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मेरा नाम अविनाश सिंघल है और मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ। बात दो साल पहले की है। मेरे दूर के रिश्ते के चाचा जी के लड़के की शादी थी। अपने परिवार की तरफ़ से सिर्फ़ मैं गया था। शादी दिल्ली से बाहर थी। वहाँ मेरा एक कज़िन भाई भी रहता है, जिसकी कुछ साल पहले शादी हुई थी। Dehati Bhabhi Porn XXX
उसने फ़ोन करके मुझसे कहा कि जब शादी में आओ तो उसी के घर पर रुकना। मेरी भी यही दिली ख़्वाहिश थी, क्योंकि उसकी बीवी यानी मेरी कज़िन भाभी बहुत ख़ूबसूरत हैं और मैं उन पर शादी के बाद से ही फ़िदा हूँ। जब वो भाभी बनकर आई थीं, तभी से मैं उन पर मर मिटा था।
मैं उनके घर चला गया और शादी से एक दिन पहले ही पहुँच गया, क्योंकि मैं भाभी के साथ ज़्यादा से ज़्यादा वक़्त बिताना चाहता था। वो दोनों वहाँ अकेले रहते थे- सिर्फ़ वो दोनों और उनकी दो साल की बेटी। मैं बहुत ख़ुश था, क्योंकि मुझे सिर्फ़ रात का इंतज़ार था।
मैंने सोच रखा था कि अगर भाभी को चढ़ा न सका तो क्या हुआ, भाई जब रात को चोदेगा तो मैं वही देखकर ख़ुश हो लूँगा और हैंड-प्रैक्टिस से काम चला लूँगा। लेकिन मेरी किस्मत ख़राब थी। रात को जब सोने का वक़्त हुआ तो मुझे पता चला कि उनके कमरे में झाँकने के लिए दरार तो क्या, एक छेद भी नहीं है।
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मैंने सोचा आना बेकार हो गया और मैं सारी रात जागता रहा। अगले दिन शादी में जाना था। भाभी सुबह से ही वहाँ चली गई थीं। मैं और भैया उनके शोरूम पर गए। शाम को हम घर आए तो भाभी तैयार होने के लिए वापस आ गई थीं। हम दोनों ने हाथ-मुँह धोए और तैयार होने लगे।
भैया जब अपने कमरे में जा रहे थे तो मैं उनके पीछे-पीछे था। जैसे ही उन्होंने दरवाज़ा खोला, सामने भाभी सिर्फ़ पेटीकोट और ब्रा में खड़ी थीं—शायद ब्लाउज़ बदल रही थीं। ये नज़ारा देखकर मेरा दिमाग़ ख़राब हो गया। ब्रा के अंदर उनके चूचे इस तरह दबे थे कि अभी बाहर आ जाएँगे।
फिर भी मैंने खुद को संभाला—कर भी क्या सकता था। हम तैयार होकर शादी में चले गए। हम शादी में तो चले गए, लेकिन मेरे दिमाग़ में बार-बार भाभी की वो बॉडी आ-जा रही थी। इस चक्कर में मैंने कुछ ज़्यादा ही शराब पी ली और फिर भाभी के साथ ख़ूब डांस किया।
फिर बारात पहुँच गई और हम लोगों ने खाना खाया। भाई ने आकर कहा कि अंकल (जिनके घर शादी थी) उन्हें रात में रुकने को कह रहे हैं। मैंने सोचा मैं अकेला घर पर क्या करूँगा, यहाँ कम-से-कम भाभी से मज़े तो ले लूँगा। इससे पहले मैं कुछ कहता, भाभी बोल पड़ीं कि वो नहीं रुकेंगी, वो थक गई हैं और घर जाकर सोएंगी। मेरी बोलती बंद हो गई, मैं कुछ बोल ही नहीं पाया।
तभी कहते हैं अल्लाह मेहरबान तो गधा पहलवान। भाई ने मुझसे पूछा, “तुम्हारा क्या प्रोग्राम है?” मैं कुछ कहता इससे पहले भाभी भाई को कोने में ले गईं। वो ज़्यादा दूर नहीं थे, इसलिए मैं उनकी बात सुन लिया। भाभी कह रही थीं— “देवर जी ने बहुत शराब पी ली है और वो यहाँ रहने की हालत में नहीं हैं। इसलिए इन्हें भी मेरे साथ घर भेज दो, वहाँ जाकर सो जाएँगे। यहाँ रहें तो कहीं कोई ग़लत काम करके अपनी इज़्ज़त ख़राब न कर लें।”
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भाई को बात समझ में आ गई। वो मेरे पास आए और बोले, “अविनाश, तू एक काम कर, तू भी घर चला जा। तेरी भाभी अकेली घर में कैसे रहेगी?”
