी पर जगह-जगह किस और मसाज करने लगीं। मैं भी उनकी बॉडी पर जहाँ मौक़ा मिला किस करने लगा।

अब मैंने संध्या के पीछे की तरफ़ से उनकी पीठ पर किस करने लगा और आगे उनके बूब्स पर ब्रा के बाहर से ही हल्का मसाज करने लगा। जैसे ही मेरे हाथों का टच उनके बूब्स पर हुआ वो टाइट होते जा रहे थे। संध्या की साँसें तेज़ हो रही थीं और वो मुझे एक्साइट करने के लिए “कम ऑन… आह्ह्ह… म्म्म… फास्ट राजू माय डार्लिंग” कहते हुए मेरे पायजामे के बाहर से रब कर रही थीं।

फिर संध्या ने अपने आप अपनी ब्रा ऊपर सरका दी तो उनके बड़े बूब्स सचमुच मल्लिका जैसे ही लग रहे थे और एकदम टाइट और गोल थे। मैंने बिना मौक़ा गँवाए उनकी ब्रा का हुक खोलकर उसे उनकी बॉडी से अलग कर दिया, जिससे वो भी मेरी तरह ऊपर से नंगी हो गईं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

उसके बाद मैंने उनके बूब्स पर अपने होंठों से केयरस करना शुरू कर दिया और बॉडी पर मसाज करने लगा। फिर मैंने उनके गोल-गोल मस्त बूब्स अपने दोनों हाथों में भरकर मसाज करते हुए उनके निप्पल्स को चूसने लगा। उनको पूरा चूमा, चाटा। फिर क्या था, मज़ा दोनों को आ रहा था।

फिर अचानक संध्या ने मुझे रोका और वो किचन में गईं और वापस आने पर उनके हाथ में शहद की बोतल थी और उन्होंने अपने बूब्स पर शहद लगा हुआ था। मैंने बोतल बेड के कोने में रख दी और संध्या को पकड़ लिया और उनके बूब्स पर लगा शहद चाटने लगा और बीच-बीच में उनके निप्पल को भी चूसता।

उनके गुलाबी बूब्स के निप्पल्स काफ़ी बड़े और ब्राउन थे, उनके बूब्स आम के जोड़े जैसे लग रहे थे। मैंने फिर संध्या को पीछे से पकड़ा और एक-एक हाथ से उनके दोनों बूब्स को बारी-बारी रब करने लगा। जैसे मेरे हाथों का टच हुआ संध्या के बूब्स बैलून की तरह टाइट होकर गोल होने लगे और मुझे उन्हें रब करने में और मज़ा आने लगा।

संध्या के बूब्स भी एकदम टाइट हो गए थे, जिसका मतलब था कि उनको पूरी एक्साइटमेंट हो रही थी। मैंने कई बार संध्या के बूब्स के निप्पल को होंठों में लेकर ज़ोर से प्रेस किया, जिससे दोनों को बड़ा मज़ा आया। जब मुझे ज्यादा मज़ा आने लगा तो मैंने एक-दो बार संध्या के निप्पल्स को अपने दाँतों से हल्का सा प्रेस भी किया, जिससे संध्या चीख पड़ीं और मुझे बड़ा मज़ा आया।

नीचे से मेरा हाथ संध्या की जाँघों से होता हुआ उनके बट्स और रानों पर मसाज करने लगा। ऊपर से मैंने संध्या की पीठ, गर्दन, कमर और नाभि एरिया में भी होंठों और जीभ से किस और लिक करना चालू रखा था। जब मेरा एक हाथ संध्या की रानों पर फिसल रहा था तो संध्या की मस्ती कंट्रोल से बाहर हो गई।

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संध्या की गोरी गुलाबी जाँघें देखकर मेरा लंड पायजामे के अंदर बेकाबू हो गया, जिसे संध्या ने देख लिया और उन्होंने मेरे पायजामे का नाड़ा खोलकर मेरे अंडरवियर के अंदर हाथ डाल दिया। मैं तो दर्द और एक्साइटमेंट में चीख पड़ा और संध्या बड़ी खुश हो गई थीं।

मैं भी जवाब में संध्या की पैंटी के अंदर हाथ डालकर उनकी पैंटी नीचे सरका दी और उनकी चूत पर उँगलियाँ फिराने लगा। पर अभी भी मेरे होंठ और जीभ संध्या के बूब्स और अपर बॉडी का टेस्ट ले रही थी। उनके निप्पल्स को चूसने और दाँतों से दबाने में बड़ा मज़ा आ रहा था और कभी-कभी मैं उनके बूब्स को हाथ से पूरी ताक़त से प्रेस भी कर देता था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

अब मैंने अपना लंड हाथ में लेते हुए संध्या से पूछा, “मैम, वुड यू लाइक टू वियर इट कंडोम, इफ यू हैव?”

