Real Baap Beti Sex Story
मेरा नाम प्रिया है और मेरी उम्र 29 साल है। मैं अभी हाउसवाइफ हूँ। मेरे हसबैंड बिज़नेसमैन हैं और मैं पुणे में रहती हूँ। मैं अपनी खुद की तारीफ़ तो नहीं कर सकती, लेकिन इतना ज़रूर कह सकती हूँ कि लोग मुझे एक बार देख लें तो भूल नहीं पाते। मैं इतनी सुंदर हूँ, ये मेरी मम्मी और मेरी बड़ी दीदी कहती हैं। Real Baap Beti Sex Story
और मेरी इसी सुंदरता की वजह से आज मैं एक बहुत बड़े बिज़नेसमैन की बीवी हूँ। बचपन से ही मैं बहुत ख़ूबसूरत थी। मेरी बड़ी दीदी से भी ज़्यादा ख़ूबसूरत लगती थी। इसलिए जब भी कोई लड़का दीदी को देखने आता था, मम्मी मुझे कमरे से बाहर निकलने से मना कर देती थीं।
वो कहती थीं, “अगर लड़के ने तुझे देख लिया तो दीदी के लिए मना कर देगा और तुझे पसंद कर लेगा।” इसीलिए मैं कमरे से बाहर ही नहीं निकलती थी। स्कूल और कॉलेज में भी सारे लड़के मेरे साथ दोस्ती करने को बेताब रहते थे। मेरी कुछ सहेलियाँ मुझे बताती थीं कि कॉलेज के सारे लड़के कहते हैं, “प्रिया के साथ कुछ न सही, दोस्ती ही कर लो, उससे थोड़ा-बहुत टच तो हो ही जाएगा, क्योंकि प्रिया ही इतनी बला की ख़ूबसूरत है।”
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इसी कारण मैं स्कूल-कॉलेज में बहुत फ़ेमस थी। अब मैं आपको अपनी वो कहानी सुनाती हूँ जो आज से करीब 11 साल पहले मेरे साथ हुई थी, जब मैं सिर्फ़ 18 साल की थी। मैं इतनी ख़ूबसूरत थी कि मेरे पापा भी मुझसे मन ही मन इश्क़ कर बैठे थे। जब भी मैं घर में होती, पापा चोरी-चोरी मुझे देखा करते थे।
कभी-कभी किसी न किसी बहाने मुझे छू भी लेते थे। मुझे कुछ समझ नहीं आता था कि पापा ऐसा क्यों करते हैं। मैं तो बस यही समझती थी कि ये मेरे पापा हैं। पापा ने एक-दो बार मुझे बिना कपड़ों के भी देख लिया था। सुबह जल्दी स्कूल जाना होता था तो मैं बहुत जल्दी-जल्दी सब काम निपटाती थी, ब्रश करना, नहाना, कपड़े पहनना, नाश्ता करना।
नहाने के बाद मैं सीधे बिना तौलिया लपेटे अपने कमरे में निकलकर कपड़े पहनती थी, क्योंकि बाथरूम मेरे और दीदी के कमरे में ही था। ऐसे ही एक-दो बार भागम-भाग में पापा ने मुझे नंगा देख लिया था। उस वक़्त मुझे लगा कि ये मेरी ही ग़लती है, मुझे ऐसे बाथरूम से बाहर नहीं निकलना चाहिए।
लेकिन पापा के मन में कुछ और ही चलता था। वो तो मुझे जान-बूझकर देखने के लिए मेरे कमरे में आते थे। ऐसे ही दिन गुज़रते रहे। फिर एक रात मैं और दीदी अपने कमरे में सो रहे थे। मम्मी-पापा अपने कमरे में सो रहे थे। नींद में मुझे कुछ ऐसा एहसास हुआ कि कोई मेरे ब्रेस्ट पर हाथ फेर रहा है।
पहले तो नींद में कुछ समझ नहीं आया, लेकिन फिर नाइटी के अंदर नीचे भी कुछ महसूस हुआ तो मैं एकदम नींद से जाग गई। देखा तो पापा मेरे बेड के पास खड़े थे और दीदी गहरी नींद में सो रही थी। मैंने पूछा, “क्या हुआ पापा?”