मैं झट से तैयार हो गया। फिर भैया हमें घर छोड़ने के लिए कार लेने चले गए।
मैंने भाभी से कहा, “आओ भाभी, बाहर चलते हैं” और कहकर उनकी बेटी को गोदी में ले लिया।
बाहर आए तो भाई कार लेकर खड़े थे। घर पंडाल से ज़्यादा दूर नहीं था, दस मिनट में हम घर पहुँच गए। भाई हमें घर के बाहर छोड़कर वापस चले गए। बच्ची मेरी गोदी में थी, इसलिए भाभी ने दरवाज़े का ताला खोला। अंदर अंधेरा था। बच्ची मेरी गोदी में थी, ऊपर से मैं शराब के नशे में चूर था।
मेरा पाँव लड़खड़ा गया और मैं भाभी से टकरा गया। उनका स्पर्श मुझे बड़ा सुखद लगा। मैंने कहा, “सॉरी।” वो बोलीं, “कोई बात नहीं, हो जाता है” और हँसने लगीं। वो जानती थीं कि मैं होश में नहीं हूँ। भाभी ने लाइट जलाई और बच्ची को मेरी गोदी से ले लिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
बोलीं, “मैं इसे सुलाती हूँ, इतने में तुम चेंज कर लो। फिर तुम्हें दूध दे दूँगी, थोड़ा नशा कम हो जाएगा।” और वो चली गईं।
मैं कमरे में गया, चेंज किया और हॉल रूम में आ गया। मेरे साथ एक परेशानी थी—शराब पीकर नशा उतरे बग़ैर मैं सो नहीं सकता, मुझे नींद नहीं आती। तो मैंने सोचा क्यों न टीवी देख लूँ। उस दिन भारत का क्रिकेट मैच था जो भारतीय समय के हिसाब से रात को आना था। हॉल रूम में टीवी था। मैंने टीवी ऑन किया। जैसे ही मैंने टीवी ऑन किया, भाभी आ गईं और बोलीं, “दूध ला दूँ?”
मैंने कहा, “नहीं, मेरा मन नहीं है।”
उन्होंने कहा, “थोड़ा सा पी लो, नशा कम हो जाएगा।”
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मैंने मना कर दिया। वो कुछ नहीं बोलीं। उन्होंने देखा टीवी पर मैच आ रहा है तो बोलीं, “सोना नहीं है क्या?”
मैंने कहा, “मुझे नींद नहीं आ रही, आप सो जाओ।”
वो बोलीं, “मैं भी थोड़ी देर मैच देख लूँ, मुझे भी शौक़ है।”
मैंने पूछा, “आपको सोना नहीं है?”
बोलीं, “सो जाऊँगी, कल संडे है और वैसे भी तुम्हारे भाई मुझे कौन-सा दो बजे से पहले सोने देते हैं।”
उन्होंने बड़े अजीब तरीक़े से ये बात कही। मैच चल रहा था और वो मेरे पास सोफ़े पर बैठ गईं। मैच काफ़ी सस्पेंस भरा हो गया था। उन्होंने उत्साह में मेरा हाथ ज़ोर से पकड़ लिया। मैं अंदर ही अंदर ख़ुश हो रहा था। थोड़ी देर बाद उन्हें ध्यान आया कि उन्होंने मेरा हाथ पकड़ रखा है तो शरमाकर हाथ छोड़ दिया। मुझे लगा भाभी के मन में कुछ है, शायद मेरे लिए। मैंने सोचा चेक किया जाए।
मैंने उनका हाथ अपने हाथ में ले लिया और बोला, “भाभी, आई लव यू।”
वो एकदम हैरान रह गईं, फिर बोलीं, “ये क्या कह रहे हो तुम? तुम्हारे भैया को पता चलेगा तो मेरा और तुम्हारा दोनों का ख़ून कर देंगे। तुम शराब के नशे में पागल हो गए हो। मैं सोने जा रही हूँ।”
मैंने कहा, “आज चाहे जो हो जाए, पर मैं तुम्हें पाकर रहूँगा। अगर अपनी मर्ज़ी से आ जाओ तो अच्छा, वरना आज मैं ज़बरदस्ती भी कर सकता हूँ।”
वो बोलीं, “तुम पागल हो, ख़ुद भी मरोगे और मुझे भी मरवाओगे।”
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लेकिन मेरे ऊपर उनकी किसी बात का असर नहीं हो रहा था। मैंने कहा, “तुम जो चाहे कहो, आज तो मैं तुम्हारे जिस्म से अपनी प्यास बुझाऊँगा ही।”
और इतना कहकर मैंने उन्हें अपनी बाहों में भर लिया। वो छुड़ाने की कोशिश करने लगीं और बोलीं, “तुम समझ क्यों नहीं रहे, ये ग़लत है। तुम्हारे भैया को अगर पता चलेगा तो क्या होगा?”