संध्या मैम बोलीं, “आई डोंट लाइक आर्टिफिशियल स्किन एंड यू नो आई डोंट नीड एनी कंडोम। व्हेन माय सन बॉर्न, आई गॉट ऑपरेशन एंड देयर इज़ नो हार्म टू मी विदाउट कंडोम। वी कैन एंजॉय एवेन सेफली। यू आर टू शाय बेब, आई डोंट थिंक यू वेंट टू एनी सेक्स प्रोफेशनल।

माय हसबैंड इज़ नॉट वेरी मच सेक्स ओरिएंटेड, फॉर हिम सेक्स इज़ जस्ट अ ड्यूटी टू परफॉर्म टू बेयर अ चाइल्ड। दैट मैन नेवर एंजॉयड सेक्स विद मी एज़ आई, एवेन व्हेन वी वर न्यू मैरिड। राजू यू आर द ओनली मैन अदर दैन माय हसबैंड हू इज़ प्लेइंग विद माय बॉडी, अदरवाइज़ व्हेन आई वाज़ एवेन यंग आई नेवर अलाउड एनीबडी टू प्ले विद माय बॉडी।”

संध्या का हाथ पकड़कर मैं उन्हें बेड से उठाकर दीवार के सामने फिक्स करके दबा लिया और उनकी चूत की दोनों लिप्स को फैलाकर अपना लंड उनकी चूत के अंदर डालकर दीवार के सामने एक ज़ोरदार धक्का लगाया तो संध्या खुशी और एक्साइटमेंट से चिल्ला पड़ीं और बोलीं, “राजू योर आइडिया इज़ ब्रिलियंट… आह्ह… ऐसे तो मैंने अपने 21 साल के एक्सपीरियंस में कभी नहीं लिया।”

संध्या की हाइट मुझसे सिर्फ़ 1 इंच ही कम थी, जिस वजह से उनकी चूत और मेरा लंड एकदम सेम लेवल पर थे। जैसे दोस्तों आपको पता ही है कि लंड चूत के मुकाबले थोड़ा ऊपर हाइट में होता है और संध्या और मेरी हाइट का डिफरेंस की वजह से मुझे थोड़ा झुकना पड़ रहा था।

मेरा लंड संध्या की चूत के अंदर 2 इंच के करीब घुसा हुआ था और संध्या मुझे एक और धक्का लगाने को कह रही थीं। लेकिन पता नहीं कैसे अंदर जाने की बजाय एक्साइटमेंट में मैंने लंड बाहर निकाल लिया तो संध्या मैम तो एकदम बेचैन हो गईं और पानी के बिना मछली की तरह तड़पने लगीं और मुझे पकड़कर खुद ही मेरा लंड अपनी चूत को फैलाकर अंदर लेने लगीं।

मैंने भी एक धक्का ऊपर को लगाकर पूरा लंड उनकी चूत के अंदर कर दिया तो संध्या और धक्का लगाने को कहने लगीं। मैं अब संध्या की चूत में अपना लंड ऊपर-नीचे करने लगा और इस तरह खड़े-खड़े चोदने का मेरा पहला चांस था और संध्या भी शायद पहली बार इस तरह चुदवा रही थीं और उन्हें बड़ा मज़ा आ रहा था।

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क्योंकि वो बार-बार मेरे कंधे पकड़कर ऊपर-नीचे उछल रही थीं, जिससे मेरे लंड के धक्के उनकी चूत पर पड़ते रहें। इस तरह चुदाई में मज़ा तो आ रहा था पर ये बहुत मुश्किल था, पर इसमें स्पीड ज्यादा तेज़ नहीं हो सकती थी, इसलिए इस एक्शन में चुदाई का टाइम ज़रूर बढ़ सकता था।

करीब एक-दो मिनट बाद संध्या ज्यादा ही एक्साइट हो गईं तो मैंने अपना लंड बाहर निकालकर अलग हो गया तो संध्या बेड पर लेट गईं, अपने पाँव पटककर और अपने बूब्स दबाकर मुझे उनको चोदने को कहने लगीं। जैसे ही मेरा लंड उनके कब्जे में आया, उन्होंने अपने बूब्स को मुझसे आज़ाद कर लिया।