उन्होंने कहा, “कुछ नहीं बेटे, बस कंबल लेने आया था।”
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फिर कंबल लेकर चले गए और मैं भी बाद में सो गई। कुछ दिनों बाद रात को डिनर करने के बाद हम सब टीवी देख रहे थे। मम्मी ने कहा, “मुझे नींद आ रही है, मैं सोने जा रही हूँ” और अपने कमरे में चली गईं। थोड़ी देर बाद दीदी भी नींद आने की वजह से अपने कमरे में चली गई। अब सिर्फ़ मैं और पापा ही टीवी देख रहे थे। पापा सोफ़े पर बैठे थे और मैं टीवी के बिल्कुल पास ज़मीन पर बैठी थी।
थोड़ी देर बाद पापा बोले, “बेटे, ऐसे टीवी के इतने पास बैठकर नहीं देखते, यहाँ दूर बैठकर देखो।”
मैं पापा के पास सोफ़े पर आकर बैठ गई। कुछ देर बाद पापा पानी पीने गए और लौटकर मेरे बिल्कुल बगल में बैठ गए। मैंने कुछ नोटिस नहीं किया। फिर पापा ने अपना एक हाथ मेरे पीछे से लाकर मेरे कंधे पर रख दिया और मुझे अपनी तरफ़ खींच लिया। मैंने कुछ ख़ास ध्यान नहीं दिया क्योंकि पापा अक्सर मज़ाक-मज़ाक में हमें गोद में भी बिठा लिया करते थे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
थोड़ी देर बाद पापा बोले, “प्रिया, मेरी गोद में बैठ जाओ।”
मैंने कहा, “नहीं पापा, मुझे सीरियल देखना है।”
पापा बोले, “हाँ-हाँ बेटे, वो भी देखो ना, लेकिन मेरी गोद में बैठकर देखो।”
फिर मैं पापा की गोद में बैठ गई और टीवी देखने लगी। कुछ देर तक तो कुछ नहीं हुआ। लेकिन थोड़ी देर बाद मुझे नीचे से कुछ चुभने लगा। पहले हल्का, फिर ज़्यादा। मैंने अपनी सीट की जगह हाथ डालकर देखा कि क्या है, लेकिन कुछ नहीं मिला।
पापा ने पूछा, “क्या हुआ बेटे?”
मैंने कहा, “कुछ नहीं।”
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थोड़ी देर बाद फिर ज़्यादा चुभने लगा।
मैंने पापा से ही कहा, “पापा, ये क्या चुभ रहा है?”
पापा बोले, “कुछ नहीं बेटे।”
मैंने फिर अपना हाथ नीचे लेकर जो चुभ रहा था उसे दबाया और बोली, “पापा, ये क्या है? यही चुभ रहा है।”
पापा मंद-मंद मुस्कुराने लगे। मुझे थोड़ी देर बाद समझ आ गया कि वो क्या था।
मैं कुछ नहीं बोली और चुपचाप टीवी देखने लगी। लेकिन अब मुझसे रहा नहीं गया। मैंने कहा, “पापा, मुझे नींद आ रही है, मैं सोने जा रही हूँ।”
पापा ने मुझे दोनों हाथों से अपनी गोदी में कसकर दबा लिया और बोले, “थोड़ी देर और बैठो।”
फिर मेरे कंधों को दबाने लगे और बोले…
पापा: अरे बेटे, मुझे एक बात तो बताओ कि तुम्हारे कोई बी/एफ है कि नहीं?
मैं: जी नहीं पापा, सब लोग ट्राई तो बहुत करते हैं मेरे फ्रेंड बनने की लेकिन मुझे उन सब में इंटरेस्ट नहीं है।
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पापा: क्यों बेटे? उसमें क्या बुराई है? बी/एफ और जी/एफ तो होने ही चाहिए।
और ऐसा कहकर उन्होंने मेरे होंठों पर एक कस के किस कर लिया और बोले, “ऐसा सब करने के लिए।”
मैं: नहीं नहीं पापा, ऐसा मुझे पसंद नहीं है।
पापा: क्यों पसंद नहीं है बेटे? ये थोड़ा खराब है?