उनकी इस बात से मुझे लगा कि वो भी चाहती हैं, पर डरती हैं। मैंने कहा, “किसी को कैसे पता चलेगा? कौन बताएगा भाई को? मैं और तुम बताएँगे नहीं, तुम्हारी बेटी को अभी कुछ पता नहीं, तो कौन बताएगा? वो आएँगे भी सुबह, जब तक तो सारा सैलाब आकर चला भी जाएगा। उन्हें पता ही नहीं चल सकता।” ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
भाभी ने मेरी तरफ़ देखा और बोलीं, “मैं कुछ नहीं जानती…”
इससे पहले वो और कुछ बोलतीं, मैंने अपने होंठ उनके गर्म-गर्म होंठों पर रख दिए। वो झटपटाने लगीं तो मैंने उन्हें कस के पकड़ लिया। वो हिल भी नहीं पा रही थीं। मैंने कम-से-कम दस मिनट तक उनके होंठों का रसपान किया। वो सिर्फ़ “ऊँ… ऊँ…” करती रह गईं। उसके बाद मैंने उन्हें छोड़ा तो वो ज़्यादा तो नहीं, लेकिन थोड़ा इनकार अब भी कर रही थीं। लेकिन अंदर से वो भी चाहती थीं।
उन्होंने कहा, “प्लीज़ मुझे छोड़ दो, मेरे साथ ऐसा न करो, ये ठीक नहीं है।”
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पर इतने में मैंने उनकी गर्दन पर ज़ोरदार लव-बाइट कर दी, जिससे वो पागल हो गईं और मुझसे लिपट गईं। मैंने उनका साड़ी का पल्लू नीचे किया तो देखा उन्होंने ब्लाउज़ के नीचे ब्रा नहीं पहनी थी। मैं देखकर पागल हो गया और मैंने उनके ब्लाउज़ में हाथ डाल दिया और उनके चूचे दबाने लगा।
वो सिसकियाँ लेने लगीं—“इस्स्स्स…” और धीरे से बोलीं, “बस… जाने दो… ये सब ठीक नहीं… मुझे जाने दो प्लीज़… ये ग़लत है…”
वो कह तो रही थीं, लेकिन सिर्फ़ ऊपर से। अंदर से उन्हें भी सब अच्छा लग रहा था। फिर मैंने उनकी साड़ी खोल दी और पेटीकोट ऊपर करके उनकी जाँघों को चूमने लगा। वो और ज़ोर से सिसकारियाँ मारने लगीं। मैंने पूछा, “मज़ा आ रहा है न?”
वो बोलीं, “तुम पागल कर दोगे…” और मुझसे लिपट गईं।
अब उन्होंने विरोध करना भी बंद कर दिया था। मैंने उनके पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और उनकी चूत पर होंठ रखे तो वो ज़ोर की सिसकी लेने लगीं—“इस्स्स्स…”
मैंने पूछा, “क्या हुआ?”
बोलीं, “मेरे अंदर आग लग रही है…”
फिर क्या था, मैंने अपना पूरा लंड उनकी चूत में डाल दिया और वो ज़ोर-ज़ोर से चीखने लगीं। दस मिनट में सारा खेल ख़त्म हो गया।
Ak says
Garam ladki msg karna 8598839589 pe , 7 inch ke laude se pura maja dunga