संध्या ने अपनी दोनों टाँगें ऊपर करके अपने चूतड़ भी ऊपर कर लिए और उनकी नंगी चूत का छेद एकदम दिखाई देने लगा और उनकी चूत का पिंक-रेड इंटरनल पार्ट मेरे सामने था। संध्या ने शायद चुदवाने की पूरी तैयारी कर रखी थी क्योंकि उनकी बॉडी एकदम शेव्ड, हेयरलेस और स्मूद थी।

मैंने अब मौक़े का फायदा उठाया और अपने खड़े लंड को (जो थोड़ी देर रेस्ट के बाद फिर रीचार्ज हो गया था) सीधे उनकी चूत में ठोंक दिया और पूरी ताक़त से धक्के लगाने शुरू कर दिए। संध्या की चूत शायद मेरी चुदाई से गीली हो गई थी, इसलिए इस बार उनकी चूत में मेरा लंड स्मूदली आगे-पीछे होने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

संध्या की चूत में मेरे लंड की रगड़ से मेरे लंड में जबरदस्त एक्साइटमेंट हो रही थी। मैं पूरी स्पीड से उनकी चुदाई में लग गया। मेरे धक्कों से संध्या की चूत का तो बुरा हाल हो गया और संध्या बोलीं, “राजू बहुत दिनों बाद आज मौक़ा मिला है, बड़ा मज़ा आ रहा है… म्म्म्म… आह्ह्ह… ऐसे ही… फास्ट… मज़ा आ गया… वाह… म्म्म… स्स्ह्ह… आह्हा… आह्हाह… मैंने कभी ऐसे एंजॉय नहीं किया… आह्हा… म्म्म…”

संध्या की मस्ती के बीच मेरे लंड की एक्साइटमेंट भी बढ़ने लगी और मेरा लंड भी गीला होने की स्टेज पर पहुँच गया तो मैंने अपना लंड कंट्रोल करते हुए स्पीड कम करके बाहर निकाल लिया। जैसे ही मैंने अपना लंड बाहर निकाला, संध्या की मस्ती में इंटरप्शन की वजह से उनकी हालत खराब हो गई और वो चुदवाने के लिए छटपटपटाने लगीं।

पर मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था। मैं तो जानता था कि उनको इस तरह चोदने के लिए मैंने कितनी रातें जागकर गुज़ारी थीं। संध्या चिल्ला रही थीं, “राजू प्ल्ज़ फ़क मी! फ़क मी यू फूल… यू बास… कम फ़ास्ट… डोंट डू लाइक दैट विद मी… प्ल्ज़ फ़क मी…”

जब मैंने संध्या को ख़ूब परेशान कर दिया और मेरा लंड भी नॉर्मल हो गया तो मैंने फिर से अपने आप को संध्या की दोनों टाँगों के बीच फिक्स कर लिया और उनकी दोनों टाँगों को और फैलाकर उनकी चूत को और चौड़ा कर दिया। मुझे उनकी चूत का छेद साफ़ इतना बड़ा दिख रहा था कि उसमें मैं अपनी उँगली डाल सकता था।

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पर मैंने बिना टाइम वेस्ट किए अपने लंड को सीधा उनकी चूत के छेद में झोंक दिया और वो एक धक्के में ही पूरा अंदर तक चला गया। ये सिलसिला मुश्किल से कुछ मिनट चला और इसके बाद ही मेरी भी हालत कुछ ढीली होने लगी और मैं थकने लगा तो मैंने स्पीड थोड़ा कम कर दी तो संध्या थोड़ा रिलैक्स लगने लगीं।

अचानक मुझे ऐसा लगने लगा कि मेरे लंड में कुछ सरसराहट सी हो रही है और अंदर नसों में कोई लिक्विड निकलने को बेताब है। मैं समझ गया कि अब मेरा भी झड़ने वाला है। संध्या तो शायद पहले ही झड़ चुकी थीं। मैंने संध्या की चूत में अपना पूरा लंड अंदर तक ठोंककर रोक दिया।