मैं शरमा गई और कुछ बोल नहीं पाई। पापा ने मुझे अपनी गोद में और कस के दबाया और मेरे कंधों से हाथ फेरते हुए नीचे की तरफ़ ले जाने लगे। मैंने रोकने की कोशिश की, लेकिन पापा बोले, “अरे बेटे, डरो मत। मैं तुम्हारा पापा हूँ, तुम्हें सब सिखाऊँगा। दुनिया में ये सब नॉर्मल है। देखो, तुम इतनी ख़ूबसूरत हो कि कोई भी तुम्हें देखकर पागल हो जाता है। मैं भी तो तुम्हारा बाप हूँ, लेकिन तुम्हारी सुंदरता ने मुझे मोह लिया है।”
मैं डर रही थी लेकिन कहीं न कहीं उत्सुक भी थी। स्कूल और कॉलेज में लड़के मेरे बारे में ऐसी बातें करते थे, लेकिन कभी किसी ने छुआ तक नहीं था। पापा ने धीरे से मेरी नाइटी ऊपर की और मेरी जाँघों पर हाथ फेरने लगे। मैं सिहर उठी। “पापा, ये ग़लत है… मम्मी क्या कहेंगी?” मैंने धीमी आवाज़ में कहा।
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पापा हँसे, “मम्मी सो रही हैं, दीदी भी। किसी को पता नहीं चलेगा। मैं तुम्हें प्यार करना सिखाऊँगा, ताकि जब तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड बने, तो तुम तैयार रहो।” उन्होंने मुझे सोफ़े पर लिटा दिया और खुद मेरे ऊपर आ गए। मैं विरोध नहीं कर पाई, क्योंकि पापा के स्पर्श में कुछ ऐसा था जो मुझे रोक नहीं पा रहा था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
पापा ने मेरी नाइटी पूरी तरह उतार दी और मेरे स्तनों को चूमने लगे। मैं सिसकियाँ लेने लगी, “पापा… आह…” उन्होंने मेरे निप्पल्स को मुँह में लिया और चूसने लगे। मेरे शरीर में आग लग गई थी। नीचे उनकी उँगलियाँ मेरी पैंटी में घुस गईं और मेरी चूत को सहलाने लगीं।
मैं पहली बार ऐसा महसूस कर रही थी—गीली हो गई थी। पापा बोले, “देखो बेटे, ये है चुदाई की शुरुआत। मैं तुम्हें सिखाऊँगा कैसे मज़ा लिया जाता है।” फिर उन्होंने अपनी पैंट उतारी और अपना लंड बाहर निकाला। वो इतना बड़ा और सख़्त था कि मैं डर गई। “पापा, ये क्या है?” मैंने पूछा।
पापा ने हँसकर कहा, “ये है वो चीज़ जो तुम्हें औरत बनाएगी। इसे छूओ।” मैंने डरते-डरते छुआ, वो गर्म था। पापा ने मेरा हाथ पकड़कर उसे हिलाना सिखाया। “ऐसे करो, बेटे।” फिर पापा ने मुझे नीचे लिटाया और मेरी टाँगें फैला दीं। उन्होंने अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ा और धीरे से अंदर डालने लगे। दर्द हुआ, मैं चीख़ी, “पापा… नहीं… दर्द हो रहा है!” लेकिन पापा नहीं रुके।
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“थोड़ा सह लो, बेटे। पहली बार होता है।” उन्होंने धक्के मारने शुरू किए। पहले दर्द था, लेकिन धीरे-धीरे मज़ा आने लगा। मैं अपनी कमर हिलाने लगी। पापा बोले, “हाँ, ऐसे… चुदाई ऐसे की जाती है। ऊपर से नीचे, तेज़-तेज़।” वो मुझे चोदते रहे, मेरे स्तनों को दबाते, गर्दन पर किस करते। मैं सिसकियाँ भर रही थी, “पापा… आह… और…” करीब 15 मिनट बाद पापा झड़ गए, उनका माल मेरे अंदर गिरा। मैं भी थक गई थी, लेकिन एक नया एहसास था। पापा ने मुझे गले लगाया और कहा, “देखा बेटे, ये है चुदना। अब तुम्हें पता चल गया। लेकिन ये हमारा राज़ रहेगा।”
मैं चुपचाप नाइटी पहनकर सोने चली गई। उस रात के बाद पापा ने मुझे कई बार चोदा—कभी रात में, कभी जब घर में कोई नहीं होता। उन्होंने मुझे सब पोज़िशन सिखाईं—डॉगी स्टाइल, मिशनरी, राइडिंग। मैं ऊपर बैठकर उन्हें चोदना सीख गई। पापा कहते, “बेटे, कमर ऐसे हिलाओ… लंड को अंदर-बाहर करो।” मैं अब एक्सपर्ट हो गई थी। लेकिन ये सब राज़ ही रहा, और आज तक किसी को पता नहीं चला। उस अनुभव ने मुझे और कॉन्फिडेंट बना दिया, और शायद इसी वजह से मैं आज एक सफल बिज़नेसमैन की वाइफ हूँ।
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