और मेरे लंड के अंदर से कोई लिक्विड धीरे-धीरे होता हुआ संध्या की चूत में जाता सा लगने लगा। उधर संध्या भी शायद अपनी चूत में मेरे लंड का क्रीम फील कर रही थीं। वो हल्की सी आहें भरते हुए रिलैक्स और खुश नज़र आ रही थीं। कुछ सेकंड बाद मेरे लंड का सारा क्रीम संध्या की चूत की गहराई में कहीं गुम हो गया।

मैं एकदम सुस्त हो गया था, ऐसा लग रहा था जैसे किसी पहाड़ पर चढ़ाई की हो और मेरा लंड भी एकदम सिकुड़ गया था। मैं इतना सुस्त हो गया कि वैसे ही संध्या के ऊपर लेट गया और संध्या ने भी कोई जवाब नहीं दिया और हम दोनों ऐसे ही सो गए।

सुबह करीब 5:00 बजे जब मेरी नींद खुली तो देखा मैं नंगा बेड पर अकेला पड़ा था, वहाँ कोई नहीं था। तो मैं नंगे ही फ्रेश होने बाथरूम में चला गया तो संध्या मैम वहाँ पहले से ही थीं और नहाने की तैयारी कर रही थीं। मैं फ्रेश होने चला गया। जब मैं बाथरूम में आया तो देखा कि संध्या एकदम नंगी बाथ टब में बैठी हुई थीं और पानी में साबुन मिला रही थीं।

मैं बिना कुछ बोले बाथ टब में उनके बगल में चला गया और मैं भी पानी को शेक करके झाग बनाने लगा। संध्या कुछ नहीं बोलीं, बस स्माइल देती रहीं, जिसका मतलब था कि वो भी मेरे साथ कुछ मज़ा चाहती हैं। संध्या मैम ने धीरे से अपना हाथ मेरी जाँघ पर रखकर जैसे ही मुझे छुआ, मैं उनकी इच्छा समझ गया और मैंने उनकी जाँघों पर हल्के से रब करना शुरू कर दिया.

तो संध्या ने मस्ती में एक टाँग ऊपर उठा दी। वाह! ब्यूटीफुल स्मूद गोरी-गोरी टाँगें! मैं एक हाथ से संध्या की गोरी-गोरी टाँगों को उनके पैरों से लेकर घुटने तक अपने होंठों से हल्का सा छूते हुए दो-तीन बार रब किया तो संध्या को बड़ा मज़ा आया और उन्होंने दूसरी टाँग भी ऊपर कर दी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

तो मैंने वैसे ही दो-तीन बार संध्या की दूसरी टाँग के साथ भी किस करते हुए रब किया तो संध्या मस्ती में मोअन करने लगीं। इस पर मैंने उनकी दोनों टाँगों को घुटने से पकड़ते हुए एक-एक कर किस-चूमते हुए रब करना शुरू कर दिया। संध्या मैम को बड़ा मज़ा आ रहा था।

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वो मुझे कॉम्प्लिमेंट करते हुए आवाज़ें निकालने लगीं – “ओह राजू… आह्ह… म्म्म… उउउ बेबी… कम ऑन… कैरी ऑन… होनी… म्म्म… आआ ज़ज़्ज़ााा… आ गय्य्या… आह्ह्ह… म्म्म…” संध्या मेरा लंड पकड़ने के लिए मचलने लगीं तो मैं समझ गया कि इससे तो गड़बड़ हो जाएगी क्योंकि ऐसा करने में जल्दी झड़ जाता और सारी मस्ती निकल जाती।

मैंने संध्या की जाँघ को अपनी जाँघों पर रखते हुए ऐसी पोजीशन की कि मेरा लंड नीचे दबा रहे और संध्या का हाथ मेरे लंड तक न पहुँचे। और मैं संध्या के होंठों पर किस करते हुए उनके पीठ और बूब्स पर झाग लगाते हुए रब करने लगा। बीच-बीच में हम दोनों एक-दूसरे के मुँह में भी झाग थ्रो कर देते।

संध्या अपनी मस्ती निकालने के लिए मेरे अपर बॉडी पर किस और रब करने लगीं और मैं उनके बूब्स को कभी दबाता, कभी रब करता तो कभी प्रेस कर देता। जब कभी संध्या मुझसे ज्यादा मस्ती करने लगती तो मैं उनके निप्पल्स को अपने हाथों से मसल देता तो संध्या की सारी मस्ती चीख के साथ निकल जाती और वो “ही रब्बा… मार डाला… ओ गॉड ही किल्ड मी” कहकर चिल्ला पड़तीं।

मस्ती में संध्या एक हाथ से मेरी जाँघों और पेट के आसपास रब करने लगीं पर मैंने उसे अपना लंड छूने का मौक़ा नहीं दिया। मैंने भी अब अपने हाथों को उनके पेट के आसपास ले जाना शुरू कर दिया। जैसे ही मेरा हाथ संध्या की चूत के पास गया वो “ही रब्बा” करके मेरा ध्यान उधर ले जातीं, जिससे मैं दोबारा वहाँ हाथ ले जाऊँ। पर मैंने इस बात का पूरा ख़याल रखा कि मेरा लंड उनकी पहुँच से दूर रहे।

धीरे-धीरे मैंने उनकी बट्स पर भी रब करना शुरू कर दिया और बीच में कभी अचानक और कभी जानबूझकर मेरा हाथ उनकी बट्स के बीच उनकी ऐस होल पर चला जाता। एक बार जैसे मेरा हाथ वहाँ गया, मैंने अपनी एक उँगली उनकी ऐस होल के अंदर आधी तक डाल दी तो संध्या मुझे अब्यूसिव लैंग्वेज में बोलने लगीं, “यू बास… फ़क माय ऐस…”

संध्या को मज़ा आ रहा था तो मुझे भी मज़ा आ रहा था। अब मैंने संध्या की ऐस होल से उनकी चूत तक के 1-1.5 इंच के एरिया पर रब करते हुए उँगली कभी उनकी ऐस होल में डाल देता तो कभी उनकी चूत में। मेरे ऐसे एक्शन से संध्या मैम तो एक्साइटमेंट के टॉप पर थीं और मैं मज़े ले रहा था और मेरा लंड पूरा तना हुआ संध्या की जाँघों के नीचे छटपटा रहा था।

अब के बार मैं मस्ती में पूरी उँगली संध्या मैम की चूत के अंदर डालकर चुदाई वाली स्टाइल में आगे-पीछे किया तो संध्या आहें भरते हुए चिल्ला पड़ीं। अब मैं संध्या की चूत में फिंगरिंग शुरू कर दी तो संध्या पूरी तरह मस्त होकर चुदाई वाला मज़ा लेने लगीं और चिल्लाने लगीं। मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था। संध्या मस्ती में अपने हाथ-पाँव पटकने लगीं और ऐसा करने से बाथरूम की सारी दीवार पर साबुन के झाग वाला पानी लग गया।

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जब संध्या को मैंने बेचैन करके परेशान कर दिया तो वो हाथ-पाँव मारते हुए ही चिल्ला पड़ीं, “राजू प्ल्ज़ स्टॉप नाउ… कम ओवर मी… आई गॉट वेट ट्वाइस… कम फ़ास्ट नाउ… आई वांट द रियल वन… डू फ़ास्ट यू बास… कम ऑन… कम ओवर मी फ़ास्ट… फ़क मी यू फ़क मी फ़ास्ट होनी… डोंट वेस्ट टाइम…”

मुझे संध्या को परेशान करने में मज़ा आने लगा था। मैं उनसे और टीज़ करना चाहता था पर इसी बीच संध्या मैम के हाथ-पाँव मारने से मेरा लंड बाहर संध्या के हाथ में आ गया और उन्होंने उसे पकड़कर दबाने लगीं और बोलीं, “नाउ आई डोंट लीव इट आउट ऑफ माय कंट। राजू प्ल्ज़ डों वेस्ट टाइम… कम ओवर मी एंड फ़क मी फ़ास्ट होनी… यू ब्लडी फ़कर… हैव फ़न… गिव मी अ हार्ड फ़क…”

इसके बाद संध्या ने अपने चूतड़ उठाकर बाथ टब में ही अपनी टाँगें ऊपर कर दीं। मुझे संध्या की चूत साफ़ विजिबल थी और जैसे ही उन्होंने मेरा लंड छोड़ा, मैंने एक धक्के से आधा लंड संध्या की चूत के अंदर डालकर छोड़ दिया। मैं जस्ट ट्राई कर रहा था पर संध्या की तो हालत अब खराब हो गई और वो मुझे धक्का लगाने को कहने लगीं, “राजू डालो ना… ऐसा मत करो… पुश इट हार्ड होनी…”

मैं भी अब अपने आप को नहीं रोक पाया और मैं उनकी चूत में लंड पेलना शुरू कर दिया। संध्या की चूत में मेरे लंड जाने से मुझे जबरदस्त एक्साइटमेंट हो रही थी। मैं पूरी स्पीड से उनकी चुदाई में लग गया। मेरे एक्शन से संध्या की चूत का तो बुरा हाल हो गया और वो भी नीचे से मेरे पुश का रिप्लाई देने की कोशिश करने लगीं।

संध्या बोलीं, “राजू आज हम दोनों को ऐसा मौक़ा मिला है, बड़ा मज़ा आ रहा है… म्म्म्म्म… आह्ह्ह… ऐसे ही… अगर थकने लगो तो बताना, मैं नीचे से ट्राई करूँगी… मज़ा आ गया… वाह… म्म्म… स्स्ह्ह… आह्हा… आह्हाह… मैंने कभी ऐसे एंजॉय नहीं किया… आह्हा… म्म्म…” ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

संध्या की चूत की मस्ती के बीच मेरे लंड की एक्साइटमेंट भी बढ़ने लगी और कुछ मिनट बाद मेरा लंड भी गीला होने की स्टेज पर पहुँच गया तो मैंने अपनी स्पीड कंट्रोल करते हुए अपना लंड बाहर निकाल लिया। पर मेरा लंड बाहर निकलते ही संध्या की मस्ती में इंटरप्शन की वजह से उनकी हालत खराब हो गई और वो चुदवाने के लिए छटपटाने लगीं। पर मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था।

वो चिल्लाने लगीं, “राजू फ़क मी! आई वांट अ फ़क… पुट योर ब्लडी कॉक इन माय थस्टी कंट… कम फ़ास्ट… डोंट डू लाइक दैट विद मी…”

जब मैंने संध्या को ख़ूब टीज़ कर दिया और मेरा लंड भी नॉर्मल हो गया तो मैंने फिर से अपने आप को संध्या की दोनों टाँगों के बीच फिक्स कर लिया और उनकी दोनों टाँगों को और फैलाकर उनकी चूत को और चौड़ा कर दिया। मुझे उनकी चूत का छेद साफ़ इतना बड़ा दिख रहा था कि उसमें मैं अपनी उँगली डाल सकता था।

इसे भी पढ़े – बेटी को चुदाई का दर्द दिया पापा ने

पर मैंने बिना टाइम वेस्ट किए अपने लंड को सीधा उनकी चूत के छेद में झोंक दिया और वो एक धक्के में ही पूरा अंदर तक चला गया। ये सिलसिला मुश्किल से कुछ मिनट चला और इसके बाद ही मेरी भी हालत कुछ ढीली होने लगी और मैं थकने लगा तो मैंने स्पीड थोड़ा कम कर दी तो संध्या थोड़ा रिलैक्स लगने लगीं। अचानक मुझे ऐसा लगने लगा कि मेरे लंड में कुछ सरसराहट सी हो रही है और अंदर नसों में कोई लिक्विड निकलने को बेताब है। मैं समझ गया कि अब मेरा भी झड़ने वाला है।

संध्या तो शायद पहले ही झड़ चुकी थीं। मैंने संध्या की चूत में अपना पूरा लंड अंदर तक ठोंककर रोक दिया। और मेरे लंड के अंदर से कोई लिक्विड धीरे-धीरे होता हुआ संध्या की चूत में जाता सा लगने लगा। संध्या भी शायद अपनी चूत में मेरे लंड का क्रीम फील कर रही थीं। वो हल्की सी आहें भरते हुए रिलैक्स और खुश नज़र आ रही थीं। कुछ सेकंड बाद मेरे लंड का सारा क्रीम संध्या मैम की चूत में समा गया। फिर हम दोनों ने साथ-साथ शावर लिया और नॉर्मली चेंज करके ड्रेस अप हो गए। मैंने और मैम ने एकसाथ ब्रेकफास्ट किया और फिर मैं अपने घर आ गया। 

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  1. Rk says

    जनवरी 15, 2026 at 7:44 अपराह्न

    Hot ladki msg karna insta pe
    @killer_boyyyy_2233
    Pura maja dunga

    प्रतिक्रिया
  2. Ak says

    जनवरी 16, 2026 at 9:54 पूर्वाह्न

    Sex chat available for girls
    Insta id @killer_boyyyy_2233

    प्रतिक्रिया
  3. Prayagraj U P. says

    जनवरी 18, 2026 at 1:15 अपराह्न

    Contact for something

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